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वन टाइम पेनल्टी लेकर निर्माण नियमित करने की मांग, बीएसपी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर चेंबर ने उठाए सवाल
दीपावली बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी, सीजीएम सेवाएं के आश्वासन के एक माह बाद भी समाधान का इंतजार
भिलाई / शौर्यपथ। भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रशासित क्षेत्र में दुकान-सह-आवास के आवंटनधारकों से अतिरिक्त निर्माण के नाम पर प्रतिमाह आर्थिक दंड वसूले जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। वर्षों से जारी इस व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है। स्टील सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स, भिलाई ने बीएसपी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि अतिरिक्त निर्माण के मामलों में प्रतिमाह जुर्माना वसूलने के बजाय पूर्व में लागू वन टाइम पेनल्टी व्यवस्था के तहत एकमुश्त राशि लेकर निर्माण को नियमित किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि व्यापारियों को शीघ्र राहत नहीं मिली तो दीपावली के बाद व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
8-10 वर्षों से प्रतिमाह आर्थिक दंड, आखिर कब तक चलेगी वसूली?
चेंबर के अनुसार, भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने प्रशासित क्षेत्र में दुकान-सह-आवास के लिए विधिसम्मत आवंटन किए हैं। आवंटनधारकों द्वारा निर्धारित ऊंचाई सीमा के भीतर कुछ अतिरिक्त निर्माण किए गए हैं। ऐसे निर्माणों के नियमितीकरण के लिए बीएसपी प्रबंधन ने पूर्व में वन टाइम पेनल्टी प्रणाली लागू करते हुए आदेश भी जारी किए थे। संगठन का आरोप है कि लगभग 8 से 10 वर्षों से इस व्यवस्था को दरकिनार कर आवंटनधारकों से हर महीने आर्थिक दंड वसूला जा रहा है।
चेंबर का सवाल है कि जब ऐसे निर्माणों के नियमितीकरण के लिए एकमुश्त जुर्माने की व्यवस्था पहले से मौजूद रही है, तो फिर व्यापारियों पर लगातार मासिक आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है? इस व्यवस्था में जुर्माने की वसूली की कोई अंतिम समय-सीमा स्पष्ट नहीं होने से आवंटनधारकों की परेशानी और बढ़ रही है।
सीजीएम सेवाएं ने दिया था निराकरण का आश्वासन, एक माह बाद भी स्थिति अस्पष्ट
इस मुद्दे को लेकर हाल ही में स्टील सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य महाप्रबंधक (सेवाएं) एवं उनके अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में अतिरिक्त निर्माण पर प्रतिमाह आर्थिक दंड वसूली की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। चेंबर के मुताबिक, चर्चा के दौरान सीजीएम ने प्रकरण के निराकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी संगठन को प्रबंधन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई अथवा निर्णय की जानकारी नहीं मिली है।
समाधान के बजाय मासिक वसूली पर अधिकारियों की रुचि : ज्ञानचंद जैन
स्टील सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसका निराकरण स्थानीय स्तर पर ही संभव है। इसके बावजूद व्यापारियों को लंबे समय से आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की रुचि समस्या का स्थायी समाधान निकालने के बजाय प्रतिमाह राशि वसूली में अधिक दिखाई देती है।
जैन ने बताया कि चेंबर ने मुख्य महाप्रबंधक, नगर सेवाएं, भिलाई इस्पात संयंत्र को पुनः पत्र भेजकर मांग की है कि प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले ऐसे सभी मामलों में आवंटनधारकों को राहत प्रदान करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
रिटेंशन और लाइसेंस प्रकरणों का हवाला, प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल
चेंबर अध्यक्ष ने रिटेंशन और लाइसेंस से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए बीएसपी प्रबंधन की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन प्रकरणों का निराकरण स्थानीय स्तर पर संभव था, उन्हें भी उच्च स्तर तक ले जाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में व्यापारियों को पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा है और सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी स्थिति स्पष्ट नहीं रखी गई।
जैन के अनुसार, इन प्रकरणों से यह सवाल उठता है कि स्थानीय स्तर पर समाधान की गुंजाइश होने के बावजूद निर्णय लेने में अनावश्यक देरी क्यों हो रही है।
नगर निगम चुनाव से पहले समाधान की मांग, दीपावली बाद आंदोलन की तैयारी
चेंबर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने मांग की है कि नगर निगम चुनाव से पहले बीएसपी प्रबंधन दुकान-सह-आवास के अतिरिक्त निर्माण पर प्रतिमाह जुर्माना वसूली की व्यवस्था का पुनरीक्षण कर वन टाइम पेनल्टी के माध्यम से नियमितीकरण का रास्ता निकाले। उनका कहना है कि व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों से राहत मिलनी चाहिए।
उन्होंने प्रबंधन से दीपावली के अवसर पर व्यापारी वर्ग को राहत देने की अपील करते हुए कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो स्टील सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स दीपावली के बाद बड़े आंदोलन की रणनीति अपनाएगा।
अब इस पूरे मामले में बीएसपी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। व्यापारियों की मांग है कि वर्षों से चली आ रही मासिक जुर्माना वसूली के स्थान पर स्थायी समाधान निकाला जाए। वहीं, प्रबंधन की ओर से इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर व्यापारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
