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- लक्ष्य संस्था ने भटका दिया अभ्यार्थियों को लक्ष्य से
- अब यहां सिर्फ खानापूर्ति हो रही है, दक्ष ट्यूटर ही नहीं है
- इसी संस्था में पढ़े विद्यार्थि GBयों से ले रहे है अध्यापन कार्य
- बॉय हॉस्टल में छात्राओं के लिए कोई सुविधा नहीं है
दंतेवाड़ा / शौर्यपथ / कांग्रेस सरकार ने लक्ष्य जैसी संस्था को भी मिट्टी में मिला दिया है। इस संस्था से राज्य का नाम रोशन करने वाले छात्र-छात्राएं निकली। उन्होंने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। यहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले स्थानीय छात्र-छात्राएं राज्य और राष्ट्र स्तर पर सेवाएं भी दे रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने इस संस्था को भी हासिए पर ला कर खड़ा कर दिया है। अब यह संस्था सिर्फ अभ्यार्थियों को भटकाने का काम कर रही है। सिर्फ यहां खानापूर्ति हो रही है। इस संस्था में दक्ष ट्यूटर नही है। पूराने पढे हुए विद्यार्थियों से अध्यापन का कार्य लिया जा रहा है। जिस परिकल्पना के साथ इसकी बुनियाद रखी गई थी, वह हिल गई है। सच तो ये है कि गल्र्स हॉस्टल को भी नजरअंदाज कर दिया गया है। हॉस्टल में छात्राएं अहम सुविधाओं से वंचित है। इन बातों को धीरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है। उन्होंनें कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। सरकार ने लक्ष्य जैसे संस्था को भी नही छोड़ा। लापरवही कहें या भ्रष्टाचार दोनों ही तो परिलक्षित हो रही है। स्थानीय छात्र-छात्राओं के भविष्य से यह सरकार खेल रही है। इतना पैसा आदिवासी बच्चों के पास नही है कि वे बेहतर कोचिंग के लिए बाहर जाएं। भाजपा सरकार ने आदिवासी छात्र-छात्रओं को सफल करने के लिए प्रतियोगी संस्था की नींव रखी थी, लेकिन इस सकरार के आते ही उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया है। लक्ष्य में बच्चे पढने जरूर जा रहे हैं, लेकिन उनको वो पढाई नही मिल रही है जिसकी वे आशा करके आ रहे हैं। सरकार आदिवासी छात्र-छात्राओं की तैयारी कराने वाली इस संस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। भाजपा सरकार ने तो टेंडर कर बेहतर कोचिंग संस्थानों को बुलावा देकर प्रतियोगिता की तैयारी करवाई थी। अब यहां अनुभवी अध्यापक तो है ही नहीं, इसी संस्था में पढे विद्यार्थियों से अधपान करवाया जा रहा है। लक्ष्य संस्था की इस सरकार ने दुर्दशा कर दी है। ये दर्शाता है कि यह सरकार शिक्षा के प्रति कितनी संवेदनशील है। खुद को सिर्फ आदिवासी हितैषी होने का ढिंढोरा पीट रही है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
