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केरसई में निर्मित महतारी सदन बना महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता का केंद्र
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के केरसई में निर्मित महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए सशक्तिकरण का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। इस भवन के निर्माण से महिलाओं को समूह की नियमित बैठकों, आजीविका गतिविधियों तथा सामाजिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है।
महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती बबीता गुप्ता ने बताया कि पहले समूह की बैठक आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं होने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कभी किसी सदस्य के घर तो कभी खुले स्थान या पेड़ के नीचे बैठक करनी पड़ती थी। विशेष रूप से बारिश और गर्मी के मौसम में बैठकों का संचालन प्रभावित होता था, जिससे समूह की गतिविधियों पर भी असर पड़ता था।
उन्होंने बताया कि महतारी सदन बनने के बाद अब सभी सदस्य नियमित रूप से एक ही स्थान पर बैठक कर रही हैं। यहां समूह की बचत, ऋण, आजीविका गतिविधियों, प्रशिक्षण तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवस्थित ढंग से चर्चा होती है। इससे समूह का संचालन अधिक प्रभावी होने के साथ महिलाओं की सहभागिता भी बढ़ी है।
श्रीमती बबीता गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निर्मित महतारी सदन ने महिलाओं की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान किया है। अब उन्हें बैठकों के लिए स्थान की चिंता नहीं रहती और समूह की सभी गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी सदन महिलाओं के लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि संगठन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन गया है। यह केंद्र महिलाओं को संगठित होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे मुख्य अतिथि, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे अध्यक्षता
डिजिटल तकनीकों के समावेश से न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली, अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली तथा डिजिटल न्यायिक समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर होगा मंथन
रायपुर / शौर्यपथ / न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सशक्त, सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आगामी 2 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में "नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना" विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीकों के समावेश के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी कार्यक्रम में सहभागी होंगे।
राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला के दौरान अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस), डिजिटल न्यायिक समन्वय, नवीन आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण तथा न्याय एवं पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों के संबंध में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।
यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य समन्वित डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नागरिकों को त्वरित, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार ने अमानक दुग्ध उत्पादों पर सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा फैसला लिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ की पूरी सीमा में ऐसे "डेयरी एनालॉग" या गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, जो असली दूध उत्पाद होने का भ्रम पैदा करते हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 एवं 18 के तहत यह कार्रवाई की गई है। आदेश में विशेष रूप से पनीर, क्रीम, मक्खन जैसे अमानकीकृत उत्पादों पर रोक लगायी गई है, जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा या वनस्पति तेल का उपयोग किया जाता है।
*किन उत्पादों पर लागू होगा प्रतिबंध:*
- जो उत्पाद वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं
- जिनमें दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का उपयोग हो
- जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या प्रदर्शन उपभोक्ताओं को गुमराह करता हो
हालांकि फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पादों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से एक वर्ष तक, या FSSAI द्वारा अंतिम नियम जारी होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा।खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी विस्तृत आदेश का पालन सभी संबंधित प्राधिकारियों और खाद्य कारोबार संचालकों को करना अनिवार्य होगा।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की
रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने आज बेमेतरा जिला मुख्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा जिले के समग्र विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बैठक में अधिकारियों से कहा कि वे सेवा, शिद्दत और संकल्प के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा बेमेतरा को विकास के हर क्षेत्र में प्रदेश का अग्रणी जिला बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करें। उन्होंने कहा कि बेमेतरा भौगोलिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से अनुकूल जिला है, जहां बेहतर कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयाल दास बघेल, विधायक श्री दीपेश साहू और ईश्वर साहू तथा कलेक्टर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगाईं भी बैठक में शामिल हुईं।
उन्होंने कहा कि एक सफल अधिकारी वही होता है जो पूर्व नियोजित कार्ययोजना के साथ निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करता है। सभी अधिकारी जनसेवक की भावना से कार्य करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरें, स्वयं का नियमित मूल्यांकन करें तथा अपनी कमियों को दूर कर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करें।
जल संचय, कृषि एवं स्वास्थ्य पर विशेष जोर
उप मुख्यमंत्री ने खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध कराने, मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने तथा जल संरक्षण, जल संवर्धन और जल संचयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत निर्मित योजनाओं को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित कर उनके सुचारु संचालन पर भी बल दिया। उन्होंने बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की शीघ्र मरम्मत तथा सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।
समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूर्ण करने के निर्देश
श्री साव ने जिले में संचालित विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी स्वीकृत निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, आदिवासी विकास प्राधिकरण सहित अन्य निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की।
जल संरक्षण, पर्यावरण एवं स्वच्छता पर विशेष फोकस
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच जल संकट और प्रदूषण बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इसलिए जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
उन्होंने वर्षा जल संग्रहण, पुराने तालाबों एवं नहरों के जीर्णोद्धार, जल संरक्षण अभियान, व्यापक वृक्षारोपण, पार्कों के विकास तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरे के पृथक्करण और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई पर विशेष जोर दिया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने कहा
श्री साव ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। खेल बच्चों में अनुशासन, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता विकसित करते हैं, तथा बच्चों को नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखते हैं। उन्होंने सभी बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की मंशा है कि प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर समस्याओं का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि सहित सभी योजनाओं में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने, कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
समन्वय से विकास को मिलेगी गति
श्री साव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की सलाह देते हुए कहा कि बेमेतरा कृषि एवं उद्योग दोनों क्षेत्रों में अपार संभावनाओं वाला जिला है। यदि सभी अधिकारी पूरी निष्ठा और समर्पण से कार्य करें तो जिला विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।
विकास कार्यों में गंभीरता लाने के निर्देश – श्री दयाल दास बघेल
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी स्वीकृत विकास कार्यों को गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरा करने तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से अमल करने के निर्देश दिए।
बैठक में बेमेतरा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी और पुलिस अधीक्षक उत्रिलोक बंसल सहित सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस की सोशल पुलिसिंग से 200 लोगों के गुम मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया गया। लगभग 60 लाख रुपये की संपत्ति उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाई गई। दुर्ग पुलिस के सतत तकनीकी एवं मैदानी प्रयासों से गुम हुए 200 मोबाइल फोन बरामद किए गए। शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-06 दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय शर्मा ने मोबाइल फोन का वितरण किया।
दुर्ग पुलिस द्वारा आम नागरिकों की गुम हुई संपत्ति को उनके वास्तविक स्वामियों तक वापस पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-06, दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से गुम हुए एवं साइबर तकनीकी सहायता से बरामद किए गए 200 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये है, उनके वास्तविक स्वामियों को विधिवत सुपुर्द किए गए।
गुम मोबाइल की सूचना प्राप्त होने के पश्चात जिले की साइबर सेल एवं संबंधित थाना पुलिस द्वारा प्रत्येक प्रकरण का तकनीकी विश्लेषण किया गया। सीईआईआर (CEIR) पोर्टल, तकनीकी ट्रैकिंग, विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से समन्वय तथा अन्य राज्यों एवं जिलों की पुलिस इकाइयों के सहयोग से मोबाइल फोनों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बरामद किया गया। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत सभी मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंपे गए। कार्यक्रम के दौरान मोबाइल प्राप्त करने वाले नागरिकों ने अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दुर्ग पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी, किन्तु दुर्ग पुलिस के निरंतर प्रयासों से उनकी महत्वपूर्ण संपत्ति पुनः प्राप्त हो सकी।
दुर्ग पुलिस द्वारा संचालित यह अभियान केवल गुम संपत्ति की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान, पारदर्शी कार्यप्रणाली एवं संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस एवं नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। दुर्ग पुलिस भविष्य में भी इसी प्रकार आम नागरिकों की सहायता एवं जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निरंतर प्रभावी कार्यवाही करती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मोबाइल प्राप्त करने वाले नागरिकों ने अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दुर्ग पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी, किन्तु दुर्ग पुलिस के निरंतर प्रयासों से उनकी महत्वपूर्ण संपत्ति पुनः प्राप्त हो सकी।
उक्त कार्यवाही में जिला साइबर सेल, समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों, विवेचना अधिकारियों तथा मोबाइल रिकवरी अभियान में संलग्न समस्त पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयास, तकनीकी दक्षता एवं सतत फॉलोअप के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में गुम मोबाइल बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया जा सका। दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि मोबाइल गुम होने अथवा चोरी होने की स्थिति में तत्काल संबंधित थाना, साइबर सेल अथवा CEIR पोर्टल के माध्यम से सूचना दर्ज कराएं। समय पर सूचना एवं आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने से मोबाइल की शीघ्र ट्रैकिंग एवं बरामदगी की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही अपने मोबाइल की सुरक्षा के लिए स्क्रीन लॉक, पासवर्ड, बायोमेट्रिक सुरक्षा एवं आवश्यक सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग अवश्य करें।
ढाबों में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, कर्मचारियों का दावा- धमकाकर करवाए गए हस्ताक्षर, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं; जांच की उठी मांग
बालोद। बालोद जिले के आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं और अवैध शराब कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के उप निरीक्षक आसाराम के कार्यक्षेत्र में कई ढाबों पर अवैध रूप से शराब बेचने और पिलाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन गतिविधियों के वीडियो भी मौजूद हैं, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इसी बीच देसी-विदेशी शराब दुकान से जुड़े मामले में पांच प्लेसमेंट कर्मचारियों को सेवा से हटा दिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और बाद में पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर डालते हुए नौकरी से बाहर कर दिया।
कर्मचारियों के अनुसार सुपरवाइजर यशपाल, सेल्समैन चुम्मन लाल, टिकेश्वर निषाद, गार्ड दिलीप और ढालेंद्र को एडीओ तथा उप निरीक्षक आसाराम ने दुकान में बुलाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा। कर्मचारियों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और अगले ही दिन सेवा से हटा दिया गया। उनका यह भी कहना है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने "नेतागिरी" की तो परिणाम ठीक नहीं होंगे।
पीड़ित कर्मचारियों का दावा है कि कई महीनों का सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला गया, लेकिन कथित रूप से शराब निकालने या किसी अनियमितता का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। इसके बावजूद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई, जबकि वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मामले को लेकर यह आरोप भी सामने आए हैं कि जिन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उप निरीक्षक आसाराम के पास है, वहां कई ढाबों में लंबे समय से अवैध रूप से शराब बेची और परोसी जा रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और हटाए गए कर्मचारियों के परिजनों ने जिला कलेक्टर तथा आबकारी आयुक्त से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अवैध शराब बेचने वाले ढाबों पर तत्काल छापेमारी, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा हटाए गए पांचों कर्मचारियों की बहाली की भी मांग की है।
विभाग का पक्ष प्रतीक्षित
इस संबंध में उप निरीक्षक आसाराम से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं बालोद के जिला आबकारी अधिकारी पलक नंदन से भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उनका आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका।
(नोट: यह समाचार संबंधित कर्मचारियों, स्थानीय सूत्रों और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
*जलापूर्ति योजनाओं के संचालन व रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री*
*पीएचई द्वारा यूनिसेफ और एसीई के सहयोग से हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए कार्यशाला का आयोजन*
रायपुर.शौर्यपथ. उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।
कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। श्री साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता श्री समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिलेगी गति, रावघाट-जगदलपुर परियोजना की समीक्षा, नई रेल लाइनों के शीघ्र अनुमोदन का किया आग्रह
रायपुर । छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के व्यापक विस्तार और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से विस्तृत चर्चा की। बैठक में प्रदेश की प्रमुख रेल परियोजनाओं, नई रेल लाइनों और लंबित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्हें शीघ्र गति देने पर जोर दिया गया। बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख औद्योगिक, खनिज और कृषि राज्य है। ऐसे में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन और जनजातीय क्षेत्रों के संतुलित विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेलवे अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिसका लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन बनेगी विकास की नई धुरी
बैठक में 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से इस परियोजना के लिए स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा।
यह रेल लाइन कटघोरा, करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी। इससे पहली बार कई ऐसे क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक निवेश और लाखों लोगों की आवाजाही के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना को मिलेगी रफ्तार
बैठक में 140 किलोमीटर लंबी रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रेलवे की निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया ताकि बस्तर अंचल की रेल कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।
सरगुजा सहित उत्तर छत्तीसगढ़ की तीन नई रेल लाइनों पर जोर
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया—
सरडेगा–पत्थलगांव–अंबिकापुर (244 किमी)
धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा (301 किमी)
अंबिकापुर–बरवाडीह (200 किमी)
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल संपर्क मजबूत होगा तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया।
बस्तर में दो नई रेल परियोजनाओं के सर्वे पर भी चर्चा
बैठक में किरंदुल–कोत्तागुडेम (180 किमी) तथा गढ़चिरौली–बीजापुर–किरंदुल (बचेली) (490 किमी) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सर्वे शीघ्र पूरा कर आगामी कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया ताकि बस्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी, विकास और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को और मजबूती मिल सके।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास का नया दौर शुरू हुआ है। नई रेल परियोजनाएं औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की आसान आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा 'विकसित छत्तीसगढ़' के लक्ष्य को नई गति देंगी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक, साझा जल प्रबंधन और दीर्घकालिक समझौते पर जोर
रायपुर । वर्षों से लंबित महानदी जल बंटवारे के मुद्दे को सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि महानदी किसी विवाद का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि महानदी का जल दोनों राज्यों के किसानों, पेयजल व्यवस्था, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए इस विषय का समाधान टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और आपसी विश्वास के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच बने संवाद और सहयोग के सकारात्मक माहौल से स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करता है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित इलाकों और भविष्य की विकास जरूरतों को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भविष्य उन्मुख जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाए। विशेष रूप से कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार करने और जल उपलब्धता, उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करने पर उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिकांश विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत मामलों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाया जाए। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद की भावना ने वर्षों पुराने जटिल मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित एवं समृद्ध हो सके।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एनॉलॉग पनीर पर सख्ती के निर्देश, 375 नई एम्बुलेंस, 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू होंगे
रायपुर/ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य मलेरिया से होने वाली एक भी मृत्यु को रोकना है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और जनजागरूकता के जरिए मलेरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनॉलॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34.29 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उपचार शुरू किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की रणनीतिक कार्ययोजना और जनसहभागिता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है, जबकि प्रदेश का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस शुरू की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक लोगों को समयबद्ध आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने बताया कि HLL Lifecare Limited के सहयोग से प्रदेश के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली और गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी बेहतर जांच सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
खाद्य सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग और विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
