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(विशेष लेख )
लेखक : शरद पंसारी
संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार
"कोई भी राज्य केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध नहीं बनता, बल्कि उन संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग, निवेशकों के विश्वास, सुशासन और दूरदर्शी नीतियों से आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा तय करता है।"
इसी सोच को केंद्र में रखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने "औद्योगिक विकास नीति 2024-30" के माध्यम से प्रदेश के आर्थिक भविष्य की नई रूपरेखा प्रस्तुत की है। यह केवल एक औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि "अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन 2047" की आधारशिला है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक जिले, प्रत्येक विकासखंड और अंतत: प्रत्येक नागरिक तक विकास का लाभ पहुँचाना है।
पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ को प्राय: केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन नई सरकार की सोच इससे कहीं आगे की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज निकालने वाला प्रदेश नहीं रहेगा, बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition), आधुनिक उद्योग, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।
यही सोच इस औद्योगिक नीति के प्रत्येक प्रावधान में दिखाई देती है।
विकास का नया मॉडल : केवल उद्योग नहीं, समग्र आर्थिक परिवर्तन
औद्योगिक नीति 2024-30 का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें केवल बड़े उद्योगों की स्थापना पर जोर नहीं दिया गया है, बल्कि उन क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया गया है जो आज भी औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों के आधार पर उद्योग विकसित हों ताकि क्षेत्रीय असंतुलन समाप्त हो और रोजगार के अवसर लोगों के घर के आसपास ही उपलब्ध हों।
यह सोच केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पलायन कम होगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
प्राकृतिक संपदा से आर्थिक शक्ति तक का सफर
छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ प्रकृति ने भरपूर संपदा प्रदान की है।
लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र, विशाल खनिज भंडार, कृषि उत्पादन, लघु वनोपज, औषधीय पौधे, जल संसाधन और भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित होना—ये सभी ऐसी विशेषताएँ हैं जिन्हें यदि योजनाबद्ध तरीके से उपयोग में लाया जाए तो प्रदेश राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री साय की सरकार ने इसी सोच के अनुरूप नीति तैयार की है कि केवल खनिजों का दोहन न हो बल्कि उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण (Processing) किया जाए, जिससे रोजगार भी यहीं उत्पन्न हो और उद्योगों का लाभ भी प्रदेश को मिले।
कोर सेक्टर से लेकर हाई-टेक उद्योगों तक व्यापक दृष्टिकोण
नई औद्योगिक नीति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है।
सरकार ने केवल पारंपरिक उद्योगों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा है बल्कि—
फार्मास्यूटिकल उद्योग
टेक्सटाइल
सूचना प्रौद्योगिकी
इंजीनियरिंग
रक्षा उत्पादन
खाद्य प्रसंस्करण
कृषि आधारित उद्योग
वनोपज आधारित उद्योग
लॉजिस्टिक्स
सेवा क्षेत्र
जैसे अनेक क्षेत्रों को समान प्राथमिकता प्रदान की है।
यह दर्शाता है कि सरकार आने वाले वर्षों की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप औद्योगिक ढाँचा तैयार करना चाहती है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार : नीति का सबसे मानवीय पक्ष
नई औद्योगिक नीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देना है।
सरकार ने निवेश प्रोत्साहन को स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए यह संदेश दिया है कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ प्रदेश के युवाओं तक पहुँचना चाहिए।
यदि उद्योग आएँ लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार न मिले तो विकास अधूरा माना जाएगा।
साय सरकार की यह सोच इस नीति को केवल उद्योग केंद्रित नहीं बल्कि जन-केंद्रित औद्योगिक नीति बनाती है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस : निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की ऐतिहासिक पहल
आज निवेशक केवल कर छूट या भूमि उपलब्धता नहीं देखते।
वे यह भी देखते हैं कि—
अनुमति कितनी जल्दी मिलेगी।
सरकारी प्रक्रियाएँ कितनी सरल हैं।
पारदर्शिता कितनी है।
समयबद्ध निर्णय होते हैं या नहीं।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने Ease of Doing Business (EoDB) को नई ऊँचाई देने का प्रयास किया है।
विभिन्न विभागों की अनुमतियों, सहमतियों, पंजीकरण और स्वीकृतियों को ऑनलाइन, समयबद्ध और सरल बनाना निवेशकों के लिए अत्यंत सकारात्मक संदेश है।
यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि निवेशकों के प्रति सरकार का विश्वास प्रस्ताव है।
विश्वास की नई पूंजी
निवेश केवल पूंजी से नहीं आता।
निवेश का सबसे बड़ा आधार होता है—विश्वास।
जब सरकार स्पष्ट नीति, पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध निर्णय और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती है तब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास स्वत: बढ़ता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार की यह नीति उसी विश्वास को मजबूत करने का प्रयास करती दिखाई देती है।
आगे की दिशा
यह औद्योगिक नीति केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने का दस्तावेज नहीं है।
यह वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना का प्रारंभिक रोडमैप है।
यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल खनिज उत्पादक राज्य नहीं बल्कि औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, निवेश, निर्यात और आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बन सकता है।
(क्रमश:...)
अगले भाग में पढि़ए—
"औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में निवेशकों को मिलने वाले प्रोत्साहन, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, रक्षा उत्पादन, उद्योग विस्तार (Diversification), स्टार्टअप, जिला-विशेष औद्योगिक संभावनाएँ और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इनके दूरगामी प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण।"
— शरद पंसारी
संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार
समय पर वेतन भुगतान, जीपीएफ-सीपीएफ राशि तत्काल जमा कराने और महिला कर्मचारियों के सम्मान में तीज उपहार देने की उठाई मांग
दुर्ग / शौर्यपथ /
हरेली पर्व से पूर्व नगर पालिक निगम दुर्ग के कर्मचारियों के हितों को लेकर नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ एक बार फिर सक्रिय हो गया है। संघ के जिला अध्यक्ष राजूलाल चंद्राकर ने कर्मचारियों के आर्थिक, सामाजिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयुक्त, महापौर एवं राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
संघ ने छत्तीसगढ़ शासन के पत्र क्रमांक एफ-4-16/2009/18, दिनांक 10 अक्टूबर 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रत्येक माह की 01 तारीख को वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, इसके बावजूद नगर पालिक निगम दुर्ग के नियमित अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्लेसमेंट कर्मचारियों का जुलाई 2026 (देय अगस्त 2026) का वेतन आज तक भुगतान नहीं किया गया है। हरेली जैसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व से पहले वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने शासन के निर्देशों का पालन करते हुए तत्काल वेतन भुगतान की मांग की है।
इसके साथ ही संघ ने जून एवं जुलाई 2026 के कर्मचारियों के वेतन से काटी गई जीपीएफ एवं सीपीएफ की राशि तत्काल संबंधित खातों में जमा कराने की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों के वेतन से कटौती की गई राशि समय पर जमा करना निगम प्रशासन की वैधानिक एवं वित्तीय जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही कर्मचारियों के अधिकारों के साथ न्यायसंगत नहीं है।
महिला कर्मचारियों के सम्मान एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए संघ ने माननीय महापौर महोदया को ज्ञापन सौंपकर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हरितालिका तीज पर्व के अवसर पर महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साड़ी, ब्लाउज एवं पेटीकोट प्रदान किए जाने की मांग की है। संघ ने कहा कि यह केवल परंपरा नहीं बल्कि महिला कर्मचारियों के सम्मान और उनके योगदान के प्रति निगम की सकारात्मक भावना का प्रतीक है।
जिला अध्यक्ष राजूलाल चंद्राकर ने कहा—
> "कर्मचारी केवल वेतन पाने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि नगर की जनसेवा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। यदि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार, समय पर वेतन, भविष्य निधि की राशि और सम्मान की रक्षा नहीं होगी तो किसी भी संस्था की कार्यक्षमता प्रभावित होगी। नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ कर्मचारियों के प्रत्येक न्यायोचित अधिकार के लिए नियम एवं कानून के दायरे में रहकर निरंतर संघर्ष करता रहेगा।"
उन्होंने आगे कहा—
> "हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान कराना है। शासन के आदेशों का पालन होना चाहिए और कर्मचारियों को उनका अधिकार समय पर मिलना चाहिए। कर्मचारी हित सर्वोपरि हैं और संगठन इस दिशा में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।"
संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि निगम प्रशासन एवं राज्य शासन कर्मचारी हितों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे कर्मचारियों में विश्वास और कार्य के प्रति उत्साह बना रहेगा।
रायपुर / शौर्यपथ /
राज्य में घुमंतू और बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देने, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 'गौधाम योजनाÓ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 1,460 गौधामों की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में स्थापित होंगे 1460 गौधाम
घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग रायपुर ने गौधाम योजना के तहत 1460 गौधामों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट 10 गौठानों का चयन कर गौधाम विकसित किए जाएंगे। 408 आवेदनों में से 151 आवेदनों को प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण अब तक किए जा चुके हैं। वर्तमान में संचालित 42 गौधामों में लगभग 5 हजार 109 निराश्रित पशुओं को संरक्षण दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के पास के गौठानों को प्राथमिकता
संयुक्त संचालक (पशु चिकित्सा सेवाएं) से मिली जानकारी के अनुसार, प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित हैं और जहां सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं पूर्ण हैं। गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में पशुधन विकास विभाग ने नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को गौधाम संचालन में प्राथमिकता दी है। इसके अलावा शहरी गौठानों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
चयन और स्वीकृति की पारदर्शी प्रक्रिया
गौधाम स्थापना के लिए प्रक्रिया को काफी सख्त और पारदर्शी बनाया गया है। जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर की अनुशंसा के बाद पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया जाता है। भौतिक सत्यापन के बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं। आयोग की क्रियान्वयन समिति हर 3 महीने में होने वाली बैठक में इन आवेदनों की विस्तृत समीक्षा करती है। समीक्षा के पश्चात आवेदनों को अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाता है, जिसके बाद अनुबंध और पंजीयन की कार्यवाही पूरी की जाती है।
ग्रामीण व कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति और कृषि व्यवस्था का मुख्य आधार है। ग्राम पंचायतों को संचालन का अधिकार मिलने और शहरी गौठानों को योजना में जोडऩे से भविष्य में गौधामों की संख्या में और वृद्धि होगी। वर्तमान में विभिन्न जिलों से नए गौधामों की स्थापना हेतु लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर त्वरित कार्यवाही जारी है।
रायपुर/शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय ने मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के तहत प्रदेश के लोक कलाकारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष 12 हजार से 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
योजना के तहत लोक नृत्य, लोक संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कला, पारंपरिक व्यंजन एवं सौंदर्यकला से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन, आय प्रमाण-पत्र (वार्षिक आय 96 हजार रुपये से कम), बैंक विवरण एवं पैन कार्ड की प्रति अनिवार्य होगी।
इच्छुक कलाकार 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित प्रारूप में आवेदन पंजीकृत डाक के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट 222.ष्द्दष्ह्वद्यह्लह्वह्म्द्ग.द्बठ्ठ
तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।
यह योजना लोक कलाकारों को आर्थिक सहयोग देने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को व्यापक मंच प्रदान कर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के तकनीकी, औद्योगिक, ग्रामीण विकास, वित्तीय प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई दूरगामी एवं महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने 500 करोड़ रुपये के 'छत्तीसगढ़ ्रढ्ढ मिशनÓ, राज्य के पहले क्चश्वरूरु हेवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र, लोक निर्माण विभाग में डिजिटल ङ्ख्ररूढ्ढस् प्रणाली, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना में बड़े बदलाव सहित सात महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी।
500 करोड़ का ्रढ्ढ मिशन, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
कैबिनेट ने 'छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) मिशनÓ को मंजूरी देते हुए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया। मिशन के तहत 100 ्रढ्ढ डेटा लैब, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, 300 से अधिक ्रढ्ढ स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जाएगा तथा 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को ्रढ्ढ का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन की 50 से अधिक सेवाओं को ्रढ्ढ आधारित बनाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में पहली बार लगेगा क्चश्वरूरु का भारी मशीन निर्माण संयंत्र
कैबिनेट ने भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम क्चश्वरूरु को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी। राज्य में पहली बार स्थापित होने वाला यह हेवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट निवेश, रोजगार और रूस्रूश्व क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा तथा छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।
क्कङ्खष्ठ में लागू होगी डिजिटल ङ्ख्ररूढ्ढस् प्रणाली
लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान और गुणवत्ता निगरानी अब ङ्ख्ररूढ्ढस् (वक्र्स एंड अकाउंट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के माध्यम से होगी। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और भुगतान प्रक्रिया में तेजी आएगी।
ग्रामीण सड़कों के निर्माण के नियम हुए सरल
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना में संशोधन करते हुए ग्रामीण गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण को शामिल किया गया है। साथ ही सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।
्रष्ठक्च से मिलेगा 15 करोड़ का अनुदान
कैबिनेट ने ्रष्ठक्च से 'अंजोर रुढ्ढत्र॥ञ्जÓ परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये के पूर्ण अनुदान को मंजूरी दी। इस तीन वर्षीय परियोजना से सार्वजनिक वित्त प्रबंधन, क्कक्कक्क, ग्रीन फाइनेंस, निवेश संवर्धन और 'छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047Ó के क्रियान्वयन को गति मिलेगी। इस योजना में राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
राज्य योजनाओं में लागू होगा स्द्बठ्ठद्दद्यद्ग हृशस्रड्डद्य ्रद्दद्गठ्ठष्4 मॉडल
सरकारी योजनाओं के धन के बेहतर उपयोग, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के लिए स्ह्लड्डह्लद्ग स्द्बठ्ठद्दद्यद्ग हृशस्रड्डद्य ्रद्दद्गठ्ठष्4 (स्-स्हृ्र) मॉडल लागू किया जाएगा। इससे योजनाओं की राशि का रियल-टाइम उपयोग, सीधे हितग्राहियों को भुगतान और निष्क्रिय राशि व वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
ष्टस्क्कत्रष्टरु जारी करेगी 200 करोड़ के बॉन्ड
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (ष्टस्क्कत्रष्टरु) को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (हृष्टष्ठ)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी। इससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और राज्य के विद्युत अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।
प्रदेश के विकास को नई दिशा देने वाले इन निर्णयों को तकनीकी नवाचार, औद्योगिक निवेश, सुशासन, वित्तीय पारदर्शिता और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।
दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग की निगरानी पर सवाल, अवैध निर्माण पर रोक या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई?
दुर्ग।
खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिछले महीने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के बाद शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब प्रतिबंधित और नियम विरुद्ध संचालित इस कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी। लेकिन कुछ ही समय बाद शहर में एक बार फिर सितार गुटखा की बिक्री शुरू होने की चर्चाओं ने विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर बाजार में सितार गुटखा दोबारा उपलब्ध हो रहा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इसका निर्माण कहां से हो रहा है? क्या कार्रवाई के बाद भी अवैध निर्माण करने वालों ने दोबारा अपना नेटवर्क सक्रिय कर लिया है या फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था सिर्फ कार्रवाई तक सीमित रह गई है?
बड़ी कार्रवाई के बाद भी क्यों लौट आया अवैध कारोबार?
पिछले महीने खाद्य एवं औषधि विभाग ने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी सक्रियता दिखाई थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी यदि वही उत्पाद बाजार में फिर दिखाई देने लगे हैं तो यह विभाग के लिए गंभीर चुनौती है।
सिर्फ विक्रेताओं पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जो अवैध निर्माण और सप्लाई नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या विभाग ने कार्रवाई के बाद लगातार निगरानी रखी या फिर मामला कार्रवाई की खबरों तक ही सीमित रह गया?
त्योहारी सीजन में मिठाई दुकानों पर जांच सिर्फ औपचारिकता?
त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और हर साल की तरह खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा मिठाई दुकानों, खाद्य प्रतिष्ठानों और मिलावट की जांच की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन आम जनता के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि आखिर कितनी जांचों का परिणाम ठोस कार्रवाई के रूप में सामने आता है?
लोगों का आरोप है कि जांच अभियान तो चलते हैं, लेकिन ऐसी कड़ी कार्रवाई कम ही दिखाई देती है जिससे मिलावटखोरों और नियम तोड़ने वालों में वास्तविक डर पैदा हो।
विभाग के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?
खाद्य सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अवैध निर्माण, प्रतिबंधित उत्पादों और मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ लगातार कार्रवाई करे। लेकिन यदि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही वही अवैध कारोबार फिर सक्रिय हो जाए तो विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना होगा कि दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग केवल त्योहारी सीजन में जांच अभियान और प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रहता है या फिर अवैध गुटखा निर्माण और विक्रय के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करता है।
बड़ा सवाल —
क्या दुर्ग में अवैध गुटखा कारोबारियों को सिर्फ कुछ दिनों की कार्रवाई का डर है, या फिर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जिससे दोबारा अवैध निर्माण करने की हिम्मत ही न हो?
मोर बिजली ऐप से हर घंटे की खपत पर नजर, दुर्ग के रितेश सोनी को मिली राहत
दुर्ग। बिजली बिल आने का इंतजार और अधिक खपत की चिंता अब कई उपभोक्ताओं के लिए पुरानी बात होती जा रही है। स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप जैसी आधुनिक सुविधाओं ने बिजली उपयोग को पारदर्शी और आसान बना दिया है। इसका अनुभव दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक-9, गिरधारी नगर निवासी रितेश कुमार सोनी कर रहे हैं।
रितेश सोनी बताते हैं कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उन्हें पूरे महीने बिजली खपत का सही अंदाजा नहीं होता था। बिल आने के बाद ही पता चलता था कि कितनी बिजली खर्च हुई है। कई बार अपेक्षा से अधिक बिल आने पर परेशानी भी होती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब वे मोबाइल ऐप के माध्यम से हर दिन और हर घंटे बिजली खपत की जानकारी देख पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मोर बिजली ऐप में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि किस समय बिजली की खपत ज्यादा हुई और कब कम। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग को पहचानना और नियंत्रित करना आसान हो गया है।
“अब बिजली बिल को लेकर चिंता नहीं रहती”
रितेश सोनी कहते हैं, “स्मार्ट मीटर लगने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब हमें पहले से पता रहता है कि बिजली की खपत कितनी हो रही है और अनुमानित बिल कितना आएगा। इससे हम अपने उपयोग को नियंत्रित कर पाते हैं।”
स्मार्ट मीटर की एक खास सुविधा यह भी है कि इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की बिजली खपत की तुलना की जा सकती है। इससे उपभोक्ता यह समझ सकते हैं कि उनका बिजली उपयोग बढ़ा है या कम हुआ है और उसी के अनुसार ऊर्जा बचत के उपाय अपना सकते हैं।
परिवार में बढ़ी बिजली बचत की आदत
रितेश सोनी के परिवार में भी अब बिजली बचाने को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अनावश्यक लाइट बंद रखना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना और जरूरत के अनुसार बिजली खर्च करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ता को जागरूक बनाने का माध्यम है। वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी मिलने से उपभोक्ता अपने खर्च को नियंत्रित कर सकता है और ऊर्जा संरक्षण में योगदान दे सकता है।
स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का यह अनुभव बताता है कि तकनीक के सही उपयोग से बिजली प्रबंधन आसान हो सकता है। रितेश सोनी जैसे उपभोक्ताओं की कहानी अन्य लोगों के लिए भी संदेश है कि जागरूकता और आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से बिजली बिल की चिंता को कम किया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, रैगिंग रोकथाम, महिला अधिकार और ट्रैफिक नियमों पर किया जागरूक
दुर्ग। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
माननीय अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) श्रीमती श्वेता पटेल, श्री रवि कश्यप तथा व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) श्रीमती महिमा शर्मा ने विद्यार्थियों को विभिन्न विधिक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रैगिंग की रोकथाम, उसके कानूनी परिणाम और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का प्रेरक संदेश भी विद्यार्थियों को सुनाया गया, जिसमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी गई।
शिविर के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान, महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार, उनकी सुरक्षा से जुड़े कानून तथा यातायात नियमों के पालन के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को ई-चालान से संबंधित कानूनी प्रावधानों और अधिकारों से भी अवगत कराया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण विषय नशामुक्ति भी रहा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार और समाज को भी नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया।
शिविर में पैरालीगल वॉलेंटियर्स ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पात्र नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। अंत में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को उपयोगी और प्रेरणादायी बताते हुए ऐसे जागरूकता शिविरों का नियमित आयोजन करने की मांग की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं में कानून के प्रति सम्मान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जागरूक नागरिक बनने की भावना विकसित करना है, ताकि न्यायपूर्ण, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
दुर्ग। जिले में मानसून की सक्रियता के बीच 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक 501.0 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में पाटन तहसील में सबसे अधिक 620.7 मिमी तथा धमधा तहसील में सबसे कम 346.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
आंकड़ों के अनुसार दुर्ग तहसील में 564.0 मिमी, बोरी में 561.1 मिमी, भिलाई-3 में 517.1 मिमी तथा अहिवारा में 396.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की मात्रा में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।
5 अगस्त 2026 को हुई वर्षा की बात करें तो भिलाई-3 में सर्वाधिक 28.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा धमधा में 24.9 मिमी, दुर्ग में 14.1 मिमी, बोरी में 2.0 मिमी, अहिवारा में 1.2 मिमी वर्षा हुई, जबकि पाटन तहसील में वर्षा दर्ज नहीं की गई।
जिला प्रशासन ने बताया कि मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा वर्षा से संबंधित आंकड़ों का नियमित संकलन किया जा रहा है। किसानों एवं आम नागरिकों को मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
भिलाई। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और सड़कों पर अवैध पार्किंग की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई ने अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में निगम के जोन-3 राजस्व विभाग एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने पावर हाउस सर्विस रोड पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई वाहनों को जब्त किया।
निगम प्रशासन के अनुसार पावर हाउस सर्विस रोड पर सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से वाहन खड़े किए जाने के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा था। अवैध पार्किंग से न केवल यातायात बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई थी। नागरिकों की सुविधा और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क पर अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाया और उन्हें जब्त कर लिया।
कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए वाहनों को पुलिस प्रशासन के सहयोग से थाना छावनी पहुंचाया गया। निगम अधिकारियों ने वाहन चालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़क, सर्विस रोड अथवा यातायात प्रभावित करने वाले स्थानों पर वाहन खड़ा करना नियमों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें तथा सड़क पर वाहन खड़े कर यातायात व्यवस्था में बाधा उत्पन्न न करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अवैध पार्किंग के विरुद्ध यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
