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May 22, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

शौर्यापथ लेख 

आज का इंसान दुनिया की सबसे तेज़ दौड़ में शामिल है। कोई दौलत के पीछे भाग रहा है, कोई शोहरत के पीछे, कोई सत्ता और पहचान की तलाश में भटक रहा है। लेकिन इस अंधी दौड़ में वह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ को पीछे छोड़ देता है — खुद को।

यही कारण है कि जीवन के शोर में आत्मा की आवाज़ दब जाती है और इंसान बाहर की दुनिया जीतते-जीतते भीतर से हार जाता है।

सूफ़ी दर्शन और संत परंपरा सदियों से एक ही बात कहती आई है कि ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता बाहर नहीं, भीतर से होकर जाता है। जब तक मनुष्य स्वयं को नहीं पहचानता, तब तक वह परम सत्य को नहीं पा सकता।

इसी गहरी अनुभूति को मशहूर शायर सदा अम्बालवी ने बेहद खूबसूरती से कहा—

"कैसे मिले ख़ुदा से जो ख़ुद से मिला नहीं"

यह सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी का दर्शन है।

क्योंकि जो व्यक्ति अपने मन की परतों से अनजान है, जो अपनी आत्मा की खामोशी को नहीं सुन पाया, वह ईश्वर की आवाज़ कैसे सुन सकेगा?

मनुष्य अक्सर मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और तीर्थों में ईश्वर को तलाशता है, जबकि असली इबादत अपने भीतर झाँकने से शुरू होती है।

जब इंसान अपने अहंकार, लालच, क्रोध और झूठ की धूल हटाकर दिल के आईने को साफ करता है, तब उसे एहसास होता है कि जिसे वह बाहर खोज रहा था, वह तो उसके भीतर ही मौजूद था।

तलाश-ए-अक्स में अपनी, वो उम्र भर भटकता रहा,

मिला सब कुछ जहाँ में, बस खुद से मिलना रह गया।

आज समाज में तनाव, अवसाद और अकेलेपन की सबसे बड़ी वजह यही है कि इंसान ने दुनिया से रिश्ता जोड़ लिया, लेकिन खुद से रिश्ता तोड़ लिया।

मोबाइल, भीड़, सोशल मीडिया और कृत्रिम चमक ने इंसान को इतना व्यस्त कर दिया कि उसे अपने भीतर उतरने का समय ही नहीं मिला।

आध्यात्मिकता का अर्थ संसार छोड़ देना नहीं है, बल्कि संसार के बीच रहकर अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना है।

जब इंसान खुद को समझने लगता है, तब उसे यह भी समझ आने लगता है कि नफरत व्यर्थ है, अहंकार क्षणिक है और प्रेम ही सबसे बड़ा सत्य है।

खुदा को ढूंढने निकले हो और खुद से ही बेगाने हो,

मिलेगा क्या तुम्हें हासिल, जब अपने घर से अनजाने हो।

मन का सबसे पवित्र मंदिर इंसान का हृदय है।

यदि वहाँ प्रेम, करुणा और सच्चाई का दीप जल जाए, तो हर दिशा में ईश्वर दिखाई देने लगता है।

फिर धर्म दीवार नहीं बनता, बल्कि आत्मा को जोड़ने वाला पुल बन जाता है।

दिल के आईने को साफ कर, फिर देख तमाशा,

वही खुदा का घर है, जिसे तू बाहर ढूंढता रहा।

आख़िरकार, जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है कि ईश्वर तक पहुँचने की यात्रा स्वयं तक पहुँचने से शुरू होती है।

जिस दिन इंसान अपने भीतर के अंधेरे को पहचान लेगा, उसी दिन उसे रौशनी का असली अर्थ समझ आएगा।

और शायद तभी वह यह महसूस कर पाएगा कि खुदा कहीं दूर आसमान में नहीं, बल्कि उसकी अपनी आत्मा की गहराइयों में बसता है।

दुर्ग। कांग्रेस संगठन ने दुर्ग जिले में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ को और अधिक सक्रियएवं मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युवा एवं संघर्षशील नेता शिशिर कांत कसार को पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, दुर्ग जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपनी सक्रियता, मेहनत और जमीनी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले शिशिर कांत कसार ने लगातार संगठन को मजबूती देने का कार्य किया है। कांग्रेस के विभिन्न आंदोलनों, सामाजिक अभियानों एवं जनहित के मुद्दों पर उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें युवा नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिले में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा तथा समाज के पिछड़े वर्गों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। संगठन में उनकी नियुक्ति को कांग्रेस की युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

इस अवसर पर कांग्रेसजनों ने कहा कि शिशिर कांत कसार की ऊर्जा, संघर्षशीलता और संगठन के प्रति समर्पण निश्चित रूप से पार्टी को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। उनके सफल एवं उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए कार्यकर्ताओं ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी समय में दुर्ग जिले की राजनीति में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है, ऐसे में शिशिर कांत कसार की नियुक्ति संगठन के लिए एक रणनीतिक निर्णय साबित हो सकती है।

समन्वय साहित्य परिवार का बृहद साहित्यकार सम्मेलन सम्पन्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा के गद्य जगत के युग प्रवर्तक डॉ. पालेश्वर शर्मा की 98 वीं जयंती पर बृहद साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया।
ऋषि- कृषि संस्कृति के उपासक,भाषाविद् डॉ.पालेश्वर की स्मृति में पहला छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य सम्मान विजय मिश्रा 'अमित' को दिया गया। उनकी पचास वर्षीय साहित्य साधना का मूल्यांकन करते हुए समन्वय साहित्य परिवार के प्रबुद्ध निर्णायक मंडल ने विजय मिश्रा का चयन किया।पुरस्कार के अंतर्गत सम्मान राशि 5001/ रुपए के साथ ही प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं शाल- श्रीफल से उन्हें सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा के आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा,अध्यक्ष डॉ. चित रंजन कर,रविशंकर विश्वविद्यालय के साहित्य भाषा अध्ययन शाला के पूर्व अध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश मिश्रा, पाणिनीय शोध संस्थान की अध्यक्षा डॉ.पुष्पा दीक्षित, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश वाजपेई, विदूषी लेखिका सरला शर्मा एवं प्रख्यात नवगीतकार डॉ अजय पाठक शामिल हुए।
संस्था के प्रदेशाध्यक्ष डॉ देवधर महंत ने डॉ पालेश्वर शर्मा के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कीर्तिशेष डॉ शर्मा की रचनाओं को कालजयी और नवपीढ़ी के लिए पथ-प्रदर्शक निरूपित किया।आभार प्रदर्शन संस्था के केंद्राध्यक्ष डॉ गंगाधर पटेल ने किया।

नई दिल्ली ।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। वर्तमान में ये अधिकारी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों, नैतिकता और जनसेवा के मूल्यों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ अब उनसे अपेक्षाएं भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

“करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन जरूरी”

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन्हें करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—

“भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें। नियमों का पालन करें, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को कभी न भूलें।”

उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की निष्पक्षता उसकी न्यायप्रियता को दर्शाती है, जबकि उसकी संवेदनशीलता समाज के हर वर्ग के प्रति उसकी समावेशी सोच का प्रमाण होती है।

“निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं”

राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रशासनिक निर्णयों में देरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान मानी जाती है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब भी लोगों के वैध अधिकारों को प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा—

“निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है। जनहित और व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही सच्ची नैतिकता है।”

युवा अधिकारियों को सीखने और नेतृत्व की सलाह

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध परिस्थितियों और क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा, जहां उन्हें विशेषज्ञ टीमों का नेतृत्व भी करना होगा। ऐसे में उनकी सीखने की क्षमता तेज और अनुकूलन क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और निरंतर कार्य निष्पादन को प्रशासनिक जीवन का आधार बनाने की सलाह दी।

“जनता और वंचित वर्ग रहें केंद्र में”

राष्ट्रपति मुर्मु ने लोकतंत्र की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाएं उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आती हैं, इसलिए अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “विकसित भारत” का सपना आसान परिस्थितियों में नहीं, बल्कि चुनौतियों के बीच संघर्ष करते हुए पूरा होगा।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को अपने विचार और कार्यों के केंद्र में रखने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि वे विकसित एवं समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

नई दिल्ली, । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री श्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भारत-स्वीडन संबंधों को लेकर एक संयुक्त लेख लिखा है, जिसमें दोनों देशों के बीच बढ़ते…

दैनिक शौर्यपथ महासमुंद ब्यूरो संतराम कुर्रे 

संगम क्रिकेट लीग" में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने दर्ज की शानदार जीत

पिथौरा। पीसीए (पिथौरा क्रिकेट एकेडमी) के तत्वावधान में आयोजित “संगम क्रिकेट लीग” के अंतर्गत पत्रकारों के बीच खेले गए मैत्री क्रिकेट मुकाबले में रोमांच, जोश और खेल भावना का शानदार संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बतौर अतिथि वरिष्ठ पत्रकार रजिंदर खनूजा, जाकिर कुरैशी, पवन गुप्ता, ऋषिकेश शुक्ला एवं पीसीए के संयोजक मनमीत छाबड़ा उपस्थित रहे। अतिथियों ने सर्वप्रथम खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा टॉस प्रक्रिया संपन्न कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रजिंदर खनूजा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह एक अत्यंत सराहनीय पहल है। आज सभी पत्रकार क्रिकेट मैदान में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं वरिष्ठ पत्रकार मंच से आयोजन की गरिमा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पत्रकारों के बीच आपसी भाईचारा, एकता और सौहार्द को मजबूत करने का कार्य करते है।

मुकाबले में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन की कप्तानी बलराज नायडू ने संभाली, जबकि श्रमजीवी पत्रकार संघ की कमान स्वप्निल तिवारी के हाथों में रही। दोनों कप्तानों के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने खेल भावना का उत्कृष्ट परिचय दिया। टॉस जीतकर श्रमजीवी पत्रकार संघ ने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया।

श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से बल्लेबाजी की शुरुआत करने उतरे सौरभ अग्रवाल और राजा उपाध्याय ने टीम को सधी हुई शुरुआत दिलाई। सौरभ अग्रवाल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए मात्र 38 गेंदों में 74 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी दमदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम ने निर्धारित 10 ओवरों में 2 विकेट के नुकसान पर 97 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

98 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। विकास अग्रवाल और उमाशंकर की सलामी जोड़ी ने तेज गति से रन बनाकर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। विकास अग्रवाल ने 17 गेंदों में 27 रन बनाए, वहीं उमाशंकर ने मात्र 10 गेंदों में 26 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर मैच का रुख बदल दिया।

विशेष रूप से विकास अग्रवाल ने पारी को अंत तक संभाले रखा और जिम्मेदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को जीत की ओर अग्रसर किया। उनकी संयमित और रणनीतिक बल्लेबाजी ने लक्ष्य तक पहुंचने की मजबूत नींव रखी।

तेज बल्लेबाजी और शानदार तालमेल के दम पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने महज 7.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। मैच का विजयी चौका गोविंद शर्मा ने लगाकर टीम को शानदार जीत दिलाई। जीत के बाद खिलाड़ियों और पत्रकार साथियों ने मैदान में उत्साहपूर्वक जश्न मनाया।

मैच में ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उमाशंकर को "मैन ऑफ द मैच" चुना गया। उन्होंने 26 रन बनाने के साथ गेंदबाजी में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मात्र 11 रन देकर एक विकेट हासिल किया।

इस अवसर पर जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के कप्तान बलराज नायडू ने सभी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उनके नेतृत्व, मार्गदर्शन और प्रेरणा से टीम ने यह यादगार जीत दर्ज की। खिलाड़ियों ने भी इस जीत का श्रेय टीम भावना और कप्तान के कुशल नेतृत्व को दिया।

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में दुर्गेश सोनी, सुनील यादव, तारी टुटेजा एवं हर्ष सहित पूरी पीसीए टीम की विशेष एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।

308 करोड़ की लागत से 11.38 किमी लंबा फोरलेन बायपास बनेगा

रायपुर. लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास रुट का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के साथ बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण किया। उन्होंने बायपास का काम तत्काल प्रारंभ करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी इस दौरान मौजूद थे।

श्री बंसल ने बायपास के रास्ते में शेष बचे पेड़ों की कटाई तत्परता से करने के निर्देश वन मंडलाधिकारी को दिए हैं। उन्होंने बायपास से संबंधित मुआवजा प्रकरणों की जानकारी लेकर लंबित मामलों का निराकरण यथाशीघ्र करने को कहा। उन्होंने कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए यह बायपास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका तेजी से निर्माण कर आवाजाही शुरू करना सरकार की प्राथमिकता में है।

2 वृहद और 2 मध्यम पुल भी बनेंगे

लोक निर्माण विभाग द्वारा 308 करोड़ रुपए की लागत से 11.38 किमी लंबे केशकाल घाट बायपास का निर्माण किया जा रहा है। इस बायपास में दो वृहद और दो मध्यम पुल भी बनाए जाएंगे।

   बीजापुर / दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कठिन परिस्थितियों के बीच पहुंचकर जनसेवा का सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बीजापुर जिले के उप स्वास्थ्य केंद्र डोडीतुमनार की टीम ने जंगल और खराब रास्तों की चुनौतियों के बावजूद गांव में यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान कुल 771 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई।
स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ मलेरिया, टीबी, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच भी की। सर्वेक्षण के दौरान 5 मलेरिया मरीजों की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू किया गया। वहीं 2 संभावित टीबी मरीजों और 1 हाई रिस्क गर्भवती महिला को आगे की जांच और उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
जांच के दौरान 1 उच्च रक्तचाप और 2 एनीमिया से पीड़ित मरीजों को भी चिन्हित किया गया। उन्हें आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया गया।
स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को साफ-सफाई, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और संक्रामक बीमारियों से बचाव के बारे में भी जागरूक किया। ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार उनके गांव के पास इतने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध हुई है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। टीम के लगातार प्रयासों से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।
ग्राम गमपुर में चलाया गया यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य विभाग लोगों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

सुकमा , /सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत एर्राबोर में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और खुशियों का केंद्र बन गया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।
शिविर का उद्देश्य शासन की योजनाओं और सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान की प्रक्रिया शुरू की।
शिविर में विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वहीं गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 6 माह के बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इससे कार्यक्रम में सामाजिक और मानवीय जुड़ाव का वातावरण देखने को मिला।
ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में राशन कार्ड ई-केवाईसी, महतारी वंदन योजना ई-केवाईसी, नया आधार कार्ड पंजीयन एवं अपडेट, बी-1 और किसान किताब वितरण तथा एग्री स्टेक पंजीयन जैसी जरूरी सेवाएं भी मौके पर उपलब्ध कराई गईं।
शिविर के दौरान विभिन्न विभागों को कुल 250 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें पंचायत विभाग के 165, कृषि विभाग के 22, विद्युत विभाग के 14 तथा राजस्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 11-11 आवेदन शामिल रहे। सभी आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
कार्यक्रम में स्थानीय सरपंच श्रीमती लक्ष्मी कट्टम, पूर्व सरपंच, पंचगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास और सहभागिता को नई मजबूती मिली है।

 

बीजापुर ।
बीजापुर में जिला प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन खेल शिविर बच्चों की प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहा है। एजुकेशन सिटी में संचालित इस आवासीय शिविर में जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों से आए बच्चे उत्साहपूर्वक खेल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य सुदूर अंचलों के बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उनकी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का मार्ग तैयार करना है।


8 खेलों का दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

शिविर में जिले के चारों विकासखंडों से चयनित 260 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को दो पालियों में नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

शिविर में बच्चों को —

  • वालीबाल
  • फुटबॉल
  • सॉफ्टबॉल
  • तीरंदाजी
  • बैडमिंटन
  • तैराकी
  • एथलेटिक्स
  • कबड्डी

जैसे 8 खेलों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।


खेल के साथ अनुशासन और फिटनेस पर भी फोकस

प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को खेलों के तकनीकी नियम, अनुशासन, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी भी दी जा रही है। प्रतिदिन योग सत्र आयोजित कर बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

खेल गतिविधियों के साथ-साथ बच्चों को सेंट्रल लाइब्रेरी में सामान्य ज्ञान एवं शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि उनका समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।


उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

शिविर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे चलकर स्पोर्ट्स अकादमी में प्रवेश देकर उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह शिविर बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच देने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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