September 06, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’: बच्चों ने गुलदस्ता देकर किया स्वागत, प्रार्थना में नंगे पैर खड़े रहे; विभाग बोला—‘जूते मंगाए हैं, जल्द मिलेंगे’

    शौर्यपथ संवाददाता कृष्णा मंडल

    दंतेवाड़ा / तस्वीर कभी-कभी वह सच बोल देती है, जिसे फाइलों में दर्ज आंकड़े और सरकारी दावे भी नहीं बता पाते। दंतेवाड़ा में शिक्षा मंत्री के स्कूल-आश्रम निरीक्षण के दौरान सामने आई एक तस्वीर ने जिले की शिक्षा व्यवस्था के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। मंत्री के स्वागत में बच्चों के हाथों में छिंद से बने खूबसूरत गुलदस्ते थे, चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन कई बच्चों के पैरों में जूते नहीं थे।

    प्रार्थना सभा में मंत्री बच्चों के साथ खड़े होकर उनकी मधुर आवाज सुनते रहे। बच्चे अनुशासन के साथ प्रार्थना करते रहे, लेकिन नीचे नजर गई तो किसी के पैर खाली थे तो कोई हवाई चप्पल में खड़ा था। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरी वर्दी और चमचमाते जूतों में मंत्री को जिले की शिक्षा व्यवस्था का हाल बताते नजर आए।

    यही दृश्य अब एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है—क्या दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की चमक बच्चों के चेहरों तक पहुंचने से पहले ही अफसरों के जूतों में सिमट गई?

    बच्चों ने दिया गुलदस्ता, बदले में कब मिलेगा पूरा हक?

    मंत्री के स्वागत के लिए बच्चों ने पूरी तैयारी की। हाथों में गुलदस्ते लेकर उन्होंने अतिथि का अभिनंदन किया। प्रार्थना सभा में भी उत्साह के साथ शामिल हुए। लेकिन सवाल यह है कि जिन बच्चों से व्यवस्था अनुशासन, उपस्थिति और बेहतर परिणाम की उम्मीद करती है, क्या उनकी बुनियादी जरूरतों की जिम्मेदारी भी उसी व्यवस्था की नहीं है?

    बच्चों के हाथ में स्वागत का गुलदस्ता था, मगर पैरों में जूते नहीं। यह विरोधाभास सरकारी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।

    DMF-CSR के करोड़ों के बीच बच्चों के पैरों में चप्पल क्यों?

    दंतेवाड़ा को DMF और CSR मद से मिलने वाले बड़े संसाधनों वाले जिलों में गिना जाता है। शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं और बजट होने के बावजूद यदि स्कूल के बच्चों को अभी तक पूरी यूनिफॉर्म और जूते नहीं मिल पाए हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

    आखिर बजट की फाइलों से जूते निकलकर बच्चों के पैरों तक पहुंचने में इतना समय क्यों लग रहा है?

    अगर स्कूल की प्रार्थना सभा में ही बच्चे नंगे पैर खड़े दिखाई दें, तो शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बच्चों के पैरों से भी करनी पड़ेगी।

    शिक्षा अधिकारी बोले—‘जूते मंगाए गए हैं, जल्द मिलेंगे’

    मामले को लेकर जब हमारी टीम ने दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर से फोन पर जानकारी ली, तो उन्होंने बताया कि जूते मंगाए गए हैं और जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

    हालांकि, शिक्षा सत्र शुरू हुए कई महीने गुजर चुके हैं और यदि अब तक विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म का पूरा सेट उपलब्ध नहीं हो पाया है, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।

    खास बात यह है कि शिक्षा मंत्री करीब दो-तीन माह पहले सार्वजनिक मंच से यह दावा कर चुके हैं कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार बच्चों को यूनिफॉर्म और पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। ऐसे में अलग-अलग स्थानों से पाठ्य सामग्री और अब यूनिफॉर्म के पूरे सेट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आना सरकारी दावे और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की ओर इशारा करता है।

    मंत्री ने बच्चों की आवाज सुनी, अब पैरों की खामोशी भी सुनेंगे?

    मंत्री ने बच्चों के साथ प्रार्थना की। बच्चों की मधुर आवाज सुनी और उनके उत्साह को करीब से देखा। लेकिन इस दौरान बच्चों के नंगे पैर भी शायद किसी सवाल की तरह सामने खड़े थे।

    अब सवाल यह है कि क्या मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस खामोश सवाल को भी सुनेंगे?

    क्योंकि बच्चे शिकायत नहीं कर रहे थे।
    वे बस नंगे पैर प्रार्थना में खड़े थे।

    100 प्रतिशत उपस्थिति, लेकिन 100 प्रतिशत सुविधा कब?

    बच्चे तमाम परिस्थितियों के बावजूद स्कूल पहुंच रहे हैं। उनकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति लगन निश्चित रूप से सराहनीय है। मगर सरकार से सवाल है कि क्या बच्चों को सिर्फ स्कूल तक पहुंचा देना ही जिम्मेदारी है?

    उनके पैरों में जूते, शरीर पर पूरी यूनिफॉर्म, हाथों में पाठ्य सामग्री और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी तो व्यवस्था का दायित्व है।

    दंतेवाड़ा का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’ आखिर क्या कह रहा है?

    सरकार आदिवासी अंचलों में शिक्षा की तस्वीर बदलने, बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात करती है। दूसरी तरफ मंत्री के सामने ही बच्चों का नंगे पैर खड़ा होना इस दावे की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़ा कर रहा है।

    फाइलों में यूनिफॉर्म पूरी हो सकती है, लेकिन बच्चों के शरीर पर भी पूरी है या नहीं—इसका जवाब तस्वीर दे रही है।

    और तस्वीरों को किसी प्रेस नोट की जरूरत नहीं होती।

    सवाल सिर्फ जूतों का नहीं... व्यवस्था की प्राथमिकता का है

    मंत्री के स्वागत में बच्चों ने गुलदस्ता दिया। उन्होंने पूरे अनुशासन से प्रार्थना की और अपनी जिम्मेदारी निभाई। अब बारी व्यवस्था की है।

    सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बच्चों को जूते कब मिलेंगे। सवाल यह है कि जिस व्यवस्था के पास DMF-CSR जैसे संसाधन हैं, वहां बच्चों की इतनी छोटी-सी बुनियादी जरूरत पूरी करने में महीनों क्यों लग जाते हैं?

    मंत्री और अधिकारी महंगे जूतों में खड़े होकर शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर समझाते रहें और बच्चे नंगे पैर भविष्य की प्रार्थना करते रहें—यह तस्वीर दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रशंसा से ज्यादा आत्ममंथन का विषय है।

    अब देखना होगा कि यह तस्वीर सिर्फ एक निरीक्षण की तस्वीर बनकर रह जाती है या फिर दंतेवाड़ा के बच्चों के पैरों में जूते और उनके हाथों में बेहतर भविष्य पहुंचाने की शुरुआत बनती है।

    NIA की जांच पर दंतेवाड़ा कांग्रेस ने उठाए सवाल, पूछा- गणपति और रमन्ना समेत 26 नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए? आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

    शौर्यपथ संवाददाता-कृष्णा मंडल

    दंतेवाड़ा । झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने जांच और कार्रवाई की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए आरोप लगाया कि झीरम नरसंहार के पीछे कथित रूप से मौजूद बड़े नक्सली नेताओं और राजनीतिक षड्यंत्र का सच अब तक सामने नहीं आया है।
    जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शकील रिज़वी ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए, फैसला उन्हीं के आधार पर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़े पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
    उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वारदात केवल छोटे स्तर के नक्सली कैडरों के भरोसे संभव नहीं थी। ऐसे में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए थी।

    गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाने पर सवाल
    कांग्रेस ने एनआईए की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि शुरुआती एफआईआर में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे, उनके नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटा दिए गए?
    कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए द्वारा वांछित और फरार घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो झीरम मामले में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई? पार्टी ने मांग की कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से घटना के संबंध में पूछताछ कर उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

    26 फरार आरोपियों के नाम हटने पर भी उठे सवाल
    पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा कि एनआईए की शुरुआती कार्रवाई और बाद में प्रस्तुत चार्जशीट के बीच कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है। उन्होंने सवाल किया कि गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद बाद की चार्जशीट से उनके नाम क्यों हटाए गए?
    उन्होंने कहा कि झीरम मामले की जांच को केवल एक स्तर तक सीमित करने के बजाय घटना की पूरी साजिश और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की जरूरत है।

    परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा और मार्ग बदलने पर भी सवाल
    कांग्रेस नेताओं ने परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई, यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला, हमले की योजना किसने बनाई और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई?
    पार्टी ने आरोप लगाया कि हमले में घायल हुए और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।

    देवती कर्मा ने भाजपा पर साधा निशाना
    पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार से लेकर मौजूदा व्यवस्था तक झीरम के पूरे सच को सामने लाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच को भी आगे नहीं बढ़ाया गया।
    देवती कर्मा ने आरोप लगाया कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे में नहीं लाया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

    ‘पूरा सच सामने आने तक जारी रहेगी न्याय की लड़ाई’
    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम केवल एक नक्सली हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का ऐसा गहरा जख्म है, जिसका पूरा सच अब भी सामने आना बाकी है। पार्टी का कहना है कि जब तक हमले के वास्तविक षड्यंत्रकारियों, कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक कांग्रेस न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।
    पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तूलिका कर्मा, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, जिला महामंत्री मनीष भट्टाचार्य, प्रवीण राणा, मनोज मालवीय, महिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रा शर्मा, दंतेवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुमित्रा शोरी, जिला सचिव जितेंद्र कश्यप और मनोज कौरव सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

      कबीरधाम / शौर्यपथ / उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा शनिवार को कवर्धा शहर के गांधी मैदान और भारत माता चौक में आयोजित भव्य दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने मंच से उपस्थित जनसमुदाय के साथ “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की” का जयघोष किया, जिससे पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति और उत्साह से गूंज उठा।

    ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर किया स्वागत

    दही हांडी उत्सव की परंपरा के अनुरूप शर्मा ने सभी ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। यादव समाज के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक सम्मान के रूप में उन्हें खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।
    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सभापति रामकुमार भट्ट, नितेश अग्रवाल सहित समस्त पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, शहरवासी एवं यादव समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    कृष्ण के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहरवासियों एवं प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गोविंदा उत्सव कवर्धा की गौरवशाली परंपरा है। यह आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हम सभी को धर्म, कर्म और कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। कृष्ण लीला यह संदेश देती है कि अन्याय और अधर्म पर सदैव धर्म की विजय होती है।
    श्री शर्मा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    कृष्ण भक्ति में सराबोर हुआ कवर्धा
    दही हांडी उत्सव में हजारों की संख्या में शहरवासी, समाजजन और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उत्सव के दौरान पूरा कवर्धा कृष्ण भक्ति, जयघोष और उल्लास से सराबोर नजर आया। गांधी मैदान से लेकर भारत माता चौक तक उत्सव का माहौल बना रहा और ‘जय कन्हैयालाल की’ के जयकारों से शहर गुंजायमान रहा।

       दुर्ग / शौर्यपथ / जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और नियंत्रण की कार्रवाई तेज कर दी है। 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक जिले में स्वाइन फ्लू के कुल 26 पॉजिटिव प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से वर्तमान में 10 मरीज एक्टिव हैं। सात मरीज अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं, जबकि तीन मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।

    कलेक्टर दुर्ग के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज वानी, जिला सर्वेलेंस अधिकारी (आईडीएसपी) डॉ. सी.बी.एस. बंजारे एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एनएचएम) सुश्री भूमिका वर्मा के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रमण की निगरानी और नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    पॉजिटिव मरीजों की कांटेक्ट ट्रेसिंग और मॉनिटरिंग

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में पॉजिटिव प्रकरण सामने आने के बाद मरीजों के संपर्क में आए लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। साथ ही संक्रमित मरीजों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी भी की जा रही है, ताकि संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

    क्या है स्वाइन फ्लू?

    स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ा संक्रमण है, जो Influenza A वायरस के कारण होता है। इसका सामान्य इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 2 दिन होता है। संक्रमित व्यक्ति में लक्षण शुरू होने के बाद लगभग 3 से 5 दिन तक संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। इसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने तथा ड्रॉपलेट संक्रमण के माध्यम से होता है।

    इसके प्रमुख लक्षणों में सर्दी, खांसी, बुखार और बदन दर्द शामिल हैं।

    खांसते-छींकते समय बरतें सावधानी

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल, टिश्यू या कोहनी से ढंकने, बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोने अथवा सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की अपील की है। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने तथा संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करने के साथ पर्याप्त आराम और नींद लेने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने तथा पौष्टिक भोजन करने की सलाह दी गई है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी करने और हालत बिगड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने को कहा गया है।

    डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बीमारी के लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय अथवा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। अभिवादन के दौरान हाथ मिलाने और गले मिलने से भी परहेज करें। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवा का सेवन न करें।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कहा है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। स्वच्छता का पालन करें, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं और लक्षण दिखाई देने पर समय पर स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करें। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आमजन से सहयोग की अपील की गई है।

    बैंक में रकम जमा करने के बजाय रखता था अपने पास, फर्जी ई-मेल भेजकर अधिकारियों को देता था झूठी जानकारी; 1.50 लाख का मोबाइल जब्त

    भिलाईनगर / शौर्यपथ / हाईटेक अस्पताल, भिलाई की नकद राशि में करीब 32 लाख रुपये के गबन के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए अस्पताल के कैशियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी कैशियर अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने पास रखता था और अधिकारियों को रकम बैंक में जमा किए जाने की फर्जी जानकारी ई-मेल के माध्यम से भेजकर गुमराह करता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गबन की रकम से खरीदा गया Samsung कंपनी का करीब 1.50 लाख रुपये कीमत का मोबाइल फोन भी जब्त किया है।

    पुलिस के अनुसार हाईटेक अस्पताल, भिलाई के संचालक मनोज अग्रवाल ने स्मृति नगर चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि अस्पताल में करीब छह वर्षों से कैशियर के पद पर कार्यरत जसविंदर सिंह (46), निवासी 122/डी, रुआबांधा सेक्टर, भिलाई, अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने पास रख रहा था।

    दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया गबन

    शिकायत प्राप्त होने के बाद स्मृति नगर चौकी पुलिस ने अस्पताल से संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन तथा बैंक में राशि जमा किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया करीब 32 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन सामने आया।

    इसके बाद सुपेला थाना, स्मृति नगर चौकी में अपराध क्रमांक 1301/2026, धारा 316(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

    फर्जी ई-मेल भेजकर छिपाता था रकम का हिसाब

    पुलिस की विवेचना में सामने आया कि आरोपी ने कैशियर के पद का फायदा उठाते हुए अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने कब्जे में रखी। इसके बाद वह अस्पताल के संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से रकम बैंक में जमा किए जाने की फर्जी जानकारी भेजता था, जिससे वास्तविक वित्तीय स्थिति सामने न आ सके और लंबे समय तक गबन छिपा रहे।

    पुलिस ने आरोपी से पूछताछ करने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गबन की रकम के इस्तेमाल के संबंध में जानकारी जुटाई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

    गबन की रकम से खरीदा 1.50 लाख का मोबाइल

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गबन की रकम से खरीदा गया Samsung कंपनी का मोबाइल फोन, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है, जब्त किया है। मामले में गबन की रकम के अन्य उपयोग और उससे जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड की कार्रवाई की जा रही है। मामले में पुलिस की विवेचना जारी है।

    संस्थानों से नियमित वित्तीय सत्यापन की अपील

    दुर्ग पुलिस ने व्यवसायिक एवं अन्य संस्थानों से अपील की है कि वे अपने वित्तीय लेन-देन का नियमित मिलान और सत्यापन करते रहें। नकद राशि के बैंक में जमा होने सहित सभी वित्तीय गतिविधियों का समय-समय पर रिकॉर्ड से मिलान किया जाए। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा गबन की जानकारी सामने आने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते वैधानिक कार्रवाई की जा सके।

    जांच रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, विजय टांडे के साथ सुनील यादव की भूमिका की भी जांच की मांग; शिक्षा मंत्री से करीबी के दावों पर भी सवाल

    बिलासपुर / शौर्यपथ / शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े विवाद की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला अब तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका तक सीमित नहीं रह गया है। जांच समिति ने जहां विजय टांडे की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    शिकायतकर्ता अंकित गौरहा का आरोप है कि जिन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच समिति ने तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को जिम्मेदार माना, उन्हीं दस्तावेजों में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। गौरहा का कहना है कि उन्होंने जांच समिति से सुनील यादव की भूमिका की भी जांच करने की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

    जिस दस्तावेज के आधार पर टांडे दोषी, उसी में सुनील की भूमिका का दावा

    अंकित गौरहा के मुताबिक उन्होंने जांच के दौरान समिति के समक्ष अपने पास उपलब्ध दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत किए थे। उनका दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को दोषी माना गया।

    गौरहा का कहना है कि रिकॉर्ड में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। उन्होंने समिति से इस भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मांग के बावजूद सुनील यादव की भूमिका पर कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया।

    गौरहा का सवाल है कि यदि किसी दस्तावेज को एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया, तो उसी रिकॉर्ड में दूसरे संबंधित कर्मचारी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?

    हर जांच में अधिकारी जिम्मेदार, बाबू पर कार्रवाई क्यों नहीं?

    शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि यह पहला मामला नहीं है, जिसमें जांच की आंच अधिकारी तक पहुंची हो और सुनील यादव पर कार्रवाई नहीं हुई हो।

    गौरहा के मुताबिक करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल के कार्यकाल में भी एक मामले की जांच हुई थी। उनका दावा है कि उस जांच में सुनील यादव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल सामने आए थे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि निलंबन की सिफारिश किए जाने की बात कही गई थी।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, उसी मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल को निलंबित कर दिया गया, जबकि सुनील यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसी पुराने घटनाक्रम को आधार बनाकर गौरहा मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं।

    उनका कहना है कि बार-बार जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों पर तय होती है, जबकि स्थापना शाखा में कार्यरत संबंधित कर्मचारी कार्रवाई से बच जाते हैं।

    शिक्षा मंत्री से करीबी की चर्चा, रसूख पर भी सवाल

    मामले में सुनील यादव के शिक्षा मंत्री से करीबी संबंध होने की चर्चा का दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। कुछ सूत्रों के हवाले से उनकी सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंच होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन राजनीतिक संबंधों और किसी कार्रवाई को प्रभावित करने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    अंकित गौरहा का आरोप है कि प्रभाव और पहुंच के कारण सुनील यादव अब तक कार्रवाई से बचते रहे हैं। हालांकि, यह आरोप भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि राजनीतिक प्रभाव की बात सही नहीं है, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में सुनील यादव की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।

    150 से 200 शिकायतों का दावा, फिर भी कार्रवाई पर सवाल

    अंकित गौरहा ने दावा किया है कि सुनील यादव के खिलाफ अलग-अलग स्तरों पर करीब 150 से 200 शिकायतें की जा चुकी हैं। उनके मुताबिक इन शिकायतों में प्रतिनियुक्ति, ट्रांसफर-पोस्टिंग और वर्तमान में चल रहे विकल्प से जुड़े मामलों सहित कई आरोप शामिल हैं।

    शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायतें कमिश्नर, सचिव, कलेक्टर और मंत्री स्तर तक भी पहुंचाई गई हैं। गौरहा का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें अलग-अलग स्तरों पर पहुंचीं, तो प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।

    इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया बार-बार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तक ही क्यों सीमित रह जाती है और स्थापना शाखा के संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

    कलेक्टर के जांच आदेश के बाद भी सवाल

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि हाल ही में कलेक्टर की ओर से सुनील यादव के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए थे। गौरहा का दावा है कि इसके बावजूद उन्होंने अपनी जगह एक चपरासी को बैठाकर स्थापना शाखा का काम करवाया।

    इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतकर्ता का यह दावा सही पाया जाता है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि किसी कर्मचारी को अपनी जगह किसी अन्य कर्मचारी से शाखा का कार्य कराने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी।

    जांच की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल

    पूरे मामले में शिकायतकर्ता का मुख्य सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर है। उनका कहना है कि उन्होंने जांच समिति के समक्ष सभी संबंधित दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराए थे। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विजय टांडे की भूमिका पर निष्कर्ष निकाला गया, लेकिन उन्हीं रिकॉर्ड में सुनील यादव की भूमिका होने के उनके दावे पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।

    अब सवाल यह है कि क्या जांच समिति संबंधित सभी कर्मचारियों की भूमिका की समान रूप से पड़ताल करेगी? क्या शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर सुनील यादव की भूमिका की भी अलग से जांच होगी? और यदि नहीं, तो इसका विभागीय आधार क्या है?

    इन सवालों का जवाब अब शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।

    सफाई, निर्माण और मूलभूत सुविधाओं का किया औचक निरीक्षण; अधिकारियों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश

    दुर्ग । नगर पालिक निगम दुर्ग की नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसम ने पदभार ग्रहण करते ही शहर की व्यवस्थाओं को लेकर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। शनिवार सुबह उन्होंने करीब चार घंटे तक मॉर्निंग विजिट कर शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्यों की प्रगति और वार्डों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर की व्यवस्थाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को नियमित रूप से मैदानी स्तर पर निरीक्षण कर कार्यों की वास्तविक स्थिति की निगरानी करनी होगी।

    सड़क पर पड़ा C&D वेस्ट तीन दिन में हटाने के निर्देश

    निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने वार्ड क्रमांक 25 स्थित अग्रसेन चौक की सड़क पर पड़े बिल्डिंग मटेरियल और C&D वेस्ट का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क पर पड़े निर्माण अपशिष्ट को तीन दिनों के भीतर पूरी तरह हटाया जाए, ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो और क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनी रहे।

    इसके अलावा वार्ड क्रमांक 13 की बैंक लेन में बेस तक बेहतर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वार्ड क्रमांक 12 और 13 में गीले एवं सूखे कचरे के पृथक संग्रहण की लगातार मॉनिटरिंग करने को भी कहा गया।

    आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मैदानी अमले की नियमित निगरानी और औचक निरीक्षण जरूरी है।

    बिजली खंभों और भवन संबंधी मामलों की जांच के निर्देश

    आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 12 में विद्युत खंभा क्रमांक 12 और 57 का तकनीकी परीक्षण तत्काल कराने के निर्देश दिए। वहीं गजानंद विहार स्थित प्लॉट के भवन संबंधी भौतिक परीक्षण और जांच की कार्रवाई जल्द पूरी करने को कहा।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी संबंधित प्रकरणों में आवश्यक कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

    मल्टी लेवल पार्किंग का काम तेज करने के निर्देश

    इसके बाद आयुक्त ने इंदिरा मार्केट और पुराने बस स्टैंड स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण की प्रगति की जानकारी लेते हुए कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।

    आयुक्त ने कहा कि मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर शहरवासियों को जल्द सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने पर भी जोर दिया।

    पटेल प्रतिमा स्थापना और सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण

    आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिमा तैयार हो चुकी है और अब स्थापना का कार्य शेष है।

    इस परियोजना की कुल लागत 50 लाख रुपये है और कार्य लगभग 70 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। आयुक्त ने शेष कार्यों को जल्द पूरा करने और परियोजना को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि जिन निर्माण कार्यों में किसी कारण से रुकावट आई है या जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए। केवल कागजों में कार्य की प्रगति दर्ज करने के बजाय मैदानी स्तर पर वास्तविक प्रगति और पूर्णता सुनिश्चित की जाए।

    पुलगांव गोठान का भी लिया जायजा

    मॉर्निंग विजिट के दौरान आयुक्त लीना कोसम ने पुलगांव स्थित गोठान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने गोठान में वर्तमान में मौजूद गायों की संख्या और समूह में कार्यरत सदस्यों की जानकारी संचालक से ली। इसके साथ ही उन्होंने गोठान की मौजूदा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

    निरीक्षण के दौरान कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, भवन अधिकारी प्रकाश चंद थवानी, सहायक अभियंता गिरीश दीवान, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, उप अभियंता मोहित मरकाम, स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, शोएब अहमद सहित संबंधित अधिकारी और ठेकेदार मौजूद रहे।

      रायपुर । छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत दुर्ग संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों एवं जिला मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू तथा सह प्रभारी सचिव एस. संपत और विजय जांगिड़ की मौजूदगी में हुआ।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

    संगठन को बूथ और ब्लॉक स्तर तक मजबूत करने पर जोर

    प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्रभावी करने और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने सहित विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर मार्गदर्शन एवं विचार-विमर्श किया गया।

    प्रशिक्षण में ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को संगठन की कार्यप्रणाली, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय और जनता से जुड़े मुद्दों को संगठन के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाने को लेकर जानकारी दी जा रही है।

    पहले दिन इन वक्ताओं ने दिया प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रशिक्षण प्रभारी युगल पांडे तथा कनेक्ट सेंटर के को-चेयरमैन अशोक चतुर्वेदी ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।

    वक्ताओं ने संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।

    बस्तर के बाद अब अन्य संभागों की बारी

    कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इससे पहले बस्तर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो चुका है। दुर्ग संभाग के प्रशिक्षण के बाद अगले चरण में बिलासपुर, सरगुजा और रायपुर संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
    संगठन सृजन अभियान के तहत चलाए जा रहे इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को जिला, ब्लॉक और जमीनी स्तर तक अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाना है।

    बीपी हुआ डाउन, चिकित्सकों ने कम बातचीत की दी सलाह; व्यापारी संघ सरकंडा ने आंदोलन के समर्थन में दुकानों को बंद रखने का किया आह्वान

    बिलासपुर। अरपा पार क्षेत्र के लिए पृथक नगर निगम की मांग को लेकर नागरिक सुरक्षा मंच के संयोजक एवं संस्थापक अमित तिवारी का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी है। लगातार अनशन के चलते उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा है। बताया गया कि पांचवें दिन उनका ब्लड प्रेशर डाउन हुआ, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें अधिक बातचीत नहीं करने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद अमित तिवारी अपनी मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि अरपा पार क्षेत्र के विकास और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पृथक नगर निगम का गठन जरूरी है।

    पांच दिन से अनशन, प्रशासन पर उठ रहे सवाल

    जनहित से जुड़ी इस मांग को लेकर पांच दिनों से आमरण अनशन जारी रहने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अनशन के कारण स्वास्थ्य में लगातार गिरावट की बात सामने आने के बावजूद अमित तिवारी आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

    उन्होंने कहा कि वे जनहित की इस मांग को लेकर पूरी दृढ़ता के साथ संघर्ष कर रहे हैं। अमित तिवारी के मुताबिक, “मैं सिर पर कफन बांधकर आया हूं और अंतिम दम तक संघर्ष करूंगा। जब तक मुझे ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा।”

    व्यापारी संघ सरकंडा ने दिया आंदोलन को समर्थन

    अरपा पार पृथक नगर निगम की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब व्यापारी वर्ग का भी समर्थन मिला है। व्यापारी संघ सरकंडा ने मांग के समर्थन में सरकंडा क्षेत्र की दुकानों को बंद रखने का आह्वान किया है।

    व्यापारी संघ ने क्षेत्र के विकास और पृथक नगर निगम की मांग के समर्थन में व्यापारियों से सहयोग की अपील की है। व्यापारी वर्ग के इस समर्थन से आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना है।

    प्रशासन की अगली पहल पर नजर

    एक ओर अमित तिवारी का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी है और उनके स्वास्थ्य में गिरावट की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अब तक मांग पर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। ऐसे में आंदोलन को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है।

    व्यापारी संघ के समर्थन के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर है। देखना होगा कि अरपा पार पृथक नगर निगम की मांग और अमित तिवारी के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन कब तक कोई ठोस पहल करता है।

    रिसाली से थानौद तक विभिन्न आयोजनों में पहुंचे विधायक, मंदिरों में की पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं को दी शुभकामनाएं

      दुर्ग। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने मंदिरों में विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात कर सभी को जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दीं।

    विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और प्रेम का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, यही उनकी प्रार्थना है।

    उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का शाश्वत संदेश हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर ही एक समृद्ध, संस्कारवान और बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है।

    कई स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हुए शामिल

    जन्माष्टमी के अवसर पर विधायक चंद्राकर ने लक्ष्मी नगर रिसाली स्थित राधेश्वरी मंदिर, दशहरा मैदान रिसाली, भिलाई सेक्टर-6 स्थित इस्कॉन मंदिर, दुर्ग की महेश कॉलोनी स्थित राधा-कृष्ण मंदिर तथा ग्राम थानौद में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता की।

    इस दौरान उन्होंने विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं से मुलाकात कर उन्हें जन्माष्टमी की बधाई दी।

    शोभायात्रा और भजन संध्या में भी की सहभागिता

    दशहरा मैदान रिसाली में नवयुवक गणेश उत्सव समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम एवं शोभायात्रा में भी विधायक ललित चंद्राकर शामिल हुए। वहीं महेश कॉलोनी के राधा-कृष्ण मंदिर समिति द्वारा आयोजित 21वें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं भजन संध्या में उन्होंने सहभागिता की।

    ग्राम थानौद में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव एवं शोभायात्रा में बड़ी संख्या में यादव समाज के सदस्यों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। शोभायात्रा और धार्मिक आयोजनों को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा।

    बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

    कार्यक्रमों में पुजारी शुभम पांडे, समाजसेवी अतुल पर्वत, सोनू शुक्ला, गोविंद पांडे, रिसाली मंडल अध्यक्ष एकनाथ अनुपम साहू, मरोदा-पुरैना मंडल अध्यक्ष राजू राकेश जंघेल, पार्षद मनीष यादव, धर्मेंद्र भगत, महामंत्री गुड्डू झा, कार्यालय मंत्री आयुष तिवारी, ओबीसी मोर्चा मंडल अध्यक्ष विक्की सोनी, प्रमोद कोसरे, युवा मोर्चा अध्यक्ष मनोज साहू, बीनू मिश्रा, रिसाली मंडल उपाध्यक्ष सचिन गोस्वामी, जिला मंत्री शैलेंद्र शेन्डे, राजू लाल नेताम, सभापति केशव बंछोर, एमआईसी सदस्य चंद्रभान ठाकुर एवं समीर साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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