July 31, 2026
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    शपथ-पत्र में ‘सच’ छुपाना पड़ा भारी: समोदा सरपंच अरुण गौतम का चुनाव रद्द, पद से बर्खास्त

    • rounak group

    दुर्ग।

    ग्राम पंचायत समोदा में अफीम कांड के खुलासे को लेकर सुर्खियों में आए सरपंच अरुण गौतम अब खुद कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। पंचायत चुनाव में दिए गए शपथ-पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के आरोप में उनका निर्वाचन न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला न सिर्फ समोदा बल्कि पूरे जिले की पंचायत राजनीति में बड़ा संदेश लेकर आया है।

    ⚖️ कोर्ट का सख्त रुख, निर्वाचन हुआ शून्य

    अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, दुर्ग द्वारा 5 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि अरुण गौतम ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथ-पत्र (प्ररूप-4-ख-01) में अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी जानबूझकर छुपाई।

    इसे छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के नियम 31(क) का उल्लंघन मानते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया गया।

    ? याचिका से खुला मामला

    यह पूरा मामला याचिकाकर्ता श्रीमती भुनेश्वरी देशमुख द्वारा दायर चुनाव याचिका से सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि:

    गौतम ने आपराधिक प्रकरणों को छुपाकर मतदाताओं को भ्रमित किया

    नामांकन प्रक्रिया में गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ा

    कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों में थाना पुलगांव के कई गंभीर मामलों का उल्लेख किया गया, जिनमें हत्या के प्रयास (धारा 307 IPC) जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    ? कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

    रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा पहले आपत्ति खारिज करना नियम विरुद्ध पाया गया

    सुनवाई के दौरान तथ्य स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुए

    शपथ-पत्र में जानकारी छुपाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छल माना गया

    ? अब क्या होगा आगे?

    अरुण गौतम का सरपंच पद तत्काल प्रभाव से समाप्त

    जनपद पंचायत दुर्ग को उप-चुनाव (Bye-election) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

    राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी

    याचिकाकर्ता को 500 रुपये की प्रतिभूति राशि वापस करने का आदेश

    ?️ पृष्ठभूमि: कड़ा मुकाबला, अब पूरा उलटफेर

    2025 के पंचायत चुनाव में अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे।

    चुनाव परिणाम के बाद ही शपथ-पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसे बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुनः सुनवाई में लिया गया और अब यह बड़ा फैसला सामने आया।

    ⚠️ राजनीतिक और सामाजिक संदेश

    यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि पंचायत चुनावों में भी पारदर्शिता और सच्चाई से कोई समझौता नहीं होगा।

    शपथ-पत्र में जानकारी छुपाना अब सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ धोखा माना जा रहा है।

    ? अपडेट

    अरुण गौतम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आगे इस फैसले को चुनौती देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    ? निष्कर्ष:

    समोदा का यह मामला अब एक मिसाल बन गया है—जहां सच छुपाने की कीमत सत्ता गंवाकर चुकानी पड़ी। पंचायत स्तर से लेकर बड़े चुनावों तक, यह फैसला आने वाले समय में प्रत्याशियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

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