August 08, 2026
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    संपत्ति विवाद का मामला : शासकीय कर्मचारी हूं, इसलिए मैं इस मामले को लेकर मीडिया के सामने नही जाना चाह रहा था

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    भिलाई / शौर्यपथ / माता पिता के किसी भी पैतृक संपत्ति पर जितने भी पुत्र होते हैं,उसमें सभी का बराबर बराबर हिस्सा होता है इसी आधार पर पिता स्व. बंशी साहनी एवं माता स्व.श्रीमती गंगादेवी एवं पंचायत के माध्यम से परिवारिक व्यवस्था पत्र और आपसी इकरारनामा संपादित कराया गया था जिसके आधार पर हमारे तीन भाईयों शंकर साहनी, बलिराम साहनी एवं कन्हाई साहनी का पैतृक संपत्ति पर बराबर अधिकार है। हमारे पिता स्व. बंशी साहनी के जीवन काल सें ही दक्षिण गंगोत्री में दुकानं क्रमांक बी-34 बंशी साहनी के नाम पर पंजीकृत है तथा बी-35 कारी साहनी (मामा) के नाम पर पंजीकृत है। जिसका बिक्रीनामा व आम मुख्तियारनामा निष्पादित है लेकिन कन्हाई साहनी और बलिराम साहनी द्वारा बी-35 पर पुन: नया मुख्तियारनामा बनाकर बी-35 की दुकान पर कब्जा कर उसका किराया वसूली किया जा रहा है साथ ही उत्तर गंगोत्री में स्थित दुकान क्रमंाक डी-10 मेरे यानि शंकर साहनी के नाम से पंजीकृत है जो कि मेरे स्वयं द्वारा किये गये आय से उसे अर्जित है जिस पर जबरन कन्हाई साहनी द्वारा जबरन कब्जा कर उनके द्वारा कम्प्यूटर का कार्य करने का काम जा रहा है और मेरे द्वारा दुकान का किराया कन्हाई साहनी से मांगने और नही देने पर दुकान खाली करने के लिए कहने पर गाली गलौच करते हुए मारपीट करने पर उतारू हो जाता है। मैं इसकी शिकायत सुपेला थाना और न्यायालय में किया हूं। इस मामला अभी भी न्यायालय में प्रक्रिया में है जिसका केस चल रहा है।
    चूंकि मैं तीन भाईयों में सबसे बड़ा हूं और शासकीय कर्मचारी हूं, इसलिए मैं इस मामले को लेकर मीडिया के सामने नही जाना चाह रहा था और आपसी बैँठक कर मामले को पटाक्षेप करना चाह रहा था, इसलिए मैं चुपचाप रहता था, जिसका फायदा उठाकर कन्हाई साहनी द्वारा मुझपर तरह तरह के आरोप लगाकर मुझे मानसिक रूप से प्रताडि़त और परेशान कुछ सालों से लगातार कर रहा है, जिसके कारण मेैं मानसिक रूप से इतना परेशान रहता हूं जिससे मुझे ब्रेन टयूमर की शिकायत हो गई है इसके अलावा अब तक दो बार ब्रेन अटैक (फिट) हो चुका हैँ, जिसके कारण मुझे उपचार के लिए दो तीन बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ चुका है। मेरे छोटे भाई बलिराम साहनी और कन्हाई साहनी द्वारा चार दुकानों दक्षिण गंगोत्री के बी-35, बी-11,बी-12 एवं उत्तर गंगोत्री की डी-10 और बी-35 के प्रथम फ्लोर पर स्थित दुकान को कब्जा कर जबरिया किराया वसूली किया जा रहा है, और इनके द्वारा मेरे हक और हिस्से का किराया नही दिया जा रहा हैँ।जबकि उत्तर गंगोत्री की दुकान डी-10 मेरे स्वयं के नाम की स्वयं के आय से अर्जित दुकान है, उसपर पर इन्ही का कब्जा है। मैं अपने छोटे भाई के उक्त कृत्यों से बहुत ही हताश और परेशान हूं, और न्याय से अब तक वंचित हूं। हाल ही में दक्षिण गंगोत्री की दुकान बी-34 जिसका किराया मैं लेता हूं, उक्त दुकान के प्रथम तल पर जबरन कन्हाई द्वारा ताला तोड़कर पूरे परिवार के साथ गत 5 दिसंबर 2020 को जबरन कब्जा करने की नियत से घुस गया है। कन्हाई द्वारा महिलाओं को आगे कर मुझे ना ना प्रकार के अपराधों में फंसाने की भी धमकिया देने लगा जिसकी शिकायत भी मेरे द्वारा सुपेला थाना में दर्ज कराया गया है, जिस पर कन्हाई साहनी, संजय साहनी उर्फ सूर्यशेखर साहनी, पप्पू साहनी, पर धारा 294,506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसके पश्चात आपसी सहमति के लिए बैठक भी गत दिवस हुई जिसमें कहा गया कि दक्षिण गंगोत्री के सामने की दुकान बी-35 और बी-34 एवं पीछे की दुकान बी-11 एवं बी-12 को बेंचकर जो भी राशि आयेगी उसे तीनों भाईयों में बराबर बराबर वितरित कर लिया जायेगा। लेकिन कन्हाई साहनी द्वारा हमें गुमराह करते हुए बी-34 की दुकान के प्रथम तल को किसी और को किराये से दे दिया गया। हम किरायेदार को हटाने पहुंचे तो कन्हाई साहनी एवं उनकी पत्नी कविता देवी और फूलोदेवी, तथा कन्हाई का साला संजय साहनी एवं पप्पू साहनी द्वारा हमलोगों के साथ गाली गलौच किया गया एवं उल्टा हमारे विरूद्ध मीडिया में गलत जानकारी देकर हमें बदनाम करने का कार्य किया गया, उसके बाद आज मैँ अपना पक्ष मीडिया के सामने पत्रकारवार्ता के माध्यम से रख रहा हूं कि किस प्रकार कन्हाई साहनी, कविता साहनी और बलराम साहनी की पत्नी फूलोदेवी तथा उनका पुत्र पप्पू साहनी द्वारा हमारे पैतृक दुकानों पर जबरन कब्जा कर उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ करते हुए हमें मीडिया से लेकर मैं जहां शासकीय कार्य में पदस्थ हूं वहां तक बार बार पत्राचार कर मुझे बदनाम और परेशान किया जा रहा है।
    हमारी माताजी के देहांत के बाद पंचायत बुलाया गया था उसमें यह निर्णय लिया गया था कि माता गंगादेवी के दशगात्र कार्यक्रम का खर्च हम तीनों भाई मिलकर उठायेंगे उस पर भी कन्हाई साहनी कायम नही रहा और कन्हाई साहनी तथा बलराम साहनी द्वारा दशगात्र में कोई खर्च वहन नही किया गया, लोकलाज और सामाजिक स्थितियो को देखते हुए पूरा खर्च मुझे ही उठाना पड़ा। जबकि माता गंगादेवी का पूरा जेवर भी कन्हाई साहनी के पास ही है।

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