
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
कोण्डागांव। शौर्यपथ । कोंडागांव के मालगाँव अ फड मुलमूला समिति का रेंजर धीरेन्द्र मिश्रा ने निरीक्षण किया एवं मौके पर फड मुंशी को परिदान करने निर्देश देते हुए फड बुक भरने हेतु जानकारी देते हुए तेंदुपता संग्रहण एवं विषयो पर बताया।
आपको बता दे की कोंडागांव जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित कोंडागांव में तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन 2023 के तहत 29 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है। तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2023 में जिला वनोपज सहकारी संघ मर्यादित कोंडागांव वनमंडल के तहत कुल 13 प्राथमिक सहकारी समितियों के 246 संग्रहण केन्द्रों के माध्यम से 19 हजार 200 मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला यूनियन के अंतर्गत वनांचल के 34 हजार 183 तेन्दूपत्ता संग्राहकों से 19 हजार 200 मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी होने पर 4000 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से लगभग 7 करोड़ 60 लाख रुपये संग्रहण पारिश्रमिक राशि का भुगतान सीधे संग्राहकों के बैंक खाते में किया जायेगा।
क्या है हरा सोना- तेंदू यानी डायोसपायरस मेलेनोक्ज़ायलोन के पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है। आदिवासी इलाकों में इसे हरा सोना भी कहा जाता है क्योंकि वनोपज संग्रह पर निर्भर एक बड़ी आबादी के लिए तेंदूपत्ता आय का सबसे बड़ा स्रोत है। द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े के अनुसार तेंदूपत्ता के संग्रहण में देश भर में 75 लाख लोगों को लगभग तीन महीने का रोजगार मिलता है। इसके अलावा इन पत्तों से बीड़ी बनाने के काम में लगभग 30 लाख लोगों की रोजी-रोटी चलती है।
1964 से पहले देश भर में तेंदूपत्ता का बाज़ार खुला हुआ था। वन विभाग पत्तों को एकत्र करने के अधिकार की नीलामी किसी भी व्यक्ति, समूह या ठेकेदार को देता था। लेकिन तेंदूपत्ता एकत्र करने के बदले ठेकेदारों द्वारा कम पैसा देने और एकत्र करने वालों से अधिक काम लेने की लगातार आने वाली शिकायतों के बाद 1964 में अविभाजित मध्यप्रदेश ने तेंदूपत्ता के व्यापार का राष्ट्रीयकरण किया।
इसके बाद पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र ने 1969 में, आंध्रप्रदेश ने 1971 में, ओडिशा ने 1973 में, गुजरात ने 1979 में, राजस्थान ने 1974 में और 2000 में अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने इसी व्यवस्था को अपनाया। इस व्यवस्था के तहत राज्य का वन विभाग तेंदूपत्ता का संग्रहण करवाता है और फिर उसे व्यापारियों को बेचता है। तेंदू पत्ता को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाने के लिए अनुज्ञा भी वन विभाग ही जारी करता है। 1984 में राज्य सरकार ने सहकारिता के माध्यम से तेंदूपत्ता का व्यापार करने के लिए राज्य लघु वनोपज संघ का गठन किया।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
