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घर-घर तिरंगा लगाने के निर्णय लेने के हृदय परिवर्तन वाले फैसले पर प्रधानमंत्री और भाजपा का धन्यवाद
घर पर तिरंगा लेकर आने पर भाजपा कार्यकर्ताओं की आरती उतारी जायेगी
खादी के अलावा अन्य कपड़ों का तिरंगा लगाने का निर्णय स्वदेशी व बुनकरों का अपमान
राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी ने भी खादी के बने झंडे फहराने की अपील की है
रायपुर / शौर्यपथ / आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने हर घर में तिरंगा लगाने की अपील की है. उस अपील पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा घर घर जाकर तिरंगा लगाने का निर्णय लिया है. इसके लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव राजेश तिवारी ने कहा है कि इस निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं भारतीय जनता पार्टी को धन्यवाद देता हूं, भाजपा कार्यकर्ता या आरएसएस के स्वयंसेवक उनके घर तिरंगा झंडा लेकर आयेंगे तो वे उनकी आरती उतार कर स्वागत करेंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री जी आरएसएस के स्वयंसेवक रहे है और आरएसएस से निकल कर ही भाजपा बनी है, और आज उनका हृदय परिवर्तन हो गया है. यह वही आरएसएस है जिसने तिरंगे को राष्ट्रध्वज मानने से इंकार किया था.
आरएसएस ने अपने अंग्रेज़ी मुखपत्र (आर्गनाइज़र) के 14 अगस्त, 1947 वाले अंक में राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर तिरंगे के चयन की खुल कर भर्त्सना की थी व कहा था कि तीन का आँकड़ा अपने आप में अशुभ है और एक ऐसा झण्डा जिसमें तीन रंग हों बेहद ख़राब मनोवैज्ञानिक असर डालेगा और देश के लिए नुक़सानदेय होगा. 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गाँधी की हत्या कर दी गयी तो इस तरह की खबरें आई थीं कि आरएसएस के लोग तिरंगे झंडे को पैरों से रौंद रहे थे. यह खबर उन दिनों के अखबारों में खूब छपी थीं.
आजादी के 52 वर्षों तक आरएसएस के कार्यालय में तिरंगा झंडा नहीं फहराता था बल्कि भगवा झंडा फहराया जाता था. पहली बार तिरंगा झंडा 26 जनवरी 2001 को नागपुर के आरएसएस कार्यालय में बाबा मेंढे, रमेश कलम्बे और दिलीप चटवानी ने झंडा फहराने की कोशिश की, जिसके विरोध में उनके विरूद्ध पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी. अगस्त 2013 को नागपुर की एक निचली अदालत ने वर्ष 2001 के एक मामले में दोषी तीन आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया था. इन तीनों आरोपियों का जुर्म तथाकथित रूप से सिर्फ इतना था कि वे 26 जनवरी 2001 को नागपुर के रेशमीबाग स्थित आरएसएस मुख्यालय में घुसकर गणतंत्र दिवस पर तिरंगा झंडा फहराने के प्रयास में शामिल थे. 2001 तक आरएसएस ने अपने मुख्यालय में कभी झंडा नहीं फहराया था 2002 से आरएसएस कार्यालय में झंडा फहराना प्रारंभ हुआ क्योंकि देश को पता चल गया था कि वे तिरंगा को राष्ट्रध्वज के रूप में आज तक स्वीकार नहीं कर पाये हैं . जो आज देशभक्त बन रहे हैं यह उनकी असलियत है।
कर्नाटक सरकार में पूर्व मंत्री और मौजूदा भाजपा विधायक ईश्वरप्पा ने दावा किया है कि आरएसएस का भगवा झंडा एक दिन राष्ट्रीय ध्वज बनेगा यह भाजपा का असली चरित्र है, क्या अपने पार्टी के विधायक के ब्यान के लिए प्रधानमंत्री देशवासियों से माफी मांगेंगे. राजेश तिवारी ने केन्द्र सरकार झण्डा संहिता में परिवर्तन कर खादी के अलावा अन्य कपड़ों का तिरंगा झंडा फहराने की अनुमति देने की निंदा की है. खादी हमारी स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान रही है, साथ ही आजादी के आंदोलन के समय विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई थी और खादी को अपनाने का अपील देशवासियों से की गई थी, जिससे हमारे देश के बुनकरों को रोजगार मिल सके. प्रधानमंत्री के इस निर्णय से लाखों बुनकरों को झण्डा बनाने का आर्डर मिलता वह अब नही मिल पायेगा. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी जी से अपील की है कि खादी से बना तिरंगा देश के आत्मबल को दर्शाता है और इससे लाखों लोगों की जीविका जुड़ी है। आज के ऐतिहासिक दिन पर आशा है कि आप खादी से झंडा बनाने वालों की बात सुनेंगे और उनकी मांग पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेंगे.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
