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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
*ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश*
*केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना*
रायपुर / प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।
*सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला*
योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी - गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
*केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना*
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।
*पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प*
मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।
*ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी*
ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी - जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
*अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण*
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।
*1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ*
योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।
*उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी*
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।
*दलहन-तिलहन की खेती अपनाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन*
*कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का आधार*
रायपुर / प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं।
*दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन*
राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।
*आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें*
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है।
*अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह*
कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।
कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।
हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।
क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।
स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
दो-तिहाई पार्षदों का एक साथ केरल रवाना होना बना चर्चा का विषय, शहर की समस्याओं के बीच सियासी समीकरणों और संभावित राजनीतिक खेल पर उठ रहे सवाल।
दुर्ग राजनीतिक।
दुर्ग की राजनीति में इन दिनों विकास, गुटबाजी और सियासी रणनीतियों का ऐसा संगम दिखाई दे रहा है, जिसने नगर निगम की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। नगर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का सामूहिक रूप से केरल भ्रमण पर जाना केवल एक पर्यटन यात्रा है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है, यही प्रश्न आज शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।
राजनीति में संख्या शक्ति का अपना महत्व होता है। सत्ता पक्ष अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों को मजबूत रखने का प्रयास करता है तो विपक्ष सत्ता की कमजोर कड़ियों को तलाशने में जुटा रहता है। दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो निगम की सामान्य सभाओं से लेकर विभिन्न विकास कार्यों तक लगातार मतभेद और टकराव की स्थिति दिखाई देती रही है। कई अवसरों पर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एक सुर में निगम प्रशासन तथा शहरी सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाते देखा गया है।
ऐसे समय में जब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और शहर के अनेक वार्ड जलभराव, गंदगी, अधूरी सफाई व्यवस्था, बदहाल सड़कों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ दस दिन की यात्रा पर निकलना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की यात्रा का विरोध नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर उठता एक लोकतांत्रिक प्रश्न है।
जनप्रतिनिधि केवल व्यक्तिगत नागरिक नहीं होते। वे अपने वार्ड और हजारों नागरिकों की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में जब शहर समस्याओं से घिरा हो और निगम के भीतर राजनीतिक असंतोष भी लगातार सामने आ रहा हो, तब सामूहिक यात्रा का राजनीतिक महत्व स्वतः बढ़ जाता है।
इसी कारण निगम क्षेत्र में "ऑपरेशन पैंथर" की चर्चा जोर पकड़ रही है। हालांकि महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कानूनी रूप से आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक इतिहास गवाह है कि कई बार बड़ी राजनीतिक घटनाओं की शुरुआत सीधे टकराव से नहीं बल्कि रणनीतिक बैठकों और समूहबद्ध गतिविधियों से होती है। यही कारण है कि पार्षदों का यह सामूहिक भ्रमण केवल पर्यटन न मानकर राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।
चर्चा का दूसरा पहलू आर्थिक है। यात्रा में शामिल पार्षदों द्वारा अलग-अलग राशि बताए जाने से भी जिज्ञासाएं बढ़ी हैं। कोई दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति बता रहा है तो कोई पंद्रह हजार रुपये। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में दस दिनों का केरल भ्रमण इतनी कम लागत में संभव कैसे हो रहा है, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि यदि यात्रा की वास्तविक लागत अधिक है तो शेष खर्च का वहन कौन कर रहा है।
हालांकि इस प्रश्न का कोई आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजनीति में कोई भी सामूहिक गतिविधि बिना किसी उद्देश्य के नहीं होती। अक्सर दिखाई देने वाले चेहरे अलग होते हैं और रणनीति तैयार करने वाले चेहरे अलग। यही कारण है कि इस यात्रा को लेकर कई तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, निगम की राजनीति में लंबे समय से विकास कार्यों को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं। कई पार्षदों ने सामान्य सभा में आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के आवंटन और स्वीकृति में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है तथा जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता। स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसाओं और विकास योजनाओं को लेकर भी समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं।
इन परिस्थितियों में केरल यात्रा केवल एक भ्रमण कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक संकेतों का माध्यम बन गई है। यात्रा समाप्त होने के बाद क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा, क्या निगम के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव होगा, या यह केवल सामूहिक पर्यटन साबित होगा—इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने वाला समय ही देगा।
फिलहाल इतना तय है कि दुर्ग नगर निगम का यह घटनाक्रम केवल केरल यात्रा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपे राजनीतिक संदेश, संभावित रणनीतियां और बदलते समीकरण आने वाले दिनों में दुर्ग की शहरी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए निगम क्षेत्र से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर नजर अब केरल से लौटने वाले पार्षदों और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
"केरल की यह यात्रा पर्यटन से अधिक राजनीति का विषय बन चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि लौटने के बाद पार्षद केवल यात्रा की यादें साझा करेंगे या दुर्ग की राजनीति में किसी नए अध्याय का सूत्रपात करेंगे।"
धमधा तहसील में अवैध कब्जा हटाकर शासन की जमीन सुरक्षित, भू-माफियाओं को स्पष्ट संदेश—शासकीय भूमि पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय भूमि की सुरक्षा और भू-माफियाओं के विरुद्ध अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दुर्ग जिले में जिला प्रशासन लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशन में प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए जिले में कोई स्थान नहीं है और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
इसी क्रम में धमधा तहसील के ग्राम बसनी में लंबे समय से शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर शासन की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शासकीय भूमि पर झटका तार लगाकर तथा खरीफ एवं रबी फसलों की खेती कर अवैध कब्जा किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।
तहसीलदार धमधा द्वारा हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त कर राजस्व प्रकरण में विस्तृत जांच और सुनवाई की गई। तथ्यों की पुष्टि होने पर संबंधित कब्जाधारियों के विरुद्ध विधिवत बेदखली आदेश पारित किया गया। आदेश के पालन में 22 जून 2026 को राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत बसनी के संयुक्त प्रयास से व्यापक कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया।
तहसीलदार श्रीमती मीना साहू ने बताया कि कार्रवाई के दौरान सेवाराम लोधी द्वारा शासकीय खसरा नंबर 1077 की 20 डिसमिल तथा खसरा नंबर 1188 की 0.34 हेक्टेयर भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया गया। इसी प्रकार राजकुमार लोधी के कब्जे से 7 डिसमिल तथा राजकपूर लोधी के कब्जे से 13 डिसमिल शासकीय भूमि मुक्त कराई गई। वहीं शिवकुमार मौर्य द्वारा खसरा नंबर 1077 की 8 डिसमिल भूमि तथा खसरा नंबर 1076 की 0.19 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और लगाए गए झटका तार को भी हटाकर भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित किया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और विधिसम्मत ढंग से संपन्न हुई, जिसमें राजस्व निरीक्षक धमधा, राजस्व निरीक्षक पेण्ड्रावन, हल्का पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भू-माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और शासकीय भूमि का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस निर्णायक पहल से ग्रामीणों में संतोष और विश्वास का माहौल है तथा शासकीय भूमि को संरक्षित करने के इस कदम की व्यापक सराहना की जा रही है।
डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर, देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
रायपुर / राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में "Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data" विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए।
साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव श्री अंकित आनन्द
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनन्द ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है।
राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप
चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक
तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा।
गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया।
समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं
कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।
कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी.एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, श्री यू.एस. अग्रवाल, श्री आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम
किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस
रायपुर / शौर्यपथ / अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।
श्री परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में 24 जून 2026 को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा के सफल आयोजन एवं अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण की प्रतीक्षा सूची का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा
ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। शासन की मार्गदर्शिका एवं मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर उनके निराकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड करने की कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा होगी।
जनभागीदारी को बढ़ावा देना
ग्राम सभाओं में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों से अपील की है कि ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उडऩदस्ता प्रभारी रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उडऩदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया।
जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खडग़वां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है।
कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
परामर्शदात्री समिति की बैठक में नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ ने रखा कर्मचारियों का पक्ष, शीघ्र समाधान की मांग
दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर सोमवार को आयुक्त कक्ष में परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ ने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए उनके त्वरित एवं न्यायसंगत निराकरण की मांग की।
बैठक के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी संस्था की कार्यक्षमता और विकास उसके कर्मचारियों के मनोबल, सुरक्षा एवं सम्मान पर आधारित होती है। कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान होने पर जनसेवा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार संभव है।
संघ ने निगम प्रशासन के समक्ष प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर नियमित वेतन भुगतान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, जीपीएफ, सीपीएफ एवं परिवार कल्याण निधि की कटौती राशि का नियमित जमा, तथा छठवें एवं सातवें वेतनमान के लंबित एरियर्स के भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे विस्तार से रखे।
पदाधिकारियों ने बताया कि समय पर वेतन नहीं मिलने और कर्मचारियों के अंशदान की राशि संबंधित खातों में जमा नहीं होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना की मांग भी कर्मचारियों की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल है।
बैठक में कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। संघ के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक पहल का आश्वासन प्राप्त हुआ है। संगठन ने उम्मीद जताई कि निगम प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर जल्द ठोस निर्णय लेगा।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि निगम प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ऐसा सकारात्मक कार्य वातावरण तैयार करना है, जिससे कर्मचारी सम्मानपूर्वक कार्य कर सकें और नगरवासियों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
इस अवसर पर संगठन ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संगठन को मजबूत बनाने तथा कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। संघ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों और हितों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे भी मजबूती के साथ उठाया जाता रहेगा।
प्रमुख मांगें
निर्धारित तिथि पर नियमित वेतन भुगतान
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
जीपीएफ, सीपीएफ एवं परिवार कल्याण निधि की राशि नियमित जमा करना
छठवें एवं सातवें वेतनमान के लंबित एरियर्स का भुगतान
कर्मचारियों की लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं का निराकरण
"मजबूत संगठन ही कर्मचारियों के अधिकारों की सबसे बड़ी ताकत है और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए संघ सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।"
— राजू लाल चन्द्राकर, जिला अध्यक्ष, नवनियुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ, दुर्ग
15 करोड़ की लागत से बनेगा संभाग स्तरीय बहुउद्देशीय स्टेडियम, खिलाड़ियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले के खेलगांव खम्हरिया में प्रस्तावित संभाग स्तरीय बहुउद्देशीय स्टेडियम निर्माण परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार सोमवार को खेल एवं युवा कल्याण विभाग के नाम आबंटित 16 एकड़ शासकीय भूमि का सीमांकन एवं चिन्हांकन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
राजस्व, लोक निर्माण एवं पुलिस विभाग के संयुक्त समन्वय से यह कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। सीमांकन कार्य के दौरान भूमि की परिधि को चूना एवं अन्य तकनीकी साधनों की सहायता से चिन्हित किया गया, जिससे अब स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
राजस्व और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम रही मौजूद
तहसीलदार वसुमित्र दीवान के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम, जिसमें आरआई श्री घनश्याम चंद्राकर और पटवारी श्री विवेक देवांगन शामिल थे, ने सीमांकन की कार्रवाई पूरी की। वहीं लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर श्री वाय.के. सोनवानी एवं श्रीमती सुस्मिता चंद्राकर ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए उतई थाना प्रभारी श्री अनिल पटेल के नेतृत्व में 10 पुरुष एवं 10 महिला पुलिसकर्मी तैनात रहे, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।
15 करोड़ की लागत से तैयार होगा आधुनिक खेल परिसर
जानकारी के अनुसार, दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चंद्राकर के विशेष प्रयासों से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। निर्माण कार्य के लिए मार्च 2026 में 4 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त लोक निर्माण विभाग को जारी की जा चुकी है।
प्रस्तावित स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें—
400 मीटर का सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक
अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला फुटबॉल मैदान
दर्शकों के लिए सीटिंग गैलरी
बैडमिंटन कोर्ट सहित इंडोर स्टेडियम
प्रशासनिक भवन एवं अन्य सहायक सुविधाएं
शामिल हैं।
पूरे संभाग के खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ
स्टेडियम निर्माण के बाद दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, रिसाली नगर निगम, भिलाई नगर निगम तथा नगर पंचायत उतई सहित पूरे दुर्ग संभाग के खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर प्रशिक्षण एवं प्रतियोगी अवसर मिल सकेंगे।
ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों की रही सहभागिता
सीमांकन कार्य के दौरान खेल विभाग के प्रशिक्षक श्री भूपेन्द्र हिरवानी, खम्हरिया सरपंच श्रीमती दुलारी देशलहरे, उपसरपंच श्री टीकाराम साहू, खेल प्रशिक्षक श्री बालक दास डहरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।
हेडलाइन विकल्प
// खेलगांव खम्हरिया को मिली नई पहचान: 16 एकड़ में बनेगा संभाग का आधुनिक स्टेडियम
// दुर्ग के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, 15 करोड़ के स्टेडियम का रास्ता हुआ साफ
// खम्हरिया में गूंजेगी खेल प्रतिभाओं की नई उड़ान, स्टेडियम निर्माण हेतु भूमि सीमांकन पूर्ण
// सिंथेटिक ट्रैक से इंडोर स्टेडियम तक: दुर्ग संभाग को मिलने जा रही खेल सुविधाओं की बड़ी सौगात
शौर्यपथ विशेष: यह परियोजना केवल एक स्टेडियम नहीं, बल्कि दुर्ग संभाग की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हो सकती है।
बिलासपुर में होने वाली प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
भिलाई। आगामी राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेने वाली दुर्ग जिला टीम के चयन हेतु सोमवार, 22 जून 2026 को शाम 5:30 बजे गुंडिचा मंडप डोम शेड, सेक्टर-10 भिलाई नगर में चयन प्रक्रिया का आयोजन किया गया। चयन ट्रायल में दुर्ग जिले के विभिन्न क्षेत्रों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
चयन प्रक्रिया में सब जूनियर (अंडर-14), जूनियर (अंडर-17) एवं सीनियर (19 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग) के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए टीम में स्थान बनाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सेक्टर-10 की पार्षद श्रीमती सुभद्रा जी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जिले का नाम रोशन करें और अधिक से अधिक पदक जीतकर लौटें।
ज्ञात हो कि राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप का आयोजन 10 से 12 जुलाई 2026 तक बिलासपुर के रेलवे स्टेडियम में किया जाएगा। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में विशेष उत्साह देखा गया।
थाई बॉक्सिंग दुर्ग जिला सचिव जे.पी. राजू ने कहा कि खेलों की नगरी भिलाई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपेक्षा है। उन्होंने बताया कि चयनित खिलाड़ियों के लिए शीघ्र ही विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा ताकि वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम में कारा-कु-जू-बो-काई-कान कराते डो मार्शल आर्ट्स एंड योग एसोसिएशन के वरिष्ठ छात्र रामकुमार पांडे, गांधी सोनी, भरत लाल साहू, सुभाष सोनी, दीपेश आहूजा, रोहन देवांगन, विपिन दहाते, अक्षत चंद्रा, अरमान देवांगन, वेदांत साहू सहित बड़ी संख्या में जूनियर एवं सीनियर ब्लैक बेल्ट तथा ब्राउन बेल्ट खिलाड़ी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दुर्ग जिला थाई बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष श्री चिन्ना केशवलु ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें जिले के खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है। उन्होंने भविष्य में थाई बॉक्सिंग खेल के विस्तार और खिलाड़ियों के विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
चयन प्रक्रिया के सफल आयोजन के साथ अब खिलाड़ियों की निगाहें बिलासपुर में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहां दुर्ग जिले की टीम से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
200 टन सैंपल से निकले 5 हीरे, दो जेम क्वालिटी; निवेश, उद्योग और रोजगार की बढ़ीं संभावनाएं
रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश के खनिज क्षेत्र को नई दिशा देने के संकेत दिए हैं। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। इनमें दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।
यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है और भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन तथा राजस्व वृद्धि का आधार बन सकती है।
वैज्ञानिक अन्वेषण से मिली सफलता
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के अनुसार बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन और अन्वेषण ड्रिलिंग जैसे वैज्ञानिक तरीकों से सर्वेक्षण किया गया। इसके आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री एकत्र कर परीक्षण किया गया, जिसके बाद पांच हीरों की प्राप्ति हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में मिले ये परिणाम क्षेत्र में व्यापक हीरा भंडार की संभावनाओं का संकेत हैं। इससे भविष्य में विस्तृत सर्वेक्षण और भूगर्भीय अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी।
रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की नीति पर कार्य कर रही है। हीरा क्षेत्र में संभावनाएं विकसित होने से निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी नई पहचान
सरकार का मानना है कि बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में मिली यह सफलता छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। आगामी वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक संसाधन क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जाएगा।
वर्तमान में प्राप्त सभी हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है। आगे की प्रक्रिया नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की जाएगी।
मुख्य तथ्य
स्थान: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक, सरायपाली (महासमुंद)
परीक्षण सामग्री: 200 टन बल्क सैंपल
प्राप्त हीरे: 5
कुल वजन: 1.22 कैरेट
जेम क्वालिटी हीरे: 2
अन्य श्रेणी के हीरे: 3
परीक्षण एजेंसी: एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड
यह खोज छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है और प्रदेश को खनिज आधारित औद्योगिक विकास के नए युग में प्रवेश कराने का आधार बन सकती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
