September 23, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री बघेल ने सभी जिलों में राज्य शासन की प्रगतिरत योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा की।…
    दुर्ग / शौर्यपथ / कांग्रेस नेता व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने भाजपा पर अपना वार जारी रखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष…
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    मुंगेली / शौर्यपथ / पढई तुहंर दुवार \"आनलाईन पढाई मे लोरमी के विद्यार्थी ,पालक ,शिक्षक भी अध्ययन अध्यापन में भाग ले रहे हैं ।आज इसी…
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    भिलाई / शौर्यपथ / शौर्यपथ समाचार के 10 जून 2019 के अंक में छावनी स्कूल के एक मात्र बड़े मैदान ( स्कूल ) में फ्लड लाइट के खम्बे गिर जाने…

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम में हर साल बरसात आने के पहले शहर के नाले / नालियों की सफाई के लिए 40 से 50 लाख की निविदा निकाली जाती थी . दुर्ग निगम में पिछले 20 सालिओ से निगम में भाजपा की सरकार थी और हर साल निगम प्रशासन शहर की नालियों / नालो की सफाई के लिए लाखो की निविदा निकाल कर ये काम करवाती थी . तब दुर्ग की जनता को ऐसा लगता था कि शहर की सत्ता द्वारा ये एक सार्थक प्रयास किया जा रहा है . किन्तु इस साल निगम ने एक नया प्रयोग किया . निकाय चुनाव के आचार सहिंता लगने के कुछ समय बाद से ही दुर्ग निगम के आयुक्त बर्मन द्वारा एक कार्य का बीड़ा उठाया गया . वो कार्य था शहर की नालियों / नालो को साफ़ करना . इस कार्य के लिए पहली बार निगम ने किसी भी ठेकेदार को ठेका नहीं दिया . निगम के कर्मचारियों से ही ये कार्य को अंजाम दिया गया .
    निगम आयुक्त द्वारा इस कार्य के लिए 40 लोगो की एक टीम गठित की गयी और शहर की सडको से सर्वप्रथम धुल मिटटी को हटाने का कार्य किया गया . धुल मिटटी हटाने के उपरान्त छोटी छोटी नालियों की सफाई तलहटी तक की गयी . गली मोहल्लो की नालियों की सफाई की निगरानी स्वास्थ्य अधिकारी और सीधे आयुक्त बर्मन द्वारा की गयी . छोटी छोटी नालियों के बाद निगम प्रशासन के द्वारा शहर के नालो को क्रमबद्ध तरीके से तलहटी तक मलबा और मिटटी निकाल कर साफ़ किया गया . स्वास्थ्य विभाग और कर्मशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम के तीन डम्पर का दो महीनो तक कार्य सिर्फ नाले की मिट्टियों को ढोने का ही था . दो महीनो में लगभग 700 से 800 ट्रिप मिट्टिया नालो से निकाल कर डंपिंग स्थान में डाला गया . ऐसा नहीं है कि ये बात किसी से छुपी है . शहर के हर वार्ड की जनता जिनका नालो के करीब निवास है इस बात की गवाही दे सकता है .
    शहर वासियों के अनुसार इस बार जिस तरह से नालियों की सफाई हुई है वैसी सफाई सालो से देखने को नहीं मिली . निगम आयुक्त बर्मन ने जिस तरह कार्य किया और ये साबित किया कि ऐसे कई कार्य जो ठेके से होते थे उसे निगम कर्मचारियों से भी कराया जा सकता है साबित कर दिया . अभी तक निगम प्रशासन पूर्व में करोडो रूपये नालियों / नालो की सफाई में खर्च कर चूका है किन्तु ये निश्चित है कि भविष्य में अब नालो / नालियों की सफाई निगम के कर्मचारियों द्वारा ही होता रहेगा जिससे भविष्य में भी निगम के लाखो करोडो रूपये बचेंगे . नालो की सफाई का सफल प्रयोग कर आयुक्त बर्मन ने एक मिसाल पेश की जो दुर्ग की जनता को वर्षो तक याद रहेगा .
    महापौर का भी रहा पूर्ण सहयोग ...
    शहर के महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा निगमआयुक्त के कार्य में किसी तरह का हस्तक्षेप ना करना ये साबित करता है कि महापौर बाकलीवाल भी यही मंशा रखते है कि शहर के ऐसे कार्य जो निगम कर्मचारियों द्वारा कराये जा सकते है उसे निगम कर्मचारियों द्वारा ही कराया जायेगा और निगम के राजस्व की बचत होगी जो निगम क्षेत्र के अन्य विकास कार्यो में ही खर्च होगी . आज जो भी नालो की सफाई का विरोध कर रहे है वो पूर्व के सालो में सफाई और बाद में जलभराव के गवाह है . निगम प्रशासन का कार्य कितना सफल रहा इसका परिणाम तो बरसात में ही चलेगा उसके लिए अभी से शंका करना वर्तमान स्थिति में क्या सही होगा क्योकि जैसी सफाई वर्तमान में हुई ऐसी सफाई पूर्व के सालो में देखने को नहीं मिली तो अब फैसला आम जनता को ही करना है कि बरसात में कैसी स्थिति निर्मित होती है और फैसला बरसात के बाद ही हो सकता है अभी से कयास लगा कर उन 40 लोगो की टीम को हतोत्साहित नहीं किया जा सकता जिन्होंने पिछले 2-3 महीनो से इस कार्य के लिए अपना योगदान दिया है .

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