August 05, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नई दिल्ली |  (शौर्यपथ समाचार)

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी एवं राष्ट्रपति श्री तो लम के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में भारत-वियतनाम संबंधों को नई दिशा देते हुए “एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” की घोषणा की। इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक, संस्कृति, सुरक्षा और कनेक्टिविटी सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

    प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति तो लम का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति बनने के एक महीने के भीतर ही उनकी भारत यात्रा इस बात का प्रमाण है कि वियतनाम भारत के साथ अपने संबंधों को कितनी प्राथमिकता देता है। उन्होंने विशेष रूप से बोधगया से यात्रा की शुरुआत को दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत-वियतनाम द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे वर्ष 2030 तक 25 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनमें दवा नियामक संस्थाओं के बीच समझौता, कृषि एवं मत्स्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा और नए बाजारों तक पहुंच शामिल है। अब वियतनाम में भारत के अंगूर और अनार पहुंचेंगे, जबकि भारत में वियतनाम के डूरियन और पोमेलो जैसे फलों की उपलब्धता बढ़ेगी।

    दोनों देशों ने भारत-आसियान व्यापार समझौते को वर्ष के अंत तक अद्यतन करने पर भी सहमति जताई, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, क्रिटिकल मिनरल्स, दुर्लभ खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

    कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ वित्तीय क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने और भारत की यूपीआई प्रणाली को वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम से जोड़ने पर सहमति बनी है। इसके अलावा राज्य-से-राज्य और शहर-से-शहर सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वियतनाम भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और “विजन महासागर” का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों का साझा दृष्टिकोण है और रक्षा व सुरक्षा सहयोग के माध्यम से शांति, स्थिरता और कानून आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले की वियतनाम द्वारा की गई कड़ी निंदा और आतंकवाद के खिलाफ भारत के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और वियतनाम अपनी आर्थिक सुधार नीतियों, सुशासन और प्रतिभा के बल पर तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने बौद्ध दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि “यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और वियतनाम मिलकर विकास की राह पर आगे बढ़ेंगे और साझा लक्ष्यों को हासिल करेंगे—“हम साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे और साथ जीतेंगे।”

    लखनऊ | (शौर्यपथ समाचार)

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं, जहां वे 6 और 7 मई को आयोजित होने वाले “फ्रूट होराइज़न-2026” कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह आयोजन देश के बागवानी और फल उत्पादन क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें किसानों से लेकर वैज्ञानिकों और निर्यातकों तक सभी प्रमुख हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

    पहले दिन 6 मई को गोमतीनगर स्थित होटल रेनेसां में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान निर्यातकों और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान फल निर्यात को बढ़ावा देने, वैश्विक बाजार की चुनौतियों, गुणवत्ता सुधार और प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होगी। शाम को प्रगतिशील निर्यातकों के साथ विशेष बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें निर्यात क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा।

    दूसरे दिन 7 मई को मुख्य कार्यक्रम आईसीएआर के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा में आयोजित होगा। यहां श्री चौहान किसानों, पौधशाला संचालकों और प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसके पश्चात मुख्य सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही और श्री दिनेश प्रताप सिंह भी शामिल होंगे।

    कार्यक्रम के एजेंडे में फल उत्पादन की गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन, निर्यात बढ़ाने की रणनीति, “जीरो रिजेक्शन” नीति, एफपीओ (FPO), एफपीसी (FPC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से नई तकनीकों, आधुनिक प्रसंस्करण पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों पर भी चर्चा होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि “फ्रूट होराइज़न-2026” जैसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने, बागवानी क्षेत्र में नवाचार लाने और भारत को वैश्विक फल निर्यात के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे, जिससे नीति और तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।

    लेखक: शरद पंसारी, संपादक – शौर्यपथ समाचार

    भारतीय लोकतंत्र केवल चुनावी जीत-हार का खेल नहीं है, बल्कि यह नेताओं के चरित्र, उनकी संवेदनशीलता और जनता के प्रति उनके व्यवहार का भी आईना है। हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाओं में दो प्रमुख नाम—तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी—एक बार फिर तुलना के केंद्र में हैं।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि एम.के. स्टालिन के चुनाव हारने या कोलाथुर में हार के बाद पहुंचने जैसी खबरों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस विषय को एक व्यापक राजनीतिक व्यवहार और नेतृत्व शैली के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।

    स्टालिन: संयम और संवाद की राजनीति

    एम.के. स्टालिन की राजनीतिक शैली को अक्सर शांत, संतुलित और संगठन-केंद्रित माना जाता है। वे द्रविड़ राजनीति की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें जनता के साथ निरंतर संवाद और संगठन की मजबूती को प्राथमिकता दी जाती है।

    यदि कोई नेता कठिन समय में भी जनता के बीच जाकर उनका आभार व्यक्त करता है, तो यह लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत माना जाता है। DMK का इतिहास इस बात का गवाह है कि पार्टी ने कई बार हार के बाद मजबूत वापसी की है।

    ममता बनर्जी: संघर्ष और विवादों के बीच नेतृत्व

    ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की सबसे जुझारू नेताओं में से एक रही हैं। उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद सत्ता प्राप्त की और कई बार उसे कायम रखा। उनकी छवि एक आक्रामक और जनांदोलन से उभरी नेता की है।

    हालांकि, समय-समय पर उनके राजनीतिक रुख—विशेषकर विपक्ष या चुनावी परिणामों को लेकर—विवादों में भी रहे हैं। लोकतंत्र में सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन उसकी निरंतरता और शैली सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करती है।

    जनादेश और जननेता का संबंध

    लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि होता है। एक परिपक्व नेता वही होता है जो:

    जीत में विनम्रता बनाए रखे

    हार में धैर्य और जनता के प्रति आभार प्रकट करे

    कठिन समय में भी संवाद का रास्ता न छोड़े

    निष्कर्ष: व्यवहार ही बनाता है स्थायी छवि

    नेताओं की असली पहचान चुनावी परिणामों से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार से बनती है।

    संयम, संवाद और संगठन—दीर्घकालिक राजनीति की नींव हैं

    आक्रामकता और आरोप—तात्कालिक लाभ तो दे सकते हैं, लेकिन छवि को प्रभावित भी करते हैं

    एम.के. स्टालिन और ममता बनर्जी, दोनों ही अपने-अपने राज्यों की मजबूत राजनीतिक हस्तियां हैं। लेकिन उनकी कार्यशैली और प्रतिक्रिया का अंतर यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में नेतृत्व केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि आचरण और दृष्टिकोण का भी विषय है।

    राजनांदगांव | 

    छत्तीसगढ़ की 'मदर टेरेसा' कही जाने वाली और प्रसिद्ध समाज सेविका पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के साथ कल (5 मई) एक रूह कंपा देने वाली घटना घटी। राजनांदगांव जिले में बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में उनका अपहरण करने की कोशिश की, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और सूझबूझ ने नाकाम कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एक मुख्य आरोपी महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

    सेल्फी के बहाने रची गई साजिश: घटना का पूरा विवरण

    जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी खुशबू साहू (निवासी बेमेतरा) अपने अन्य साथियों के साथ राजनांदगांव के सुकुलदैहान गांव स्थित फूलबासन बाई के निवास पर पहुंची। आरोपियों ने बड़ी चतुराई से इस साजिश को अंजाम दिया:

    बहाना: खुशबू ने फूलबासन जी को घर से बाहर बुलाया और कहा कि कार में एक दिव्यांग महिला बैठी है जो उनके साथ सेल्फी लेना चाहती है।

    अपहरण: जैसे ही फूलबासन बाई कार के पास पहुंचीं, आरोपियों ने उन्हें जबरदस्ती खींचकर गाड़ी के अंदर डाल लिया और तेजी से फरार हो गए।

    कार के अंदर बर्बरता: पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने कार के भीतर ही फूलबासन जी के हाथ-पैर बांध दिए और उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वे मदद के लिए शोर न मचा सकें।

    चिखली पुलिस चौकी पर 'मिर्गी' का ड्रामा और गिरफ्तारी

    अपहरणकर्ता खैरागढ़ मार्ग की ओर भाग रहे थे, लेकिन उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया। चिखली पुलिस चौकी के पास पुलिस की टीम रूटीन चेकिंग कर रही थी।

    पुलिस का संदेह: जब संदिग्ध कार को रोका गया, तो घबराए हुए आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठ बोला कि "फूलबासन जी को मिर्गी का दौरा पड़ा है और वे उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल ले जा रहे हैं।"

    सतर्क पुलिसकर्मी की पहचान: चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी ने कार के भीतर बंधक स्थिति में पद्मश्री फूलबासन बाई को पहचान लिया। संदिग्ध स्थिति देख पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर चारों आरोपियों (2 महिला और 2 पुरुष) को हिरासत में ले लिया।

    क्यों हुआ अपहरण? साजिश के पीछे की कहानी

    प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मुख्य आरोपी खुशबू साहू पिछले 4 महीनों से फूलबासन जी के संपर्क में थी। पुलिस को संदेह है कि:

    बेमेतरा क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के नाम पर अवैध वसूली की कोई बड़ी योजना थी।

    रोजगार प्रशिक्षण के बहाने पद्मश्री के नाम का उपयोग कर कोई बड़ा वित्तीय लाभ कमाने की साजिश रची जा रही थी।

    वर्तमान स्थिति

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई की पूरे राज्य में सराहना हो रही है। पद्मश्री फूलबासन बाई अब सुरक्षित हैं और उन्हें उनके घर पहुंचा दिया गया है। पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस अपहरण कांड के पीछे छिपे असली मकसद और किसी बड़े गिरोह के शामिल होने की पुष्टि की जा सके।

    "अपराधियों के हौसले बुलंद थे, लेकिन पुलिस की एक छोटी सी रूटीन चेकिंग ने छत्तीसगढ़ की एक महान हस्ती को बड़ी अनहोनी से बचा लिया।"

    दुर्ग | 

    दुर्ग शहर के विभिन्न वार्डों में गहराते जल संकट और बदहाल जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर आज जन-प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। शहर के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पानी की बूंद-बूंद के लिए मची हाहाकार और स्थानीय तालाबों के सूखने/खाली किए जाने के विरोध में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

    प्रमुख समस्याएँ: क्यों प्यासा है दुर्ग?

    ज्ञापन में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए प्रमुख रूप से तीन बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया:

    तालाबों का अस्तित्व खतरे में: शहर के पारंपरिक जल स्रोतों (तालाबों) को खाली किया जा रहा है, जिससे न केवल भूजल स्तर गिर रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

    अनियमित जलापूर्ति: कई मोहल्लों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी का दबाव (Pressure) बहुत कम है, और कुछ क्षेत्रों में तो घंटों तक पानी की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

    भीषण गर्मी में आम नागरिक बेहाल: पारा बढ़ने के साथ ही पानी की खपत बढ़ी है, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभाग सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रहे हैं।

    ज्ञापन की मुख्य मांगें

    कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

    जलापूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग: उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए जहाँ पानी नहीं पहुँच रहा है और वहां टैंकरों के बजाय पाइपलाइन व्यवस्था को सुधारा जाए।

    तालाबों का संरक्षण: तालाबों को खाली करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए जल संचय की योजना बनाई जाए।

    दोषियों पर कार्रवाई: जलापूर्ति बाधित होने के पीछे यदि कोई तकनीकी लापरवाही या प्रशासनिक ढिलाई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    प्रशासनिक आश्वासन

    कलेक्टर महोदय ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को वस्तुस्थिति की जांच करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि "हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

    "पानी का अधिकार, बुनियादी अधिकार है। दुर्ग की जनता को प्यासा रखकर विकास की बातें बेमानी हैं। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस पर त्वरित एक्शन लेगा।"

    कोलकाता | 

    पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ लोकतांत्रिक परंपराएं और संवैधानिक नियम आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद राज्य में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) की आहट सुनाई दे रही है। चुनावी नतीजों के बाद उभरी यह स्थिति अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजभवन की शक्तियों और संविधान के अनुच्छेदों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

    संवैधानिक मर्यादा और राज्यपाल की शक्तियाँ

    विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना किसी व्यक्तिगत इच्छा का नहीं, बल्कि विधायी संख्याबल का विषय है। इस स्थिति में निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:

    अनुच्छेद 164 और 'प्रसादपर्यंत' का सिद्धांत: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और सरकार राज्यपाल के "प्रसादपर्यंत" (Pleasure of the Governor) पद पर बनी रहती है। यदि विधानसभा में बहुमत खो जाता है, तो राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने की संवैधानिक शक्ति होती है।

    फ्लोर टेस्ट (Floor Test): यदि बहुमत को लेकर कोई भी धुंधली तस्वीर सामने आती है, तो 'शक्ति परीक्षण' ही एकमात्र रास्ता है। राज्यपाल सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दे सकते हैं। आंकड़े पक्ष में न होने पर इस्तीफा अनिवार्य हो जाता है।

    अनुच्छेद 356 की संभावना: यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देतीं और नई सरकार के गठन में बाधा उत्पन्न होती है, तो इसे 'संवैधानिक तंत्र की विफलता' माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।

    ममता बनर्जी की रणनीति: 'फ्री बर्ड' बनाम कानूनी लड़ाई

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी भावी रणनीति के संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को सड़क और अदालत दोनों जगह लड़ेंगी:

    चुनावी नतीजों को चुनौती: मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए परिणामों को न्यायालय में चुनौती देने का मन बनाया है।

    जनता के बीच संघर्ष: उन्होंने खुद को एक "फ्री बर्ड" की संज्ञा देते हुए कहा है कि वे अब आम नागरिक के रूप में जनता के बीच जाकर 'संघर्ष' करेंगी।

    INDIA गठबंधन का साथ: राज्य की राजनीति से इतर, ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।

    निष्कर्ष: अंतिम निर्णय संख्याबल का

    लोकतंत्र की बुनियादी शर्त 'बहुमत' है। यदि विपक्षी खेमे (भाजपा) के पास स्पष्ट बहुमत है, तो राजभवन को नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी मुख्यमंत्री बिना सदन के विश्वास के अनिश्चितकाल तक पद पर काबिज नहीं रह सकता।

    आने वाले 48 घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक होने वाले हैं। क्या राज्य एक सुचारू सत्ता परिवर्तन देखेगा, या फिर यह विवाद देश के सबसे बड़े कानूनी और संवैधानिक मामलों में तब्दील हो जाएगा? पूरे देश की नजरें अब कोलकाता के राजभवन पर टिकी हैं।

    *बालोद शौर्यपथ संवाददाता,*

    छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को आखिरकार उसका ‘कप्तान’ मिल गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लंबा ने सोमवार को वो फैसला कर दिया जिसका पूरे प्रदेश को इंतजार था - संजारी-बालोद की दमदार विधायक संगीता सिन्हा अब महिला कांग्रेस की कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हैं।

    *‘सियासी पारा हाई’*  

    सोमवार दोपहर आदेश की कॉपी वायरल होते ही कांग्रेस खेमे में जश्न और विपक्ष में सन्नाटा छा गया। व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर चौपाल तक बस एक ही नाम - संगीता सिन्हा। कार्यकर्ता बोले - “दीदी आईं, अब आंधी आएगी”।

    *बालोद बना ‘मिनी रायपुर’, रात तक बजी बधाइयां*  

    नियुक्ति की खबर लगते ही संजारी-बालोद में दिवाली जैसा नजारा था। संगीता सिन्हा के घर के बाहर आतिशबाजी, ढोल और लड्डुओं का दौर चला। बुजुर्ग बोले - “बेटी ने पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया”। संगीता सिन्हा की मिलनसार छवि और हर घर में पहचान ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

    *‘महिला कार्ड’ से 2026 की बिसात*  

    अलका लंबा ने संगीता सिन्हा को कमान देकर सीधा 2026 के चुनाव पर निशाना साधा है। संगीता सिन्हा का जमीनी नेटवर्क और महिलाओं में पकड़ कांग्रेस के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। एक कार्यकर्ता ने कहा - “संगीता दीदी जिस घर में चाय पी लें, उस घर का वोट पक्का”।

    *हिमांशु लावत्रे ने दी बधाई*  

    युवा नेता हिमांशु लावत्रे ने कहा - “संगीता सिन्हा जी की नियुक्ति से महिला कांग्रेस को नई दिशा मिलेगी। उनकी मिलनसार कार्यशैली पूरे संगठन में जोश भरेगी”।

    *अब मिशन ‘आधी आबादी’*  

    पद संभालते ही संगीता सिन्हा का ऐलान - “अब हर ब्लॉक, हर गांव, हर वार्ड में महिला कांग्रेस की टीम खड़ी करेंगे। 2026 में आधी आबादी का पूरा आशीर्वाद कांग्रेस को दिलाएंगे।”

    भिलाई ब्यूरो 

    भिलाई। छत्तीसगढ़ और नागपुर विदर्भ क्षेत्र में तबलीग़ जमात के 'अमीर' हाजी मोहम्मद असलम का शनिवार 2 मई को तड़के दो बजे इंतकाल हो गया। हाजी असलम कई दिनों से बीमार चल रहे थे। खुर्सीपार निवासी सैय्यद असलम ने बताया कि मरहूम हाजी मोहम्मद असलम के जनाजे की नमाज़ यंग मुस्लिम फुटबॉल ग्राउंड मोमिनपुरा नागपुर में उनके बेटे मौलाना अब्दुल्ला ने पढ़ाई। 

     नमाजे जनाजा मे निजामुद्दीन मरकज दिल्ली, बरार, महाराष्ट्र, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के उलेमा के साथ आम लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के मुस्लिम समाज के लोगों ने हजारों की तादाद में नागपुर पहुंच कर अपनी अकीदत का इजहार किया। 

    गौरतलब है कि तबलीग़ जमात में आध्यात्मिक स्तर पर संगठन प्रमुख 'अमीर' का पद मशविरा से तय होता है। हाजी मोहम्मद असलम नागपुर के रहने वाले थे और तबलीग़ के काम को लेकर छत्तीसगढ़ बरार , महाराष्ट्र सहित देश विदेश में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि हाजी मोहम्मद असलम ने अल्लाह के दीन और हज़रत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की पाकीजा जिंदगी को अपनाने लोगों की सच्ची रहनुमाई की। समाज के लिए उनका दुनिया से जाना एक रहनुमा एक सच्चा दाई (प्रेरक व्यक्तित्व) और बुर्जुग शख्सियत का चला जाना है।

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    आईकेएफ सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान संवाद किया वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच ने

    भिलाई। टाइगर कैपिटल के सहयोग से इंडिया खेलो फुटबॉल (आईकेएफ) के सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने पालकों और उभरते फुटबॉलरों से संवाद किया। उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों की परवरिश में सामने आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए पालकों को कुछ सुझाव भी दिए। उल्लेखनीय है कि यहां 2 और 3 मई 4 अलग-अलग सत्रों में सेक्टर-2 के फुटबॉल ग्राउंड में ट्रायल रखा गया था। जिसमें 200 से ज्यादा उभरते फुटबॉलरों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया।

    ट्रायल के आखिरी दौर के बाद 3 मई की शाम पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन का संवाद सत्र रखा गया। उन्होंने इस दौरान समाज में खास तौर पर बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजीटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता को बड़ी चुनौती बताया।

    उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज स्मार्ट फोन की लत के चलते मैदान के बजाए डिजीटल दुनिया में खेल खेला जा रहा है, जो हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों को सलाह दी कि दूसरों को भी खेल के लिए प्रेरित करें।

    जैन ने पालकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय दें और उन्हें सुनने की कोशिश करें। क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए माता-पिता से बेहतर काउंसलर कोई नहीं होता। जिस तरह किसी भी पौधे की शुरूआती अवस्था में सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ से घेरा लगाना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह बच्चों को भी एक उम्र तक पैरेंट्स की जरूरत पड़ती है। इसलिए अपने बच्चों को भरपूर समय दें और उनके खानपान के साथ नींद पर भी ध्यान दें। इस दौरान कुछ पालकों और बच्चों ने सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की।

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    तमिलनाडु की राजनीति में इस बार ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने लोकतंत्र की असली ताकत को फिर से साबित कर दिया। विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में जहां विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया, वहीं एक सीट ऐसी रही जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    ? तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर श्रीनिवास सेतुपति ने इतिहास रच दिया। उन्होंने के.आर. पेरियाकरुप्पन को महज़ 1 वोट से हराकर राजनीति के दिग्गज को पटखनी दे दी।

    पेरियाकरुप्पन, जो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के कद्दावर नेता और मंत्री रहे हैं, 2006 से लगातार 4 बार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे थे। उनका प्रभाव इतना मजबूत था कि इस सीट को लगभग ‘अजेय गढ़’ माना जाता था। लेकिन इस बार जनता के एक-एक वोट ने सियासी समीकरण बदल दिए।

    ? जीत का अंतर—सिर्फ 1 वोट!

    लोकतंत्र के इतिहास में यह परिणाम एक मिसाल बन गया है, जहां एक वोट ने न सिर्फ चुनाव का नतीजा बदला, बल्कि एक लंबे समय से स्थापित राजनीतिक दबदबे को भी खत्म कर दिया।

    ? राजनीतिक संदेश क्या है?

    यह परिणाम साफ संकेत देता है कि जनता का मूड बदल रहा है और अब हर वोट की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। नए चेहरों और नई सोच को मतदाता खुलकर मौका दे रहे हैं।

    ? सरकार गठन की तस्वीर

    हालांकि टीवीके को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के समर्थन से विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ नजर आ रहा है।

    ? निष्कर्ष:

    तिरुपत्तूर की यह सीट सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की ताकत का जीवंत उदाहरण बन गई है—जहां “एक वोट” भी इतिहास लिख सकता है।

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