
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
प्रमोद रूसिया को कुम्हारी, युवराज साहू बने पाटन थाना प्रभारी; यातायात की जिम्मेदारी ओम प्रकाश पटेल को
दुर्ग। जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए एसपी विजय अग्रवाल ने पांच पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में थाना प्रभारियों के साथ यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
आदेश के अनुसार पाटन थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा को पदमनाभपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं पदमनाभपुर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद रूसिया को हटाकर कुम्हारी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी क्रम में निरीक्षक युवराज साहू को यातायात शाखा से हटाकर पाटन थाना प्रभारी बनाया गया है। रिजर्व केंद्र दुर्ग में पदस्थ निरीक्षक ओम प्रकाश पटेल को यातायात की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुर्रे को कुम्हारी थाना प्रभारी के पद से हटाकर यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है।
एसपी विजय अग्रवाल ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल नवीन पदस्थापना स्थल पर आमद देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महकमे में हुए इस फेरबदल को जिले की कानून-व्यवस्था और थाना स्तर पर प्रशासनिक कसावट के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जंतर-मंतर से निकली नई पीढ़ी की आवाज अब स्कूलों के दरवाजे तक पहुंची, शिक्षा व्यवस्था की हर कमी पर नजर—गजेंद्र यादव के राजनीतिक भविष्य की भी होगी परीक्षा
शौर्यपथ विशेष /रायपुर/दुर्ग।
कभी शिक्षा विभाग की खबरें सरकारी विज्ञप्तियों, परीक्षा परिणामों और नियुक्तियों तक सीमित रहती थीं। लेकिन बदलते भारत में तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब स्कूल शिक्षा केवल विभागीय फाइलों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि अखबारों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवाओं की सीधी आवाज का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में Gen Z के आंदोलनों के बाद अब Gen Alpha भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने सड़क तक पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक छात्रों की आवाज में एक समान सवाल दिखाई दे रहा है—स्कूल में शिक्षक कहां हैं, मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी और व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?
छत्तीसगढ़ में इसकी सबसे ताजा तस्वीर दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां Gen Alpha से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों के आंदोलन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव स्वयं स्कूल पहुंचे और छात्रों की समस्याएं सुनीं। आंदोलन में शिक्षकों की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।
अब शिक्षा विभाग की हर कमी मोबाइल कैमरे की नजर में
आज का विद्यार्थी केवल शिकायत नहीं करता—वह उसे रिकॉर्ड करता है, सोशल मीडिया पर डालता है और कुछ ही घंटों में वह मुद्दा हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
कहीं शिक्षकों की कमी, कहीं स्कूल भवन की समस्या, कहीं मध्यान्ह भोजन को लेकर शिकायत, कहीं परीक्षा और पेपर से जुड़े विवाद, तो कहीं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल—शिक्षा व्यवस्था की छोटी से छोटी कमी अब बड़ी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
यही बदलाव स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।
क्योंकि अब सरकार के सामने केवल विभागीय रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जमीन पर खड़ा विद्यार्थी और उसके हाथ में मोबाइल कैमरा भी है।
गजेंद्र यादव के सामने दो रास्ते—आलोचना या समाधान?
छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मंत्री गजेंद्र यादव के पास है। हाल के दिनों में शिक्षा विभाग को लेकर उनकी सक्रियता और विभागीय समीक्षा लगातार चर्चा में रही है। 25 अगस्त को भी उनकी अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा और विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई।
ऐसे समय में Gen Alpha का मैदान में उतरना उनके लिए सामान्य राजनीतिक चुनौती नहीं है।
यह वह दौर है जब मंत्री के सामने यह साबित करने का अवसर है कि शिक्षा विभाग केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलावों से चलता है।
अगर किसी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं और मंत्री वहां शिक्षक पहुंचा देते हैं, अगर भवन जर्जर है और उसका समाधान होता है, अगर किसी व्यवस्था में गड़बड़ी है और उस पर कार्रवाई होती है—तो उसका प्रभाव केवल उस स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा।
उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जाएगी, उसका वीडियो वायरल होगा और जनता यह देखेगी कि सरकार सवाल सुनती ही नहीं, उनका समाधान भी करती है।
यही गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक अवसर है।
पिछली सरकारों का हिसाब या वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी?
राजनीति में यह आसान रास्ता होता है कि वर्तमान समस्या के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार बता दिया जाए।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की मौजूदा सरकार से पहले भूपेश बघेल सरकार का लगभग पांच वर्ष का कार्यकाल रहा। उससे पहले डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पूरी जिम्मेदारी किसी एक सरकार पर डालना आसान नहीं है।
लेकिन जनता का सवाल भी उतना ही सीधा है—
“गलती किसी की भी रही हो, अब सुधार कौन करेगा?”
यहीं से गजेंद्र यादव की राजनीतिक परीक्षा शुरू होती है।
यदि मंत्री हर समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताते हुए दिखाई देंगे, तो सवाल उठेगा कि वर्तमान सरकार आखिर कब तक अतीत का हिसाब गिनाएगी?
इसके विपरीत यदि वे पुराने विवादों को किनारे रखकर समस्याओं के समाधान पर फोकस करते हैं, तो यही शिक्षा विभाग उनके राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे मजबूत मंच बन सकता है।
नरेंद्र मोदी का उदाहरण—छोटे अवसर से बड़ी मंजिल तक
राजनीति में अवसर हमेशा बड़े मंच पर नहीं मिलता। कई बार किसी नेता को ऐसा विभाग या जिम्मेदारी मिलती है, जहां उसके काम का सीधा असर जनता पर दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इसका बड़ा उदाहरण है। संगठन में लंबे समय तक जमीन पर काम करने के बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे।
यानी राजनीति में अवसर वही बड़ा बनता है, जिसे नेता अपनी कार्यक्षमता से बड़ा बना दे।
आज गजेंद्र यादव के सामने भी ऐसा ही अवसर दिखाई देता है।
स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के लाखों बच्चों, अभिभावकों और हजारों शिक्षकों से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। यदि यहां सुधार दिखाई देता है, तो उसका राजनीतिक लाभ भी व्यापक हो सकता है।
लेकिन Gen Alpha को नजरअंदाज करना भारी भी पड़ सकता है
दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
Gen Alpha वह पीढ़ी है जो सूचना के लिए सरकारी दफ्तरों की प्रतीक्षा नहीं करती। उसके पास मोबाइल है, इंटरनेट है और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।
इसीलिए स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने चुनौती अब केवल विधानसभा, विपक्ष या मीडिया की नहीं है—एक ऐसी पीढ़ी भी सामने है जो सवाल पूछने से नहीं डरती।
हाल के छत्तीसगढ़ आंदोलन ने यह संकेत दे दिया है कि यदि स्कूल की समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ तो विद्यार्थी और अभिभावक अपनी आवाज सामूहिक रूप से उठा सकते हैं।
और इस आवाज को सोशल मीडिया की ताकत मिल जाए तो किसी छोटे गांव की समस्या भी पूरे प्रदेश की चर्चा बन सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान का घटनाक्रम भी देता है बड़ा राजनीतिक संदेश
शिक्षा के मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता का राष्ट्रीय उदाहरण भी सामने है। 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया।
इस घटनाक्रम से यह संदेश जरूर निकलता है कि शिक्षा जैसा विभाग केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील राजनीतिक जिम्मेदारी भी है।
हालांकि किसी मंत्री के पद से हटने के कारणों को केवल छात्र आंदोलन या किसी एक मुद्दे से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि शिक्षा से जुड़े विवाद जब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक दबाव बनाते हैं, तो उसका असर सत्ता और नेतृत्व के फैसलों तक पहुंच सकता है।
गजेंद्र यादव के लिए फैसला जनता की नजरों के सामने होगा
आज गजेंद्र यादव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि Gen Alpha उनके समर्थन में है या विरोध में।
बड़ा सवाल यह है कि—
क्या Gen Alpha को यह महसूस होगा कि उसकी आवाज सत्ता तक पहुंच रही है?
यदि बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है, शिक्षक पहुंचते हैं, स्कूल सुधरते हैं, भवन बनते हैं, योजनाओं में पारदर्शिता आती है और विभागीय जवाबदेही तय होती है, तो आज जो आंदोलन चुनौती दिखाई दे रहा है, वही कल गजेंद्र यादव की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बन सकता है।
लेकिन यदि शिकायतों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा दिया गया, समस्याओं के लिए केवल पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया गया और जमीन पर बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो यही डिजिटल पीढ़ी सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा आईना भी बन सकती है।
क्योंकि Gen Alpha को न किसी नेता को वोट देना है, न किसी दल का झंडा उठाना है। उसे सिर्फ बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और बेहतर शिक्षा चाहिए।
और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।
अवसर भी, चुनौती भी… और फैसला काम करेगा
राजनीति में हर नेता को अपने आपको साबित करने के लिए बार-बार मौका नहीं मिलता।
गजेंद्र यादव के पास आज प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक की जिम्मेदारी है। शिक्षा व्यवस्था पर पूरे प्रदेश की नजर है। मीडिया देख रहा है, अभिभावक देख रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—नई पीढ़ी खुद देख रही है।
अब आने वाला समय तय करेगा कि Gen Alpha का आंदोलन—
गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक चुनौती बनता है या उनके राजनीतिक करियर को नई ऊंचाई देने वाला अवसर।
फिलहाल गेंद स्कूल शिक्षा मंत्री के पाले में है।
सवाल आंदोलन का नहीं, अब जवाब कार्रवाई का है।
आर्थिक संबल से कम हुई अभिभावकों की चिंता, पढ़ाई से विवाह तक भविष्य को लेकर बढ़ा भरोसा
रायपुर / शौर्यपथ / बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की चिंता हर अभिभावक के मन में होती है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा भी अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए पर्याप्त प्रबंध करना उनके लिए चुनौती था। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना उनके लिए उम्मीद और आर्थिक संबल बनकर सामने आई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से बेटी का योजना में पंजीयन कराने के बाद आकांक्षा को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की पढ़ाई, आगे के महत्वपूर्ण पड़ाव और विवाह जैसे अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी। इससे उन्हें बेटी के भविष्य को लेकर मानसिक राहत भी मिली है।
सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, भविष्य का भरोसा
आकांक्षा चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और आत्मनिर्भर बने। उनके लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक भरोसेमंद सहारा है।
उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने वाली सरकारी योजनाएं परिवारों का संबल बढ़ाती हैं। इससे अभिभावकों में बेटियों की शिक्षा, बेहतर परवरिश और उन्हें आगे बढ़ाने का विश्वास मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
आकांक्षा ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी योजनाएं बेटियों के भविष्य को लेकर परिवारों में उम्मीद और सुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।
आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी है।
दंतेवाड़ा के दूरस्थ छिंदनार में पहली बार पूरे गांव ने सुनी प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’; मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद
दंतेवाड़ा/ शौर्यपथ / नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते बस्तर की बदलती तस्वीर रविवार को दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में नजर आई। कुछ समय पहले तक जहां धमाकों की आवाज लोगों में दहशत पैदा करती थी, वहीं आज उसी गांव में ग्रामीण उत्साह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनने के लिए एकत्र हुए। गांव के कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुना।
ग्रामीणों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने भी कार्यक्रम सुना। प्रधानमंत्री के संदेश को ग्रामीणों ने बेहद तल्लीनता से सुना और इसे देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया। ग्रामीणों का कहना था कि ‘मन की बात’ देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की पहल को सामने लाकर लोगों को प्रेरित करती है।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
छिंदनार में ग्रामीणों का इस तरह एकत्र होकर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते माहौल का प्रतीक माना जा रहा है। नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सरकार सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
दशकों तक विकास से दूर रहे दुर्गम गांवों तक शासन की योजनाएं और नागरिक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास तेज किए गए हैं। ऐसे में छिंदनार की तस्वीर यह संदेश देती नजर आई कि जहां कभी बंदूक और धमाकों का भय था, वहां अब विकास, संवाद और रेडियो की आवाज सुनाई दे रही है।
धमाकों से ‘मन की बात’ तक का यह सफर बदलते बस्तर की सबसे बड़ी कहानी है।
राज्य स्तरीय UCC समिति को दिए जाएंगे सुझाव, शहर काजी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहेंगे मौजूद
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।
1 सितंबर को गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में होगी बैठक
मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।
दो प्रतियों में लिखित सुझाव लाने की अपील
आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।
टनल रेस्क्यू टीम और बेली ब्रिज लेकर पहुंचा भारत; 88 भारतीय सुरक्षित निकाले, 287 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर
नई दिल्ली / एजेंसी(पीआईबी) / नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बीच भारत ने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारत की चौथी विशेष उड़ान 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची। इसके साथ नेपाल को भेजी गई कुल आपातकालीन राहत सामग्री 68.5 टन हो गई है। भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन मैत्री 2.0’ के तहत व्यापक रूप दिया है।
टनल रेस्क्यू टीम मैदान में
नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में श्रमिकों के फंसे होने की आशंका के बीच भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम अत्याधुनिक मलबा हटाने वाले उपकरणों और लाइफ-डिटेक्टर सेंसर के साथ बचाव अभियान में जुटी है।
बाढ़ में बह चुके पुलों के कारण प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क बहाल करने के लिए भारत से 16 ट्रक बेली ब्रिज उपकरण नेपाल पहुंच चुके हैं। इनसे करीब 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज भेजने की तैयारी है।
88 भारतीय सुरक्षित, सैकड़ों अब भी संपर्क से बाहर
भारत ने अब तक 88 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें नागपुर और कर्नाटक के तीर्थयात्री भी शामिल हैं। लापता लोगों की पहचान और शवों के DNA परीक्षण में सहायता के लिए भारत की छह फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमें काठमांडू में स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रही हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 287 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। भारतीय दूतावास नेपाल सेना के साथ मिलकर उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहा है।
आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क
भारतीय दूतावास, काठमांडू कंट्रोल रूम:
? +977-9851107021
? +977-9851312456
विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली 24x7:
? +91-11-23012113
? +91-11-23014104
बिहार आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम:
? 0612-2217305 | टोल-फ्री: 1070
नेपाल की त्रासदी के बीच राहत सामग्री, विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, पुल निर्माण उपकरण और नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत की बहुआयामी सहायता ने ‘पड़ोसी पहले’ नीति को जमीन पर प्रभावी रूप से सामने रखा है।
5,967 पदों की भर्ती पूरी करने और सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग; कवर्धा-रायपुर में दिन-रात धरना, विजय शर्मा बोले—‘मामला कैबिनेट के निर्णय से होगा’
कवर्धा/रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में विज्ञापित 5,967 पदों को पूरी तरह भरने और 1,940 रिक्त पदों के लिए सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में युवा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के कवर्धा स्थित निवास/कार्यालय और रायपुर स्थित कार्यालय के बाहर लगातार धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थी रात भी सड़क और कार्यालय के बाहर गुजार रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक सेकंड लिस्ट को लेकर सरकार लिखित निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार पुलिस भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और निर्धारित 5,967 पदों में से 1,940 पद अभी रिक्त हैं। उनका कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को मौका देने के लिए दूसरी प्रतीक्षा सूची जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। 23-24 अगस्त के दौरान कवर्धा में गृह मंत्री के कार्यालय के घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस की स्थिति भी बनी।
‘आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए’
अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे गृह मंत्री, अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री से पहले भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिले। उनका कहना है कि यदि पद स्वीकृत और विज्ञापित हैं तो उन्हें खाली रखने के बजाय भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
गृह मंत्री ने दिया बातचीत का भरोसा
आंदोलन के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांग के प्रति संवेदनशील हैं और इस संबंध में अपनी ओर से सरकार को लिखकर भेज चुके हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सेकंड लिस्ट जारी करने का अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर ही लिया जा सकता है।
विजय शर्मा ने आंदोलनकारी युवाओं को मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के समक्ष ले जाने तथा मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात कराने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि अभ्यर्थी सीधे अपनी मांग रख सकें।
‘लिखित फैसला नहीं तो आंदोलन जारी’
फिलहाल कवर्धा और रायपुर में प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थी मांग पर अड़े हैं और उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। दूसरी सूची जारी करने को लेकर आधिकारिक आदेश या ठोस लिखित निर्णय आने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
अब नजर इस बात पर है कि 5,967 पदों की भर्ती में शेष 1,940 पदों को लेकर कैबिनेट क्या फैसला करती है—और क्या वर्दी की उम्मीद लगाए बैठे इन युवाओं को सेकंड लिस्ट के रूप में राहत मिलती है?
‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान; बोले—हर बेटी को सपने पूरे करने और हर महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
रायपुर । शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला-संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा समारोह आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।
सम्मानित महिलाएं बेटियों के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मानित महिलाओं ने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाएं खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए कहा कि आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और जरूरतमंद महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने। आयोग को गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं को उनके कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए।
68 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन का सहारा
मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है और योजना की 31 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं। यह सहायता महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर रही है। रक्षाबंधन को देखते हुए भी सहायता राशि समय से पहले खातों में पहुंचाई गई।
13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
श्री साय ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। कृषि, वनोपज, लघु उद्योग, सिलाई-कढ़ाई और स्वरोजगार के साथ महिलाएं ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।
प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
‘महतारी गौरव वर्ष’ में सशक्तिकरण को नया आयाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर काम कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन मिल रहा है, जबकि ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा देने प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है।
महिलाओं के नाम संपत्ति से मजबूत होगा आर्थिक आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति का पंजीयन उनके आर्थिक अधिकार और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है। बेटियों को अच्छी शिक्षा, युवतियों को रोजगार व उद्यमिता के अवसर, महिलाओं को सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर त्वरित न्याय उपलब्ध कराना सरकार की समग्र प्राथमिकता है। नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प साकार होगा।
नारी सशक्तिकरण के बिना विकास अधूरा
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने महिला आयोग को पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का माध्यम बताया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए आयोग के माध्यम से महिलाओं को त्वरित न्याय और सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कार्य की उम्मीद जताई।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन सहित विभिन्न योजनाओं से प्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को मजबूती मिली है।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा एवं मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. ममता साहू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं उपस्थित रहीं।
विदेश दौरे पर होने के बावजूद पीएम मोदी ने नहीं तोड़ा ‘मन की बात’ का सिलसिला, 137वीं कड़ी में फिर देश से संवाद
रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर होने के बावजूद अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए रविवार को देशवासियों से जुड़े। ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी का प्रसारण हुआ, जिसे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ महज रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का देश के 140 करोड़ नागरिकों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम है। यह कार्यक्रम देश के दूर-दराज क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से समाज और राष्ट्रहित में काम कर रहे लोगों, नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को देशवासियों को ‘मन की बात’ का इंतजार रहता है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में ऐसे लोगों और प्रयासों को देश के सामने लाते हैं, जिनकी जानकारी सामान्यतः व्यापक स्तर पर नहीं पहुंच पाती। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, नवाचार और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाले सामान्य नागरिकों के असाधारण कार्यों को राष्ट्रीय मंच मिलने से उनका उत्साह बढ़ता है और लाखों लोगों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही सकारात्मक गतिविधियों को एक सूत्र में जोड़कर जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करती है।
‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के ‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को नशे से दूर रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। नशे का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समाज इसकी कीमत चुकाता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नशामुक्ति के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा युवाओं को स्वस्थ, सकारात्मक और रचनात्मक जीवन की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया।
‘हर घर तिरंगा’ में नजर आया देश का राष्ट्रप्रेम
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति देशवासियों के अभूतपूर्व उत्साह का भी उल्लेख किया। अभियान के तहत 8 करोड़ से अधिक लोगों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड की। उन्होंने कहा कि यह केवल संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के प्रति देशवासियों के सम्मान, गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का प्रमाण है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अब जन-जन का अभियान बन चुका है और राष्ट्रीय एकता तथा नागरिक कर्तव्यों की भावना को मजबूत कर रहा है।
पीएम स्वनिधि से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के जरिए महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में हो रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया। योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिला अपने परिवार को मजबूत करने के साथ समाज और देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
स्वच्छता सरकारी अभियान नहीं, नागरिकों की आदत बने
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा कि स्वच्छता में स्थायी बदलाव तभी आएगा, जब यह केवल सरकारी अभियान न रहकर प्रत्येक नागरिक की आदत और जिम्मेदारी बने। घर, मोहल्ले, गांव और शहर को स्वच्छ रखने का संकल्प सामूहिक रूप से लिया जाए तो इससे न केवल वातावरण बेहतर होता है, बल्कि क्षेत्र की पहचान और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
अंतरिक्ष विज्ञान में छत्तीसगढ़ की बेटी महिमा राजपूत की ऊंची उड़ान
‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ की बेटी महिमा राजपूत का उल्लेख प्रदेश के लिए विशेष गौरव का विषय बना। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत की बेटियां आज शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल सहित हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। उनकी आकांक्षाओं की उड़ान अब अंतरिक्ष तक पहुंच रही है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मिशन शक्ति सैट जैसे प्रेरक प्रयास का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक को समझने, सीखने और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मुहिम का हिस्सा बनी छत्तीसगढ़ की महिमा राजपूत प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने महिमा को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ को बार-बार मिला राष्ट्रीय मंच
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की विभिन्न कड़ियों में अनेक अवसरों पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति, विरासत, नवाचार और सकारात्मक प्रयासों का उल्लेख किया है। बस्तर ओलंपिक से लेकर मल्हार में मिले प्राचीन ताम्रपत्रों और काले हिरण के संरक्षण जैसे विषयों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान मिला है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के उल्लेखनीय कार्यों को देश के सामने रखना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात है। इससे प्रदेश के सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है और समाज के विभिन्न वर्गों में बेहतर कार्य करने का उत्साह बढ़ता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक कार्यों को राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बनाती है। कार्यक्रम स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, नवाचार, समाजसेवा और राष्ट्रहित के कार्यों के लिए नागरिकों को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह सतत संवाद देशवासियों में कर्तव्यबोध जगाने के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश देता है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू एवं पुरंदर मिश्रा, संतजन, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर छत्तीसगढ़ के गौरवशाली खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को मिला नया मंच
फोटो प्रदर्शनी में प्रदेश की खेल विभूतियों के जीवन और योगदान की झलक, कॉफी टेबल बुक में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां संकलित
रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के गौरवशाली खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री साय ने फोटो प्रदर्शनी में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की खेल विभूतियों के जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों और खेल जगत में उनके योगदान से संबंधित छायाचित्रों एवं जानकारियों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदेश के खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की इस पहल की सराहना की।
खेलों पर आधारित इस विशेष फोटो प्रदर्शनी में शहीद राजीव पाण्डेय, शहीद पंकज विक्रम, शहीद कौशल यादव और शहीद विनोद चौबे सहित छत्तीसगढ़ की अनेक विभूतियों के जीवन और योगदान को छायाचित्रों एवं रोचक जानकारियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में वीर हनुमान सिंह के जीवन, उनकी खेल साधना और खेल जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के संघर्ष से सफलता तक के सफर को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया है। इसमें खिलाड़ियों की उपलब्धियों के साथ उन प्रेरक प्रसंगों को भी स्थान दिया गया है, जो नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा देने वाले हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का भी विमोचन किया। इस कॉफी टेबल बुक में छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के जीवन परिचय, खेल यात्रा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों और उनके योगदान को आकर्षक छायाचित्रों के साथ संकलित किया गया है। यह पुस्तक प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की उपलब्धियों को दस्तावेजीकृत करने के साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध खेल विरासत को नई पीढ़ी से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
फोटो प्रदर्शनी एवं कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ को खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया गया है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास, प्रदेश की गौरवशाली खेल विभूतियों तथा वर्तमान खिलाड़ियों की उपलब्धियों को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं विजय बघेल, विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू एवं सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिसोदिया सहित विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 126 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को प्रदान किए राज्य खेल अलंकरण
666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को मिली 1.74 करोड़ रुपए से अधिक की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान, प्रदेश में मजबूत हो रहा खेल अधोसंरचना का नेटवर्क
उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुल रहे शासकीय सेवा के द्वार, 156 खिलाड़ियों की सूची जारी
बस्तर ओलंपिक से लेकर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स तक, युवाओं को मिल रहा अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच
रायपुर, /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के लिए 126 उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण प्रदान किए। समारोह में राज्य खेल अलंकरण प्राप्त खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के साथ ही 540 अन्य खिलाड़ियों को भी नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस प्रकार कुल 666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को 1 करोड़ 74 लाख 19 हजार रुपए की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में खिलाड़ी का परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी सफलता से पूरे प्रदेश और देश का गौरव बढ़ता है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।
समारोह में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्री विजय बघेल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए शासकीय सेवा के अवसर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया जा रहा है। राज्य सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए भी लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रदेश के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची जारी की गई है, जिससे उनके लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और प्रोत्साहन देने के साथ उनके भविष्य को संवारना भी सरकार की प्राथमिकता है। इससे प्रदेश के युवाओं में खेलों को करियर के रूप में अपनाने का विश्वास और मजबूत होगा।
बस्तर की खेल प्रतिभाओं को मिला बड़ा मंच
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, अवसर देने और उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर रही है।
उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक के पहले आयोजन में 1 लाख 65 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 लाख 91 हजार तक पहुंच गई। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का खेल मैदान तक आना बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलाव और युवाओं के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर दिया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का सफल आयोजन किया गया। इन आयोजनों के जरिए राज्य सरकार प्रतिभाओं को तलाशने के साथ उन्हें प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का बेहतर वातावरण उपलब्ध करा रही है।
पांच मिशन के जरिए खेलों को नई ऊंचाई देने की तैयारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए पांच मिशन पर काम कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन भी शामिल है। इसके लिए 100 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन, बेहतर खेल अधोसंरचना और बड़े मंचों तक पहुंचने के अवसर उपलब्ध कराने की समग्र व्यवस्था विकसित करना है। इससे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।
प्रदेश में मजबूत हो रही खेल अधोसंरचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना का तेजी से विकास किया जा रहा है। कुनकुरी, रायगढ़ और रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि तीरंदाजी के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवा रायपुर में लगभग 67 करोड़ रुपए की लागत से एकेडमी का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह पहाड़ी कोरवा समुदाय की नैसर्गिक तीरंदाजी प्रतिभा को निखारने के लिए पंडरापाट में लगभग 18 करोड़ रुपए की लागत से तीरंदाजी अकादमी विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में अनेक ऐसे युवा हैं, जिनमें खेलों की स्वाभाविक प्रतिभा है। उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और उचित मंच उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक विविधता विभिन्न खेलों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें निखारने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर देने की है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी पहलों से देशभर में खेलों के प्रति नया उत्साह और सकारात्मक वातावरण बना है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी मिल रहा है।
श्री साव ने बिलासपुर खेल अकादमी की गीता यादव और मधु सिदार का एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयन होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। प्रदेश की प्रतिभाएं निरंतर बड़े मंचों तक पहुंच रही हैं।
देश में खेलों के लिए बना सकारात्मक वातावरण : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल से भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया। आज उनके पदचिह्नों पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियां विभिन्न खेलों में प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, आधुनिक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के कारण देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है। इसका परिणाम है कि भारत के खिलाड़ी विश्व की बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के सामने अनेक बड़े अवसर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों के साथ ही ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर पदक जीतकर छत्तीसगढ़ के एम्बैसडर बनेंगे और राज्य का गौरव बढ़ाएंगे।
तीन वर्षों के उत्कृष्ट खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान
राज्य खेल अलंकरण समारोह में वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान और मुख्यमंत्री ट्रॉफी शामिल हैं।
वर्ष 2023-24
शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार – कु. मोनिका साहू (फेंसिंग), श्री सुभाष लहरे (वेटलिफ्टिंग), श्री अनुप यदु (नेटबॉल), श्री राजेश राठौर (नेटबॉल), श्री भूपेन्द्र कुमार गढ़े (सॉफ्टबॉल) एवं श्री परमानंद (पैरा स्विमिंग)।
शहीद कौशल यादव पुरस्कार – सुश्री दिपांशी नेताम (फेंसिंग), श्री महेन्द्र धुर्वे (वॉलीबॉल), श्री अमित कुमार (एथलेटिक्स) एवं श्री राकेश कडती (सॉफ्टबॉल)।
वीर हनुमान सिंह पुरस्कार – श्री विकास ढीढ़ी (पैरा जूडो)।
शहीद पंकज विक्रम सम्मान – कु. सीता साहू (पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग), श्री करन भारती (वुशू), सुश्री प्रियंका ठाकुर (वुशू), श्री शशांक मसीह (रायफल शूटिंग), श्री राजीव साहू (टेबल टेनिस), कु. काजल (टेबल टेनिस), कु. भूमिका उपाध्याय (हॉकी) एवं अजिंक्या सिंह (तैराकी)।
शहीद विनोद चौबे सम्मान – श्री प्रवेश चढ्ढा (शूटिंग), श्री विजय बहादुर (हैंडबॉल), श्री लक्ष्मण लाल साहू (कुश्ती), श्री के. रवि शंकर (टेबल टेनिस) एवं श्री गिरिराज बागड़ी (टेबल टेनिस)।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी – सीनियर वर्ग में बिलासपुर की पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग टीम।
वर्ष 2024-25
शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार – कु. ज्ञानेश्वरी यादव (वेटलिफ्टिंग), श्री ईशान भटनागर (बैडमिंटन), श्री दिव्यांशु नेताम (फेंसिंग), कु. भूमि गुप्ता (तैराकी), कु. सोनम शर्मा (नेटबॉल), श्री कलाराम पटेल (पैरा एथलेटिक्स) एवं लोमेन्द्र साहू।
शहीद कौशल यादव पुरस्कार – श्री मानस भट्टाचार्य (बैडमिंटन) एवं श्री सुखदेव (पैरा एथलेटिक्स)।
वीर हनुमान सिंह पुरस्कार – श्री अशोक कुमार साहू (कयाकिंग एवं कैनोइंग)।
शहीद पंकज विक्रम सम्मान – कु. सुमन यादव (फुटबॉल), श्री रोहित रजक (हॉकी), कु. गीतांजलि निर्मलकर (हॉकी), श्री के.एस. साई प्रशांत (टेबल टेनिस), कु. सुष्मिता सोम (टेबल टेनिस), श्री रामकृष्ण साहू (पैरा स्विमिंग), स्वाति साहू (पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग), श्री साकेत सामुएल (रायफल शूटिंग), श्री अमन तिवारी (वुशू) एवं कु. मानसी डुंभरे (वुशू)।
शहीद विनोद चौबे सम्मान – श्रीमती प्रभा हुसैन (एथलेटिक्स), श्रीमती संगीता राजगोपालन (बैडमिंटन), श्री गामा यादव (कुश्ती) एवं श्री प्रनय नन्द मजूमदार (टेबल टेनिस)।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी– सीनियर महिला वर्ग में बिलासपुर की तीरंदाजी टीम।
वर्ष 2025-26
शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार – विकास कुमार (आर्चरी), किरण पिस्दा (फुटबॉल), दीपांशी नेताम (फेंसिंग), सुजेय तंबोली (बैडमिंटन), आयुष माखिजा (बैडमिंटन), संजू देवी (कबड्डी), रीमा राय (सॉफ्ट टेनिस), मिशा कुमारी (नेटबॉल) एवं लक्की यादव (पैरा एथलेटिक्स)।
शहीद कौशल यादव पुरस्कार – दिव्यांशु देवांगन (शूटिंग), विक्रम राज (आर्चरी), दिव्यांश अग्रवाल (बैडमिंटन), सोनिका राजवाड़े (एथलेटिक्स), स्वप्निल प्रधान (वुशू), भूमिका चौधरी (नेटबॉल), पूजा (नेटबॉल) एवं निखिल कुमार यादव (पैरा एथलेटिक्स)।
वीर हनुमान सिंह पुरस्कार – अजय दीप सारंग (वेटलिफ्टिंग)।
शहीद पंकज विक्रम सम्मान – संस्कार दिवान (वुशू), विद्या सिंह (वुशू), अंकुश सिंह (खो-खो), झमिता साहू (खो-खो), हेमशिखर (वॉलीबॉल), अरन्दिम देवनाथ (टेबल टेनिस), स्नेहा न्योगी (जूडो), अनमोल सिंह (जूडो), यश केरकेट्टा (बॉक्सिंग), टुकेश साहू (जिम्नास्टिक), सेमेश्वर सिंह (पैरा स्विमिंग), श्रीकांत पाण्डे (पैरा जूडो) एवं खुशाल यादव (हॉकी)।
शहीद विनोद चौबे सम्मान – गंगेश्वर (एथलेटिक्स), ख्वाजा अहमद (वॉलीबॉल), एवन कुमार जैन (वेटलिफ्टिंग), मो. अकरम खान (वॉलीबॉल) एवं प्रदीप जोशी (टेबल टेनिस)।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी – तीरंदाजी सीनियर महिला टीम एवं सॉफ्ट टेनिस जूनियर बालिका टीम।
समारोह में विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू एवं श्री सुनील सोनी, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिसोदिया, विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक उपस्थित थे।
25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ
रायपुर / कलाई आगे बढ़ी तो कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया। सामने सुरक्षा बल का जवान था और हाथ में राखी लिए खड़ी थी वह महिला, जिसकी जिंदगी के करीब 25 साल जंगल, नक्सली संगठन और संघर्ष के बीच बीते थे। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में टकराव और अविश्वास पैदा होता था, उसी वर्दी की कलाई पर इस बार उसने राखी बांधी। जवान ने भी बहन का रिश्ता स्वीकार किया, शगुन दिया और मिठाई खिलाई।
भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन का यह दृश्य बस्तर की बदलती तस्वीर की कहानी कह रहा था। यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था। यह उस दूरी को पाटने की कोशिश थी, जो वर्षों के हिंसक संघर्ष ने समाज और सुरक्षा बलों के बीच पैदा कर दी थी।
हाथ में हथियार नहीं, राखी थी
करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल सामान्य नहीं था। जंगल की जिंदगी में हथियार और संघर्ष उनका अतीत रहे हैं। लेकिन अब वही हाथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे थे।
सुरक्षा बल के कैंप में पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। शगुन दिया, मिठाई खिलाई और इस रिश्ते को सम्मान दिया।
यह तस्वीर इसलिए भी खास थी क्योंकि बस्तर में कई सालों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच बने इस तनाव के बीच एक राखी ने संवाद और विश्वास की एक नई जगह बनाई।
महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया हाथ
इस आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सल हिंसा के खिलाफ अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे सुरक्षा बल के जवान और पूर्व नक्सली महिलाएं इस दिन किसी संघर्ष के दो पक्ष नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भाई-बहन नजर आए।
रक्षाबंधन के इस छोटे से आयोजन में संदेश बड़ा था—अगर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में स्वीकार्यता मिले और सुरक्षा बलों के साथ विश्वास का रिश्ता बने, तो नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की राह और मजबूत हो सकती है।
एसपी बोले—रिश्ते सामान्य होंगे
कांकेर एसपी श्री निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।
उन्होंने कहा, यह एक अनूठा प्रयास है कि नक्सलवाद की जो समस्या थी, उसके समाधान की दिशा में हम जो कदम बढ़ा रहे हैं, उसका यह प्रतीक स्वरूप रक्षाबंधन है। इस रिश्ते के धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।
एसपी ने कहा कि ऐसे प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।
मीना के लिए राखी का मतलब सिर्फ त्योहार नहीं
करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ता है। जंगल की जिंदगी, संगठन की सोच और संघर्ष के बीच बीते वर्षों के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। ऐसे में राखी का यह धागा मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए एक नए सामाजिक रिश्ते की शुरुआत जैसा था।
जिस समाज और सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी समाज के प्रतिनिधि जवान की कलाई पर राखी बांधना यह संकेत भी है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश जारी है।
बस्तर में बदल रही है कहानी
बस्तर की कहानी लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़, शहीद जवानों और भय के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही। गांवों में बंदूक की मौजूदगी ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। विकास की राह भी हिंसा के साए में आगे बढ़ती रही। लेकिन अब इसी बस्तर से कहानी के कुछ नए अध्याय सामने आ रहे हैं।
हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोग, गांवों में पहुंचती विकास की योजनाएं, बनती सड़कें, खुलते स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव की मानवीय तस्वीर है।
एक राखी, कई संदेश
राखी का धागा छोटा है, लेकिन इस आयोजन का संदेश बड़ा है। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए थे कि वापसी का रास्ता खुला है। यह समाज के लिए संदेश है कि मुख्यधारा में लौटने वालों को स्वीकार करना जरूरी है। और यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मानवीय पहल है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ विश्वास का रिश्ता भी बनाया जा सकता है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—यह भरोसे पर बंधी।
जहां कभी डर था, वहां अब भरोसे की कोशिश
छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि किसी भी संघर्ष का अंत केवल बंदूक से नहीं होता। स्थायी शांति के लिए लोगों के बीच भरोसा लौटना भी उतना ही जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर के बदलते सामाजिक माहौल की एक भावुक तस्वीर पेश करती है। कैंप में राखी बंधने के बाद शायद सबसे बड़ा बदलाव यही था कि कुछ देर के लिए वहां किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला कल कौन था। देखा तो सिर्फ इतना गया कि आज वह सामने खड़ा व्यक्ति कौन है—एक भाई, एक बहन और एक ऐसे समाज का हिस्सा, जो अपने अतीत से आगे बढ़कर शांति की ओर जाना चाहता है।
बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह एक धागा खड़ा था—रिश्तों का, भरोसे का और नए बस्तर का।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
