
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
आश्रम-पोटाकेबिन के बच्चे योजना से बाहर, ग्रामीणों ने पूछा—CSR का लाभ किसके लिए?
दंतेवाड़ा / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट।
रिपोर्टर—कृष्णा मंडल
एनएमडीसी बचेली की CSR योजना के तहत प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत भांसी में स्कूली बच्चों को जूता-बैग वितरण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना, पुष्पमाला और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। बच्चों को नए काले जूते और बैग मिलने से कई बच्चों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी।
लेकिन इसी बीच CSR योजना के लाभ को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं। बताया गया था कि परियोजना से प्रभावित 12 ग्राम पंचायतों के स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को जूता-बैग उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन्हीं प्रभावित पंचायतों से जुड़े आश्रम और पोटाकेबिन में पढ़ने वाले बच्चों को योजना में शामिल क्यों नहीं किया गया?
आखिर पात्रता का आधार क्या है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि CSR योजना का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्र के जरूरतमंद स्कूली बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराना है, तो आश्रम और पोटाकेबिन में अध्ययनरत बच्चों को इससे अलग रखने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। क्या इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे प्रभावित पंचायतों के दायरे में नहीं आते? यदि आते हैं, तो उन्हें योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया?
वितरण कार्यक्रम के दौरान जहां लाभ पाने वाले बच्चों में उत्साह नजर आया, वहीं योजना से बाहर रह गए बच्चों और उनके परिजनों में नाराजगी की चर्चा भी सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि 12 पंचायतों के सभी पात्र बच्चों तक योजना पहुंचाने की बात और वास्तविक वितरण में अंतर दिखाई दे रहा है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट करना एनएमडीसी की जिम्मेदारी है।
सवाल जूते-बैग से बड़ा, CSR की पारदर्शिता पर नजर
मामला केवल एक जोड़ी जूते या एक बैग का नहीं है। सवाल यह है कि CSR योजना के लिए पात्रता के मापदंड क्या तय किए गए हैं, लाभार्थियों की संख्या कितनी है और चयन किस आधार पर किया गया है?
ग्रामीणों की मांग है कि एनएमडीसी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि 12 प्रभावित पंचायतों में कितने बच्चों को जूता-बैग दिया जाना है और आश्रम-पोटाकेबिन में पढ़ने वाले बच्चों को योजना से बाहर रखने का क्या कारण है।
यदि योजना का दायरा वास्तव में प्रभावित क्षेत्र के सभी पात्र बच्चों तक है, तो किसी भी वर्ग के बच्चों को लाभ से वंचित किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में एनएमडीसी की ओर से लाभार्थियों की संख्या, पात्रता और वितरण की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करना CSR योजना की पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
“ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी स्थिति न बने
ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा भी तेज है कि कहीं 12 पंचायतों के नाम पर शुरू की गई योजना कुछ चुनिंदा बच्चों तक सीमित होकर न रह जाए। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से जुड़े हैं और यदि योजना का लाभ समान रूप से नहीं पहुंचता, तो इसका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
अब निगाहें एनएमडीसी प्रबंधन के जवाब पर हैं—क्या आश्रम और पोटाकेबिन के बच्चों को भी योजना में शामिल किया जाएगा? कितने बच्चे वास्तव में लाभान्वित होंगे? और पात्रता तय करने का आधार क्या है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलने के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि एनएमडीसी की CSR योजना वास्तव में कितने बच्चों तक पहुंच रही है।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
