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May 11, 2026
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जनता के पैसे बरबाद हो रहे है, ना जाने क्यो जिम्मेदार चैन से सो रहे है ?

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PWD की आंखें बंद—ठेकेदार की हिम्मत बुलंद, सड़कें बनते ही उखड़ रहीं!

 

By- नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। नगर निगम क्षेत्र में PWD विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से चल रहा बी.टी. पैच रिपेयर कार्य अब जगदलपुर शहर की सड़कों से ज्यादा विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। काम अभी पूरा भी नहीं हुआ, लेकिन जहाँ-जहाँ नया डामर डाला जा रहा है, वहाँ कुछ ही घंटों में डामर उखड़कर सड़क की असली सूरत सामने आने लगी है। मानो करोड़ों का यह प्रोजेक्ट सड़क सुधार का नहीं, बल्कि सड़क उजाड़ने का ठेका लेकर किया जा रहा हो। शहर में चर्चा है—“डामर से ज़्यादा कमीशन की परत चढ़ाई गई है!”

सबसे बड़ी हैरानी यह है कि इतनी बड़ी परियोजना की निगरानी जिस अधिकारी को करनी चाहिए वही मौके से नदारद बताए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी और सुस्त देखरेख ने ठेकेदार को इतना बेलगाम कर दिया है कि वह खुलेआम घटिया काम कर रहा है, जैसे शहर उसकी निजी जागीर हो? लोग तंज कस रहे हैं—“जब साहब आंखें मूंदे बैठे हैं, तो ठेकेदार क्यों न काम में आंख मारे!”

यह भी कम चौंकाने वाली बात नहीं कि शहर के कई ऐसे सड़क है जिससे रोज शहर के VIP गुजरते हैं। लेकिन फिर भी घटिया गुणवत्ता वाला पैच रिपेयर ऐसे डाला जा रहा है जैसे सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि जनता की समझदारी और धैर्य पैच किए जा रहे हों। शहरवासियों का गुस्सा इस बात पर और भड़क रहा है कि VIP एक्सेस वाली इस सड़क पर जब इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है, तो बाकी शहर का क्या हाल किया जाएगा? साफ संदेश मिल रहा है “जिम्मेदारों की चुप्पी ही ठेकेदार की ताकत है।”

लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा ने गुणवत्ता देखने की जिम्मेदारी ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी है? क्या इस पैच रिपेयर में डामर से ज्यादा कुछ और बह रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि निरीक्षण की फाइलों में सब कुछ सही है, और जमीन पर सिर्फ दुकानदारों और आम जनता के पैसे बह रहे हैं? यह भी चर्चा गर्म है कि कुछ “चार पैसे” की चमक ने विभागीय आंखों पर ताला लगा दिया है, और उसी का फायदा उठाकर ठेकेदार शहर की सड़कों को प्रयोगशाला समझकर खेल खेल रहा है?

करोड़ों का यह काम यदि ऐसे ही चलता रहा तो शहर के गड्ढे तो भरेंगे नहीं, पर PWD की जवाबदेही के गड्ढे जरूर और गहरे होते जाएंगे। जनता ने स्पष्ट कहा है—यह सिर्फ खराब सड़क का मामला नहीं, बल्कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से होने वाले सफेदपोश भ्रष्टाचार की बू है, जिसे अब छुपाना मुश्किल हो रहा है। लोगो का कहना है की जरूरत इस बात की है कि पूरे काम की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो, ठेकेदार को रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

 

और अब बात PWD के ‘भाग्य-विधाता’ श्री बत्रा साहब की…

इस विषय पे कार्यालय पहुँच, मुँह खोलकर सवाल रखने से पहले हि साहब बिना कुछ सुने ही अपने आप बोलने लगे— “अभी टाइम नहीं है… मीटिंग में जाना है… बाद में बात करेंगे…” लग ही नहीं रहा था कि कोई अधिकारी जनता के सवालों का सामना कर रहा है; बल्कि ऐसा लगा जैसे सवाल सुनने की ज़िम्मेदारी भी किसी और विभाग को ठेके पर दे दी गई हो!

साहब का व्यवहार बिल्कुल ऐसा—जवाबदेही नहीं, बल्कि सवाल पूछना ही अपराध हो गया हो। काम की गुणवत्ता सड़क पर लोटपोट है, पर साहब का एटीट्यूड?

जिम्मेदारी से भागने का रफ्तार VIP स्पीड साहब!

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