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चेन्नई/शौर्यपथ।
तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के नेतृत्व वाली नवगठित तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने विधानसभा में भारी बहुमत के साथ विश्वास मत हासिल कर लिया।
13 मई 2026 को आयोजित फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि विरोध में केवल 22 वोट पड़े। इस परिणाम ने न केवल नई सरकार की स्थिरता पर मुहर लगा दी, बल्कि राज्य की पारंपरिक राजनीतिक धुरी को भी पूरी तरह बदल दिया।
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बचाने के लिए साधारण बहुमत का आंकड़ा 118 था, जिसे विजय सरकार ने बेहद सहजता और प्रभावशाली राजनीतिक प्रबंधन के साथ पार कर लिया।
TVK के पास अपने 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके, आईयूएमएल और एएमएमके जैसे सहयोगी दलों ने सरकार को खुला समर्थन देकर सत्ता पक्ष को और मजबूती प्रदान की।
विश्वास मत के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक झटका विपक्षी दल AIADMK को लगा।
सूत्रों और सदन की स्थिति के अनुसार, पार्टी के लगभग 25 बागी विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया।
इस बगावत के चलते विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी का खेमाअसहज स्थिति में दिखाई दिया और उनके समर्थन में केवल 22 विधायक ही सरकार के खिलाफ मतदान कर सके।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम AIADMK के भीतर गहरे नेतृत्व संकट और असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
हालांकि मतदान की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मुख्य विपक्षी दल DMK के 59 विधायकों ने पूरी प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
DMK के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “जनादेश से पलायन” करार दिया।
विश्वास मत के दौरान भाजपा के एकमात्र विधायक तथा पीएमके के 4 विधायकों ने मतदान से दूरी बनाते हुए तटस्थ रुख अपनाया।
इस रणनीति को भविष्य की संभावित राजनीतिक संभावनाओं और गठबंधन समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए थलापति विजय ने बेहद कम समय में जिस प्रकार राज्य की सत्ता तक पहुंच बनाई, वह दक्षिण भारतीय राजनीति के इतिहास में एक असाधारण राजनीतिक उभार माना जा रहा है।
फ्लोर टेस्ट में मिली प्रचंड सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि TVK अब केवल एक उभरता हुआ दल नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता का नया केंद्र बन चुका है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस शक्ति परीक्षण के बाद विजय सरकार अब प्रशासनिक फैसलों और जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकेगी।
तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को हुए इस विश्वास मत ने एक संदेश साफ कर दिया —
राज्य की राजनीति अब नए नेतृत्व, नए गठबंधन और नए सत्ता समीकरणों के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
