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June 08, 2026
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की आहट, पीसीसी अध्यक्ष पद की दौड़ में टी.एस. सिंहदेव सबसे आगे

  • rounak group

रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा होने जा रहा है, जिसके साथ ही संगठन में बड़े फेरबदल की संभावनाओं ने जोर पकड़ लिया है। आगामी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस आलाकमान संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।

टी.एस. सिंहदेव ने जताई संगठन संभालने की इच्छा

सरगुजा अंचल के प्रभावशाली नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पहली बार सार्वजनिक रूप से संगठन की कमान संभालने की इच्छा व्यक्त की है। हाल के दिनों में उनकी संगठनात्मक सक्रियता बढ़ी है और वे लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में दिखाई दे रहे हैं। सिंहदेव का मानना है कि कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी साफ-सुथरी छवि, प्रशासनिक अनुभव और प्रदेशभर में स्वीकार्यता उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।

दीपक बैज भी दावेदारी में बरकरार

वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल भले ही समाप्ति की ओर हो, लेकिन वे अभी भी अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं। बस्तर क्षेत्र के आदिवासी चेहरे के रूप में उनकी पहचान कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनकी पकड़ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उनके समर्थक नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में जल्दबाजी नहीं चाहते।

भूपेश बघेल का नाम भी चर्चा में

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन को एक आक्रामक और जनाधार वाले नेतृत्व की जरूरत है। बघेल समर्थकों का तर्क है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।

हालांकि अभी तक बघेल की ओर से इस विषय पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान केवल प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर ही नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन के व्यापक फार्मूले पर भी विचार कर रहा है। चर्चा है कि नए अध्यक्ष के साथ दो कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।

यदि टी.एस. सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो आदिवासी, ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

कार्यकारी अध्यक्ष पद के संभावित चेहरे

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि मुख्य अध्यक्ष पद किसी गैर-आदिवासी नेता को दिया जाता है तो आदिवासी समाज को संगठन में मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

इंद्रशाह मंडावी और लखेश्वर बघेल के नाम भी आदिवासी नेतृत्व के रूप में चर्चा में हैं। वहीं ओबीसी वर्ग से राम कुमार यादव का नाम तेजी से उभर रहा है।

अनुसूचित जाति वर्ग से पूर्व मंत्री शिव डहरिया की सक्रियता भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि संगठन में सामाजिक संतुलन स्थापित करने के लिए उन्हें भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

सचिन पायलट और आलाकमान की नजर

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट लगातार संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सभी संभावित नामों, क्षेत्रीय प्रभाव, सामाजिक समीकरणों और चुनावी रणनीति का विस्तृत अध्ययन कर रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व का लक्ष्य केवल नया अध्यक्ष चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संगठनात्मक ढांचा तैयार करना है जो 2028 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दे सके।

2028 की तैयारी का संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीसीसी अध्यक्ष का चयन केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा, बल्कि यह कांग्रेस की आगामी चुनावी रणनीति का आधार भी बनेगा। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक प्रभाव जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

फिलहाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह संगठन की दिशा और भविष्य की राजनीति तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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