
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
जगदलपुर में एक सप्ताह के भीतर खाद विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई, अवैध चावल कारोबारियों में मचा हड़कंप
जगदलपुर, शौर्यपथ। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब एवं पात्र राशन कार्डधारकों को निःशुल्क वितरित किए जाने वाले चावल की अवैध खरीदी-बिक्री के खिलाफ खाद विभाग ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के भवानी चाट भंडार के पीछे स्थित दीप्ती बाड़ा के एक गोदाम से लगभग 378 बोरा (करीब 186 क्विंटल) पीडीएस चावल, लगभग 3 क्विंटल चना, 100 पीडीएस बारदाना तथा लोडिंग में लगे 12 चक्का ट्रक (CG 04 LC 9409) को जब्त किया है। बताया जा रहा है कि ट्रक रायपुर का है और कार्रवाई के समय उसमें चावल लोड किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार खाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि गोदाम से बड़ी मात्रा में पीडीएस चावल बाहर भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी और कार्रवाई को अंजाम दिया। जब्त चावल को सुरक्षित रखने के लिए निकटस्थ शासकीय उचित मूल्य दुकान में रखवाया गया, जबकि ट्रक को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए कोतवाली थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजी गई है।
विभाग के अनुसार, इस मामले का संबंध मोहम्मद जिलानी नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
खाद विभाग की एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई से शहर में पीडीएस चावल की अवैध खरीदी-बिक्री से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। विभाग के सख्त रुख से ऐसे कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच भय का माहौल देखा जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य द्वारा शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान का संचालन किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं कथित अवैध चावल खरीदी-बिक्री के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों के लिए आवंटित पीडीएस राशन के वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता या हेराफेरी तो नहीं हुई। इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पीडीएस का चावल शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे चावल का अवैध भंडारण, परिवहन अथवा व्यापार न केवल शासन की जनकल्याणकारी योजना को प्रभावित करता है, बल्कि पात्र हितग्राहियों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है। अब इस मामले में जांच पूरी होने और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।
हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।
क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।
स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। संचालक खनिज एवं बस्तर कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर अवैध कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 वाहनों को जब्त किया है।
खनिज विभाग की इस सक्रियता को जिले में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय टीम ने उपनपाल, देवड़ा, कोडेनार, बड़ेआमाबाल, कोरपाल, बेलगांव, धरमपुरा, जगदलपुर, कुम्हरावंड, पिपलावंड, बजावंड, बडांजी, तारापुर और बनियागांव सहित कई क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण किया। जांच के दौरान अवैध रूप से रेत एवं चुना पत्थर का उत्खनन, परिवहन और भंडारण करते पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी वाहनों को पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, वहीं चार भंडारणकर्ताओं के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनिज गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1967 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
खनिज विभाग की इस मुहिम से अवैध खनिज कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम लोगों में प्रशासन की सक्रियता को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। विभागीय अधिकारियों की सतर्कता और मैदान स्तर पर लगातार निगरानी से यह साफ संकेत मिला है कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अभियान में खनि अधिकारी शिखर चेरपा, सहायक खनि अधिकारी जागृत गायकवाड, खनि निरीक्षक अंकित पुरी, अनि सिपाही डिकेश्वर खरे, नगर सैनिक विजय कश्यप, कृष्णा बघेल एवं सहदेव बघेल सहित जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोंडागांव जिला 2012 से जिला घोषित हो गया था जिसके बाद से अब तक जिले में सभी जिलेवासियों को शासन की सभी योजनाओं को पूरा किया जा रहा है । मगर एक तरफ ध्यान दिया जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है देश एक कठनाई से गुजर रहा है जहाँ पेट्रोल व डीजल की किल्लत देखा जा रहा है।
वही अगर बात करे कोंडागांव की तो
न्यायालय कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर जेल भेजती है जो कोंडागांव मुख्यालय से 60 से 50 किलोमीटर दूर पड़ता है जहाँ रोजना कैदियों को लाने में मशक्कत की जाती है अगर कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी एक जेल या उप जेल बन जाए तो पुलिस को राहत मिलेगी।
समस्या क्या है?
कोंडागांव को 2012 में जिला घोषित किया गया था
इसके बावजूद यहां अभी तक जिला जेल/उप-जेल नहीं है
कोर्ट (न्यायालय) से कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर भेजा जाता है
यह दूरी लगभग 50–60 किलोमीटर है
इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?
पुलिस को रोज कैदियों को ले जाने में अधिक मेहनत और संसाधन खर्च
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक बोझ
सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है (लंबी दूरी पर ट्रांजिट)
कैदियों और उनके परिजनों को असुविधा
अब देखने वाली बात होगी कि शौर्यपथ की इस खबर से जिला प्रशासन व शासन क्या कदम उठाएगी।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। डिमरापाल आयुष औषधालय में नियमित उपस्थिति को लेकर शिकायत के बाद अब मामले में एक नया पहलू सामने आया है। विभागीय सूत्रों एवं संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायत के बाद जिला आयुष अधिकारी द्वारा संबंधित चिकित्सा अधिकारी से चर्चा की गई, जिसमें कथित रूप से नियमित उपस्थिति प्रभावित होने के पीछे “अत्यधिक गर्मी” एवं व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने चर्चा के दौरान कहा कि अत्यधिक तापमान के कारण लंबे समय तक अस्पताल में बैठने में कठिनाई होती है। इस पर जिला आयुष अधिकारी ने कथित तौर पर नाराजगी व्यक्त करते हुए यह कहा कि शासकीय सेवा में निर्धारित समय तक उपस्थित रहकर मरीजों को सेवाएं देना आवश्यक दायित्व है और अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी समान परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इसके बाद संबंधित चिकित्सा अधिकारी द्वारा पारिवारिक परिस्थितियों, विशेषकर अपनी स्कूली बेटी की देखभाल का उल्लेख करते हुए नियमित उपस्थिति में कठिनाई होने की बात कही गई। साथ ही यह भी चर्चा में आया कि उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों की जानकारी विभागीय स्तर पर होने के कारण उन्हें ऐसे स्थान पर पदस्थ किया गया, जहां आवागमन अपेक्षाकृत सुगम हो। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी अस्पताल “व्यक्तिगत सुविधा केंद्र” बनते जा रहे हैं? यदि व्यक्तिगत कारणों और मौसम को आधार बनाकर नियमित ड्यूटी प्रभावित होगी, तो दूरदराज के मरीज आखिर किस भरोसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओर देखें?
सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिरी में अनुपस्थिति दर्ज नहीं होती। हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही संभव होगी।
अब मुख्य प्रश्न यह है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण मरीजों पर पड़ता है। ऐसे में आमजन की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस मामले में तथ्यात्मक जांच कर क्या निष्कर्ष निकालता है और नियमानुसार क्या कदम उठाए जाते हैं।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए भरसक प्रयास कर रही है, योजनाएं बन रही हैं, बजट खर्च हो रहा है—लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली इन प्रयासों पर सवाल खड़े करती दिख रही है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं मानो जनता का पैसा और सरकारी मंशा, दोनों ही कागज़ों में बेहतर और जमीन पर कमजोर पड़ रहे हों। सबसे चिंताजनक यह है कि जिन अधिकारियों को जिले में निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें भी यह सब या तो दिखाई नहीं दे रहा, या फिर प्राथमिकता में नहीं है।
इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काकलूर से सामने आई जानकारियों ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि केंद्र में पदस्थ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी द्वारा नियमित रूप से ड्यूटी का निर्वहन नहीं किया जा रहा है, जिससे मरीजों को निरंतर सेवाएं मिल पाना प्रभावित हो रहा है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए विभागीय सूत्रों का दावा है कि संबंधित महिला चिकित्सा अधिकारी महीने में एक बार आ जाएं तो ही “बहुत” माना जाता है, जबकि कभी-कभार तो वे लंबे समय तक अनुपस्थित रहती हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि उनके पति—जो स्वयं अन्य स्थान पर पदस्थ बताए जाते हैं—सप्ताह में एक बार आकर उपस्थिति रजिस्टर, ओपीडी रजिस्टर सहित अन्य आवश्यक प्रविष्टियां भरते नजर आते हैं। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार, यह सब संभव होने के पीछे स्थानीय स्तर पर “संरक्षण” की चर्चा भी है, जिसमें विकासखंड चिकित्सा अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह पहलू जांच का विषय है और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अब जिम्मेदारी से अधिक “व्यवस्था के भरोसे” चल रहे हैं? और क्या निगरानी तंत्र केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है? यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन के विश्वास के साथ भी गंभीर समझौता है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—क्या पारदर्शी जांच और कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकारी घोषणाएं तेज़ हैं, मगर डिमरापाल में तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती दिख रही है। सवाल सीधा है—जब अस्पताल ही नियमित रूप से संचालित न हो, तो मरीज इलाज कहां कराएं? योजनाओं की चमक और ज़मीनी हकीकत के बीच यह फासला न सिर्फ व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आयुर्वेद की साख पर भी असर डाल सकता है। और सबसे दिलचस्प बात—निगरानी तंत्र को जैसे यह सब दिखता ही नहीं, या दिखता है तो दर्ज नहीं होता।
इसी कड़ी में शासकीय आयुर्वेद औषधालय डिमरापाल चर्चा में है, जहां सेवाएं कथित तौर पर “हफ्ते में एक-दो दिन” तक सिमट गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की नियमित अनुपस्थिति के चलते उन्हें छोटे-छोटे इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है, जबकि रजिस्टरों में सब कुछ ‘समय पर’ और ‘नियमित’ बताया जाता है।
“शौर्यपथ” टीम के निरीक्षण में सोमवार से बुधवार तक चिकित्सा अधिकारी मौजूद नहीं मिलीं। गुरुवार—सियान जतन —पर अस्पताल में उपस्थिति दर्ज कर सेवाएं दी जाती दिखीं। ग्रामीणों के शब्दों में, “यहां इलाज नहीं, हाजिरी का कैलेंडर चलता है।”
सूत्रों के अनुसार, उपस्थिति और ओपीडी आंकड़ों के बीच अंतर की आशंका जताई जा रही है। संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में पारिवारिक कारणों—विशेषकर छोटे बच्चों की देखभाल—का हवाला देते हुए बताया कि वे प्रतिदिन उपस्थित नहीं हो पातीं। साथ ही यह भी संकेत दिया कि मरीजों की संख्या कम होने के बावजूद नियमित आंकड़े प्रस्तुत करने का दबाव रहता है, जिसके चलते प्रविष्टियों में अंतर आ सकता है। सवाल यह है कि अगर आंकड़े ही इलाज बन जाएं, तो मरीज का भरोसा किस पर टिका रहेगा?
मामले की सूचना जिला आयुर्वेद अधिकारी को दिए जाने पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन मिला और 20 दिन पहले शिकायत भी सौंपी गई। लेकिन “तत्काल” शब्द फिलहाल फाइलों में ही सक्रिय नजर आता है—स्थानीय स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या व्यवस्था में ‘सब ठीक है’ मान लेना ही नई कार्यप्रणाली बन गई है?
अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, या फिर डिमरापाल का औषधालय यूं ही कागज़ों में रोज़ खुलता रहेगा और ज़मीन पर हफ्ते में एक-दो दिन ही दिखाई देगा।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती के दावे भले कागज़ों में मजबूत दिखते हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत ग्राम पंचायत बनियागांव के आश्रित ग्राम बेलगांव में कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कुछ दिन पहले माइनिंग विभाग द्वारा रेत उत्खनन में लगी मशीन को जब्त कर ‘बड़ी कार्रवाई’ का दावा जरूर किया गया, मगर अब वही क्षेत्र फिर से रेत निकासी का केंद्र बनता नजर आ रहा है।
सूत्रों और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित टेंडर प्रक्रिया से पहले ही खदान से दिन-रात ट्रैक्टरों के जरिए रेत निकासी की गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक मशीन की जब्ती के बाद क्या अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लग पाई, या फिर यह कार्रवाई केवल सीमित असर तक ही रह गई?
चर्चा यह भी है कि जब तक विभाग टेंडर प्रक्रिया पूरी करेगा, तब तक खदान के भंडार पर असर पड़ सकता है। यानी टेंडर के समय वास्तविक स्थिति प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे चिंताजनक पहलू यह बताया जा रहा है कि कथित गतिविधियां विभागीय जानकारी के दायरे में होने के बावजूद प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी कई सवाल जरूर खड़े कर रही है—क्या यह लापरवाही है या समन्वय की कमी? क्योंकि जिस स्तर पर रेत निकासी की बातें सामने आ रही हैं, वह स्थानीय निगरानी से जुड़ा विषय भी माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन बेलगांव की स्थिति इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। एक मशीन की जब्ती के बाद भी यदि गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आती हैं, तो यह कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
यदि समय रहते ठोस और त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और खदान के संसाधनों पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की मंशा, राजस्व और पर्यावरणीय संतुलन की प्रभावी सुरक्षा हो सके।
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर स्थित मुख्य डाकघर जगदलपुर में इन दिनों डाक सेवा लेने पहुंचे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पोस्ट कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े लोगों के ऊपर लगे पंखे खराब पड़े हैं, जिससे भीषण गर्मी के बीच हालात और कठिन हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और कतार में खड़े लोगों के अनुसार, तेज गर्मी में बिना पंखे के इंतजार करना बेहद मुश्किल हो रहा है। कई लोगों ने बताया कि इस स्थिति में बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी उठानी पड़ रही है।
यह उल्लेखनीय है कि ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर न्यूनतम सुविधाओं का सुचारू रहना आवश्यक माना जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह व्यवस्था प्रभावित दिख रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान दिया जाए, तो आम नागरिकों को अनावश्यक असुविधा से बचाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस स्थिति को कितनी प्राथमिकता से सुधारता है।
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। धरमपुरा क्षेत्र के LIC रोड, कंगोली में सड़क के दोनों किनारों पर खड़ी हैवी गाड़ियों के कारण स्थानीय निवासियों को लगातार असुविधा और संभावित खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनीवासियों के अनुसार, इस प्रकार की पार्किंग से सड़क की दृश्यता प्रभावित हो रही है, जिससे मुख्य मार्ग पर निकलते समय आने-जाने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना कठिन हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थिति के चलते दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, और पूर्व में एक दुर्घटना घटित होने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बावजूद क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने या यातायात नियंत्रण के लिए कोई स्पष्ट और प्रभावी कदम नजर नहीं आ रहा है।
निवासियों द्वारा संबंधित विभागों को इस विषय में अवगत कराए जाने की बात कही जा रही है, किंतु अब तक समस्या के समाधान हेतु ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष है।
यह स्थिति संकेत देती है कि क्षेत्र में यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के संबंध में अतिरिक्त ध्यान एवं आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी संभावित अप्रिय घटना को रोका जा सके। यदि समय रहते उचित व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह समस्या भविष्य में गंभीर रूप ले सकती है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
