August 05, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नजरिया / शौर्यपथ / जब भारत जनवरी 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के रूप में शामिल हो जाएगा, तब वहां अनेक मसलों से रूबरू होगा। क्या संयुक्त राष्ट्र आने वाले दिनों में दुनिया के लोगों के लिए मानवीय सहायता और गलत काम करने वालों के विरुद्ध न्याय को बेहतर तरीके से सुनिश्चित कर पाएगा? सीरिया, यमन और अफगानिस्तान जैसे देशों में चल रहे संघर्ष के समाधान में क्या वह मदद कर सकेगा? अशांत जगहों से भाग रहे शरणार्थियों की रक्षा करेगा?
    चीन, रूस या अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों में भी मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है, लेकिन ऐसे देशों की आलोचना न करने की वजह से मानवाधिकार समूहों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की बार-बार आलोचना की है। जवाब में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र व उसके सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अधिकारों की बढ़ती चुनौतियों पर अधिक ध्यान देने के मकसद से ‘कॉल टु एक्शन ऑन ह्यूमन राइट्स’ की पहल करें। अब दुनिया भर में उत्पीड़न का सामना करने वालों के अधिकारों के बचाव की दिशा में भारत से भी बड़ी उम्मीदें होंगी। भारत सरकार ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में भारत तर्क व संयम की आवाज बुलंद करेगा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत दृढ़ विश्वास के साथ काम करेगा।
    दुर्भाग्य से अन्य देशों में मानवाधिकारों के सम्मान को बढ़ावा देने के मामले में भारत का रिकॉर्ड खराब रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने आमतौर पर देश-विशिष्ट प्रस्तावों पर ही अमल किया है। भारत रोहिंग्या मामले अर्थात म्यांमार में जातीय शोषण या फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के ड्रग युद्ध जैसे मामलों में संयुक्त राष्ट्र की पहल का समर्थन करने में नाकाम रहा है। कुछ ही मौके आए हैं, जब भारत ने आवाज उठाई है। अतीत में देखें, तो भारत ने श्रीलंका में कथित युद्ध अपराधों की जवाबदेही की चर्चा की थी। हाल की बात करें, तो हांगकांग में अधिकारों की रक्षा के प्रति भारत ने चिंता का इजहार करते हुए कहा है कि इसे ‘ठीक से, गंभीरता से और निष्पक्ष रूप से देखा जाए’।
    भारत दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपने सैनिक भेजकर महत्वपूर्ण योगदान करता रहा है और सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने की इच्छा रखता है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियान किसी संघर्ष के बाद स्थितियों की निगरानी, जांच और मानवाधिकार पर ध्यान केंद्रित रखते हैं। भारत को ऐसी कोशिशों का विस्तार करते हुए नेतृत्व और समर्थन का प्रदर्शन करना चाहिए। दुनिया में मानवाधिकार के पक्ष में खड़े होने के लिए अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड को भी देखना चाहिए। जहां भारत लंबे समय से ज्यादा स्वतंत्र समाज रहा है, वहीं चीन एकदलीय अधिनायकवादी राज्य है। हाल ही में भारत ने भी चीन जैसी पाबंदियों की कुछ नकल की है। जब सूचना, संचार, मनोरंजन, शिक्षा और व्यवसाय इत्यादि क्षेत्रों में इंटरनेट बुनियादी आजादी का हिस्सा हो गया है, तब भारत में कुछ पाबंदियां दिखी हैं।
    अमेरिका में पुलिस द्वारा अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद जो आंदोलन हुआ, उसने दुनिया या भारत पर कोई खास असर नहीं डाला है। भारतीय पुलिस में भी ज्यादती का पुराना ढर्रा जारी है। हाशिये पर पड़े वंचितों के संरक्षण की जरूरत पर अधिकारी चुप रहते हैं। उधर, अमेरिका में पुलिस ने न सिर्फ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया है, बल्कि प्रदर्शनकारियों की रक्षा में नाकाम रही है। कुछ मामलों में तो पुलिस खुद हमलों में शामिल दिखी है।
    आज भारत निर्णायक मोड़ पर है। जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल हो जाएगा, तब उसके पास दो विकल्प होंगे, या तो वह मानवाधिकार का सम्मान करने वाले देशों के पक्ष में खड़ा हो जाए या फिर चीन, रूस, ब्राजील जैसे देशों के साथ तालमेल बनाकर चलता रहे। ये देश अक्सर मानवाधिकार के मामले में वैश्विक नियम आधारित कानूनी प्रणाली को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश करते हैं। दुनिया में आक्रामक होता चीन, कोरोना की वजह से सेहत व आजीविका पर दोहरे संकट की पृष्ठभूमि में साल 2021 का आगाज भारत के लिए अहम मौका होगा। देखना है, देश मानवाधिकारों के समर्थकों के साथ खड़ा होता है या मानवाधिकारों को कमजोर करने वालों के साथ?
    (ये लेखिका के अपने विचार हैं) मीनाक्षी गांगुली,दक्षिण एशिया निदेशक, ह्यूमन राइट्स वाच

     

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारत में राफेल जैसे लड़ाकू विमान का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो गया। पांच विमानों की पहली खेप के भारत पहुंचते ही हमारी ताकत में जो इजाफा हुआ है, उससे निश्चित ही हमारी सेनाओं के मनोबल में वृद्धि हुई होगी। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हम रक्षा सौदों में दो दशक से ज्यादा ढिलाई की वजह से कोई भी लड़ाकू विमान खरीद नहीं पा रहे थे।
    जब 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल के लिए सौदा हुआ, तब हमें भूलना नहीं चाहिए कि उसे लेकर किस तरह के विवाद हुए थे। राजनीतिक क्षेत्र में किस तरह से चर्चाएं हुई थीं। बहुत अप्रिय ढंग से आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। संभव है, राजनीतिक विवाद न होते और रक्षा सौदों के प्रति हमारे प्रतिष्ठानों में पूरी निष्ठा व त्वरा होती, तो भारत को नए विमानों के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
    पिछली सदी में सुखोई विमान खरीदे गए थे, अब 23 साल बाद राफेल मिला है, तो भारत में इसके मानसिक-सामरिक महत्व को समझा जा सकता है। अव्वल तो भारतीय गगन में एक असुरक्षा का भाव आने लगा था, पुराने पड़ चुके मिग विमानों की दुखद स्थिति आए दिन रुलाने लगी थी। ऐसे विमानों को उड़ाने की जरूरत पड़ रही थी कि जिन्हें उड़ते ताबूत तक कह दिया जाता था। बेशक, अब राफेल के आने के बाद हम अपनी वायुसेना के और उज्ज्वल भविष्य की ओर देख सकेंगे। सुखोई-30 जैसे विमान अभी भी सेवारत हैं, लेकिन सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें राफेल या उससे भी विकसित 200 से ज्यादा विमानों की जरूरत है। और अभी तो पांच विमानों के साथ शुरुआत हुई है, अगले साल तक जब सभी 36 राफेल भारत आ जाएंगे, तो जाहिर है, देशवासियों को ज्यादा सुरक्षा का एहसास कराएंगे। राफेल का आना बड़ी खुशखबरी है, लेकिन हमें अपना पारंपरिक संयम भी नहीं खोना चाहिए। भारत ने हथियार या विमान कभी भी किसी पर हमले के लिए नहीं खरीदे हैं, हमारी एक-एक रक्षा खरीद अपने बचाव के लिए है। हमें किसी अन्य देश की जमीन नहीं चाहिए, हमें किसी पर हमला नहीं करना है, हमें केवल अपना बचाव करना है। हां, जो हमसे दुश्मनी पालना चाहते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि भारत ईंट का जवाब पत्थर से दे सकता है। साथ ही, इस रक्षा उपलब्धि के पक्ष या विपक्ष में किसी तरह की सियासत से बचना चाहिए।
    राफेल का आना हमारे लिए एक प्रेरणा भी है कि हम आगे के लिए और तैयार रहें। संसाधनों से भरे भारत में अब उस दौर का आगाज हो जाना चाहिए, जब हमें किसी भी देश से कोई रक्षा उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं पड़े। अभी भारत स्वयं अगर बहुत सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरे विकसित सहयोगी देशों के साथ मिलकर अपनी ही सीमा में रक्षा निर्माण उद्यम लगाना चाहिए। यह प्रयास शुरुआत में बहुत महंगा भले लगे, लेकिन दूरगामी रूप से भारत को इससे व्यापक मजबूती मिलेगी।
    रक्षा के मोर्चे पर कोई भी तैयारी जयघोष के साथ हो, यह जरूरी नहीं। ऐसी तैयारियों को चुपचाप अंजाम देकर परिणाम देश के सामने रख देना चाहिए। राफेल या सुखोई जैसे विमानों के नए संस्करणों पर भारत को काम करना चाहिए। हमें पुराने साथी देशों जैसे रूस को भी साथ रखना होगा। राफेल की रोशनी में उन तमाम रक्षा खरीद और निर्माण योजनाओं में तेजी आनी चाहिए, जिनसे अपना देश और मजबूत होगा।

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / कोरोना वायरस धीरे-धीरे पूरे देश में अपने पैर पसार चुका है। इससे राष्ट्र एकजुट होकर जरूर लड़ रहा है, लेकिन कई दूसरी समस्याएं भी अब पैदा होने लगी हैं। ऐसी ही एक समस्या है, घरेलू हिंसा। हालांकि, जब हम घरेलू हिंसा की बात करते हैं, तो हमारे सामने असहाय महिलाओं का दृश्य कौंध जाता है। लेकिन आज तस्वीर कुछ अलग है। इससे आज घर-परिवार के छोटे-बड़े सभी लोग प्रभावित हैं। अब इसके दायरे में बड़े-बुजुर्ग भी आ गए हैं। लंबे समय तक चले लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी हुई है। इसकी एक वजह बढ़ता मानसिक तनाव है, जिसके कारण घर में क्लेश बढ़ गया है। घरेलू हिंसा सदा से ही समाज के लिए अभिशाप रही है, लेकिन कोरोना काल में इसमें वृद्धि शर्मनाक है। इससे पार पाने के उपाय गंभीरता से किए जाने चाहिए।
    विकास सिंह बघेल , दिल्ली

    याद आएंगे वे दिन
    एनालॉग यानी एंटीना की सहायता से दूरदर्शन देखना अब संभव नहीं रहा। वर्षों से इसी तरह प्रसारित हो रहा दूरदर्शन का मुख्य चैनल अब अचानक बंद कर दिया गया है। इससे एक स्वर्णिम पल इतिहास बन गया। चूंकि अधिकतर लोगों के पास डिश होने की वजह से एंटीना का कम इस्तेमाल हो रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में अब भी साधारण एंटीना मुख्य विकल्प है। ऐसे में, एनालॉग सर्विस बंद करने की बजाय कुछ और उपाय निकाले जाने चाहिए थे। संभव हो, तो यह सेवा फिर से शुरू की जाए, ताकि एंटीना से भी लोग दूरदर्शन को देख सकें। दूरदर्शन की ताकत ही यही है कि इसकी पहुंच देश के हर घर में है, इसीलिए इसे सिर्फ डिश के माध्यम से प्रसारित किए जाने से न सिर्फ इसकी पहुंच कम होगी, बल्कि जनता की यह आवाज भी कमजोर पड़ जाएगी।
    विवेक भारद्वाज, विष्णु धाम, सहारनपुर

    रक्षा-सूत्र का बंधन
    राखी का त्योहार नजदीक है। यह पावन पर्व भाई और बहन के आपसी अटूट प्रेम को दर्शाता है, लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध में यह त्योहार भी अपनी सार्थकता खोता दिख रहा है। दूसरे त्योहारों की तरह राखी में भी अब दिखावा ज्यादा होने लगा है। रक्षा-सूत्र का बंधन सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि भाई और बहन के अटूट स्नेह व विश्वास का भरोसेमंद बंधन है, जो आज के दौर में कई बार औपचारिकता का निबाह भर लगता है। दिक्कत यह है कि हमारा आपसी प्रेम-व्यवहार सिर्फ मोबाइल और ऑनलाइन संदेशों तक सीमित होता जा रहा है। एक शहर में रहकर भी हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि मिलने का वक्त भी कथित तौर पर नहीं निकाल पाते। इस बार हमें इस सोच से पार पाना चाहिए। आपसी स्नेह जागृत करते हुए हम रिश्तों में गुम हो चुकी मिठास को फिर से पा सकते हैं। इससे इस पावन पर्व की सार्थकता भी बनी रहेगी और रक्षा-सूत्र का मान भी बढ़ेगा।
    माधुरी शुक्ला
    सारनाथ, वाराणसी

    एप पर प्रतिबंध
    विश्व के सभी देशों को समझ लेना चाहिए कि भारत जितना नरम और शांतिप्रिय देश है, उतना ही सख्त भी है। चीन के अति-आत्मविश्वास को चूर-चूर करने के लिए हमारी सरकार ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। जून माह में चीन के 59 एप पर पाबंदी लगाई गई थी और अब देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिहाज से उसके 47 अन्य एप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन एप को प्रतिबंधित करके सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उड़ान को और ऊंचाई दी है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इस प्रतिबंध से भारतीय एप और नवाचार कंपनियों के लिए नए-नए मार्ग खुलेंगे, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर अधिक से अधिक अपना कौशल दिखाने और कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा।
    अमन जायसवाल, दिल्ली

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ / अभी जनवरी में ही हुआवेई को दूरसंचार क्षेत्र में सीमित कामकाज की अनुमति दी गई थी, लेकिन अपने इस फैसले को अचानक से पलटते हुए ब्रिटेन ने चीन की इस कंपनी पर अब प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। पाबंदी के तहत इस साल के अंत, यानी 31 दिसंबर से ब्रिटेन की मोबाइल-प्रदाता कंपनियां हुआवेई कंपनी से 5जी उपकरण नहीं खरीद सकेंगी, साथ ही ब्रिटिश दूरसंचार ऑपरेटर भी अपने यहां लगे सभी हुआवेई किट 2027 तक हटा लेंगे। ब्रिटेन के डिजिटल और संस्कृति मंत्री ओलिवर डाउडेन ने मई में अमेरिका द्वारा कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंध को इसकी वजह बताया है। उनका कहना है कि चूंकि अमेरिकी पाबंदी से हुआवेई की आपूर्ति शृंखला को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, इसलिए ब्रिटेन अब यह उम्मीद नहीं कर सकता कि कंपनी आने वाले दिनों में अपने 5जी उपकरणों की सुरक्षा की गारंटी दे सकेगी।
    ब्रिटेन के इस फैसले का अमेरिका ने तत्काल स्वागत किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ब्रिटेन की सराहना करते हुए समान सोच रखने वाले अन्य देशों से भी बीजिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया है। दूसरी तरफ, बीजिंग ने ब्रिटेन के इस ‘आधारहीन प्रतिबंध’ का ‘कड़ा विरोध’ किया है और चेतावनी दी है कि अपनी कंपनियों के ‘जायज हितों की रक्षा के लिए चीन तमाम कदम’ उठाएगा, क्योंकि ‘किसी भी फैसले या कार्रवाई की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है’। देखा जाए, तो ब्रिटेन की सरकार अपने फैसले की कीमत साफ-साफ समझ भी रही है, क्योंकि इस पाबंदी के बाद वहां 5जी के विस्तार में अब वक्त लगेगा। इस फैसले से उसे रणनीतिक नुकसान भी होगा, क्योंकि उससे चीन का साथ छूट सकता है। यह सब ऐसे वक्त में होगा, जब ब्रेग्जिट-बाद के दौर में अपने कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने के लिए ब्रिटेन दुनिया की तमाम बड़ी ताकतों से रिश्ते मजबूत करना चाह रहा है।
    बहरहाल, ट्रंप प्रशासन द्वारा मई में हुआवेई पर नई पाबंदी लगाने के बाद से उसके सेमीकंडक्टर की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके कारण ब्रिटेन में उसकी लागत बढ़ गई है। फिर, बोरिस जॉनसन सरकार को सुरक्षा समीक्षा के एक नए दौर के लिए भी जाना जाता है, जिसकी झलक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के फैसले में दिखी और पाबंदी का यह कदम उठाया गया। ब्रिटेन-अमेरिका संबंध भी इस फैसले की एक वजह है, क्योंकि जनवरी में जब हुआवेई को ब्रिटेन में कारोबार की अनुमति दी गई थी, तब ट्रंप प्रशासन ने यह साफ कर दिया था कि लंदन के साथ वाशिंगटन के ‘विशेष रिश्ते’ की समीक्षा की जाएगी। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की डोर प्रभावित होती, बल्कि अमेरिका-ब्रिटेन में व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत पर भी प्रतिकूल असर पड़ता। जाहिर है, ब्रिटेन का नया रुख ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि अमेरिका-चीन विवाद पर तटस्थ रुख अपनाने वाले अन्य देशों को भी इसी तरह से मनाया जा सकता है।
    पिछले दो दशकों से ब्रिटेन में कारोबार कर रही हुआवेई के लिए यकीनन यह एक मुश्किल घड़ी है। इससे यूरोप में उसका कारोबार प्रभावित हो सकता है, जहां कुल वैश्विक बिक्री का करीब एक चौथाई उत्पाद वह बेचती है। फ्रांस ने भी सीमित अवधि के लिए लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था करके हुआवेई-5जी उपकरणों के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला किया है। इसे भी कंपनी पर एक वास्तविक प्रतिबंध के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि फ्रांस सरकार ने इसे सीधे-सीधे नहीं कुबूला है। जर्मनी भी हुआवेई पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, क्योंकि पूरे यूरोप में चीन के खिलाफ नकारात्मक माहौल बन गया है। वर्षों तक बीजिंग की जी-हुजूरी करने वाला यूरोपीय संघ भी अब उसके खिलाफ मुखर है। उसकी नाराजगी की वजह कोविड-19 के खिलाफ शुरुआत में बीजिंग द्वारा ढीला रवैया अपनाने से लेकर हांगकांग में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर यूरोप में चलाया गया भ्रामक अभियान है। अब चीन को एक ‘सार्वभौमिक दुश्मन’ के रूप में देखा जा रहा है, जो तमाम समझौतों, नियमों और संस्थानों के साथ-साथ मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने पर आमादा है।
    साफ है, जो लड़ाई अब तक वाशिंगटन अकेले लड़ता हुआ दिख रहा था, उसमें कई दूसरे राष्ट्र भी शामिल हो गए हैं। इससे युद्ध का मैदान पूरी तरह से बदल गया है। भारत की प्रतिक्रिया पर भी खूब नजर है। पिछले साल नई दिल्ली ने हुआवेई को 5जी ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी, जो कोविड-19 संक्रमण की वजह से संभव नहीं हो सका। मगर अब सीमा-विवाद और नई दिल्ली की चिंताओं के प्रति बीजिंग की बेरुखी के कारण भारत-चीन द्विपक्षीय रिश्तों का ताना-बाना पूरी तरह से बदल गया है। नई दिल्ली का सख्त रुख कायम है और संभावना यही है कि हुआवेई को शायद ही भारत में 5जी नेटवर्क लागू करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। नई दिल्ली यह संकेत दे रही है कि महत्वपूर्ण निर्माण-परियोजनाओं में चीनी कंपनियों की भागीदारी को सीमित करने या रोकने का मतलब यदि आर्थिक और तकनीकी नुकसान है, तब भी भारत यह कीमत चुकाने को तैयार है। मगर बीजिंग पर भी इसका खूब असर होगा, क्योंकि वह एक ऐसे बाजार से हाथ धो लेगा, जहां आने वाले वर्षों में चीन के बाद सबसे अधिक 5जी उपभोक्ता होंगे। यूरोपीय बाजार से बाहर होने के बाद यह हुआवेई के लिए एक विनाशकारी झटका हो सकता है।
    साफ है, हुआवेई पर पाबंदी महज एक तकनीकी या आर्थिक मसला नहीं है, बल्कि कई देशों के लिए यह एक राजनीतिक फैसला है। कारोबारी और प्रौद्योगिकी रिश्ते को हथियार बनाने का चीन का फैसला ही अब उसके खिलाफ जाता दिख रहा है। कई मुल्क अब जैसे को तैसा की रणनीति आजमाने लगे हैं।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) हर्ष वी पंत, प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज, लंदन,नई दिल्ली

     

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम के महापौर बाकलीवाल की पहल व विधायक वोरा के दिशानिर्देश में शहर के बीमार और दुर्घटना ग्रस्त मवेशियों की बेहतर ईलाज के लिए जल्द से जल्द टिचिंग वेटनरी हॉस्पिटल प्रारंभ किया जा रहा है। इस वेटेनरी हॉस्पिटल के प्रारंभ होने से शहर सहित गौठान में रहने वाले मवेशियों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी . महापौर धीरज बाकलीवा द्वारा छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के डाक्टरों से आज विशेष चर्चा किये।
    चर्चा के दौरान महापौर बाकलीवाल ने डाक्टरों को बताया कि माननीय विधायक जी की मंशा है कि शहर के मवेशियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो । उन्होनें बताया शहर में पकड़े जाने वाले आवारा मवेशियों के साथ ही दुर्घटना ग्रस्त होने वाले मवेशियों की अकाल मौत हो जा रही है। निगम द्वारा एैसे मवेशियों की सूचना पर निगम अमला उसे उठाती है। उन्होनें कहा शहर में बीमार मवेशी और दुर्घटना ग्रस्त मवेशी किसी बीमारी या अन्य कारण से न मरे इसके लिए व्यवस्था किया जाना है।
    उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम द्वारा चार स्थानों पर गौठान स्थापित किया जा रहा हैं जहॉ अधिक संख्या में मवेशी एकत्र होगें। मवेशियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को किसी भी प्रकार से तकलीफ ना हो इसकी तैयारी पहले से किया जाना आवश्यक है।
    चर्चा के दौरान डाक्टरों ने जानकारी देते हुये बताया कि महिला समृद्धि बाजू से पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय की ओर टिचिंग वेटनरी हास्पीटल शीघ्र ही शुरु किया जा रहा है। जहॉ मवेशियों की शल्य क्रिया एवं बांझपन, के अलावा एक्सरे, ईसीजी जांच, पेशाब जांच, आंख, कान आदि की जांच, अन्य होने वाली बिमारियों की जांच कर उसका निदान किया जावेगा।
    यह कार्य पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय के सर्जरी, मेडिसीन, गायनेकोलाजी के विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। तथा छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा के अधीन संचालित किया जावेगा ।

    मुख्यमंत्री ने सपरिवार कौशल्या माता मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की , छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों के विकास के लिए बनाया है 137.45 करोड़ का कान्सेप्ट प्लान ,चंदखुरी मंदिर के सामने बायपास सड़क की स्वीकृति: राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा भी खुलेगी , पर्यटकों की सुविधा के लिए स्थलों में पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण, रेस्टोरेंट, पहुंच मार्ग बनाये जाएंगे , मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में लगाया बेल का पौधा

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में शीघ्र ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचकर वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के सौन्दर्यीकरण के दौरान मंदिर के मूलस्वरूप को यथावत रखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।


         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पडऩे वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण, तालाब का सौंदर्यीकरण, घाट निर्माण, पार्किंग, परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं।
    मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए है। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। श्री बघेल ने कहा कि चंदखुरी में 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।


    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है। श्री बघेल ने इस अवसर पर मंदिर परिसर पर बेल और उनकी धर्मपत्नी ने महुआ का पौधा भी रोपा। इसके साथ ही परिसर में आवंला, पीपल, अमरूद और करंज आदि के पौधे भी लगाए गए। मुख्यमंत्री ने इन रौपे गए पौधों पर सेरीखेड़ी महिला समूह द्वारा बांस से बनाए जा रहे ट्री-गार्डो का लगवाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणजनों से गौठान और गोधन न्याय योजना सहित गांव में उपलब्ध अन्य सुविधाओं की चर्चा की। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, जनपद पंचायत आरंग के अध्यक्ष खिलेश देवांगन, ग्राम पंचायत चंदखुरी की सरपंच श्रीमती मालती धीवर और कौशल्या माता समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / 22 अगस्त से गणेश उत्सव प्रारंभ हो रहा है . हिन्दू धर्म में गणेश उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है गली मोहल्ले में झांकिया इस पर्व की विशेषता होती है किन्तु इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के चलते यह उत्सव भी फीका ही मनाया जाएगा . गणेश उत्सव के लिए जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए है ताकि उत्सव में भीड़ की वजह से कोरोना का संक्रमण ना बढे .
    कंटेन्मेंट जोन में मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं होगी, यदि पूजा की अवधि के दौरान भी उपरोक्त क्षेत्र कंटेन्मेंट क्षेत्र घोषित हो जाता है तो तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी।मूर्ति स्थापना के दौरान, विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात् किसी भी प्रकार के भोज, भंडारा, जगराता अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं होगी।मूर्ति स्थापना के समय, स्थापना के दौरान , विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात किसी भी प्रकार के वाद्ययंत्र, ध्वनि विस्तारक यंत्र, डी.जे. बजाने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन के दौरान प्रसाद, चरणामृत या कोई भी खाद्य एवं पेय पदार्थ वितरण की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए एक से अधिक वाहन की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए पिकअप, टाटाएस(छोटा हाथी ) से बड़े वाहन का उपयोग प्रतिबंधित होगा।मूर्ति विसर्जन के वाहन में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त साज-सज्जा, झांकी की अनुमति नहीं होगी।
    विसर्जन में 4 से अधिक नहीं जा सकेंगे
    मूर्ति विसर्जन के लिए 4 से अधिक व्यक्ति नहीं जा सकेंगे एवं वे मूर्ति के वाहन में ही बैठेंगे। पृथक से वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी।मूर्ति विसर्जन के लिए प्रयुक्त वाहन पंडाल से लेकर विसर्जन स्थल तक रास्ते में कहीं रोकने की अनुमति नहीं होगी। विसर्जन के लिए नगर निगम द्वारा निर्धारित रूट मार्ग, तिथि एवं समय का पालन करना होगा। शहर के व्यस्त मार्गो से मूर्ति विसर्जन वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सामान्य रूप से सभी वाहन रिंग रोड के माध्यम से ही गुजरेंगे।विसर्जन के मार्ग में कहीं भी स्वागत, भंडारा, प्रसाद वितरण पंडाल लगाने की अनुमति नहीं होगी।सूर्यास्त के पश्चात एवं सूर्योदय के पहले मूर्ति विसर्जन के किसी भी प्रक्रिया की अनुमति नहीं होगी।
    7 दिवस पूर्व नगर निगम को देना होगा आवेदन- उपरोक्त शर्तो के साथ घरों में मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी। यदि घर से बाहर मूर्ति स्थापित किया जाता है तो कम से कम 7 दिवस पूर्व नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय में निर्धारित शपथपत्र मय आवेदन देना होगा एवं अनुमति प्राप्त होने के उपरांत ही मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी।
    इन सभी शर्तो के अतिरिक्त भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आदेश 04 जून 2020 के अंतर्गत जारी एस.ओ.पी का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना होगा।यह निर्देश तत्काल प्रभावशील होगा तथा निर्देश के उल्लंघन करने पर ऐपीडेमिक डिसीज एक्ट एवं विधि अनुकूल नियमानुसार अन्य धाराओं के तहत् कठोर कार्यवाही किया जाएगा।

    शासन के निर्देशानुसार इस बार गणेश उत्सव में निम्न दिशा निर्देश जारी किये गए है ..

    मूर्ति की ऊंचाई एवं चौड़ाई 4&4 फिट से अधिक नही होना चाहिए।
    मूर्ति स्थापना वाले पंडाल का आकार 15&15 फिट से अधिक नही होना चाहिए।
    पंडाल के सामने कम से कम 5000 वर्ग फिट की खुली जगह हो।
    पंडाल एवं सामने 5000 वर्ग फिट की खुली जगह में कोई भी सड़क अथवा गली का हिस्सा प्रभावित न हो ।
    पंडाल के सामने दर्शकों के बैठने हेतु पृथक से पंडाल नही होना चाहिऐ।
    दर्शकों एवं आयोजकों के बैठने हेतु कुर्सी नहीं लगाये जायेंगे ।
    किसी भी प्रकार एक समय में मंडप एवं सामने मिलाकर 20 व्यक्ति से अधिक नही होना चाहिए।
    मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति एक रजिस्टर संधारित करेंगी, जिसमें दर्शन हेतु आने वाले सभी व्यक्तियों का नाम पता एवं मोबाईल नम्बर दर्ज किया जाएगा। ताकि उनमें से कोई भी कोरोना संक्रमित होने पर कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा सके।
    मूर्ति दर्शन अथवा पूजा में शामिल होने वाला कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नहीं जाएगा। ऐसा पाये जाने पर संबंधित एवं समिति के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किया जाएगा।
    मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति द्वारा सेनेटाईजर, थर्मल स्क्रीनिंग, आक्सीमीटर, हैण्डवाश एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी।
    थर्मल स्क्रीनिंग में बुखार पाये जाने अथवा कोरोना से संक्रमित सामान्य या विशेष लक्षण पाये जाने पर पंडाल में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति का होगा।
    व्यक्ति अथवा समिति द्वारा फिजिकल डिस्टेंसिंग आगमन एवं प्रस्थान की पृथक से व्यवस्था बास-बल्ली से बेरिकेटिंग कराया जाएगा।

    संक्रमित होने पर समिति को देना होगा इलाज का पूरा खर्च
    यदि कोई व्यक्ति जो मूर्ति स्थापना स्थल पर जाने के कारण संक्रमित हो जाता है तो ईलाज का संपूर्ण खर्च मूर्ति स्थापना करने वाला व्यक्ति अथवा समिति द्वारा किया जाएगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विजय जयसिंघानी ने कहा कि 29,30 जुलाई को ही क्यों किराना दुकानों को छूट दी जा रही है, जबकि 1, 2 अगस्त को भी छूट दी जानी चाहिए। क्योंकि राजधानी, रायपुर व प्रदेश भर में रक्षाबंधन त्यौहार को मनाया जाता है, एवं किसी भी नागरिक को कोई असुविधा न हो इसके लिए नई गाइडलाइन बनाकर रक्षाबंधन पर्व के चलते 1 व 2 अगस्त को छूट देना अति आवश्यक है।
    साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी प्रकार की छूट का दुरुपयोग न करें, मात्र अपने त्योहारों के लिए आवश्यक सामग्री का क्रय करने के बाद तत्काल अपने घरों में लौटकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, क्योंकि हमारी सावधानी ही हमारी सुरक्षा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / चिकित्सा क्षेत्र एक पवित्र और पूजनीय के रूप में आम जनता के लिए स्थापित किया जाता है किन्तु वर्तमान में चिकित्सा क्षेत्र में कुछ ऐसे लोगो की मनमानी चल रही है जिसके कारण सेवा भाव से चिकित्सीय कार्य में लगे लोगो पर भी कभी कभी ऊँगली उठ जाती है सिर्फ चाँद लोगो के कारण कई लोगो को संदेह की नजर से देखा जाता है ऐसे ही एक मामले में एनएसयूआई ने शहर के बीएम शाह हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के खिलाफ कलेक्टर दुर्ग से शिकायत की है। संगठन के जिला अध्यक्ष आदित्य सिंह ने आरोप लगाया कि बीएम शाह हास्पिटल की करतूत चैरिटेबल ट्रस्ट की मूल भावना के विपरीत होने से आम लोगों को लाभ के बजाए नुकसान उठाना पड़ रहा है। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष आदित्य सिंह के नेतृत्व में आज कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि शास्त्री नगर कान्ट्रेक्टर कालोनी सुपेला में स्थित बीएम शाह हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर द्वारा इलाज के नाम पर मनमानी की जा रही है। यह हास्पिटल श्री भानजी मोनजी शाह चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा संचालित है। लेकिन यहां पर चैरिटेबल ट्रस्ट की मूल भावना की बेखौफ अंदाज में धज्जियां उड़ाई जा रही है।
    आमजनों से इलाज के पूर्व ही अनुचित तरीके से अग्रिम राशि जमा कराने का दबाव डाला जाता है और इंकार किए जाने पर मरीज को वापस ले जाने का जवाब देकर चिकित्सकीय सेवा का अपमान किया जाना आम बात है। सरकारी योजनाओं के तहत भर्ती मरीजों के परिजनों से भी इलाज के बाद भारी भरकम राशि की मांग हास्पिटल प्रबंधन द्वारा की जाती है। कभी-कभी मरीज की मौत होने पर लाखों का बिल जमा करने के बाद भी शव देने की हास्पिटल प्रबंधन की जिद से मानवता शर्मसार होती है। जिलाध्यक्ष आदित्य सिंह ने कलेक्टर दुर्ग से बीएम शाह हास्पिटल प्रबंधन द्वारा आमजनों को दिए जा रहे अनुचित बिल की जांच करते हुए कड़ी कार्यवाही किए जाने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान शरद मिश्रा और जे संजीव, आसिफ खान उपस्थित थे।

    अहिवारा / शौर्यपथ / अहिवारा नगर पालिका चुनाव के समय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव मेेंं क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगा था और जांच में सही पाया गया। नगर कांग्रेस कमेटी अहिवारा के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री जगतगुरु गुरु रूद्रकुमार को चुनाव के बाद क्षेत्र में अध्यक्ष न बनने और उपाध्यक्ष न बनने पर समीक्षा की और जिन्होंने अंजाम दिया कैबिनेट मंत्री जगतगुरु रूद्र कुमार के द्वारा नगर कांग्रेस कमेटी अहिवारा के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने अपने लेटर पैड में 3 पार्षदों के नाम लिखे गए वार्ड नंबर 8 हेमंत साहू, वार्ड नंबर 9 दुलारी भुवन साहू, वार्ड नंबर 10 स्टालिन समुएल इन सभी को निष्कासित करने के लिए मंत्री के समक्ष दस्तावेज पेश किए गए थे। उन्ही के अनुशंसा में जिला अध्यक्ष दुर्ग ग्रामीण निर्मल कोसरे के निर्देशानुसार वार्ड नंबर 10 पार्षद स्टालिन समुएल को निष्कासित पार्टी से 6 साल के लिए कर दिया गया है। आपको जानकारी हो 26 तारीख को स्टालिन जुआ के हाई प्रोफाइल में पकड़ा गए थे। यह जुआ और सट्टा कई सालों से संचालित करने में सम्मिलित थे। पकड़ आने के बाद इसमें आरोपित होने से कांग्रेस पार्टी की छवि धूमिल हुई। इस अनुशासनहीनता को देखते हुए जिला अध्यक्ष निर्मल कोसरे ने तत्परता दिखाते हुए आज इन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिए।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision