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April 27, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग। सूरज आग उगल रहा है, पारा आसमान छू रहा है और दुर्ग शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की फेहरिस्त में 12वें पायदान पर अपनी बदहाली दर्ज करा रहा है। ऐसे में जब इंसान और बेजुबान जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, दुर्ग नगर निगम "विकास" का ऐसा चश्मा पहनकर बैठा है जिसे जनता का दर्द और मूक जानवरों की प्यास नजर नहीं आ रही।

देवनारायण की 'डंके की चोट' और खाली होता तालाब

शक्ति नगर वार्ड में इन दिनों एक अजीबोगरीब तमाशा चल रहा है। पीडब्ल्यूडी प्रभारी देवनारायण चंद्राकर अपने वार्ड में 45 लाख रुपये के 'सौंदर्यीकरण' की ऐसी जिद पाले बैठे हैं कि भीषण गर्मी में भी तालाब को खाली कराया जा रहा है। लाखों गैलन पानी बहाया जा रहा है ताकि कंक्रीट का विकास खड़ा हो सके।

 पूर्व में हुई घटना:पिछले साल ब्लीचिंग पाउडर से हजारों मछलियों का दम घोंटने वाली "शहरी सरकार" इस बार बेजुबान जानवरों के हलक सुखाने की तैयारी में है। शायद पार्षद महोदय के लिए 45 लाख के टेंडर की चमक, उन प्यासे जानवरों की आंखों की नमी से ज्यादा कीमती है।

महापौर अलका बाघमार: 'चयनित' विकास और तकनीकी अंधापन

शहर की प्रथम नागरिक, महापौर अलका बाघमार अपनी उपलब्धियों के कसीदे तो पढ़ती हैं, लेकिन उनके 'तकनीकी ज्ञान' पर अब सवाल उठने लगे हैं। दुर्ग शायद दुनिया का इकलौता ऐसा शहर होगा जहाँ पेवर ब्लॉक के नीचे सीमेंट का बेस बनाया जा रहा है। यह तकनीकी रूप से कितना सही है, यह तो इंजीनियर जानें, लेकिन जनता इसे "भ्रष्टाचार की नई परत" कह रही है।

महापौर की अनदेखी के कुछ नमूने:

अधूरे उद्यान: दादा-दादी पार्क के सामने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा शुरू किया गया उद्यान 2 साल बाद भी अपनी बदहाली पर रो रहा है।

अधूरे नाले: वार्ड-43 कसारीडीह में नाले का काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जो अब जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

गंदगी का साम्राज्य: सुराना कॉलेज के सामने कचरे का अंबार और सड़ांध मारता वातावरण महापौर की 'स्वच्छ दुर्ग' की दावों की पोल खोल रहा है।

आवारा पशु: सड़कों पर आवारा पशुओं की फौज खड़ी है, लेकिन निगम प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।

क्या 'पटरी पार' ही पूरा दुर्ग है?

शहर के गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि क्या महापौर के लिए विकास का मतलब सिर्फ 'पटरी पार' का क्षेत्र है? बाकी शहर को क्या गंदगी, बदबू और पानी की किल्लत के हवाले कर दिया गया है? भ्रष्टाचार चाहे बाजार विभाग हो या पीडब्ल्यूडी, अपनी चरम सीमा पर है।

पुरानी गलतियों की ढाल कब तक?

निगम की सत्ता में बैठे लोग अक्सर पुरानी सरकारों की कमियां गिनाकर अपनी खाल बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हुजूर, याद रखिए कि जनता ने आपको उन्हीं कमियों को दूर करने के लिए चुना था, उन्हें दोहराने या उनसे भी बदतर हालात पैदा करने के लिए नहीं।

निष्कर्ष का कड़वा सच:

विकास जरूरी है, पर क्या वह विकास बेजुबानों की जान और जनता की प्यास की कीमत पर होना चाहिए? दुर्ग शहर में आज 'विकास की वीरांगना' के पोस्टर तो चमक रहे हैं, लेकिन उन पोस्टरों के पीछे छिपी प्यास और तड़प की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। महापौर जी और पीडब्ल्यूडी प्रभारी जी, याद रखिएगा— कंक्रीट के जंगल प्यास नहीं बुझाते!

दुर्ग।

कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक में लंबित प्रकरणों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा लापरवाही पर नोटिस जारी किया जाएगा।

बैठक में नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, भू-अर्जन, स्वामित्व योजना, जाति प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व मामलों की समीक्षा की गई। जिले में अविवादित नामांतरण के 16,646 प्रकरणों में से 15,385 का निराकरण (92.42%) किया जा चुका है, जबकि 1,237 मामले लंबित हैं और 115 प्रकरण समय-सीमा से बाहर हैं।

कोटवारी भूमि पर सख्ती:

कलेक्टर ने कोटवारी भूमि के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दिए। 90 प्रकरणों में से अब तक 32 में सिविल वाद दायर हुआ है, जबकि 57 लंबित हैं। सभी तहसीलदारों को ग्रामवार खसरा सूची तैयार कर पंजीयन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।

सीमांकन प्रकरणों में देरी पर नाराजगी:

कुल 1,242 सीमांकन प्रकरणों में 1,080 का निराकरण हुआ है, जबकि 162 लंबित और 65 समय-सीमा से बाहर हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को फील्ड में जाकर प्राथमिकता से निराकरण के निर्देश दिए।

स्वामित्व योजना की प्रगति:

जिले के 381 गांवों में ड्रोन सर्वे पूर्ण, 379 में मैप तैयार, जबकि 106 गांवों में अंतिम प्रकाशन हो चुका है। शेष 273 गांवों में कार्य जारी है, जिसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

मैदानी निरीक्षण अनिवार्य:

नक्शा बटांकन और भू-अर्जन मुआवजा मामलों में तेजी लाने तहसीलदारों को फील्ड निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारतमाला परियोजना सहित सभी लंबित मुआवजा प्रकरणों के शीघ्र भुगतान पर जोर दिया गया।

अन्य निर्देश:

जाति प्रमाण पत्र के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण

तकनीकी कारणों से लंबित प्रकरणों के समाधान हेतु उच्च स्तर पर पत्राचार

भूमि आबंटन आवेदनों का प्राथमिकता से निपटारा

बैठक में एडीएम, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर सहित जिले के सभी राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।

नई दिल्ली/गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।

क्या है पूरा विवाद?

5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।

हाईकोर्ट का रुख सख्त

24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।

अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।

आगे क्या?

अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा के सभापति को राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका सौंपे जाने का दावा सामने आया है। आरोप है कि संबंधित सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) का उल्लंघन किया है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विश्वसनीय सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की बात भी स्थापित तथ्यों से मेल नहीं खाती, जिससे इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।

राजनीतिक और संवैधानिक जानकारों के अनुसार, यदि कोई सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है या व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही संभव है। लेकिन इसके लिए स्पष्ट साक्ष्य, औपचारिक प्रक्रिया और सभापति का निर्णय आवश्यक होता है।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

दलबदल कानून के तहत, यदि किसी दल के 2/3 सांसद एक साथ विलय का दावा नहीं करते, तो व्यक्तिगत स्तर पर पार्टी बदलने पर अयोग्यता लागू हो सकती है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है, जिसे न्यायालय में चुनौती भी दी जा सकती है।

निष्कर्ष:

फिलहाल यह मामला दावों और अटकलों के स्तर पर है। जब तक आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने नहीं आते, इसे सत्यापित खबर के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

भिलाई | शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में शनिवार सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। सुपेला थाना क्षेत्र अंतर्गत स्मृतिनगर चौकी के एचएससीएल कॉलोनी में एक महिला ने आरक्षक की पत्नी और उसके मासूम बेटे की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। इस हमले में आरक्षक की दो बेटियां भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

घटना का खौफनाक विवरण

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज ने आरक्षक ललितेश यादव के घर में घुसकर उसकी पत्नी रीना यादव और 8 वर्षीय बेटे आदित्य यादव पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले में बच्चे पर 14 से अधिक और महिला पर लगभग 18 वार किए गए, जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।

हमले के दौरान घर का पूरा कमरा खून से सन गया था, जो घटना की भयावहता को दर्शाता है।

मां का साहस, बेटियों की जंग

हमले के दौरान रीना यादव ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए अंतिम समय तक संघर्ष किया। एक बेटी ने बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाई, जबकि दूसरी किसी तरह बाहर निकलकर पड़ोसियों को सूचना देने में सफल रही। दोनों बच्चियां घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं, जहां एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पड़ोसियों की तत्परता से आरोपी पकड़ी गई

घटना की सूचना मिलते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आरोपी महिला को पकड़ लिया। लोगों ने उसके हाथ से चाकू छीनकर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है।

फेसबुक से शुरू हुआ संबंध, बना हत्या का कारण

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला और आरक्षक ललितेश यादव के बीच वर्ष 2024 में फेसबुक के माध्यम से संपर्क हुआ था। यह संबंध धीरे-धीरे व्यक्तिगत रिश्ते में बदल गया।

बताया जा रहा है कि आरक्षक ने आरोपी महिला को रायपुर में अलग मकान लेकर रखा था। हाल के दिनों में वह आशानगर क्षेत्र में किराए के मकान में रह रही थी। घटना से एक दिन पहले भी वह आरक्षक के घर पहुंची थी, लेकिन समझाकर वापस भेज दिया गया था।

घटना वाले दिन क्या हुआ?

24 अप्रैल को आरक्षक ललितेश की मैरिज एनिवर्सरी थी। परिवार को यूपी भेजने के लिए रिजर्वेशन भी कराया गया था। इसी बीच पत्नी रीना ने आरोपी महिला को घर आने की जानकारी दी। आरोपी घर पहुंची, जहां उसने खाना भी खाया।

बताया जाता है कि उसी दौरान अचानक उसने सो रहे बच्चे पर हमला कर दिया और फिर रीना यादव को भी निशाना बनाया। जब बेटियां बचाने आईं, तो उन पर भी हमला कर दिया।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में प्रेम संबंध, मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद को घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:

“मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है, आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का स्पष्ट खुलासा किया जाएगा।”

धमतरी  | शौर्यपथ

जिले में आयोजित “यूथ फेस्ट-2026” के समापन अवसर पर रविवार शाम आयोजित विशेष प्रेरक सत्र में देश के वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने युवाओं को जीवन के मूल मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में फिट रहना, सकारात्मक सोच बनाए रखना और परिवार के साथ मिलकर आगे बढ़ना ही सफलता का सबसे मजबूत आधार है।

दो दिन तक चला प्रतिभा और रचनात्मकता का उत्सव

24 और 25 अप्रैल को शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस फेस्ट में युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोकनृत्य,
  • स्टार्टअप, एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप,
  • फूड स्टॉल्स और कला प्रदर्शनियां
    जैसी विविध गतिविधियों ने युवाओं को मंच दिया। समापन दिवस पर दायरा बैंड (जादू बस्तर) की प्रस्तुति ने पूरे आयोजन में सांस्कृतिक रंग घोल दिए।

“खुद को अपडेट रखें, मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान”

अपने संबोधन में सौरभ द्विवेदी ने कहा कि बदलते समय में निरंतर सीखना और खुद को अपडेट रखना अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से मेंटल हेल्थ पर जोर देते हुए कहा कि संतुलित जीवनशैली ही दीर्घकालिक सफलता का आधार बनती है।

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे भ्रामक सूचनाओं और अनावश्यक आलोचनाओं से दूर रहें, अपने विवेक से निर्णय लें और परिवार के मार्गदर्शन को महत्व दें।

“परिवार ही व्यक्ति का सबसे बड़ा शुभचिंतक होता है, इसलिए उनके साथ जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।”

“विकसित भारत में महिलाओं की अहम भूमिका”

महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश के विकास में माताओं और बहनों की भूमिका केंद्रीय है। जब महिलाएं घर के साथ आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय होती हैं, तो प्रगति को नई गति मिलती है। साथ ही उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और संतुलन को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने की अपील

उन्होंने युवाओं, महिलाओं और बच्चों को विज्ञापनों और भ्रामक प्रचार से सावधान रहने का संदेश देते हुए कहा कि जागरूकता और सही जानकारी ही सशक्त समाज का निर्माण करती है।

अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान समारोह

कार्यक्रम में महापौर श्री रामू रोहरा, कलेक्टर श्री अभिनाश मिश्रा, डीएफओ श्री कृष्ण जाधव, प्राचार्य श्री विनोद पाठक सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर महापौर ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

युवाओं के लिए प्रेरणादायी मंच साबित हुआ आयोजन

“यूथ फेस्ट-2026” युवाओं के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक मार्गदर्शन का सशक्त मंच बनकर उभरा। यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं को पहचान दिलाने में सफल रहा, बल्कि युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा देने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

रायपुर, | शौर्यपथ

दुर्ग जिले के ग्राम भरर (जामगांव-आर) में आयोजित तहसील स्तरीय विशाल कर्मा महोत्सव एवं सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 13 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय दांपत्य जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विकास को गति देने वाली घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं—

  • साहू समाज भवन, पाटन में शेड निर्माण हेतु 50 लाख रुपये
  • ग्राम भरर पंचायत में शौचालय व शेड निर्माण तथा सीसी रोड के लिए 10 लाख रुपये

इन घोषणाओं से स्थानीय आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

माता कर्मा के आदर्शों का स्मरण

मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और गौरवशाली समाज बताते हुए माता कर्मा के त्याग, भक्ति और सेवा भावना को प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने स्वर्गीय ताराचंद साहू को नमन करते हुए उनके साथ अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए।

सरकार की उपलब्धियां और योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 28 महीनों में राज्य सरकार ने सुशासन स्थापित करते हुए “मोदी की गारंटी” को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कार्य किए हैं। उन्होंने प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया—

  • 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
  • किसानों को बकाया बोनस और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी
  • महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता, जिससे वे स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैं
  • रामलला दर्शन योजना से दो वर्षों में करीब 42 हजार लाभार्थी

ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में पहल

ऊर्जा क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 का जिक्र करते हुए बताया कि बकाया बिल पर 100% सरचार्ज छूट दी जा रही है।
साथ ही “मोर बिजली ऐप” के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल केंद्रों के जरिए गांव-गांव में डिजिटल सेवाएं सुलभ बनाई जा रही हैं और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

नक्सल उन्मूलन और विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में नक्सल समस्या के नियंत्रण और विकास कार्यों में आई तेजी को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सुशासन और भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए प्रतिबद्ध है।

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में सांसद श्री विजय बघेल, कमिश्नर श्री सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, जिला साहू संघ के अध्यक्ष श्री नंदलाल साहू, तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।


सामाजिक एकता का संदेश

भरर का यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और सामूहिक सहयोग का सशक्त संदेश बनकर सामने आया, जहां संस्कार और विकास—दोनों का सुंदर संगम देखने को मिला।

गुंडरदेही। क्षेत्र में चल रहे गो सम्मान आह्वान अभियान को ग्रामीण स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसी कड़ी में परिक्षेत्र साहू समाज कांदूल द्वारा ग्राम सनोद में आयोजित भक्त माता कर्मा जयंती समारोह जनजागरण का प्रभावी मंच बन गया, जहां गौ सेवकों को विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक पदाधिकारियों का खुला समर्थन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में अनुसूचित जाति प्राधिकरण के अध्यक्ष डोमन लाल कोरसेवाड़ा, विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत सदस्य मीना साहू, जनपद अध्यक्ष पुरुषोत्तम चंद्राकर, सहित गुलशन साहू, कौशल किशोर साहू, टोमन लाल साहू, उमा शंकर साहू (तहसील अध्यक्ष), खिलावन साहू (पूर्व जिला अध्यक्ष), केशव राम साहू (पूर्व तहसील अध्यक्ष), सरपंच हिलेश्वर निषाद, परिक्षेत्र अध्यक्ष धनेश्वर साहू, ग्रामीण अध्यक्ष सेतराम साहू समेत 20 से अधिक गांवों के पदाधिकारी व ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अभियान के समर्थन में अपने विचार व्यक्त करते हुए राजमहंत डोमन लाल कोरसेवाड़ा ने कहा कि “सतनामी समाज लंबे समय से गो हत्या प्रतिबंध के पक्ष में रहा है। वर्तमान समय में इस विषय पर जनजागरण अत्यंत आवश्यक है। गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना चाहिए।”

समारोह के दौरान वक्ताओं ने गौ संरक्षण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में अभियान को समर्थन देते हुए इसे समाजहित में महत्वपूर्ण पहल बताया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनसमर्थन के विस्तार का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।

  नई दिल्ली, । भारत निर्वाचन आयोग के अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) 2026 के तहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-1) के विधानसभा चुनावों ने वैश्विक मंच पर भारतीय लोकतंत्र की ताकत, पारदर्शिता और व्यापकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 16 देशों के 32 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों और ‘इंटरनेशनल आईडीईए’ के विशेषज्ञों ने चुनाव प्रक्रिया को नजदीक से देखा और इसे “लोकतंत्र का सच्चा उत्सव” करार दिया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से रिकॉर्ड मतदान, सूक्ष्म योजना और निर्बाध चुनाव संचालन की सराहना की। मॉरीशस की उच्चायुक्त शीलाबाई बाप्पू ने कहा कि भारत दुनिया को चुनाव कराने की प्रक्रिया और अनुभव सिखा रहा है, जहां “वोट को मतदाता के द्वार तक पहुंचाया जाता है।”

प्रबंधन और तकनीक का संगम
22-23 अप्रैल के दौरान प्रतिनिधियों ने डिस्पैच और डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों का दौरा कर चुनावी लॉजिस्टिक्स की सटीकता को देखा। फिलीपींस की मेलिसा ऐन टेलन ने ईवीएम (कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट) के व्यवस्थित वितरण और पारदर्शिता को “अद्भुत अनुभव” बताया।

100% वेबकास्टिंग, कंट्रोल रूम्स की निगरानी और मॉक पोल जैसी प्रक्रियाओं ने चुनावी पारदर्शिता को और मजबूत किया। प्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण माना।

समावेशी और सुलभ मतदान व्यवस्था
मतदान केंद्रों पर रैंप, व्हीलचेयर, हेल्प डेस्क, क्रेच सुविधा और स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने समावेशी लोकतंत्र की झलक पेश की। बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए घर से मतदान की सुविधा को भी प्रतिनिधियों ने सराहा। नेपाल के प्रतिनिधि यज्ञ प्रसाद भट्टराई ने मतदान केंद्रों के प्रबंधन को “उत्कृष्ट और सराहनीय” बताया।

चेन्नई में कलर-कोडेड मतदान केंद्रों और न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था ने भूटान के प्रतिनिधि शेरिंग समद्रुप को प्रभावित किया, वहीं पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य जांच सेवाएं और मोबाइल डिपॉजिट सुविधा को केन्या की रूथ कुलुंडु ने गोपनीयता और सुविधा का बेहतर उदाहरण बताया।

वैश्विक मानक स्थापित करता भारत
इससे पहले 8-9 अप्रैल को 22 देशों के 38 प्रतिनिधि असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा कर चुके हैं। अब तक कुल 38 देशों के 70 प्रतिनिधि भारत की चुनावी प्रक्रिया का अनुभव ले चुके हैं।

भारत निर्वाचन आयोग का यह कार्यक्रम न केवल वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारत के चुनावी मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक के रूप में स्थापित कर रहा है। विशाल पैमाने, रिकॉर्ड भागीदारी और तकनीकी नवाचारों के साथ भारत एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि लोकतंत्र केवल एक प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवंत और समावेशी उत्सव है।

  आगरा । भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से ठीक पहले आगरा में आयोजित उद्योग संवाद ने इस समझौते को केवल टैरिफ कटौती तक सीमित न मानकर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में स्थापित कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की संयुक्त अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और FTA से मिलने वाले अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।

इस संवाद का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—यह FTA व्यापार, निवेश, प्रतिभा के आवागमन, शिक्षा, पर्यटन और जन-संपर्क जैसे कई आयामों को जोड़ने वाला बहु-स्तरीय फ्रेमवर्क है। सरकार का दृष्टिकोण इसे “जन-केंद्रित आर्थिक साझेदारी” के रूप में विकसित करने का है, जिससे MSME, महिला उद्यमी, किसान और कुशल पेशेवर सभी को लाभ मिल सके।

आगरा का चमड़ा उद्योग इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर सकता है। वर्तमान में भारत के कुल लेदर फुटवियर उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा आगरा से आता है। FTA लागू होने के बाद जूते और चमड़े के उत्पादों पर 5% तक का टैरिफ शून्य हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत ने इस क्षेत्र के 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावनाएं जताई हैं। न्यूजीलैंड के कच्चे चमड़े के संसाधन और भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इस सहयोग को और मजबूती देंगे।

फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भी FTA को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। त्वरित नियामक स्वीकृति, GMP और GCP रिपोर्टों की पारस्परिक मान्यता से भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा। विशेष रूप से आयुष को लेकर समझौते में एक समर्पित अध्याय शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा।

पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, स्किल मोबिलिटी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने MSME सेक्टर तक इसके लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। वहीं टॉड मैक्ले ने भारत को न्यूजीलैंड की रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए इसे अब तक का “उच्च गुणवत्ता वाला FTA” करार दिया और संयुक्त उद्यमों व निवेश के नए अवसरों पर बल दिया।

महज नौ महीनों में तैयार हुआ यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। आगरा में हुआ यह उद्योग संवाद इस बात का संकेत है कि FTA केवल एक कागजी समझौता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उद्योगों, रोजगार और निर्यात को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है।

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