August 27, 2026
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    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / फलों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है और केला उन्हीं फलों में से एक है. असल में केला एक ऐसा फल है जो आसानी से मार्केट में आपको मिल जाएगा. केला हर मौसम में मिलने वाले फलों में से एक है. केले को सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है. रोजाना केले का सेवन करने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. आपको बता दें कि केले में फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम,सोडियम, आयरन और विटामिन सी जैसे कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं रोजाना केले का सेवन करने से मिलने वाले लाभ.
    केला खाने के फायदे-
    1. डायबिटीज-
    केला फाइबर, स्टार्च, विटामिन, खनिज, फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट सहित कई बायोएक्टिव कंपाउंड का अनूठा मिश्रण होता है, जो टाइप 2 डायबिटीज से लड़ने का काम कर सकता है.
    2. इम्यूनिटी-
    कमजोर इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए आप केले का सेवन कर सकते हैं. केले में विटामिन सी पाया जाता है, विटामिन सी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है.
    3. कब्ज-
    अगर आपको कब्ज की समस्या है तो आपके लिए केले का सेवन फायदेमंद हो सकता है. केले में रेसिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है. केले को डाइट में शामिल कर कब्ज की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.
    4. हड्डियों-
    केले में मौजूद मैग्नीशियम और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. केले और दूध का रोजाना सेवन करने से कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है.
    5. स्ट्रेस-
    स्ट्रेस की समस्या से हैं परेशान तो केले का सेवन आपके लिए हो सकता है फायदेमंद. केले में पोटैशियम और विटामिन बी पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर तनाव से राहत दिलाने में मदद कर सकता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हाई ब्लड प्रेशर यानि हाइपरटेंशन दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करने वाली एक आम समस्या में से एक है. अगर समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो इससे शरीर को कई हानि पहुंच सकती हैं. आपको बता दें कि हाई ब्लड प्रेशर हार्ट की बीमारी और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर को डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके मैनेज किया जा सकता है. हाई प्रेशर के मरीजों को अधिक नमक और मसालेदार चीजें खाने से बचना है. अगर आप भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप किचन मे मौजूद अजवाइन का ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
    अजवाइन में एंटीहाइपरटेन्सिव और एंटीस्पास्मोडिक गुण पाए जाते हैं. कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि अजवाइन को डाइट में शामिल करना हाई ब्लड प्रेशर के लिए चमत्कार से कम नहीं है. अजवाइन को आमतौर पर पूड़ी, परांठा, रसम और कई तरह की डिशेज को बनाने में किया जाता है. कब्ज की समस्या को दूर करने में भी अजवाइन का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. अजवाइन में प्रोटीन, फाइबर, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें कि गर्मियों के मौसम में अजवाइन का सीमित मात्रा में ही सेवन करें. क्योंकि अजवाइन की तासीर गर्म होती है.
    कैसे बनाएं अजवाइन पानी-
    हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए आप अजवाइन पानी का सेवन कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए आपको एक कप पानी में सूखे भुने हुए एक चम्मच अजवाइन के बीज भिगोए. इसे रात भर छोड़ दें. अगले दिन पानी को उबालकर छान लें.
    इसके ठंडा होने का इंतज़ार करें. खाली पेट इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है.

     

    आस्था /शौर्यपथ /पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली 15वीं तिथि को अमावस्या पड़ती है. अमावस्या की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इस दिन स्नान-दान धार्मिक महत्व रखता है. माना जाता है कि अमावस्या पर पूजा करने से और पितरों का तर्पण करने से घर-परिवार पर पितृ दोष नहीं लगता है. पितृ दोष तब लगता है जब पितृ नाराज हो जाते हैं. इससे घर में कलह और कलेश का माहौल रहने लगता है, घर की सुख-शांति खत्म होती है और परिवार पर आर्थिक दिक्कतें मंडराने लगती हैं. ऐसे में पितृ दोष से बचे रहने के लिए और पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या के दिन कुछ मंत्रों का जाप किया जा सकता है. इन मंत्रों के जाप से पितृ नाराज नहीं होते हैं. जानिए इस साल कब पड़ रही है फाल्गुन अमावस्या और कैसे पाया जा सकता है पितृ दोष से छुटकारा.
    फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष से छुटकारा
    इस साल पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि 9 मार्च शाम 6 बजकर 17 मिनट से शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 10 मार्च, दोपहर 2 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में 10 मार्च, रविवार के दिन अमावस्या मनाई जाएगी. निम्न वो मंत्र दिए जा रहे हैं जो पितृ दोष से बचाव करते हैं और छुटकारा दिलाते हैं.
    ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्'
    ॐ कुल देवताभ्यो नमः।
    ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्
    गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू
    अयोध्या मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्ष दायिका
    कर सकते हैं ये काम
    पितृ दोष से निवारण के लिए अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. अगर पवित्र नदी घर के आस-पास ना हो तो घर में रखे किसी पवित्र नदी के पानी, जैसे गंगाजल, को बाल्टी में पानी में मिलाएं और फिर इस पानी से स्नान करें. अमावस्या पर पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से भी पितृ दोष हट सकता है. इस दिन दान का भी अत्यधिक महत्व होता है. जरूरमंदों को भोजन और कपड़े दान में दिए जा सकते हैं.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / पपीता एक ऐसा फल है जिसे खाना ज्यादातर लोग पसंद करते हैं. सबसे ज्यादा पपीते का सेवन वो लोग करते हैं जो वजन को कम करना चाहते हैं. पपीते में मौजूद गुण शरीर को कई लाभ पहुंचाने का काम करते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पपीते के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं. पीला पपीता डायटरी फाइबर का एक हेल्दी स्रोत है. पपीत में कैलोरी और फैट कम मात्रा में होते हैं. जो वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. सेहत के गुणों से भरपूर पपीता कई लोगों के लिए हानिकारक भी है. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को नहीं करना चाहिए पपीते का सेवन.
    पपीता खाने के नुकसान-
    1. डिहाइड्रेशन-
    पपीता एक रेशेदार फल है और इसका अधिक मात्रा में सेवन करने पर दस्त की समस्या हो सकती है. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है.
    2. कब्ज-
    अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से शरीर में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. अत्यधिक फाइबर के सेवन से भी कब्ज की समस्या हो सकती है.
    3. गर्भावस्था-
    गर्भावस्था के दौरान कच्चे या आधे पके पपीते का सेवन करना असुरक्षित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है.
    4. एलर्जी-
    पपीते में मौजूद एंजाइम पपैन एक शक्तिशाली एलर्जेन है. इसलिए पपीते का अत्यधिक सेवन कई रेस्पिरेटरी विकारों को ट्रिगर कर सकता है. कुछ लोगों को पपीता खाने से एलर्जी हो सकती है.
    5. पाचन तंत्र-
    पपीता खाने से आपका गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम खराब हो सकता है. अगर आपको पेट संबंधी समस्या है तो आप अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचे. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन पाचन तंत्र की समस्या को बढ़ा सकता है.

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कई बच्चे पढ़ने लिखने के साथ जीवन जीने के तरीकों में भी माहिर होते हैं. वहीं कई कम बुद्धि वाले भी बच्चे होते हैं जो ठीक से न तो समस्याओं को सुलझा पाते हैं और न ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे होते हैं. बच्चों की बुद्धिमत्ता का लेवल उनके बिहेवियर, सीखने की क्षमता और डेली लाइफ में उनके फैसलों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर कुछ अलग आदतों और बिहेवियर को दिखाते हैं जो उनके एजुकेशनल और सोशल ग्रोथ में चुनौतियों का संकेत दे सकते हैं. हालांकि, यह जरूरी है कि हम इन बच्चों को लेबल करने से बचें और उन्हें सपोर्ट दें ताकि वे अपनी फुल कैपेसिटी तक पहुंच सकें.
    मंद बुद्धि बच्चों में होती हैं ये आदतें |
    बहुत धीरे सीखना: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सीखने में धीमे होते हैं. उन्हें नई जानकारी को समझने और याद रखने में ज्यादा समय लग सकता है.
    बात करने में कठिनाई: ऐसे बच्चे विचारों को व्यक्त करने और बातचीत करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं. उनकी शब्दावली भी लिमिटेड हो सकती है और उनमें अक्सर कम्यूनिकेशन क्लियरिटी की कमी दिखाई देती है.
    समस्या सुलझाने में कठिनाई: ऐसे बच्चों को अक्सर समस्या-सुलझाने में चुनौती का सामना करना पड़ता है. वे कठिन समस्या को समझने और उनके समाधान खोजने में ज्यादा समय लेते हैं.
    सोशल इंटिमेसी: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सामाजिक संकेतों को पढ़ने और समझने में कठिनाई अनुभव करते हैं. इससे उनके सामाजिक अंतरंगता और दोस्ती बनाने में चुनौतियां आ सकती हैं.
    ध्यान देने में कठिनाई: ध्यान केंद्रित करने और ध्यान बनाए रखने में इन बच्चों को कठिनाई हो सकती है. वे अक्सर आसानी से विचलित हो जाते हैं, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.
    यह जरूरी है कि परिवार और शिक्षक इन बच्चों के लिए एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करें. उन्हें एजुकेशन सपोर्ट, धैर्य और समझ की जरूरत होती है. इंडिविजुअल लर्निंग प्लान्स, थेरेपी सेशन और सोशल स्किल ट्रेनिंग उनकी ग्रोथ में बड़ा योगदान दे सकते हैं. अच्छे सपोर्ट के साथ ये बच्चे अपनी चुनौतियों को पार कर सकते हैं और अपने जीवन में सफल हो सकते हैं.

    टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब आप अपने बच्चे को पढ़ने के लिए कहते हैं तो वो रोने लग जाता है या बहाने बनाने लगता है. अगर आप उनको पढ़ने के लिए बैठाते भी हैं तो वो इधर-उधर करता है या फिर ध्यान नहीं लगाता है. बता दें कि बच्चे अक्सर ऐसा करते हैं जब उनका पढ़ने में मन नहीं लगता है. ऐसे में पेरेंट्स को उनकी टेंशन रहती है कि कहीं उनका बच्चा दूसरों से पीछे न रह जाएं और फेल ना हो जाएं. अगर आप भी अपने बच्चों को पढ़ाने में ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिससे आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा.
    पढ़ाई से भागने वाले बच्चों को यूं करें पढ़ने के लिए तैयार
    डिसिप्लिन बनाएं
    बच्चे को पढ़ाने के लिए आप पढ़ाई का एक टाइम सेट कर लें. उनके लिए एक स्टडी कॉर्नर बनाएं जहां पर वो बैठकर पढ़ाई करें. उनके पढ़ने का टाइम सेट करें और उस समय उनको फोन और टीवी से दूर रखें.
    इंट्रेस्टिंग बनाएं
    आप उनके पढ़ाई को इंट्रेस्टिंग बनाएं. जिससे वो पढ़ते समय बोर न हो. इसके लिए आप बच्चे को पढ़ाने के लिए नए और क्रिएटिव तरीकों को अपनाएं. आप उन्हें किताबों के अलावा कार्टून्स, वीडियो की मदद से पढ़ाएं. साइंस और पर्यावरण से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए बच्चों को जंगल, साइंस सेंटर और साइंस एक्ज़िबिशन्स में भी ले जा सकते हैं.
    अकेले ना छोड़ें
    बच्चों को कभी भी अकेले पढ़ने के लिए न बैठाएं. आप उनके साथ बैंठे और उनके साथ उनकी किताबों को देखें और उनको इस तरह से पढ़ाएं और ऐसे एक्सांपल दें जिससे उनको पढ़ने में मजा और इंट्रेस्ट आए.
    कंपेरिसन
    बच्चे का कंपेरिसन किसी पड़ोसी के बच्चे या क्लास के किसी दूसरे बच्चे के साथ न करें. अगर आपका बच्चा पढ़ने में अच्छा नही है तो कभी भी दूसरों के सामने उसे बुरा-भला कहने से बचें.

    ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सरसों का तेल किचन में एक आम सामग्री है. इसका उपयोग खाना पकाने के साथ-साथ कई ब्यूटी और में भी किया जाता है. सरसों के तेल में विटामिन ई, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड के साथ-साथ एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो स्किन में बड़ा रोल प्ले करते हैं. जब इसे चेहरे पर लगाया जाता है, तो यह स्किन को पोषण देता है, चेहरे की चमक बढ़ाता है और स्किन प्रोब्लम्स से बचाता है. हालांकि बहुत कम लोगों को पता होता है कि ग्लोइंग स्किन के लिए सरसों के तेल में क्या मिलाकर लगाना कमाल कर सकता है. अगर आप ग्लोइंग स्किन के लिए घरेलू नुस्खों (Glowing Skin Home Remedies) पर विश्वास करते हैं तो यहां हम बता रहे हैं कि कैसे चमकदार त्वचा के लिए सरसों का तेल चमत्कार कर सकता है.
    सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं ये चीज |
    1. हल्दी और सरसों का तेल
    हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो स्किन को हेल्दी बनाते हैं. थोड़ी सी हल्दी को सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में चमक आती है.
    2. बेसन और सरसों का तेल
    बेसन स्किन को साफ करने और डेड स्किन को हटाने में सहायक होता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. यह मिश्रण त्वचा को पोषण देता है और चमक लाता है.
    3. दही और सरसों का तेल
    दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो स्किन के लिए अच्छे होते हैं. सरसों के तेल के साथ दही मिलाकर लगाने से स्किन की ड्राइनेस कम होती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है.
    4. नींबू का रस और सरसों का तेल
    नींबू का रस विटामिन सी से भरपूर होता है, जो त्वचा के लिए एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम होते हैं और चेहरे पर चमक आती है.
    उपयोग करने का तरीका:
    सामग्री को सरसों के तेल के साथ सही मात्रा में मिलाएं.
    इस मिश्रण को अपने चेहरे पर समान रूप से लगाएं.
    इसे लगभग 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर रहने दें.
    बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें.
    सरसों का तेल और इन सामग्रियों का मिश्रण स्किन को न केवल पोषण देता है बल्कि इसे हेल्दी और चमकदार भी बनाता है. हालांकि, किसी भी नए ट्रीटमेंट को आजमाने से पहले एक पैच टेस्ट करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा पूजा का अभिन्न अंग है. पूजा के नियमों में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा भी शामिल होती है. चाहे मंदिरों की चारों ओर घूम कर की गई परिक्रमा हो या पूजा के दौरान एक ही जगह पर घूमकर की गइ परिक्रमा हो, दोनों का ही बहुत महत्व होता है. आप भी मंदिर में दर्शन करने जाते होंगे तो परिक्रमा जरूर करते होंगे. पर क्या आपको पता है की परिक्रमा क्यों की जाती है और परिक्रमा करने के नियम क्या हैं. आइए जानते हैं परिक्रमा के क्या है नियम और इनसे क्या लाभ होता है….
    पहली बार परिक्रमा
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश और कार्तिकेय ने सबसे पहले परिक्रमा लगाई थी. देवों में सबसे पहले पूजन के लिए निश्चित किया गया था कि जो देव सबसे पहले सृष्टि का चक्कर लगाएंगे उनकी प्रथम पूजा होगी. इसमें भगवान गणेश भगवान शंकर और माता पार्वती के दिन चक्कर लगाकर प्रथम पूज्य देव बन गए. इसी के आधार पर पुण्य की प्राप्ति के लिए देवी देवताओं और उनके घर मंदिरों की परिक्रमा की शुरुआत मानी जाती है.
    सकारात्मक ऊर्जा
    सनातन धर्म में परिक्रमा को बहुत शुभ माना जाता है. मान्यमा है कि देचर देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा करने से सकारत्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. इससे उसके चारों तरफ फैली नकारात्मकता का नाश हो जाता है. देवी देवताओं या मंदिर की परिक्रमा करना उनके प्रभुत्व के आगे सिर झुकाने की तरह होता है.
    इस तरह करें परिक्रमा
    शास्त्रों के अनुसार परिक्रमा हमेशा देवी देवता के दाएं हाथ से बाएं हाथ की तरफ लगाना शुभ माना जाता है. परिरकमा की गिनती हमेशा विषम संख्या में होनी चाहिए. जैसे 11 या 21 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. परिक्रमा करते समय बातें नहीं करनी चाहिएद्व इस समय चलते हुए भगवान को स्मरण करना सर्वोत्तम माना जाता है.
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी परिक्रमा लगाना फायदेमंद माना जाता है. जिस जगह पर प्रतिदिन पूजा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इस ऊर्जा से आत्मबल मजबूत होता है और उसको मानसिक शांति मिलती है.

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /कहते हैं राधा-कृष्ण को होली का त्योहार सबसे ज्यादा प्रिय होता है. यही कारण है कि वृंदावन और बरसाना में फाल्गुन माह की शुरुआत से ही होली की शुरुआत हो जाती है और यहां पर फूलों वाली होली से लेकर लठमार होली तक खेली जाती है. इसी तरह से फुलेरा दूज भी होली का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इसी दिन से मथुरा-वृंदावन में होली की शुरुआत होती है. कहते हैं कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली थी, इसलिए इसे फुलेरा होली भी कहा जाता है. कहते हैं कि फुलेरा दूज पर अगर कुछ उपाय किए जाएं तो भगवान श्री कृष्ण की तरह जीवनसाथी मिलता है.
    कब मनाई जाएगी फुलेरा दूज |
    फुलेरा दूज की तिथि 11 मार्च सुबह 10:44 पर शुरू हो रही है और इसका समापन 12 मार्च को सुबह 7:13 पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, फुलेरा दूज 12 मार्च को ही मनाई जाएगी. वहीं, राधा-कृष्ण की पूजा का मुहूर्त 12 मार्च को सुबह 9:32 से लेकर दोपहर 2:00 तक रहेगा. इस दौरान अगर आप कुछ विशेष काम करें, तो राधा रानी का आशीर्वाद आपको मिलेगा और आपकी लव लाइफ एकदम ठीक चलेगी. साथ ही आपको मनचाहा जीवन साथी भी मिलेगा.
    फुलेरा दूज पर करें ये उपाय
    अगर आपकी लव लाइफ में परेशानियां चल रही हैं और आप चाहते हैं कि आपकी लव लाइफ राधा कृष्ण की तरह प्रेममय हो, तो आप फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण को पीले रंग के फूल और वस्त्र अर्पित करें. इसके साथ ही कृष्ण को प्रिय माखन मिश्री का भोग लगाएं. ऐसा करने से राधा-कृष्ण प्रसन्न होते हैं और आपकी लव लाइफ में खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं.
    अगर आप चाहते हैं कि आपको अपना मनचाहा जीवनसाथी मिले और इसके लिए आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है, घर वाले नहीं मान रहे या कोई अन्य समस्या है, तो फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद एक सफेद कागज पर केसर से उस इंसान का नाम लिखें जिसे आप जीवनसाथी बनाना चाहते हैं. इसके बाद इस सफेद कागज को राधा रानी के चरणों में अर्पित करें. कहते हैं कि ऐसा करने से राधा रानी मनचाहा जीवनसाथी आपको मिलने का आशीर्वाद देती हैं.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /महाशिवरात्रि को लेकर पूरे देश में रौनक नजर आने लगी है. इस बार महाशिवरात्रि का पावन त्योहार 8 मार्च 2024, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. ऐसे में घरों के अलावा मंदिरों में भी जाकर भक्त पूजा-अर्चना करते हैं और शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं. कहते हैं कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और जातकों को मनचाहा वरदान देते हैं. लेकिन, अक्सर लोगों का सवाल होता है कि महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक  कैसे करना चाहिए और उसका तरीका क्या है. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि रुद्राभिषेक में आपको किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए.
    इस तरह से करें भगवान शिव का रुद्राभिषेक
    जल अभिषेक
    सबसे सरल तरीका भगवान शिव के अभिषेक करने का है कि आप उन्हें एक लोटा शुद्ध जल अर्पित करें. कहते हैं कि भगवान को शुद्ध जल चढ़ाने मात्र से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं. आप चाहे तो किसी तीर्थ स्थान के जल का इस्तेमाल भी अभिषेक के लिए कर सकते हैं. कहते हैं ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
    दूध और घी से करें रुद्राभिषेक
    अगर आप चाहते हैं कि आप आरोग्य रहें और सुख संपत्ति के अलावा आपके जीवन में आनंद आए तो आप महाशिवरात्रि के दिन गाय के कच्चे दूध और शुद्ध घी (Ghee) से भगवान शिव का अभिषेक करें.
    पंचामृत से करें रुद्राभिषेक
    महाशिवरात्रि के मौके पर आप पंचामृत यानी कि दूध, दही, शहद, चीनी, पंच मेवा जैसी चीजें मिलाकर पंचामृत बनाएं और इससे भगवान का रुद्राभिषेक करें. इससे जातकों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
    शहद से करें रुद्राभिषेक
    स्टूडेंट अगर पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहते हैं और सफल होना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि के मौके पर शहद  से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें. इससे शिक्षा में सफलता मिलने के साथ ही मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है और कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है.
    इत्र का करें इस्तेमाल
    महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग पर इत्र लगाने से मानसिक शांति मिलती है, इतना ही नहीं अगर आप किसी भी प्रकार के तनाव या नींद की समस्या से परेशान है तो आपको इत्र से रुद्राभिषेक करना चाहिए.
    गन्ने के रस से करें रुद्राभिषेक
    शिवरात्रि के मौके पर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इससे जातकों की धन की समस्या दूर होती है और घर में समृद्धि आती है.
    दही से करें अभिषेक
    दूध और घी के अलावा अगर दही से शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जाए, तो इससे किसी भी कार्य में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है. साथ ही इससे ग्रह कलेश भी दूर होता है और घर में सुख-शांति आती है.
    भांग से करें रुद्राभिषेक
    जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव को भांग अति प्रिय है और उन्हें भांग की पत्तियां जरूर चढ़ाई जाती हैं. ऐसे में शिवरात्रि के मौके पर यदि आप भांग की पत्तियों को पीसकर इससे शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं, तो परिवार में हो रहा लड़ाई झगड़ा, बीमारियां और अन्य समस्याओं से निजात मिलती है.

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