August 25, 2026
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    कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमलता साहू की होती है हार तो बड़ा कारण होंगे पूर्व विधायक वोरा और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज

    कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमलता साहू की होती है हार तो बड़ा कारण होंगे पूर्व विधायक वोरा और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमलता साहू की होती है हार तो बड़ा कारण होंगे पूर्व विधायक वोरा और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज
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      दुर्ग। शौर्यपथ।

      नगरी निकाय चुनाव में 11 फरवरी को शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो चुका है प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 15 फरवरी को हो जाएगा मतदान होने के बाद शहर में चर्चा का विषय राजनीतिक पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर रहा है एक तरफ ऐसी चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी के लगभग 20 पार्षद चुनावी जंग में जीत हासिल करेंगे वहीं एक बार फिर शहरी सरकार में कांग्रेसी पार्षदों की संख्या ज्यादा होगी और सभापति का पद कांग्रेस के पास पहुंच जाएगा वहीं दूसरी तरफ महापौर के लिए भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी श्रीमती अलका वाघमार की जीत को निश्चित माना जा रहा है.
        ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में कांग्रेसी पार्षद ज्यादा संख्या में जीत कर आ रहे हैं ऐसे में कांग्रेसी महापौर को हार का सामना क्यों करना पड़ रहा है कांग्रेसी पार्षदों के जीत की संख्या ज्यादा होने की चर्चा से इस बात को बल मिल रहा है कि शहर में कांग्रेस के कार्यकर्ता अभी भी अपनी जमीनी पकड़ को मजबूत बने हुए हैं परंतु संगठन की दृष्टि से कांग्रेस एक कमजोर संगठन के रूप में फिर उभर कर सामने आ गई दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस संगठन का पूरा होल्ड पूर्व विधायक अरुण वोरा के पास सालों से है और इस कमजोर संगठन में कोई बड़ा फेरबदल न होने का प्रमुख कारण  अरुण वोरा ही माने जा रहे हैं .पूर्व विधायक अरुण वोरा कांग्रेस संगठन के निष्क्रिय और कमजोर जिला अध्यक्ष को बदलने में असफल हुए .ऐसी चर्चा है कि एक बार बैठक में जिला अध्यक्ष ने अपनी पीड़ा भी कह दी कि उन्हें उनके हिसाब से काम करने नहीं दिया जा रहा और वह इस्तीफा दे रहे हैं परंतु ना तो उनका इस्तीफा मंजूर हुआ और ना ही जिले का अध्यक्ष किसी अन्य के हाथों सौपा गया वहीं सालों से ब्लॉक अध्यक्ष भी नहीं बदले गए .कांग्रेस सरकार के समय ब्लॉक अध्यक्षों को चखना सेंटर मिलने की चर्चा के बाद ब्लॉक अध्यक्षों की छवि भी धूमिल हुई वहीं पूर्व के कार्यकाल में कांग्रेसी पार्षद ठेकेदारी में और शौचालय सञ्चालन सहित राशन दुकान लेने को ही अपनी उपलब्धि मानते रहे संगठन की मजबूती से ना उन्हें कोई लगाव नजर आया और ना ही संगठन के लिए उनके द्वारा कोई विशेष पहल की गई .
       युवा कांग्रेस अध्यक्ष की बात करें तो युवा कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति भी कांग्रेस नेता अरुण वोरा द्वारा की गई यह अलग विषय है कि अब वह भी गुटबाजी की चपेट में है . युवा अध्यक्ष के विषय में भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का यही कहना है कि वह सिर्फ ठेकेदारी करने के लिए युवा कांग्रेस अध्यक्ष बने थे युवा कांग्रेस अध्यक्ष की शक्ति कभी आंदोलन में नजर नहीं आई युवा कांग्रेस अध्यक्ष अपनी शक्ति प्रदर्शन का नजारा तब दिखाएं जब उनकी टिकट काटी गई और अपने साथियों सहित पूर्व विधायक अरुण वोरा के समक्ष बड़ी संख्या में विरोध करने पहुंच गए . वहीं निष्क्रिय कार्यशैली की बात करे तो मतदान के एक दिन पहले युवा कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा वार्ड प्रभारी की नियुक्ति कर समाचार पत्रों में झूठी वाह वाही भी बटोरी गई परंतु जहां एक और भारतीय जनता पार्टी संगठन पिछले 6 महीना से नगर निगम चुनाव की तैयारी में बैठकों का दौर आरंभ कर चुकी थी वहीं कांग्रेस संगठन में बैठकों की बात तो दुर्ग कांग्रेस की  आपसी गुटबाजी चुनावी समर में अपनी चरम सीमा पर नजर आई .
       दुर्ग शहर कांग्रेस की राजनीति की बात करें तो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का पूर्व विधायक अरुण वोरा से मोह भंग हो गया ऐसे में कांग्रेस संगठन लगातार कमजोर स्थिति में नजर आ रहा है अगर जल्द बदलाव नहीं हुई तो कोई बड़ी बात नहीं कि कांग्रेस अपने और बुरे दौर में गुजरेगी कांग्रेस की राजनीति करने वाले कार्यकर्ता भी अब यह मानने लगे हैं कि दुर्ग शहर में संगठन में बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है और पूर्व विधायक अरुण वोरा के वर्चस्व की समाप्ति के बाद ही कांग्रेस संगठन एक बार फिर सक्रिय भूमिका में पूरी दमदारी के साथ नजर आएगा .वर्तमान समय में कांग्रेस से महापौर प्रत्याशी प्रेमलता साहू शहर में चर्चा का विषय जरूर रही परंतु संगठन की निष्क्रियता प्रेमलता साहू के हार का बड़ा कारण माना जा रहा है वही प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दीपक बैज की कार्यप्रणाली की निष्क्रियता का प्रमाण यही है कि दुर्ग जिले में कांग्रेस लगातार अपनी लोकप्रिय खोती जा रही है और संगठन कमजोर होने के बावजूद भी प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दुर्ग कांग्रेस में कोई बदलाव की दिशा में सार्थक कदम नहीं उठाया गया परिणाम स्वरुप फिर एक बड़ी हार की ओर दुर्ग कांग्रेस पहुंच गई वहीं पार्षदों की ज्यादा संख्या (चर्चो अनुसार )यह भी दर्शा रही है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता अभी भी मजबूत है परंतु नेतृत्वकर्ता काफी कमजोर जिसके परिवर्तन की आवश्यकता अब कांग्रेसी कार्यकर्ता भी कर रहे हैं ?

    राजनितिक चर्चा के आधार पर

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