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May 15, 2026
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सीबीआई चयन पर सियासी संग्राम: राहुल गांधी के विरोध के बीच प्रवीण सूद को मिला एक और सेवा विस्तार

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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के निदेशक चयन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति में नए निदेशक के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा सीबीआई निदेशक Praveen Sood के कार्यकाल को एक वर्ष और बढ़ाने का फैसला लिया है। यह निर्णय अब राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।

चयन समिति की बैठक में टकराव

मई 2026 में आयोजित चयन समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi शामिल थे। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों की “सेल्फ-अप्रेजल” और “360-डिग्री असेसमेंट रिपोर्ट” समिति के सामने प्रस्तुत नहीं की।

राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को “महज औपचारिकता” और “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए असहमति नोट सौंपा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद सरकार के फैसलों पर केवल “रबर स्टैंप” लगाने के लिए नहीं है। नए नामों पर सहमति न बनने के बाद उन्होंने बैठक से खुद को अलग कर लिया।

सरकार ने क्यों बढ़ाया कार्यकाल?

चयन प्रक्रिया में गतिरोध के बीच केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का हवाला देते हुए प्रवीण सूद को एक और सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया।

1986 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद को मई 2023 में पहली बार दो वर्ष के लिए सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। मई 2025 में उन्हें पहला विस्तार मिला और अब उनका कार्यकाल मई 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

नए दावेदारों की उम्मीदों पर विराम

सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में शामिल GP Singh और Shatrughan Singh Kapoor जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति फिलहाल टल गई है। राजनीतिक सहमति नहीं बनने के कारण अब यह मामला और अधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है। ऐसे में सीबीआई प्रमुख के चयन को लेकर उठा यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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