August 05, 2026
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    मध्यान भोजन या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़?

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    तोकापाल ब्लॉक की शालाओं में “पोषण” नहीं, सिर्फ पेट भरने का औपचारिकता?

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। विकासखंड तोकापाल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुरूंगपाल, पटेलपारा में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा निर्धारित मेनू चार्ट के अनुरूप भोजन नहीं दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है।

    स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बच्चों की थाली में परोसा जा रहा भोजन न तो स्वाद में संतोषजनक है और न ही पोषण की कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देता है। भोजन की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि परोसी गई सब्ज़ी है या पानी में उबली सब्ज़ी की परछाईं।

    स्वाद की बात छोड़ भी दी जाए, तो पोषण का अभाव साफ नजर आता है। बच्चों और स्थानीय लोगों के अनुसार सब्ज़ियाँ अक्सर अधपकी होती हैं, मेनू चार्ट के अनुसार अचार-पापड़ जैसे निर्धारित घटक नहीं दिए जाते और भोजन लगभग प्रतिदिन एक जैसा, फीका व बेस्वाद रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

     

    निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल

    इस पूरे मामले में निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्यान भोजन योजना की नियमित जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय है, लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह संकेत देती है कि जमीनी निरीक्षण प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहे हैं।

    इसी क्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), तोकापाल की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण नियमित रूप से हो रहे होते, तो भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रही ये शिकायतें सामने नहीं आतीं—या समय रहते सुधारी जा सकती थीं।

     

    योजना का उद्देश्य और ज़मीनी हकीकत

    मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य केवल बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन बुरूंगपाल की स्थिति यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं यह योजना सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गई है। सरकार इस योजना पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद यदि बच्चों की थाली में पोषण नहीं पहुँच पा रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।

    इस संबंध में ब्लॉक तोकापाल खण्ड शिक्षा अधिकारी पुनम सलाम से फ़ोन मे संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

    अब यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे विकासखंड में मध्यान भोजन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि बुरूंगपाल की यह स्थिति है, तो अन्य शालाओं में भोजन की गुणवत्ता कैसी है—यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है।

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