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April 16, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

नवा रायपुर / शौर्यपथ / 

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत राज्य में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को गति देने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी कड़ी में गठित “छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता निर्माण क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति” की पहली बैठक 17 मार्च 2026 को अपराह्न 4 बजे मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित की जाएगी।

यह बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाइब्रिड मोड (भौतिक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की होगी समीक्षा

सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के प्रशासनिक मार्गदर्शन में गठित यह समिति राज्य में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने पर भी कार्य किया जाएगा।

iGOT प्लेटफॉर्म के उपयोग की होगी समीक्षा

राज्य नोडल अधिकारी (मिशन कर्मयोगी – iGOT), सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार बैठक में राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा iGOT डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के उपायों पर भी चर्चा होगी।

नई तकनीकों के उपयोग पर होगा विचार

बैठक के एजेंडे में राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों (ATI सहित अन्य संस्थानों) की भूमिका को सुदृढ़ करने, डिजिटल लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श भी शामिल है।

इसके अलावा राज्य स्तर से प्राप्त सुझावों को संकलित कर आगामी राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के लिए अनुशंसाएँ तैयार की जाएंगी।

बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

अब तक 102 स्थानों से 741 गैस सिलेंडर जब्त, अफवाहों से सावधान रहने की अपील रायपुर / शौर्यपथ / 13 मार्च 2026 राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़…

जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ, रैंप शो में दिखा आदिवासी परिधानों का आकर्षण

रायपुर / शौर्यपथ / 

राजधानी रायपुर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के उत्सव ‘आदि परब’ का रंगारंग आगाज हो गया। दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्सव को जीवंत बना रहे हैं।

इस वर्ष आदि परब की थीम ‘परम्परा से पहचान तक’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और जीवन शैली को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया। इस अवसर पर राज्य अंत्यावसायी आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक श्री हिना अनिमेष नेताम, श्रीमती गायत्री नेताम सहित विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।

रैंप शो में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक

आदि परब के उद्घाटन अवसर पर जनजातीय युवाओं ने पारंपरिक आदिवासी परिधानों में सजे-धजे रैंप शो के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधान, आभूषण और पारंपरिक शैली ने दर्शकों का खूब मन मोह लिया और लोगों ने उत्साह के साथ इस प्रस्तुति का आनंद लिया।

प्रदर्शनी और हाट बना आकर्षण का केंद्र

आदि परब में जनजातीय समाज के खान-पान, वेशभूषा, पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया गया है, जहां छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है।

समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

आदि परब का समापन 14 मार्च को होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, जनजातीय समाज के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्ति

रायपुर / शौर्यपथ /

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। विभाग द्वारा कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद शामिल हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण कर उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा 24 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को विस्तृत जानकारी सहित पत्र भी भेजा जा चुका है।

विषयवार पदों का विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक प्राध्यापक पदों के लिए विभिन्न विषयों में भर्ती की जाएगी, जिनमें—

हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पद

अर्थशास्त्र, इतिहास और भूगोल के 25-25 पद

कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15 पद

वाणिज्य के 75 पद

विधि (लॉ) के 10 पद

इसके अलावा ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद भी भरे जाएंगे।

जल्द जारी होगा विज्ञापन

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा का पाठ्यक्रम और विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।

महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मिलेगा बल

इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।

अतिथि प्राध्यापकों की व्यवस्था जारी

यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है।

विभाग के अनुसार अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट और सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं में योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

राजनांदगांव / शौर्यपथ /

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल करना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नजर रखना और जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाना भी है। लेकिन जब प्रशासन स्वयं मीडिया को सवाल पूछने या स्वतंत्र रूप से कवरेज करने से रोकने लगे, तो स्वाभाविक रूप से कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से सामने आया है, जहां मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

क्या है पूरा मामला

डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का विशाल मेला प्रारंभ होने वाला है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा तैयारियों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक में संभाग आयुक्त, राजनांदगांव आईजी, कलेक्टर जितेंद्र यादव, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस बैठक की वीडियो कवरेज कर रही थी, ताकि नवरात्रि मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जा सके।

लेकिन इसी दौरान राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडिया को यह कहते हुए कवरेज करने से रोक दिया कि “खबर आपको पीआरओ से मिल जाएगी।”

इस बयान के बाद बैठक में मौजूद पत्रकारों में असंतोष फैल गया और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार (बायकॉट) कर दिया।

खड़े हो रहे हैं कई बड़े सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जगत में कई सवाल उठने लगे हैं —

क्या अब मीडिया को सिर्फ पीआरओ द्वारा जारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाएगा?

क्या प्रशासन नहीं चाहता कि मीडिया सीधे घटनास्थल से सच्चाई दिखाए और सवाल पूछे?

या फिर कहीं प्रशासन को यह आशंका तो नहीं कि मीडिया के सवालों से व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर हो सकती हैं?

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करना नहीं होती।

मीडिया का कार्य है

घटनास्थल से वास्तविक स्थिति सामने लाना

प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करना

जनता की समस्याओं को उठाना

और शासन की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखना

अगर मीडिया को केवल पीआरओ द्वारा जारी जानकारी तक सीमित कर दिया जाए, तो स्वतंत्र पत्रकारिता का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।

संविधान क्या कहता है

भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसी अधिकार के अंतर्गत मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से समाचार जुटाने और प्रसारित करने की आज़ादी प्राप्त होती है।

हालांकि प्रशासनिक प्रोटोकॉल और सुरक्षा कारणों से कुछ परिस्थितियों में कवरेज सीमित किया जा सकता है, लेकिन सामान्य समीक्षा बैठक में मीडिया को रोकना कई बार पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर देता है।

पत्रकारों में नाराजगी

इस घटना के बाद स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों में नाराजगी देखी गई। कई पत्रकारों का कहना है कि —

“अगर खबर केवल पीआरओ के माध्यम से ही दी जाएगी, तो फिर स्वतंत्र रिपोर्टिंग कैसे होगी?

और अगर अधिकारी मीडिया के सवालों से बचने लगें, तो जनता तक सही जानकारी कैसे पहुंचेगी?”

प्रशासन की संभावित दलील

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कई बार प्रशासन व्यवस्था, सुरक्षा या बैठक की गोपनीयता के कारण मीडिया की कवरेज सीमित करता है।

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब बैठक में मीडिया को आमंत्रित किया गया था, तो फिर कवरेज से रोकना कितना उचित है?

लोकतंत्र की मजबूती पारदर्शिता से

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत पारदर्शिता और जवाबदेही है। जब प्रशासन खुलकर मीडिया के सवालों का जवाब देता है, तो जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

लेकिन यदि मीडिया को केवल सरकारी प्रेस नोट तक सीमित कर दिया जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत नहीं माना जाता।

अब बड़ा सवाल

डोंगरगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि —

क्या प्रशासन और मीडिया के बीच दूरी बढ़ रही है?

क्या पत्रकारों को केवल पीआरओ की जानकारी तक सीमित किया जाएगा?

या फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उसका पूरा अधिकार मिलेगा?

यह सवाल केवल राजनांदगांव जिले का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बन गया है।

 

भाजपा सरकार बताये प्रति पशु चारा के लिए प्रतिदिन 10 रु में पशुधन को भरपेट खुराक कैसे मिलेगा?

रायपुर। भाजपा सरकार के गौधाम योजना को हवा हवाई बताते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार की गौधाम, गौ-अभ्यारण बनाने की योजना सिर्फ हवा हवाई है, सवा दो साल में धरातल पर कही नजर नही आ रही है। सरकार जब मान रही है, प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 993 से अधिक छुट्टा घुमन्तु गौवंश पशुधन है, जिसका कोई मालिक नही है। ऐसे में सवा दो साल में मात्र 3 गौधाम बनाकर पशुधन की संरक्षण की दावा झूठा एवं नकली है। सवा दो साल में 11 गौधाम का पंजीयन हुआ जिसमें मात्र 3 ही बन पाये है, एक गौधाम की क्षमता 200 पशुधन की है, ऐसे में 600 पशुधन को ही गौधाम में जगह मिला, शेष 1 लाख 84 हजार 303 पशुधन अभी भूखे प्यासे सड़क पर भटक रहे है। दुर्घटना और खुली चराई का कारण बन रहे है, ये सब भाजपा सरकार की गोठान के प्रति राजनीतिक द्वेष के चलते हो रहा है, गोठान में तालाबंदी के कारण हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश में 10000 से अधिक गोठान बनाए थे, उसमें से 7000 से अधिक गोठान आत्मनिर्भर थे। सरकार की उसमें फूटी कौड़ी नहीं लगती थी, महिला स्वसहायता समूह और गौठान समिति मिलकर उसका संचालन करती थी, गांव-गांव में पैरा दान होता था और डे केयर के रूप में वह पशुधन को संरक्षण देते थे, भाजपा की सरकार ने गोठानों में ताला लगाकर पशुधन के साथ अन्याय किया है, महिला स्व सहायता समूह से भी काम छीना है। गोठानो में तालाबंदी के चलते किसान भी खुली चराई से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। परेशान है दुर्घटनाएं हो रही है अभी सरकार ने सवा दो साल में पशुधन संरक्षण के लिए कोई काम नहीं किया।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार बताये गौधाम योजना में चारा के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 10 रु. निर्धारित किया गया है, इसमें कौन सा चारा मिलेगा? 10 रु. में पशुधन को भरपेट भोजन कैसे मिलेगा? 10 रु. में पशुधन के लिए चारा की व्यवस्था करने का निर्णय हास्यपद है। सरकार दावा कर रही है कि 1460 गौधाम बनायेगे तो जिसमे 5 एकड़ चारागाह के लिए जमीन दी जायेगी तो कितने स्थानों पर चारागाह की जमीन की व्यवस्था की गई है। भाजपा का गौधाम योजना सिर्फ फर्जी विज्ञापन बाजी है। भाजपा आरएसएस से जुड़े लोगों को पालने पोसने एवं सरकारी जमीन पर कब्जा देने की योजना है। इससे पशुधन को कोई लाभ नही होगा बल्कि संघ भाजपा के नेता मालामाल होंगे।

बिजली दरों में कटौती और 400 यूनिट तक रियायत दे सरकार, समाधान योजना से ईमानदार उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं - कांग्रेस

 

रायपुर। बिजली बिल के समाधान योजना 2026 को सरकार का प्रोपोगेंडा बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार ईमानदारी से अपने बकाया का भुगतान करने वाले बिजली उपभोक्ताओं को हतोत्साहित करना चाहती है, यदि सरकार वास्तविक राहत और रियायत देना चाहती है तो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की तरह बिना किसी भेदभाव के 400 यूनिट तक घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में आधी छूट का लाभ दे और दो सालों में 5-5 बार की गई भारी भरकम मूल्य वृद्धि वापस ले। स्मार्ट मीटर की बाध्यता खत्म करे, अनियंत्रित मुनाफाखोरी, लूट और अधिक वसूली तत्काल बंद करें।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एक तरफ यह सरकार आम जनता को राहत देने के बजाय बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज लगा दी है, दूसरी तरफ समाधान योजना का ढोल पीटकर केवल पुराने बकायादारों के बिलों पर सरचार्ज में शत प्रतिशत और मूल राशि में 75 प्रतिशत की मामूली राहत को मास्टर स्ट्रोक बताने केवल विज्ञापनबाजी कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बिजली बिल हॉफ योजना में दुर्भावना पूर्वक किए गए संशोधन और बार-बार बिजली के दाम बढ़ाने से आम लोगों के घरों का बिजली बिल 4 गुना अधिक आ रहा है। महंगी बिजली के बाद भी यह सरकार जनता को 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में 8 से 9 घंटे तक बिजली कटौती से जनता परेशान है। ज़मीन हमारी, कारखाने हमारे, कोयला हमारा, पानी हमारा, हमारे ही राज्य में बिजली का सरप्लस उत्पादन फिर भी हमें ही महंगी दरों पर बिजली बेची जा रही है। सारे राहत और रियायत, छत्तीसगढ़ के संसाधनों को केवल भाजपा के चहेतों पर ही लुटाए जा रहे हैं। अब तो कोयले पर लगने वाला सेस भी हट गया है जिसके कारण कोयले के दाम पर न्यूनतम 400 रुपए प्रति टन कम हुआ है लेकिन बिजली के उत्पादन लागत में कमी का लाभ भी यह सरकार आम जनता से छिन रही है।

 रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।…

  रायपुर /\ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा की पूर्व सदस्य श्रीमती मंगली बाई रावटे के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय मंगली बाई रावटे अत्यंत सरल, विनम्र और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व की धनी थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज के लोगों के सुख-दुःख में सदैव सहभागिता निभाते हुए सेवा और सहयोग की भावना से कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता था। उनके निधन से समाज ने एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी कमी सदैव महसूस की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने सदन की ओर से दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

8 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव, ई-निविदा से भूमि आवंटन में पारदर्शिता और 20% राजस्व वृद्धि

रायपुर, । छत्तीसगढ़ विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम तथा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग से संबंधित वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं। इनमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 1567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपये तथा श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रुपये शामिल हैं।

उद्योग मंत्री Laxmi Lal Devangan (लखनलाल देवांगन) ने सदन में बताया कि Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।


उद्योग विभाग: निवेश और रोजगार को बढ़ावा

मंत्री देवांगन ने बताया कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बजट में 1750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें:

  • 652 करोड़ रुपये उद्योगों को अनुदान के लिए

  • लगभग 700 करोड़ रुपये औद्योगिक भूमि अर्जन, भूमि विकास और अधोसंरचना विकास के लिए रखे गए हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन अब ई-निविदा प्रणाली से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और राजस्व में 20% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, आईटी, बीपीओ और क्लीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं।

पिछले एक वर्ष में

  • 951 नए उद्योग स्थापित हुए

  • 8000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ

  • 45 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित हुए।

बस्तर से सरगुजा तक 23 नए औद्योगिक क्षेत्र और पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना भी शामिल हैं।

महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ाने के लिए बिलासपुर जिले में दो कामकाजी महिला हॉस्टल बनाए जा रहे हैं, जिनके लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

साथ ही स्टार्ट-अप मिशन को बढ़ावा देने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


श्रम विभाग: श्रमिकों के लिए नई योजनाएं

श्रम मंत्री देवांगन ने बताया कि असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 श्रेणियों के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए 128 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए अभिनव पहल करते हुए:

  • वर्तमान में 96 बच्चों को डीपीएस और राजकुमार कॉलेज सहित उत्कृष्ट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है।

  • अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।

इसके अलावा श्रमिक हित में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:

  • श्रमिक आवास योजना की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये

  • ई-रिक्शा सहायता भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये

राज्य में 32.58 लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं पर वर्ष 2025 में लगभग 387 करोड़ रुपये खर्च किए गए।


औद्योगिक सुरक्षा और बीमा सेवाएं

  • औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान

  • इंडस्ट्रियल हाइजीन लैब के लिए 5 करोड़ रुपये

  • कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।


आबकारी विभाग: राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि

वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए

  • 10 जिला अधिकारी

  • 85 आबकारी उपनिरीक्षक
    की भर्ती की गई है, जबकि 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्धारित 10,500 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 10,145 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के 8430 करोड़ रुपये की तुलना में 20.35% अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 12,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 28 फरवरी 2026 तक 9660 करोड़ रुपये (80.50%) प्राप्त हो चुके हैं।

नवा रायपुर में आबकारी विभाग का कम्पोजिट कार्यालय भवन बनाने की योजना है, जिसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

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