July 26, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    टीएमसी के 20 बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) विवाद पर अंतिम सुनवाई पूरी; मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय की संभावना, दलबदल कानून बनेगा सबसे बड़ी कसौटी

       नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष दोनों मामलों में अंतिम दौर की सुनवाई पूरी हो चुकी है और संसदीय सूत्रों के अनुसार जुलाई में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है।

    टीएमसी ने अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि सांसदों द्वारा 'नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI)' में विलय का दावा संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अनुरूप नहीं है। पार्टी का कहना है कि केवल सांसदों का समूह किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता और वैध विलय के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है।

    वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने भी बागी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। पार्टी का कहना है कि दलबदल के मामलों में संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए। महाराष्ट्र में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

    स्पीकर का फैसला अंतिम नहीं होगा

    संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है, लेकिन 1992 के 'किहोतो होलोहान बनाम जाचिल्हू' फैसले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आता है। ऐसे में स्पीकर का कोई भी फैसला सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में चुनौती दिया जा सकता है।

    मानसून सत्र में वोटिंग का क्या होगा?

    जब तक किसी सांसद को औपचारिक रूप से अयोग्य घोषित नहीं किया जाता, तब तक वह संसद का सदस्य बना रहता है और सदन की कार्यवाही में भाग लेने तथा मतदान करने का अधिकार रखता है। यदि स्पीकर का फैसला सत्र से पहले नहीं आता या मामला अदालत में लंबित रहता है, तो बागी सांसद सामान्य रूप से वोट कर सकते हैं, जब तक कि अदालत विशेष रूप से उनके मतदान पर रोक न लगाए।

    यदि स्पीकर बागियों के पक्ष में फैसला देते हैं, तो मूल राजनीतिक दल अदालत से अंतरिम रोक (Stay) की मांग कर सकते हैं। वहीं यदि स्पीकर उन्हें अयोग्य घोषित करते हैं, तो बागी सांसद राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसी स्थिति में अदालत अंतरिम राहत, सशर्त भागीदारी या अन्य उपयुक्त आदेश दे सकती है।

    राजनीतिक महत्व भी बड़ा

    इस पूरे विवाद पर देश की नजर इसलिए भी टिकी है क्योंकि आगामी मानसून सत्र में सरकार महत्वपूर्ण विधेयक और संभावित संवैधानिक संशोधन ला सकती है, जिनके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में बागी सांसदों की सदस्यता और उनके मतदान के अधिकार पर आने वाला फैसला राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
    फिलहाल मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के बाद इसके सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की पूरी संभावना बनी हुई है।

    3450 दिनों से लगातार निःशुल्क भोजन सेवा दे रही संस्था ने स्टील की थाली, वस्त्र, फल, मिष्ठान और दैनिक उपयोग की सामग्री भी बांटी

        दुर्ग / शौर्यपथ / अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की अमावस्या के पावन अवसर पर जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग ने सेवा और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए वृद्धाश्रमों, रेलवे स्टेशन तथा शहर के विभिन्न स्थानों पर रह रहे जरूरतमंदों के बीच भोजन और आवश्यक सामग्री का वितरण किया। संस्था द्वारा वृद्धजनों को सम्मानपूर्वक भोजन कराने के साथ ही स्टील की थाली, गिलास, चम्मच, वस्त्र एवं दैनिक उपयोग की सामग्री भी भेंट की गई।

    संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि जन समर्पण सेवा संस्था पिछले 9 वर्ष 6 माह (लगभग 3450 दिनों) से बिना किसी व्यवधान के प्रतिदिन दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं अन्य स्थानों पर अस्थायी रूप से निवासरत मजदूरों, असहायों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों को रात्रि में निःशुल्क भोजन उपलब्ध करा रही है। संस्था के स्वयंसेवक विभिन्न पर्व एवं त्योहारों पर भी जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता करते हैं।

    अधिकमास अमावस्या के अवसर पर संस्था के सदस्यों ने पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम तथा कादंबरी नगर स्थित महिला अनाथ एवं वृद्ध आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों को नई स्टील की थाली, गिलास एवं चम्मच प्रदान किए और उन्हीं में भोजन परोसा। इसके बाद वृद्ध पुरुषों को लुंगी, महिलाओं को नाइटी तथा सभी को मिष्ठान, नमकीन, फल, बिस्किट, साबुन, निरमा, तेल, टूथपेस्ट, कंघी सहित अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

    इसके पश्चात संस्था की टीम ने दुर्ग रेलवे स्टेशन एवं शहर के विभिन्न फुटपाथों पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया तथा साबुन एवं अन्य उपयोगी सामग्री का भी वितरण किया।

    संस्था ने बताया कि पद्म पुराण एवं अन्य धर्मग्रंथों में अधिकमास के दौरान अन्नदान एवं जरूरतमंदों की सेवा को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इस माह में किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी होता है तथा इससे मानव सेवा के साथ आध्यात्मिक संतोष की भी प्राप्ति होती है।

    सेवा कार्य में रहे उपस्थित

    इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’, प्रतिभा शर्मा, पार्षद राम भाऊ, सुरेश गुप्ता, मनोज गुप्ता, लाला, अर्चला शर्मा, सरिता शर्मा, चंचल शर्मा, पिंकी पुरोहित, किरण सेन, सुमन शर्मा, गिरधर शर्मा, राजेंद्र ताम्रकार, अर्जित शुक्ला, आशीष मेश्राम, सुजल शर्मा, विनय मिश्रा, संदीप गुप्ता, अंकेश पेसवानी, वाशु शर्मा, सार्थक शर्मा, अनस खान, अंश पाण्डेय, मंटू गुप्ता, मोक्ष शर्मा सहित संस्था के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

    मानपुर में दर्दनाक हादसा, बैरिकेड्स तोड़कर फरार हुआ आरोपी; पुलिस की तत्परता से गिरफ्तारी, क्षेत्र में आक्रोश

        मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौक / शौर्यपथ / जिले के मानपुर क्षेत्र में तेज रफ्तार और लापरवाही ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। कथित रूप से नशे की हालत में ट्रक चला रहे चालक ने 8 वर्षीय बालिका को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब 60 किलोमीटर तक पीछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही मानपुर पुलिस ने तत्काल जिलेभर में अलर्ट जारी किया और ट्रक को रोकने के लिए प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए। लेकिन आरोपी चालक ने रुकने के बजाय बैरिकेड्स को तोड़ते हुए ट्रक दौड़ा दिया और भागने का प्रयास किया।
    60 किलोमीटर तक चला पीछा, पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी
    घटना के बाद पुलिस की कई टीमें सक्रिय हुईं। लगातार पीछा करते हुए पुलिस ने कोर-कोरकट्टी के पास ट्रक को घेरकर रोक लिया और आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने ट्रक को भी जब्त कर लिया है।
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चालक के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
    एक परिवार का उजड़ गया संसार
    हादसे में 8 वर्षीय मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने दोषी चालक के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
    सवाल फिर वही—कब थमेगा तेज रफ्तार का आतंक?
    यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, नशे की हालत में वाहन चलाने और भारी वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो मासूम जिंदगियां इसी तरह तेज रफ्तार की भेंट चढ़ती रहेंगी।
    फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह मामला तेज रफ्तार, लापरवाही और कथित रूप से नशे की हालत में वाहन चलाने से जुड़ा माना जा रहा है।

    राजनांदगांव/शौर्यपथ । भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, राजनांदगांव द्वारा गुरुवार को पीटीएस ऑडिटोरियम में “Caring for Community – Health Awareness & BLS Training Program” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन एवं विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने वाली तकनीकों की जानकारी देना था।

    कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अतुल मनोहरराव देशकर, संयुक्त संचालक सह चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय राजनांदगांव ने “जीवनशैली में परिवर्तन का महत्व – नींद एवं योग की भूमिका” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित जीवनशैली और नियमित योगाभ्यास को आवश्यक बताया।

    इस अवसर पर डॉ. प्रकाश खुंटे, सहायक प्राध्यापक, चिकित्सा विभाग द्वारा बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने हृदयाघात जैसी आपात स्थिति में सीपीआर (CPR) की उपयोगिता और प्राथमिक उपचार के महत्व के बारे में बताया तथा प्रतिभागियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।

    कार्यक्रम में पुलिस विभाग की प्रशिक्षण टीम ने भी विशेष सहयोग दिया। टीम के सदस्यों ने आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार एवं जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में PTS School, Rajnandgaon के संकाय सदस्यों सहित करीब 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अजय कुमार, डॉ. आदान भाटिया एवं अनिमेष श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनरक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों को समाज के लिए उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता जताई।

    लेख : राजनीतिक विश्लेषण

    दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की राजनीति इन दिनों विकास से अधिक गुटबाजी और शक्ति प्रदर्शन की चर्चाओं के केंद्र में दिखाई दे रही है। बरसात की शुरुआत के साथ जहां शहर के अनेक वार्ड जलभराव, सफाई व्यवस्था, गड्ढों, बदबू और मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के बड़ी संख्या में पार्षदों का केरल भ्रमण राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पहले कुछ पार्षदों के साथ पुरी यात्रा की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक केरल यात्रा का कार्यक्रम सामने आया और अधिकांश पार्षद उसी ओर रवाना हो गए। इसे लेकर तरह-तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर यह केवल पर्यटन है या इसके पीछे भविष्य की राजनीतिक रणनीति भी आकार ले रही है?

    यात्रा बनी शक्ति प्रदर्शन का माध्यम?

    इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल एक दल के नहीं, बल्कि कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय पार्षद भी एक साथ दिखाई दिए। इससे यह संदेश गया कि स्थानीय राजनीति में वैचारिक सीमाओं से अधिक व्यक्तिगत समीकरण और गुटीय संतुलन प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े समूह का एक मंच पर आना भविष्य की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता है। ऐसे में यह यात्रा केवल पर्यटन न होकर शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखी जा रही है।

    खर्च को लेकर भी उठ रहे सवाल

    यात्रा के खर्च को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ पार्षदों का दावा है कि प्रति व्यक्ति 10 से 15 हजार रुपये का योगदान लिया गया, जबकि सामान्य यात्रा व्यय का अनुमान इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वास्तविक खर्च अधिक है तो शेष राशि की व्यवस्था किसने की?

    हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।

    वार्डों की चिंता या राजनीतिक गणित?

    बरसात के मौसम में शहर के अनेक हिस्सों में जल निकासी, कचरा प्रबंधन और सड़क मरम्मत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का एक साथ लंबी यात्रा पर जाना नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।

    आलोचकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क है कि जनप्रतिनिधियों को भी समय-समय पर सामूहिक संवाद और विश्राम का अवसर मिलना चाहिए। इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच जनता अपने सवालों के उत्तर तलाश रही है।

    गुटबाजी का नया अध्याय?

    दुर्ग निगम की राजनीति पिछले कुछ समय से लगातार गुटीय समीकरणों के कारण सुर्खियों में रही है। सामान्य सभा से लेकर विकास कार्यों तक कई बार मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। अब केरल यात्रा ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यदि निगम की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम होता है, तो इस यात्रा को उसके शुरुआती संकेतों में गिना जा सकता है। हालांकि यह केवल राजनीतिक विश्लेषण है और भविष्य की दिशा आने वाला समय ही तय करेगा।

    जनता पूछ रही है...

    जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता शहर का विकास है या राजनीतिक गुटों का विस्तार? आखिर वार्डों की समस्याओं के बीच पर्यटन को प्राथमिकता क्यों मिली? और यदि यह केवल निजी यात्रा थी, तो इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों का एक साथ जाना संयोग है या किसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा?

    अंतिम बात

    लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को यात्रा करने, संवाद करने और राजनीतिक रणनीति बनाने का पूरा अधिकार है। लेकिन उसी लोकतंत्र में जनता को यह अपेक्षा भी रहती है कि उसके प्रतिनिधि सबसे पहले उसके वार्ड, उसकी सड़क, उसकी नाली और उसकी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दें।

    केरल यात्रा समाप्त हो जाएगी, तस्वीरें भी सोशल मीडिया से धीरे-धीरे गायब हो जाएंगी, लेकिन शहर की टूटी सड़कें, जलभराव, कचरे के ढेर और जनता के सवाल वहीं रहेंगे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यात्रा से लौटने के बाद जनप्रतिनिधि विकास की नई पटकथा लिखेंगे या फिर दुर्ग की राजनीति में किसी नए "ऑपरेशन" की शुरुआत होगी।

    28 जून तक नामांकन, ऑनलाइन मतदान से होगा नए अध्यक्ष का चुनाव; संगठन ने अपनाया निष्पक्ष रुख

    दुर्ग। दुर्ग शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक सरगर्मी पैदा कर दी है। नामांकन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 28 जून तक नामांकन दाखिल किए जा रहे हैं। चुनाव की तिथि की आधिकारिक घोषणा भले अभी शेष हो, लेकिन यह तय है कि मतदान पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाएगा।

    वर्तमान चुनावी परिदृश्य में ऋषि साहू और मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों युवा नेता लगातार कार्यकर्ताओं और युवा मतदाताओं के बीच जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। संगठन के भीतर भी दोनों की सक्रियता और स्वीकार्यता को लेकर सकारात्मक चर्चा है।

    सूत्रों के अनुसार, रौनक दुबे ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है, जिससे चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर फिलहाल मुख्य रूप से ऋषि साहू और मनीष सोनवानी के बीच बनते मुकाबले पर टिकी हुई है।

    संगठन ने नहीं खोले अपने पत्ते

    इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन ने किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है। संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि "सभी प्रत्याशी हमारे अपने हैं। जो कार्यकर्ताओं का अधिक विश्वास प्राप्त करेगा, वही विजयी होगा। संगठन पूरी तरह निष्पक्ष है।"

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन का यह निर्णय भविष्य में किसी प्रकार की गुटबाजी से बचने और लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    35 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा मतदान का अधिकार

    युवा कांग्रेस के संगठनात्मक नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के चुनाव में 35 वर्ष तक की आयु वाले सदस्य ही मतदान कर सकेंगे। मतदान ऑनलाइन होने से युवा मतदाताओं में भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है।

    जीत किसी की भी हो, संगठन रहेगा मजबूत

    चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सबसे सकारात्मक संदेश दोनों प्रमुख दावेदारों की ओर से सामने आया है। ऋषि साहू और मनीष सोनवानी दोनों ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो, वे मिलकर संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने का कार्य करेंगे। दोनों नेताओं ने आपसी सामंजस्य और कांग्रेस संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

    वरिष्ठ नेताओं का मिल रहा निष्पक्ष सहयोग

    इस पूरे चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा भी निष्पक्ष भूमिका निभाई जा रही है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सभी दावेदारों को समान अवसर देने और चुनाव प्रक्रिया को लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी बनाने पर जोर दे रहे हैं।

    बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस

    दुर्ग युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल नए अध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है और माना जा रहा है कि नया युवा अध्यक्ष संगठन की इस रणनीति को और गति देगा।

    अब सभी की निगाहें ऑनलाइन मतदान की तिथि की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बनने वाले अंतिम चुनावी समीकरणों पर टिकी हुई हैं।

    140 आवेदनों के साथ जनता पहुंची कलेक्टर दरबार, भूमि, आवास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे रहे प्रमुख

     

    दुर्ग। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम एक बार फिर आम नागरिकों की उम्मीदों का केंद्र बना, जहां विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्वयं लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

    जनदर्शन में कुल 140 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें अवैध कब्जा, भूमि सीमांकन, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता एवं अन्य जनहित से जुड़े मामले शामिल रहे। कलेक्टर ने कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    28 साल बाद भी नहीं मिला पट्टे की जमीन का पता

    जनदर्शन में सबसे मार्मिक मामला भिलाई की एक विधवा महिला का सामने आया। महिला ने बताया कि वर्ष 1998 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत उनके और उनके दिवंगत पति के नाम पर भू-स्वामित्व पट्टा जारी किया गया था, लेकिन लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें अपनी जमीन का वास्तविक स्थान नहीं बताया गया।

    महिला ने प्रशासन को बताया कि वर्तमान में वह बीएसपी क्वार्टर में निवास कर रही हैं और जर्जर आवासों को तोड़े जाने की प्रक्रिया के चलते उनका परिवार आवासीय संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने पट्टे की भूमि का चिन्हांकन कर कब्जा दिलाने तथा मकान निर्माण की अनुमति प्रदान करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तहसील नजूल को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    फोरलेन सड़क के मापदंड पर उठे सवाल

    बोरसी क्षेत्र के नागरिकों ने प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण में एक समान मानक अपनाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। नागरिकों का कहना था कि महाराजा चौक से बोरसी चौक तक अधिकांश हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण 20 मीटर के मानक पर किया जा रहा है, जबकि एक विशेष हिस्से में 22 मीटर चौड़ाई प्रस्तावित है।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इससे उनकी निजी संपत्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने पूरे मार्ग में समान रूप से 20 मीटर चौड़ाई के आधार पर नापजोख कराने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

    50 कुत्तों से दहशत, रहवासियों ने मांगी राहत

    पदमनाभपुर क्षेत्र के शकुंतला नगरवासियों ने एक आवास में बड़ी संख्या में पालतू कुत्ते रखे जाने की शिकायत दर्ज कराई। आवेदकों के अनुसार संबंधित मकान में लगभग 50 कुत्ते रखे गए हैं, जिन्हें कई बार बिना निगरानी के बाहर छोड़ दिया जाता है।

    रहवासियों ने बताया कि कुत्तों के झुंड के कारण क्षेत्र में भय का वातावरण बना हुआ है तथा राहगीरों और मवेशियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इस संबंध में पूर्व में थाना पदमनाभपुर में शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने की बात कही गई। कलेक्टर ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई हेतु एसडीएम दुर्ग को निर्देशित किया।

    जनदर्शन बना उम्मीदों का मंच

    जनदर्शन में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट किया कि नागरिक आज भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन को सबसे भरोसेमंद मंच मानते हैं। भूमि, आवास, सड़क और सुरक्षा जैसे मुद्दे सीधे आम जनजीवन से जुड़े हैं और इनके समाधान की अपेक्षा प्रशासन से की जाती है।

    कलेक्टर द्वारा कई मामलों में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना यह संकेत देता है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। अब नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनदर्शन में दिए गए निर्देश धरातल पर कितनी तेजी से अमल में आते हैं।

    काला दिवस मनाने वाली भाजपा को कांग्रेस का पलटवार, कहा- संवैधानिक आपातकाल और वर्तमान हालात की तुलना नहीं छिपा सकती सच्चाई

    रायपुर। आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाए जा रहे "काला दिवस" को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा आज भाजपा का अलोकतांत्रिक चरित्र बन चुका है।

    दीपक बैज ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल संविधान के प्रावधानों के तहत लागू किया गया था। उस समय देश में उत्पन्न परिस्थितियों और आंतरिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे निर्धारित समय के बाद समाप्त भी कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज उस ऐतिहासिक घटना को राजनीतिक हथियार बनाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक चिंता का विषय वर्तमान परिस्थितियां हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है, विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग हो रहा है।

    बैज ने दावा किया कि चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं पर कार्रवाई, दल-बदल की राजनीति और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, करों का बोझ, पेपर लीक की घटनाएं और आम नागरिकों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज को सुनना और संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना भी उसकी मूल आत्मा है।

    दीपक बैज ने कहा कि जो संगठन और राजनीतिक दल कभी आपातकाल के विरोध को अपना प्रमुख मुद्दा बनाते थे, वे आज अपनी ही सरकार के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों पर उठ रहे सवालों पर मौन दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, युवाओं और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे काला दिवस को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक चिंता है तो पहले वर्तमान व्यवस्था में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं भाजपा लगातार कांग्रेस पर आपातकाल के ऐतिहासिक अध्याय को लेकर निशाना साध रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल की बरसी को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष को और तीखा कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।

    शौर्यपथ ब्यूरो, नई दिल्ली।

    'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के संकल्प को नई ऊंचाई देते हुए इस्पात मंत्रालय के अधीन महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (SAIL) ने देश की समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। भारतीय नौसेना के बेड़े में हाल ही में शामिल किए गए तीन अत्याधुनिक और उन्नत जहाजों के निर्माण के लिए सेल ने अकेले ही 5,700 टन विशेष रक्षा-ग्रेड (Defense-Grade) स्टील की आपूर्ति की है।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में किया कमीशन

    इन तीनों उन्नत और स्वदेशी जहाजों को 21 जून, 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित एक ऐतिहासिक और भव्य समारोह के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल (कमिशन) किया गया। इन जहाजों में शामिल हैं:

    आईएनएस दूनागिरी (INS Dunagiri): उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट

    आईएनएस अग्रय (INS Agray): एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट

    आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak): विशाल सर्वेक्षण पोत (लार्ज)

    भिलाई, बोकारो और राउरकेला प्लांट का साझा पराक्रम

    सेल ने इन तीनों अत्याधुनिक जहाजों की सुरक्षा और मजबूती के लिए विशेष गुणवत्ता वाले DMR 249A ग्रेड हॉट-रोल्ड शीट और प्लेट की सप्लाई की है। इस विशिष्ट डिफेंस ग्रेड स्टील का उत्पादन सेल ने अपने तीन प्रमुख संयंत्रों के जरिए किया है:

    भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP)

    बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL)

    राउरकेला इस्पात संयंत्र (RSP)

    इस उच्च स्तरीय स्टील का बेहद सावधानीपूर्वक किया गया उत्पादन यह प्रमाणित करता है कि 'सेल' के पास देश की समुद्री सुरक्षा की जटिल और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए विश्वस्तरीय तकनीकी क्षमता मौजूद है।

    आयात पर निर्भरता खत्म, राउरकेला में उत्पादन क्षमता बढ़ी

    रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती जरूरतों और विदेशी आयात को प्रतिस्थापित (Import Substitution) करने के लिए सेल ने अपनी कमर कस ली है। कंपनी ने डीएमआर (DMR) ग्रेड प्लेटों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष रूप से राउरकेला स्टील प्लांट के 'स्पेशल प्लेट प्लांट' में अतिरिक्त एवं आधुनिक पहल लागू किए हैं, ताकि भारतीय सेनाओं को कभी भी स्टील की कमी न हो।

    शानदार है सेल का ट्रैक रिकॉर्ड (देश के समुद्री रक्षक)

    यह पहली बार नहीं है जब सेल के फौलाद ने देश की सीमाओं को सुरक्षित किया है। इससे पहले सेल ने:

    भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत के लिए स्टील दिया।

    विशिष्ट प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट्स - आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का निर्माण किया।

    इसके अलावा आईएनएस अजय, आईएनएस निस्तार और आईएनएस अंजदीप जैसे शक्तिशाली जहाजों की रीढ़ भी सेल का विशेष स्टील ही है।

    "रणनीतिक स्वतंत्रता को मिलेगी मजबूती" — डॉ. अशोक कुमार पंडा (सीएमडी, SAIL)

    सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पंडा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, "भारत के रक्षा क्षेत्र के एक प्रमुख भागीदार के रूप में, SAIL देश की आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने रक्षा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राउरकेला के स्पेशल प्लेट प्लांट की उत्पादन क्षमता को पहले ही अपग्रेड कर दिया है। इन उच्च-क्षमता वाली DMR 249A स्टील प्लेटों की आपूर्ति न केवल भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूती देती है, बल्कि यह सेल की अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता का भी जीता-जागता प्रमाण है।"

    शौर्यपथ संवाददाता, भिलाई।

    सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सिन्टरिंग प्लांट-3 (SP-3) के एरिया रिपेयर शॉप से आत्मनिर्भरता और बेहतरीन टीमवर्क की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। यहाँ पिछले 9 वर्षों (वर्ष 2017) से विभिन्न तकनीकी खराबियों के कारण कबाड़ और निष्क्रिय पड़ी एचएमटी निर्मित ड्रिलिंग मशीन (मॉडल आरएम-62) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार (Restoration) कर उसे फिर से चालू कर दिया गया है।

    24 जून 2026 को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस पुनरुद्धारित मशीन का भव्य लोकार्पण किया गया।

    दिग्गज अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ लोकार्पण

    मशीन के पुनः संचालन के अवसर पर बीएसपी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

    श्री सजीव वर्गीज - मुख्य महाप्रबंधक (SP-3 एवं OHP)

    श्री डी. जगदीश - महाप्रबंधक (MARS-1)

    श्री राहुल बिजुरकर - महाप्रबंधक प्रभारी (SP-3)

    श्री आई. वी. रमणा - महाप्रबंधक (मैकेनिकल, SP-3)

    अधिकारियों का संदेश: "आंतरिक संसाधनों, तकनीकी दक्षता और समन्वित टीमवर्क के माध्यम से इस मशीन का पुनरुद्धार बीएसपी की आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है। भविष्य में भी ऐसी परिसंपत्ति पुनर्स्थापन (Asset Restoration) पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा।"

    चुनौतीपूर्ण था सफर: गायब थे स्पेयर्स और तकनीकी दस्तावेज

    यह मशीन 2017 से यांत्रिक (Mechanical), विद्युत (Electrical) और हाइड्रोलिक खराबियों के कारण बंद थी। मूल इलेक्ट्रिकल सर्किट डायग्राम (विद्युत परिपथ आरेख) और जरूरी स्पेयर्स न होने के कारण इसका सुधरना नामुमकिन लग रहा था। लेकिन SP-3 की बहु-विभागीय टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया।

    इन विभागों और 'मास्टर्स' के तालमेल से हुआ कमाल

    मशीन को दोबारा जिंदा करने में संयंत्र के विभिन्न विभागों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया:

    यांत्रिक पुर्जों का निर्माण (MARS-1): क्षतिग्रस्त पार्ट्स का निर्माण महाप्रबंधक श्री डी. जगदीश एवं इंजीनियरिंग एसोसिएट श्री हेमंत वानखेड़े के मार्गदर्शन में मार्स-1 मशीन शॉप में किया गया।

    गुमशुदा दस्तावेजों की खोज (HRDC): मूल विद्युत आरेख न होने पर मानव संसाधन विकास केंद्र के प्रशिक्षण अनुभाग से श्री ए. के. तिवारी ने आवश्यक तकनीकी दस्तावेज खोजकर उपलब्ध कराए।

    विद्युत प्रणाली का पुनरुद्धार: महाप्रबंधक श्री एस. एस. मौरी, उप महाप्रबंधक श्री दीपक कुमार गुप्ता तथा सहायक महाप्रबंधक श्री एस. सी. साहू के नेतृत्व में इलेक्ट्रिकल सिस्टम को पूरी तरह ठीक किया गया।

    हाइड्रोलिक सिस्टम की ओवरहॉलिंग: स्नेहन दल द्वारा सहायक प्रबंधक श्री अशोक राव ठाकरे के नेतृत्व में हाइड्रोलिक प्रणाली को दुरुस्त किया गया।

    इनका भी रहा विशेष योगदान: इस पूरे प्रोजेक्ट के सफल निष्पादन में उप महाप्रबंधक श्री एम. यू. राव, वरिष्ठ प्रबंधक श्री जितेश एच. शाहनी, वरिष्ठ प्रबंधक श्री विपिन मौर्य तथा सहायक महाप्रबंधक श्री राजेश साहू के नेतृत्व में मैकेनिकल मेंटेनेंस प्लानिंग एवं एरिया रिपेयर शॉप की टीमों की मुख्य भूमिका रही।

    मशीन शुरू होने से बीएसपी को क्या होगा फायदा?

    क्षमता में वृद्धि: एरिया रिपेयर शॉप की मशीनिंग और फैब्रिकेशन क्षमताओं को भारी मजबूती मिलेगी।

    काम में तेजी: ड्रिलिंग कार्यों के निष्पादन में अब काफी तेजी आएगी।

    पैसों की बचत: अनुरक्षण (Maintenance) कार्यों के लिए जरूरी स्पेयर्स का आंतरिक निर्माण अब प्लांट के भीतर ही प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

    घटेगी निर्भरता: विशेष ड्रिलिंग कार्यों के लिए अब केंद्रीय इंजीनियरिंग शॉप्स (Central Engineering Shops) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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