January 27, 2026
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सीसीएफ और डीएफओ का राजनंदगांव प्रेम बिलासपुर गौठान पर पड़ा भारी ,वृक्षारोपण के 4 लाख पौधों पर हैं भ्रष्टाचार के छीटें

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     बिलासपुर / शौर्यपथ / जिले में इस बार का वृक्षारोपण मनरेगा की मद से हो रहा है और जंगल विभाग चुन-चुन कर बिलासपुर के प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों को गुमराह कर रहा है। जिले की प्रत्येक रेंज में बीटगार्ड से लेकर रेंजर और डीएफओ तक केवल पौधे लगाने के स्थान पर रुपये तोड़ने का काम किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि वृक्षारोपण का सतही काम देख कर सोशल मीडिया पर खुश हो रहे है। जबकि बिलासपुर के गौठान स्वं सहायता समूह और वन प्रबंधक समिति को कुछ हासिल नही हुआ। फाॅरेस्ट ने सबसे पहले महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून के 4 करोड़ 25 लाख में सेंधमारी की और गड्ढे में जमकर पैसा कमाया। एक नही दर्जनों स्थानों पर मानव श्रम की जगह मशीन से गड्ढा खोदा गया। कई जगहों पर कम भुगतान कर गड्ढे खोदवाय गए।
     अब मामला जैविक खाद्य का है। जिले में मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव और कलेक्टर से विधायक तक ने घुम-घुम कर गौठान निर्माण कराए। इस तरह जिले में 97 गौठान बने और मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना अस्तित्व में आई। गौठान में जैविक खाद्य बनाई गई और खाद्य जिले में जैविक खाद्य की खपत का आंकलन करके ही बनी। किन्तु फाॅरेस्ट ने जिले के गौठानों को बड़ा झटका दिया। 4 लाख गड्ढांे में राजनंदगांव जिले के वनप्रबंधन समितियों की जैविक खाद्य डाली जा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिले के उदासीन नेतृत्व को यह पता ही नई चला की पेड़ लगाने के दौरान अपने हाथों से जिस जैविक खाद्य को डाल रहे है उसका उत्पादन बिलासपुर में नही हुआ है। जिले के प्रभारी मंत्री ने अपनी प्रशासनिक पकड़ को इतना ढीला कर रखा है कि अधिकारी शासन के दिशा निर्देश को ही अनदेखा करते है।
     यही कारण है कि बिलासपुर के गौठान का जैविक खाद्य गौठान में ही पड़ा है और राजनंदगांव से जैविक खाद्य के तीन ट्रक अब तक आ चुके है। विभाग को जैविक खाद्य बुलाने की शीघ्रता इतनी थी कि खाद्य लेने वाले ट्रक यहीं से भेजे गए। इस मामले में जंगल के उच्च अधिकारी गेंद को एक दुसरे के पाले में डालते है। एक बड़ा अधिकारी दुसरे बड़े अधिकारी के निर्देश पर काम होना बताता है, जबिक बड़े अधिकारी का कहना है कि मैने पुरी जिम्मेदारी रेंजर को देदी है, और रेंजर दिशा निर्देश के अनुसार ही काम करेगा। अब यह बात समझ के परे है कि रेंजर को कागज पर छपा हुआ दिशा निर्देश मानना है या कि साहब के मौखिक दिशा निर्देश मानना है। कुल मिलाकर यी समझ आता है कि राजनंदगांव का प्रभारी मंत्री और फाॅरेस्ट का मिनिस्टर एक ही है। तो क्या लोक निर्माण और गुह विभाग बिलासपुर प्रभारी इतना कमजोर हो गया या बिलासपुर के नेताओं की जागरूक्ता केवल फेसबुक तक है। 

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