August 25, 2026
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    वृद्धों के लिए "करूणा" के नाम से दुर्ग सहित छग में शुरू हो रहा है जागरूकता कार्यक्रम

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    दुर्ग / शौर्यपथ / श्री राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र. न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग केे मार्गदर्शान में एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त जिलों में निवास करने वाले वृद्धजनों के सम्मान में "करूणा" के नाम से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उपरोक्त कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु वृद्धजनों के विभिन्न अधिकारों के सम्मान में संक्षिप्त वीडियो बनाया जाएगा एवं वृद्धजनों को चिन्हित किया जाएगा। जिन्हें भरण-पोषण की आवश्यकता है किंतु उन की संताने भरण-पोषण प्रदान नहीं कर रहे हैं। चिन्हांकित मामलों में वृद्धजनों की संतान/परिवार जन जो भरण-पोषण देने के लिए उत्तरदाई है। उनको समझाइश दी जाएगी एवं बुजुर्ग माता-पिता रिश्तेदारों को नियमानुसार भरण-पोषण एवं रहन-सहन की सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा।
    काउंसलिंग के पश्चात भी संतान/परिवार जन बुजुर्ग माता-पिता को भरण-पोषण एवं रहन-सहन की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु सहमत ना हो तब पैनल अधिवक्ता के माध्यम से भरण-पोषण संबंधित मामले विधि अनुसार जिला न्यायालय में संचित किए जाने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
    इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव श्री राहुल शर्मा द्वारा विशेष जागरूकता कार्यक्रम सेक्टर-6 भिलाई में स्थित आस्था संस्था में वृद्धजनों को उनके अधिकारों के संबंध में जानकारी दी गई। जानकारी देकर बताया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों भरण-पोषण कल्याण अधिनियम 2007 के तहत अपने संतान/परिवारजनों से भरण पोषण एवं रहन-सहन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं तथा इसके लिए विधि अनुसार परिवार न्यायालय में प्रकरण भी दर्ज किये जा सकते हैं । प्राय: यह देखने में आता है कि संतान अपने माता-पिता के संम्पत्ति का उपभोग करते हैं किन्तु उनके भरण-पोषण के दायित्व से अपने का अलग कर देते हैं । माता-पिता भी अपनी संतानों के इस कृत्य को आमजनों के सामने लाये जाने में संकोच करते हैं तथा अपने इज्जत एवं सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए संतानों के द्वारा दी जा रही पीड़ा को सहन करते हैं तथा मानसिक रूप से कमजोर होते जाते हैं। वृद्धजनों को अपने संतानों से भरण-पोषण पाने का अधिकार है जिसके लिए उन्हें सामने आना चाहिए।
    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे वृद्धजनों के लिए भरण-पोषण की राशि संतानों से दिलाये जाने के लिए प्रबल रूप से खड़ा होकर उन्हें पूरी तरह से विधिक सहायता हेतु मदद करेगा तथा उन्हें नि:शुल्क विधिक सहायता प्रदान करते हुए शासकीय व्यय पर पैनल अधिवक्ता भी उपलब्ध करायेगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण वृद्धजनों के पारिवारिक मामलों को काउंसिलिंग अथवा मध्यस्थता अथवा लोक अदालत के माध्यम से निपटाये जाने का प्रयास करेगा। जागरूकता शिविर में सचिव के समक्ष आस्था संस्था में निवासरत् दो महिला वृद्धजनों द्वारा अपने पारिवारिक समस्याओं के संबंध में विधिक सलाह चाही गई तथा संतानों से अपने रहन-सहन हेतु भरण पोषण की राशि दिलाये जाने का निवेदन किया गया। जिस पर उक्त दोनों वृद्धजन महिलाओं के पारिवारिक समस्या के संबंध में चर्चा कर अग्रिम कार्यवाही की गई। जागरूकता शिविर में 40 वृद्धजन उपस्थित रहें ।

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