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भिलाई / शौर्यपथ / विश्व बैंक कालोनी से ऐश्वर्या गैस एजेंसी के समीप गौरव पथ से जुड़ी भिलाई-चरोदा नगर निगम का मॉडल रोड भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। करीब एक करोड़ की लागत बनी मॉडल रोड एक महीने के अंदर ही दरकने लगी है। महज पांच सौ मीटर की लंबाई वाली इस सड़क पर जगह-जगह उभरी दरारे भ्रष्टाचार की पोल खुलता दिखाई दे रहा है। इस रोड में जगह जगह दरारों को देख रेत डालकर छिपाने की नाकाम कोशिश की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि भिलाई -3 में एक करोड़ की लागत से बनी मॉडल रोड भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है। विश्व बैंक कालोनी से ऐश्वर्या गैस एजेंसी के समीप गौरव पथ से जुड़ी इस मॉडल रोड पर माह भर पहले ही डामरीकरण किया गया है। इस बीच कोई अधिक बारिश भी नहीं हो पायी है। बावजूद इसके सड़क का कुछ स्थान पर धंस जाना और दरारों के उभरने से कहीं न कहीं इसके निर्माण में हुई भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास और पीएचई मंत्री गुरु रूद्र कुमार के निर्वाचन क्षेत्र वाले नगर निगम के महत्वपूर्ण विकास कार्य में भ्रष्टाचार की पोल खोलते इस मामले पर चर्चा सरगर्म हो गई है।
भिलाई-चरोदा नगर निगम के द्वारा लगभग दो साल पहले विश्व बैंक कालोनी से गौरव पथ को जोडऩे वाली सड़क को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए लगभग एक करोड़ रूपये व्यय प्रावधानित किया गया। इसके तहत बीच में डिवाइडर के साथ दोनों ओर 20-20 फीट चौड़ाई में डामरीकृत सड़क को माह भर पहले ही अंतिम रूप दिया गया। दोनों तरफ पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ और दोनों किनारों पर आरसीसी नाली के सहित सड़क को रौशन करने डिवाइडर में ट्यूबलर पोल लगाने का कार्य भी इसमें शामिल है।
जनप्रतिनिधियों की माने तो नगरीय प्रशासन विकास विभाग ने नगर निगम को अपनी सीमा के भीतर किसी एक सड़क को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने लागत के अनुरूप राशि प्रदान करने में कोई हीला-हवाला नहीं बरता। निगम द्वारा सड़क का चयन कर प्रेषित प्रस्ताव को स्वीकृति देकर शासन ने लगभग एक करोड़ की राशि प्रदान कर दिया। लेकिन डामरीकरण के माह भर के भीतर ही जिस तरह से सड़क पर दरारें उभरने लगी है। उसके शासन की दी गई राशि के बंदरबांट होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है। महज एक महिने में एक करोड़ की सड़क ने जिस तरीके से भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दिया है उससे नगर मकसद से रेत की परत बिछाने से यह साफ नजर आ रहा है।
प्रतिबंधित समय में डामरीकरण
मॉडल रोड पर डामरीकरण का कार्य प्रतिबंधित समय में किया गया है। लोक निर्माण विभाग की गाइड लाइन के अनुसार 15 जून से 15 सितम्बर के बीच सड़क डामरीकरण नहीं किया जा सकता है। इस अवधि में बारिश की बनी रहने वाली संभावना के चलते डामरीकरण की गुणवत्ता प्रभावित होती है। लेकिन संबंधित ठेकेदार ने मॉडल रोड पर 15 जून के बाद डामरीकरण कर नियम के खिलाफ काम किया। अधिकारियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया और माह भर के भीतर ही सड़क की दशा व दिशा बिगडऩे लगी है।
ठेकेदारों की रिंग पद्धति है जिम्मेदार: विजय जैन
नगर निगम के सभापति विजय जैन ने निर्माण के एक महिने में मॉडल रोड के दरकने के लिए ठेकेदारों के अघोषित रिंग पद्धति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से मामूली बारिश में सड़क खराब होने लगी है उससे अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत उजागर हुई है। जनप्रतिनिधियों की भावना के खिलाफ जाकर ठेकेदारों को रिंग बनाकर काम बांटने अधिकारियों की करतूत से जनभावना के अनुरूप विकास नहीं हो पाना दुखद है। इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
