July 14, 2026
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    बाबा साहेब डां़भीमराव अंबेडकर जी की 130 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाकर हुआ संपन्न

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    जगदलपुर / शौर्यपथ / अनुसूचित जाति विभाग के बस्तर जिला अध्यक्ष विक्रम लहरें एवं उनके जिला उपाध्यक्ष सतिस वानखडे जी एवं,शहर जिला अध्यक्ष,सतनामी समाज जगदलपुर एवं 5वी सशस्त्र वाहनी बल के कर्मचारियों के संयुक्त तत्वाधान पर 14 अप्रैल 2021 को भारत रत्न एवं संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की 130 वीं जयंती सतनाम भवन दंतेश्वरी वार्ड स्थित प्रांगण पर सर्वप्रथम प्रातः 10:30 को दीप प्रज्वलित कर पुष्प श्रद्धांजलि अर्पण कर मनाया गया और अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष विक्रम लहरें एवं उपाध्यक्ष सतिस वानखडे जी एवं समस्त समाज के साथ भीम जन्मोत्सव पर आतिशबाजी के साथ ही मिष्ठान वितरण भी किया गया .
    इस आयोजन के माध्यम से सतनामी समाज के संरक्षक इंदर प्रसाद बंजारे जी ने अपने उद्बोधन में कहे कि समाज को शिक्षित होने के बाद संगठित होना अनिवार्य है आज समाज शिक्षित होने के बाद संगठित होना भूल गया है हमें पढ़ लिखकर बाबा जी की सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए समाज को प्रेरित करना चाहिए ।
    सतनामी समाज के शहर जिला पुर्व अध्यक्ष रुपेश नगेकर जी ने आपने उद्धबोधं मे कहा- महान विचारक ,महान अर्थशास्त्री,महान विधिवेत्ता, दार्शनिक,राजनीतिक, शिक्षाशास्त्री, चिंतक, भारतीय संविधान के जनक, विश्वरत्न, शोषितों, वंचितों* के उद्धारक, नारी के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक युगद्रष्टा, भारत रत्न, परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर जी के130 वीं जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं तत्पश्चात अनुसूचित जाति विभाग के बस्तर जिलाध्यक्ष श्री विक्रम लहरें ने संगठन के महत्वपूर्ण विशेषताओं को तार्किक ढंग से रखते हुए उन्होंने बाबा जी के उन वाक्यों को भी याद करवाएं जो बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने उनके समय बताए थे कि राजनीति एक मास्टर की है जिससे समस्त दरवाजे खुलते हैं ।
    बाबाजी के द्वारा गोलमेज सम्मेलन में दो मत का अधिकार देने का प्रावधान के लिए संघर्ष किए थे किंतु कुटिल प्रयासों के द्वारा उनकी मांगों को अनुसंसा कर दिया गया साइमन कमीशन भी एक सोची-समझी विरोध के कारण पूर्णतः अमल में नहीं लाई गई थी हमें संगठन की जरूरत है।
    तत् पश्चात अनुसूचित जाति विभाग के उपाध्यक्ष सतीश वानखेड़े जी ने भी अपने उद्बोधन में प्रमुखता से राजनीति की महत्वता को प्रथम पायदान पर रखकर कहे की शिक्षा के साथ-साथ संगठन और संगठन के साथ साथ संघर्ष करना उतना ही आवश्यक है जितना कि एक इंसान को रोटी कपड़ा और मकान की । भीमवाद किसी भी जाति समाज धर्म देश का ना होकर यह एक मानवता का सिद्धांत है। आज भी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के बताएं मानवाधिकार कानून विश्वव्यापी चलायमान है। इस आयोजन के उपलक्ष्य पर सतनाम भवन में बटालियन के गणमान्य नागरिक गण सतनामी समाज के सदस्यगण बच्चे एवं महिलाएं उपस्थित हो श्रद्धांजलि अर्पण किये।
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 130वी जयंती की इस अवसर पर अतिथगगणों जिसमे उपस्थित बस्तर जिला के सतनामी समाज के संरक्षक ईन्दर प्रसाद बंजारे,पुर्व शहर अध्यक्ष रुपेश नागेकर, सतनामी समाज के भंडारी राजू कोशले जी को नीला पटका एवं सतनामी समाज के प्रमुखो को जयभीम कैलेण्डर भेंट अनुसूचित जाति कांग्रेस प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष विक्रम लहरें एवं उनके जिला उपाध्यक्ष सतिस वानखडे के द्वारा सप्रेम भेट किया गया इसके पश्चात सतनामी समाज जगदलपुर के पूर्व अध्यक्ष रूपेश नागेकर के द्वारा मंच संचालन किया गया तथा उनके संक्षिप्त उद्बोधन में बताए कि भारत देश में गरीब मजबूर दबित व्यक्तियों के लिए बाबा साहब मसीहा के रूप में अवतरित होकर धरती पर आए । समस्त मजबूर मजलूम दलित समाज के लिए सन 14 अप्रैल 1891 किसी अपार संपदा प्राप्ति से कामना न था। बाबा जी के द्वारा 7 नवंबर 1900 को प्रथम स्कूल प्रवेश व 20 मार्च 1927का जलग्रह आंदोलन तथा 29 अगस्त 1947 को अपार ज्ञान के बदौलत संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष नियुक्त होना दलित समाज के साथ साथ महिला एवं मजदूर सह समानतावादी राष्ट्रप्रेमीयों के प्रकाश पुंज रह संरक्षक बन ताउम्र समानतावाद के पैरोकार थे।
    आज वर्तमान भी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के द्वारा प्रज्वलित दीप के प्रकाश से भारत भूमि प्रकाशमान है और यहां भीम की सच्ची राष्ट्रीयता समानतावादी विचारधारा का ही परिणाम है कि आज भी बाबा भीम जी जीवित है और यहां गुणांक होती हुई चाहुंओर जय भीम का नारा लगा, समानता वादी,विचारधारा को लिए राष्ट्र विकास को पोषिता कर रहा है। इस अवसर पर सम्माननीय गणों उपस्थित थे अनुसूचित जाति विभाग कांग्रेस के बस्तर जिला अध्यक्ष विक्रम लहरें, जिला उपाध्यक्ष सतिस वान्खडे,सतनामी समाज के बस्तर जिला संरक्षक ईन्दर प्रसाद बंजारे, पुर्व शहर जिला अध्यक्ष रुपेश नागेकर, राजू कोसले भंडारी सतनामी समाज जगदलपुर, जीवन कुर्रे, प्रकाश नाग,आकाश चन्देल,तुषार डीढी,शमिर कुर्रे, संजीव जोगी, श्यामसुंदर चंदेल आदी महिलाये एवं बच्चे शामिल रहे .

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