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जगदलपुर / शौर्यपथ /
दुब्बाटोटा में नक्सलियों द्वारा ध्वस्त मत्स्य हेचरी के कायाकल्प पर कमिश्नर श्री श्याम धावड़े ने प्रसन्नता जताई। गुरुवार को सुकमा प्रवास के दौरान कमिश्नर श्री धावड़े ने कोंटा मार्ग में स्थित ग्राम दुब्बाटोटा स्थित मत्स्य हेचरी का अवलोकन किया। इस दौरान कलेक्टर श्री विनीत नंदनवार भी मौजूद थे। कमिश्नर श्री धावड़े ने कहा कि दुब्बाटोटा में मत्स्य हेचरी के नवनिर्माण से आसपास के ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ ही जिले के मछलीपालकों को आसानी से मछली बीज भी मिलेगी और मछली बीज के लिए इनकी निर्भरता अन्य राज्यो पर नहीं रहेगी। उन्होंने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को आधुनिक तकनिकों का उपयोग कर मत्स्य पालन के लिए जागरूक किसानों को जोड़कर अधिक से अधिक लाभ देने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि दुब्बोटोटा स्थित मत्स्य प्रसंस्करण केन्द्र स्थानीय ग्रामीणों और मछली पालकों के लिए आय का एक प्रमुख स्त्रोत था। नक्सल गतिविधियों के कारण वर्ष 2006 में मत्स्य उत्पादन का यह केंद्र पूर्णत: बंद हो गया। जिले में 1990 के आसपास दुब्बाटोटा में निर्मित मत्स्य बीज प्रक्षेत्र में मत्स्य उत्पादन, मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य प्रारंभ था। अंदरूनी गांव होने के कारण सलवा जुडूम का प्रभाव दुब्बाटोटा पर भी रहा और मत्स्य प्रसंस्करण का कार्य बंद करना पड़ा। समय का चक्का चला और शासन-प्रसाशन के प्रयास से एक बार फिर से यहाँ के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव तेज हुआ। आदिवासी अंचलों का विकास और उनके निवासियों को आर्थिक संवर्धन प्रदान करना शासन की प्राथमिकता है, और इसी का नतीजा है की इतने लंबे समय से बंद पड़े मत्स्य बीज प्रक्षेत्र का जीर्णोधार किया गया। आज मत्स्य हेचरी का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, और जल्द ही यहां मत्स्य उत्पादन भी प्रारंभ कर लिया जाएगा।
मत्स्य पालन में जिला होगा आत्म निर्भर, ग्रामीणों को आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
दुब्बाटोटा में मत्स्य हेचरी शुरू होने पर यहां के ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें इससे रोजगार मिलेगा। अब तक मछली उतपादन हेतु बीज के लिए सीमावर्ती राज्य ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलांगना पर निर्भर रहना पड़ता था। मत्स्य हेचरी से क्षेत्र के मत्स्य पालकों को जीविकोपार्जन का साधन तो सशक्त होगा ही साथ ही मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता पूर्ण रूप से बंद हो जाएगी। जिले भर में मत्स्य हेचरी से बीज लेकर ग्रामीण मछलियों का उत्पादन करेंगे और इसका क्रय-विक्रय होने पर ग्रामीण आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगे। जिलेवासियों को स्थानीय स्तर पर ही ताजी मछलियां उपलब्ध होंगी। प्रसंस्करण केंद्र के पुन: प्रारंभ होने से मत्स्य बीज उत्पादन हेतु सुकमा पूर्णत: आत्मनिर्भर हो जायेगा। इसके साथ ही बच्चों में कुपोषण को दूर करने में भी यह सहायक सिद्ध होगा और जिले में सुपोषण अभियान को गति मिलेगी।
दुब्बाटोटा में मत्स्य हेचरी का पुन: निर्माण शुरू होने से यहां के ग्रामीणों में खुशी की लहर है। गाँव के बुजुर्गों का कहना हैं कि पुराने दिन वापिस लौट रहें हैं ऐसा महसूस हो रहा हैं। एक समय था जब यहां के मछली बीज दूसरे इलाकों में पहुँचते थे, अच्छी आमदनी उन्हें होती थी। फिर सब कुछ बदल गया और यहां का मछली बीज का व्यापार बन्द हो गया। उनमें से किसी को यह विश्वास नहीं था कि यह सब कुछ वापिस से लौटकर आएगा। लेकिन शासन-प्रशासन के प्रयासों से अब उन्हें बेहद खुशी हैं कि पुराने अच्छे दिन लौटकर आ रहें हैं। दुब्बोटोटा के ग्रामीणों के लिए मत्स्य प्रसंस्करण केन्द्र ना सिर्फ आय का साधन रहा, बल्कि उनकी जीवनशैली थी, जिसे प्रशासन ने उन्हें वापस लौटा दिया है। मत्स्य प्रसंस्करण केन्द्र के पुन: संचालन से क्षेत्र के सैकड़ों मत्स्य पालकों को आजीविका का साधन उपलब्ध होगा। इस प्रसंस्करण केन्द्र में एक करोड़ स्पान, 40 लाख स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन वार्षिक दर पर किया जाएगा जिससे मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी।
कमिश्नर ने की मातागुड़ी के सुंदरता की प्रशंसा
कमिश्नर धावड़े ने दुब्बाटोटा में धानी माता के गुड़ी का अवलोकन भी इस अवसर पर किया। उन्होंने माता गुड़ी के सुंदरता की प्रशंसा की और आसपास के पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने पेड़ पौधों के आसपास चबतुरों के निर्माण के संबंध में भी निर्देश दिए। सुकमा जिले में लगभग 300 देवगुड़ी-देवस्थल और मृतक स्थल का विकास किया जा रहा है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
