September 01, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित लोहा चोरी के मामले को लेकर लगातार सवाल उठाने वाले वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की एक नई सोशल मीडिया पोस्ट ने दुर्ग जिले…

    प्रमोद रूसिया को कुम्हारी, युवराज साहू बने पाटन थाना प्रभारी; यातायात की जिम्मेदारी ओम प्रकाश पटेल को

    दुर्ग। जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए एसपी विजय अग्रवाल ने पांच पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में थाना प्रभारियों के साथ यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।

    आदेश के अनुसार पाटन थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा को पदमनाभपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं पदमनाभपुर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद रूसिया को हटाकर कुम्हारी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    इसी क्रम में निरीक्षक युवराज साहू को यातायात शाखा से हटाकर पाटन थाना प्रभारी बनाया गया है। रिजर्व केंद्र दुर्ग में पदस्थ निरीक्षक ओम प्रकाश पटेल को यातायात की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुर्रे को कुम्हारी थाना प्रभारी के पद से हटाकर यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है।

    एसपी विजय अग्रवाल ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल नवीन पदस्थापना स्थल पर आमद देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महकमे में हुए इस फेरबदल को जिले की कानून-व्यवस्था और थाना स्तर पर प्रशासनिक कसावट के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    GST जांच ने बढ़ाई हलचल, सोशल मीडिया के आरोपों ने भी खड़े किए गंभीर सवाल; अब जवाब देगी जांच या समाजसेवी की छवि? भिलाई। कभी समाजसेवी के रूप में सुर्खियों…

    जंतर-मंतर से निकली नई पीढ़ी की आवाज अब स्कूलों के दरवाजे तक पहुंची, शिक्षा व्यवस्था की हर कमी पर नजर—गजेंद्र यादव के राजनीतिक भविष्य की भी होगी परीक्षा

    शौर्यपथ विशेष /रायपुर/दुर्ग।
    कभी शिक्षा विभाग की खबरें सरकारी विज्ञप्तियों, परीक्षा परिणामों और नियुक्तियों तक सीमित रहती थीं। लेकिन बदलते भारत में तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब स्कूल शिक्षा केवल विभागीय फाइलों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि अखबारों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवाओं की सीधी आवाज का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
    जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में Gen Z के आंदोलनों के बाद अब Gen Alpha भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने सड़क तक पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक छात्रों की आवाज में एक समान सवाल दिखाई दे रहा है—स्कूल में शिक्षक कहां हैं, मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी और व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?
    छत्तीसगढ़ में इसकी सबसे ताजा तस्वीर दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां Gen Alpha से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों के आंदोलन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव स्वयं स्कूल पहुंचे और छात्रों की समस्याएं सुनीं। आंदोलन में शिक्षकों की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।

    अब शिक्षा विभाग की हर कमी मोबाइल कैमरे की नजर में
    आज का विद्यार्थी केवल शिकायत नहीं करता—वह उसे रिकॉर्ड करता है, सोशल मीडिया पर डालता है और कुछ ही घंटों में वह मुद्दा हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
    कहीं शिक्षकों की कमी, कहीं स्कूल भवन की समस्या, कहीं मध्यान्ह भोजन को लेकर शिकायत, कहीं परीक्षा और पेपर से जुड़े विवाद, तो कहीं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल—शिक्षा व्यवस्था की छोटी से छोटी कमी अब बड़ी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
    यही बदलाव स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।
    क्योंकि अब सरकार के सामने केवल विभागीय रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जमीन पर खड़ा विद्यार्थी और उसके हाथ में मोबाइल कैमरा भी है।

    गजेंद्र यादव के सामने दो रास्ते—आलोचना या समाधान?
    छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मंत्री गजेंद्र यादव के पास है। हाल के दिनों में शिक्षा विभाग को लेकर उनकी सक्रियता और विभागीय समीक्षा लगातार चर्चा में रही है। 25 अगस्त को भी उनकी अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा और विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई।
    ऐसे समय में Gen Alpha का मैदान में उतरना उनके लिए सामान्य राजनीतिक चुनौती नहीं है।
    यह वह दौर है जब मंत्री के सामने यह साबित करने का अवसर है कि शिक्षा विभाग केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलावों से चलता है।
    अगर किसी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं और मंत्री वहां शिक्षक पहुंचा देते हैं, अगर भवन जर्जर है और उसका समाधान होता है, अगर किसी व्यवस्था में गड़बड़ी है और उस पर कार्रवाई होती है—तो उसका प्रभाव केवल उस स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा।
    उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जाएगी, उसका वीडियो वायरल होगा और जनता यह देखेगी कि सरकार सवाल सुनती ही नहीं, उनका समाधान भी करती है।
    यही गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक अवसर है।

    पिछली सरकारों का हिसाब या वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी?
    राजनीति में यह आसान रास्ता होता है कि वर्तमान समस्या के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार बता दिया जाए।
    छत्तीसगढ़ में भाजपा की मौजूदा सरकार से पहले भूपेश बघेल सरकार का लगभग पांच वर्ष का कार्यकाल रहा। उससे पहले डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पूरी जिम्मेदारी किसी एक सरकार पर डालना आसान नहीं है।
    लेकिन जनता का सवाल भी उतना ही सीधा है—
    “गलती किसी की भी रही हो, अब सुधार कौन करेगा?”
    यहीं से गजेंद्र यादव की राजनीतिक परीक्षा शुरू होती है।
    यदि मंत्री हर समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताते हुए दिखाई देंगे, तो सवाल उठेगा कि वर्तमान सरकार आखिर कब तक अतीत का हिसाब गिनाएगी?
    इसके विपरीत यदि वे पुराने विवादों को किनारे रखकर समस्याओं के समाधान पर फोकस करते हैं, तो यही शिक्षा विभाग उनके राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे मजबूत मंच बन सकता है।

    नरेंद्र मोदी का उदाहरण—छोटे अवसर से बड़ी मंजिल तक
    राजनीति में अवसर हमेशा बड़े मंच पर नहीं मिलता। कई बार किसी नेता को ऐसा विभाग या जिम्मेदारी मिलती है, जहां उसके काम का सीधा असर जनता पर दिखाई देता है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इसका बड़ा उदाहरण है। संगठन में लंबे समय तक जमीन पर काम करने के बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे।
    यानी राजनीति में अवसर वही बड़ा बनता है, जिसे नेता अपनी कार्यक्षमता से बड़ा बना दे।
    आज गजेंद्र यादव के सामने भी ऐसा ही अवसर दिखाई देता है।
    स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के लाखों बच्चों, अभिभावकों और हजारों शिक्षकों से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। यदि यहां सुधार दिखाई देता है, तो उसका राजनीतिक लाभ भी व्यापक हो सकता है।
    लेकिन Gen Alpha को नजरअंदाज करना भारी भी पड़ सकता है

    दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
    Gen Alpha वह पीढ़ी है जो सूचना के लिए सरकारी दफ्तरों की प्रतीक्षा नहीं करती। उसके पास मोबाइल है, इंटरनेट है और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।
    इसीलिए स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने चुनौती अब केवल विधानसभा, विपक्ष या मीडिया की नहीं है—एक ऐसी पीढ़ी भी सामने है जो सवाल पूछने से नहीं डरती।
    हाल के छत्तीसगढ़ आंदोलन ने यह संकेत दे दिया है कि यदि स्कूल की समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ तो विद्यार्थी और अभिभावक अपनी आवाज सामूहिक रूप से उठा सकते हैं।
    और इस आवाज को सोशल मीडिया की ताकत मिल जाए तो किसी छोटे गांव की समस्या भी पूरे प्रदेश की चर्चा बन सकती है।

    धर्मेंद्र प्रधान का घटनाक्रम भी देता है बड़ा राजनीतिक संदेश
    शिक्षा के मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता का राष्ट्रीय उदाहरण भी सामने है। 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया।
    इस घटनाक्रम से यह संदेश जरूर निकलता है कि शिक्षा जैसा विभाग केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील राजनीतिक जिम्मेदारी भी है।
    हालांकि किसी मंत्री के पद से हटने के कारणों को केवल छात्र आंदोलन या किसी एक मुद्दे से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि शिक्षा से जुड़े विवाद जब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक दबाव बनाते हैं, तो उसका असर सत्ता और नेतृत्व के फैसलों तक पहुंच सकता है।

    गजेंद्र यादव के लिए फैसला जनता की नजरों के सामने होगा
    आज गजेंद्र यादव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि Gen Alpha उनके समर्थन में है या विरोध में।
    बड़ा सवाल यह है कि—
    क्या Gen Alpha को यह महसूस होगा कि उसकी आवाज सत्ता तक पहुंच रही है?
    यदि बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है, शिक्षक पहुंचते हैं, स्कूल सुधरते हैं, भवन बनते हैं, योजनाओं में पारदर्शिता आती है और विभागीय जवाबदेही तय होती है, तो आज जो आंदोलन चुनौती दिखाई दे रहा है, वही कल गजेंद्र यादव की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बन सकता है।
    लेकिन यदि शिकायतों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा दिया गया, समस्याओं के लिए केवल पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया गया और जमीन पर बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो यही डिजिटल पीढ़ी सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा आईना भी बन सकती है।
    क्योंकि Gen Alpha को न किसी नेता को वोट देना है, न किसी दल का झंडा उठाना है। उसे सिर्फ बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और बेहतर शिक्षा चाहिए।
    और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।

    अवसर भी, चुनौती भी… और फैसला काम करेगा
    राजनीति में हर नेता को अपने आपको साबित करने के लिए बार-बार मौका नहीं मिलता।
    गजेंद्र यादव के पास आज प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक की जिम्मेदारी है। शिक्षा व्यवस्था पर पूरे प्रदेश की नजर है। मीडिया देख रहा है, अभिभावक देख रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—नई पीढ़ी खुद देख रही है।
    अब आने वाला समय तय करेगा कि Gen Alpha का आंदोलन—
    गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक चुनौती बनता है या उनके राजनीतिक करियर को नई ऊंचाई देने वाला अवसर।
    फिलहाल गेंद स्कूल शिक्षा मंत्री के पाले में है।
    सवाल आंदोलन का नहीं, अब जवाब कार्रवाई का है।

    आर्थिक संबल से कम हुई अभिभावकों की चिंता, पढ़ाई से विवाह तक भविष्य को लेकर बढ़ा भरोसा

    रायपुर / शौर्यपथ / बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की चिंता हर अभिभावक के मन में होती है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा भी अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए पर्याप्त प्रबंध करना उनके लिए चुनौती था। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना उनके लिए उम्मीद और आर्थिक संबल बनकर सामने आई।

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से बेटी का योजना में पंजीयन कराने के बाद आकांक्षा को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की पढ़ाई, आगे के महत्वपूर्ण पड़ाव और विवाह जैसे अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी। इससे उन्हें बेटी के भविष्य को लेकर मानसिक राहत भी मिली है।

    सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, भविष्य का भरोसा

    आकांक्षा चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और आत्मनिर्भर बने। उनके लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक भरोसेमंद सहारा है।

    उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने वाली सरकारी योजनाएं परिवारों का संबल बढ़ाती हैं। इससे अभिभावकों में बेटियों की शिक्षा, बेहतर परवरिश और उन्हें आगे बढ़ाने का विश्वास मजबूत होता है।

    मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    आकांक्षा ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी योजनाएं बेटियों के भविष्य को लेकर परिवारों में उम्मीद और सुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।

    आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी है।

    दंतेवाड़ा के दूरस्थ छिंदनार में पहली बार पूरे गांव ने सुनी प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’; मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद
    दंतेवाड़ा/ शौर्यपथ / नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते बस्तर की बदलती तस्वीर रविवार को दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में नजर आई। कुछ समय पहले तक जहां धमाकों की आवाज लोगों में दहशत पैदा करती थी, वहीं आज उसी गांव में ग्रामीण उत्साह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनने के लिए एकत्र हुए। गांव के कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुना।
    ग्रामीणों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने भी कार्यक्रम सुना। प्रधानमंत्री के संदेश को ग्रामीणों ने बेहद तल्लीनता से सुना और इसे देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया। ग्रामीणों का कहना था कि ‘मन की बात’ देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की पहल को सामने लाकर लोगों को प्रेरित करती है।

    बदलते बस्तर की नई तस्वीर

    छिंदनार में ग्रामीणों का इस तरह एकत्र होकर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते माहौल का प्रतीक माना जा रहा है। नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सरकार सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

    दशकों तक विकास से दूर रहे दुर्गम गांवों तक शासन की योजनाएं और नागरिक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास तेज किए गए हैं। ऐसे में छिंदनार की तस्वीर यह संदेश देती नजर आई कि जहां कभी बंदूक और धमाकों का भय था, वहां अब विकास, संवाद और रेडियो की आवाज सुनाई दे रही है।

    धमाकों से ‘मन की बात’ तक का यह सफर बदलते बस्तर की सबसे बड़ी कहानी है।

    राज्य स्तरीय UCC समिति को दिए जाएंगे सुझाव, शहर काजी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहेंगे मौजूद

       रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।

    1 सितंबर को गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में होगी बैठक

    मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।

    दो प्रतियों में लिखित सुझाव लाने की अपील

    आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।

    टनल रेस्क्यू टीम और बेली ब्रिज लेकर पहुंचा भारत; 88 भारतीय सुरक्षित निकाले, 287 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर

      नई दिल्ली / एजेंसी(पीआईबी) / नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बीच भारत ने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारत की चौथी विशेष उड़ान 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची। इसके साथ नेपाल को भेजी गई कुल आपातकालीन राहत सामग्री 68.5 टन हो गई है। भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन मैत्री 2.0’ के तहत व्यापक रूप दिया है।

    टनल रेस्क्यू टीम मैदान में

    नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में श्रमिकों के फंसे होने की आशंका के बीच भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम अत्याधुनिक मलबा हटाने वाले उपकरणों और लाइफ-डिटेक्टर सेंसर के साथ बचाव अभियान में जुटी है।

    बाढ़ में बह चुके पुलों के कारण प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क बहाल करने के लिए भारत से 16 ट्रक बेली ब्रिज उपकरण नेपाल पहुंच चुके हैं। इनसे करीब 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज भेजने की तैयारी है।

    88 भारतीय सुरक्षित, सैकड़ों अब भी संपर्क से बाहर

    भारत ने अब तक 88 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें नागपुर और कर्नाटक के तीर्थयात्री भी शामिल हैं। लापता लोगों की पहचान और शवों के DNA परीक्षण में सहायता के लिए भारत की छह फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमें काठमांडू में स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रही हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 287 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। भारतीय दूतावास नेपाल सेना के साथ मिलकर उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहा है।

    आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क

    भारतीय दूतावास, काठमांडू कंट्रोल रूम:
    ? +977-9851107021
    ? +977-9851312456

    विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली 24x7:
    ? +91-11-23012113
    ? +91-11-23014104

    बिहार आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम:
    ? 0612-2217305 | टोल-फ्री: 1070

    नेपाल की त्रासदी के बीच राहत सामग्री, विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, पुल निर्माण उपकरण और नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत की बहुआयामी सहायता ने ‘पड़ोसी पहले’ नीति को जमीन पर प्रभावी रूप से सामने रखा है।

    5,967 पदों की भर्ती पूरी करने और सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग; कवर्धा-रायपुर में दिन-रात धरना, विजय शर्मा बोले—‘मामला कैबिनेट के निर्णय से होगा’

       कवर्धा/रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में विज्ञापित 5,967 पदों को पूरी तरह भरने और 1,940 रिक्त पदों के लिए सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में युवा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के कवर्धा स्थित निवास/कार्यालय और रायपुर स्थित कार्यालय के बाहर लगातार धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थी रात भी सड़क और कार्यालय के बाहर गुजार रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक सेकंड लिस्ट को लेकर सरकार लिखित निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार पुलिस भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और निर्धारित 5,967 पदों में से 1,940 पद अभी रिक्त हैं। उनका कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को मौका देने के लिए दूसरी प्रतीक्षा सूची जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। 23-24 अगस्त के दौरान कवर्धा में गृह मंत्री के कार्यालय के घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस की स्थिति भी बनी।

    ‘आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए’

    अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे गृह मंत्री, अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री से पहले भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिले। उनका कहना है कि यदि पद स्वीकृत और विज्ञापित हैं तो उन्हें खाली रखने के बजाय भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

    गृह मंत्री ने दिया बातचीत का भरोसा

    आंदोलन के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांग के प्रति संवेदनशील हैं और इस संबंध में अपनी ओर से सरकार को लिखकर भेज चुके हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सेकंड लिस्ट जारी करने का अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर ही लिया जा सकता है।

    विजय शर्मा ने आंदोलनकारी युवाओं को मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के समक्ष ले जाने तथा मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात कराने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि अभ्यर्थी सीधे अपनी मांग रख सकें।

    ‘लिखित फैसला नहीं तो आंदोलन जारी’

    फिलहाल कवर्धा और रायपुर में प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थी मांग पर अड़े हैं और उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। दूसरी सूची जारी करने को लेकर आधिकारिक आदेश या ठोस लिखित निर्णय आने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी गई है।

    अब नजर इस बात पर है कि 5,967 पदों की भर्ती में शेष 1,940 पदों को लेकर कैबिनेट क्या फैसला करती है—और क्या वर्दी की उम्मीद लगाए बैठे इन युवाओं को सेकंड लिस्ट के रूप में राहत मिलती है?

    ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान; बोले—हर बेटी को सपने पूरे करने और हर महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

    रायपुर । शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े।
    मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला-संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा समारोह आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।

    सम्मानित महिलाएं बेटियों के लिए प्रेरणा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मानित महिलाओं ने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। छत्तीसगढ़ की महिलाएं खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
    उन्होंने महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए कहा कि आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और जरूरतमंद महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बने। आयोग को गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर महिलाओं को उनके कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए।

    68 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन का सहारा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है और योजना की 31 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं। यह सहायता महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर रही है। रक्षाबंधन को देखते हुए भी सहायता राशि समय से पहले खातों में पहुंचाई गई।

    13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    श्री साय ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। कृषि, वनोपज, लघु उद्योग, सिलाई-कढ़ाई और स्वरोजगार के साथ महिलाएं ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।
    प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

    ‘महतारी गौरव वर्ष’ में सशक्तिकरण को नया आयाम

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर काम कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन मिल रहा है, जबकि ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
    महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा देने प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है।

    महिलाओं के नाम संपत्ति से मजबूत होगा आर्थिक आधार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति का पंजीयन उनके आर्थिक अधिकार और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है। बेटियों को अच्छी शिक्षा, युवतियों को रोजगार व उद्यमिता के अवसर, महिलाओं को सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर त्वरित न्याय उपलब्ध कराना सरकार की समग्र प्राथमिकता है। नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प साकार होगा।

    नारी सशक्तिकरण के बिना विकास अधूरा

    केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने महिला आयोग को पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का माध्यम बताया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए आयोग के माध्यम से महिलाओं को त्वरित न्याय और सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कार्य की उम्मीद जताई।
    महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन सहित विभिन्न योजनाओं से प्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को मजबूती मिली है।
    कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा एवं मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. ममता साहू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं उपस्थित रहीं।

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