July 28, 2026
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    प्यासी जनता, मालामाल ठेकेदार! दुर्ग के वाटर एटीएम में ‘जल सेवा’ के नाम पर खुला खेल, लागत मूल्य का पानी ऊंचे दामों में बेचने का आरोप Featured

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    दुर्ग / शौर्यपथ

    भीषण गर्मी से जूझ रहे दुर्ग शहर में जहां आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जनहित के लिए लगाए गए वाटर एटीएम अब कथित तौर पर “जल व्यापार” का माध्यम बनते नजर आ रहे हैं। इंदिरा मार्केट स्थित वाटर एटीएम संचालक पर पानी की कालाबाजारी और मनमाने दामों पर बिक्री के गंभीर आरोप लगे हैं।

    स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के अनुसार, जिस वाटर एटीएम से पहले ₹10 में पूरा केन भर जाता था, अब ₹15 से ₹20 डालने के बाद भी केन पूरा नहीं भर पा रहा। आरोप है कि एटीएम संचालक के कर्मचारी अंदर से पाइप के माध्यम से बड़े केनों में पानी भरकर ई-रिक्शा के जरिए दुकानों तक पहुंचा रहे हैं और एक केन ₹30 से ₹40 तक में बेचा जा रहा है।

    शौर्यपथ टीम के पास इस पूरे मामले के वीडियो फुटेज मौजूद हैं, जिसमें कथित तौर पर वाटर एटीएम से बड़े पैमाने पर पानी भरकर निजी बिक्री किए जाने के दृश्य कैद हैं।

    जनहित की योजना या निजी कमाई का जरिया?

    नगर निगम द्वारा शहर में वाटर एटीएम आम जनता को राहत देने और लागत मूल्य पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए थे। लेकिन आरोप है कि ठेकेदारों की मनमानी ने इस योजना की मूल भावना को ही प्रभावित कर दिया है।

    व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो महीनों से यह खेल लगातार चल रहा है और प्रतिदिन सैकड़ों केन पानी निजी रूप से बेचा जा रहा है। इससे निगम प्रशासन को लाखों रुपए के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

    जल विभाग भी हुआ सख्त

    मामले में जब जल विभाग प्रभारी से चर्चा की गई तो उन्होंने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई। विभागीय प्रभारी ने वीडियो फुटेज मांगते हुए मामले की जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निगम प्रशासन और जल विभाग इस मामले में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाएंगे, या फिर वास्तव में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई होगी।

    भ्रष्टाचार पर कार्रवाई या फिर लीपापोती?

    प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। ऐसे में दुर्ग निगम प्रशासन और शहरी सरकार के सामने अब यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है कि जनहित की योजना में कथित गड़बड़ी करने वालों पर वास्तव में सख्त कदम उठाए जाते हैं या फिर मामला नोटिस और चेतावनी तक सीमित रह जाता है।

    भीषण गर्मी के बीच पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता पर मुनाफाखोरी का यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

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