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जगदलपुर, शौर्यपथ। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह और उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधी उपस्थित थे।
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा और नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 जिलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। श्री शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी और सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों जिले सभी आदिवासी जिलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले जिले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। श्री शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और श्री विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात जिलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। श्री शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति दुनियाभर में सबसे अधिक समृद्ध संस्कृति है। उन्होंने कहा कि सभी जनजातियों का खानपान, परिवेश, कला, वाद्य, नृत्य और पारंपरिक खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे समृद्ध विरासत है।
श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाकर यहां के पारंपरिक गीतों को सहेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई परंपरागत उत्सव और त्योहार जो नक्सलवाद के लाल आतंक के साए में समाप्त होने की कगार पर थे, उन्हें भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि आज जिन खिलाड़ियों ने बस्तर ओलंपिक में भाग लिया है, उनकी प्रतिभा को पहचानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की एक टीम यहां आई है। श्री शाह ने कहा कि इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक खेलों में बस्तर के खिलाड़ी खेलें, वहां तक ले जाने की व्यवस्था हमारी सरकार ने की है। श्री शाह ने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है, जो लगभग ढाई गुना की वृद्धि है और बहनों की प्रतिभागिता में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साह देखकर आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ को चुना है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और बस्तर अब भय नहीं भविष्य का पर्याय बन चुका है, जहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां आज स्कूल की घंटियां बज रही हैं। जहां सड़क बनाना एक सपना था, वहां आज रेलवे ट्रैक और राजमार्ग बिछाए जा रहे हैं, जहां लाल सलाम के नारे लगते थे, वहां आज भारत माता की जय के नारे लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम सब विकसित बस्तर के लिए कृत संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़ों में नक्सलियों को मारने का लक्ष्य नही रखा था, क्योंकि 2000 से अधिक नक्सली युवाओं ने सरेंडर भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी समाज के प्रमुखों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया है, उनके मार्गदर्शन ने नक्सली युवाओं को ढांढस भी बंधाया है और हिम्मत भी दी है। गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग आज भी हथियार लेकर घूम रहे हैं, वे उन्हें समझाकर समाज की मुख्यधारा वापिस में लाने का काम करें।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य समृद्ध राज्य है, लेकिन माओवाद समस्या शुरू से ही राज्य के विकास में बाधक रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और गृहमंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ संकल्प से इसके अंत की डेट लाइन तय की है। गृह मंत्री द्वारा नियद नेलानार योजना के 05 किलोमीटर के दायरे को 10 किलोमीटर तक विस्तार किया गया है, जिसके माध्यम से गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही है। माओवाद के कारण बंद स्कूलें अब खुल रहे हैं। सड़कों का जाल बिछाकर अंदरूनी इलाकों को आवागमन सुविधा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही इन ईलाके के लोगों को जनहितकारी योजनाओं से सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के फलस्वरूप अब विकास से लोगों का विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी और आगामी वर्ष पुनः बेहतर प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दी।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में इतिहास रच रहा है, 100 साल के इतिहास में माओवाद समस्या की समाप्ति की तिथि वर्ष 2026 तक तय करने का साहस गृहमंत्री श्री अमित शाह ने किया है। जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा तो बस्तर फिर खुशहाल होगा। इस दौरान उप मुख्यमंत्री द्वय अरूण साव और विजय शर्मा ने भी बस्तर ओलम्पिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। वहींे विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उदबोधन में सभी अतिथियों और खिलाड़ियों का स्वागत किया। समारोह के अन्त में सांसद बस्तर महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर केबिनट मंत्री केदार कश्यप, सांसद कांकेर भोजराज नाग, उपाध्यक्ष बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोंडागांव सुश्री लता उसेंडी, विधायक अंतागढ़ विक्रम उसेंडी, केशकाल नीलकंठ टेकाम, चित्रकोट विनायक गोयल, कांकेर आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कारपोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर नगर निगम जगदलपुर संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और केन्द्र शासन एवं राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों की संख्या में खेलप्रेमी गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन में भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी की प्रेरणा से बस्तरिया नौजवान खिलाड़ियों का बढ़ा जोश
जगदलपुर, शौर्यपथ। संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक का भव्य समापन समारोह इस बार एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। इस अवसर पर भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक, बाईचुंग भूटिया ने कार्यक्रम में शिरकत की, जिनकी उपस्थिति ने पूरे माहौल में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अपने चहेते खिलाड़ी को अपने बीच पाकर बस्तर के नौजवान खिलाड़ी अत्यधिक उत्साहित और रोमांचित हो उठे।
बाईचुंग भूटिया, जिन्हें भारतीय फुटबॉल में सिक्किमी स्निपर के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से संभाग स्तरीय बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर पर जगदलपुर पहुँचे थे। उन्होंने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनका उत्साह बढ़ाया और खेल के प्रति उनके समर्पण तथा जुनून की सराहना की।
बाईचुंग भूटिया का नाम भारतीय फुटबॉल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वह यूरोपियन क्लब (इंग्लैंड के बरी फुटबॉल क्लब) के लिए खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे, जिसने भारतीय प्रतिभा के लिए वैश्विक द्वार खोले। लंबे समय तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का उनका रिकॉर्ड आज भी प्रेरणास्रोत है। खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया है।
एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया, उनके प्रेरक शब्द और सहज उपस्थिति ने बस्तर के खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। स्थानीय युवा खिलाड़ियों की आँखों में एक चमक और अपने सपनों को साकार करने का एक नया जोश साफ दिखाई दिया। बस्तर ओलम्पिक का यह समापन समारोह अब बाईचुंग भूटिया की यादगार यात्रा के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा, जिसने बस्तर की खेल प्रतिभाओं को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर ओलम्पिक का समापन समारोह स्थानीय इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहाँ नारायणपुर के मलखम्भ खिलाड़ियों ने अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से पूरे स्टेडियम को स्तब्ध कर दिया। इस प्राचीन भारतीय कला और खेल के महारथियों ने अपनी अद्भुत साहस और उत्कृष्ट सन्तुलन का ऐसा नजारा पेश किया कि दर्शक अपनी सीटों से हिल नहीं पाए और दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।
खिलाड़ियों ने ऊँचे, चिकने लकड़ी के खंभे और लोहे के पतले खंभे पर जिस सहजता और नियंत्रण के साथ जोखिम भरे आसन किए, वह उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती उनकी कलाबाजियाँ और शारीरिक लचीलापन हर किसी के लिए प्रेरणादायक था। यह प्रदर्शन केवल खेल का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के इस पारंपरिक खेल की गरिमा और सुंदरता का एक जीवंत प्रमाण था। नारायणपुर के इन युवा खिलाड़ियों के हैरतअंगेज प्रदर्शन ने बस्तर ओलम्पिक के समापन अवसर को न केवल यादगार बना दिया, बल्कि इस क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय पटल पर स्थापित कर दिया।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की गरिमामयी उपस्थिति में गूंजेगी कलम के सिपाहियों की आवाज
कोंडागांव, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा ने जानकारी दिए की आगामी 21 दिसंबर को आयोजित होने वाले विशाल 'पत्रकार महासम्मेलन' की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार कर ली गई है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इस महासम्मेलन के सफल क्रियान्वयन के लिए अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है।
लखीराम ऑडिटोरियम में होगा भव्य समागम
प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल ने बताया है की महासम्मेलन के लिए बिलासपुर के प्रतिष्ठित लखीराम ऑडिटोरियम का चयन किया गया है। 21 दिसंबर को यह ऑडिटोरियम प्रदेश भर से जुटने वाले पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और समाज के प्रबुद्ध जनों से खचाखच भरा रहेगा। कार्यक्रम की भव्यता को देखते हुए तैयारियों को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। मंच सज्जा से लेकर अतिथियों के स्वागत और भोजन तक की व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है, ताकि कार्यक्रम में शामिल होने वाले किसी भी पत्रकार साथी को असुविधा का सामना न करना पड़े।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू होंगे मुख्य अतिथि
प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा के द्वारा बताया गया कि इस महासम्मेलन की गरिमा बढ़ाने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संगठन में उत्साह का माहौल है। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति न केवल इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए शासन और प्रशासन भी गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि श्री तोखन साहू पत्रकारों के हितों, उनकी सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखेंगे और संगठन का मार्गदर्शन करेंगे।
पत्रकारिता के सरोकार और भविष्य पर मंथन
छ.ग. प्रखर पत्रकार महासंघ' के प्रदेश कोषाध्यक्ष अध्यक्ष राजेंद्र कश्यप ने कहा यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि पत्रकारिता के गिरते स्तर को संभालने और पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक वैचारिक महाकुंभ होगा। महासम्मेलन के दौरान पत्रकार सुरक्षा कानून, फील्ड रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियां और डिजिटल युग में मीडिया की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। संगठन का उद्देश्य प्रदेश के सुदूर वनांचलों से लेकर शहरों तक काम करने वाले पत्रकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे अपनी आवाज बुलंदी से उठा सकें।
संपन्न हुई रूपरेखा बैठक
जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा ने बताया की हाल ही में संपन्न हुई संगठन की उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश भर के जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कार्यक्रम की मिनट-टू-मिनट रूपरेखा तय की गई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 21 दिसंबर का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।
आयोजन में शामिल होने की अपील
संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला महासचिव गौतम बाल बोंदरे और कोर कमेटी ने छत्तीसगढ़ के समस्त पत्रकार साथियों, छायाकारों और मीडिया कर्मियों से अपील की है कि वे 21 दिसंबर को बिलासपुर के लखीराम ऑडिटोरियम में भारी संख्या में पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। यह आयोजन संगठन की शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ आपसी भाईचारे को मजबूत करने का एक स्वर्णिम अवसर है।
कार्यक्रम में उपस्थित थे प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा प्रदेश महासचिव पंकज खंडेलवाल प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेंद्र कश्यप प्रदेश सचिव सुधीर तिवारी प्रदेश सचिव अजय द्विवेदी प्रदेश सचिव उमा साहू जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा जिला उपाध्यक्ष भूषण प्रसाद श्रीवास जिला महासचिव गौतम बाल बोदंरे जिला सचिव उमाशंकर शुक्ला मीडिया प्रभारी यू मुरली राव बिल्हा ब्लॉक अध्यक्ष रूपचंद अग्रवाल जिला सदस्य पवन वर्मा रमेश यादव रमेश गोयल संजय ठाकुर जितेन्द्र पोर्तें रंजीत खनूजा दुर्गेश मरावी दिव्यांग सोनी मोहन मदवानी अजय साहू अनिल यादव अरविन्द परिहार रोहिणी अग्रवाल गीता सोंचे पुष्पा साहू लता गुप्ता रेशमा लहरे आदि उपस्थित थे।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर में सालों तक सड़कें तब टूटती थीं जब नक्सली IED फोड़ते थे। पुल-पुलिया उड़ जाते थे, रास्ते गायब हो जाते थे, और लोग समझते थे यह यहां की मजबूरी है, हालात हैं। लेकिन आज दिल को जो चीर देने वाली तस्वीर सामने है, वह किसी विस्फोट की नहीं… यह भ्रष्टाचार के फटने की तस्वीर है। और यही डर भी है कि कहीं यह बस्तर में आने वाले समय की “नई सामान्य घटना” न बन जाए।
तोकापाल ब्लॉक की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वाली Nh -16 KM 476.60 से पटेलपारा लम्बाई 5.20 किलोमीटर लगभग 72 लाख रुपए की सड़क, जो गांव की एकमात्र जीवन-रेखा थी, आज मौत के गड्ढे में बदल चुकी है। जहां कभी रास्ता था, वहां अब सड़क हवा में झूलती और नीचे मिट्टी पूरी तरह धंसी हुई दिखती है। गांव वाले रोज़ इसी टूटे हुए खड्डे के किनारे से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बड़ा हादसा टल चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की तरफ से अब तक ना चेतावनी बोर्ड, ना मरम्मत, ना निरीक्षण, सिर्फ खामोशी।
यह हाल देखकर यही लगता है—
यहां डामर नहीं बहा… जिम्मेदारी बह गई।
यहां मिट्टी नहीं धंसी… ईमानदारी धंस गई।
यहां सड़क नहीं टूटी… सिस्टम की आत्मा टूट गई।
और सबसे ज्यादा चुभने वाली बात यह कि
जनप्रतिनिधि-विशेषकर विधायक साहब—इस खाई के सामने भी खामोश बैठे हैं। मंचों से विकास की गूंज, पोस्टरों में चमकते वादे, फोटोशूट में मुस्कान… पर इस सड़क पर विकास का चेहरा घावों से भरा दिखाई देता है।
विधायक क्षेत्र के इस हालत पर लोगों ने यह भी कहा कि
“अगर यह सड़क विधायक के घर तक जाती, तो क्या इतने दिन चुप्पी रहती?” यह सवाल किसी की भावना नहीं, बल्कि असल दर्द है।
विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के निशाने पर हैं।
जिन्हें निर्माण की गुणवत्ता देखनी थी, निरीक्षण करना था, उसी सड़क की हालत आज उनके हस्ताक्षरों और स्वीकृति पर सबसे भीषण सवाल खड़ा कर रही है।
गांव में चर्चा साफ-साफ है—
“सड़क नहीं टूटी… अधिकारियों की नीयत टूटी है।” 72 लाख की सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल पाई।अगर यह भ्रष्टाचार नहीं, तो फिर क्या है? अगर यह लापरवाही नहीं, तो फिर किसे कहेंगे? और कार्रवाई के इंतजार में जनता पूछ रही है—क्या किसी की मौत का इंतज़ार किया जा रहा है, साहब?
ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच, घटिया निर्माण की जिम्मेदारी, और ठेकेदार से लेकर फाइल पास करने वाले अधिकारी तक हर स्तर पर कार्रवाई की जाए। क्योंकि जनता का सब्र अब अंतिम सीमा पर है, और गांव की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा तीखी— “सड़क कट गई तो क्या हुआ… अब जिम्मेदारों की कुर्सी कटनी चाहिए, साहब!”
छत्तीसगढ़ ग्राम सड़क विकास अभिकरण विभाग के SDO धनंजय देवांगन ने इस मामले पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।
PWD की आंखें बंद—ठेकेदार की हिम्मत बुलंद, सड़कें बनते ही उखड़ रहीं!
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। नगर निगम क्षेत्र में PWD विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से चल रहा बी.टी. पैच रिपेयर कार्य अब जगदलपुर शहर की सड़कों से ज्यादा विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। काम अभी पूरा भी नहीं हुआ, लेकिन जहाँ-जहाँ नया डामर डाला जा रहा है, वहाँ कुछ ही घंटों में डामर उखड़कर सड़क की असली सूरत सामने आने लगी है। मानो करोड़ों का यह प्रोजेक्ट सड़क सुधार का नहीं, बल्कि सड़क उजाड़ने का ठेका लेकर किया जा रहा हो। शहर में चर्चा है—“डामर से ज़्यादा कमीशन की परत चढ़ाई गई है!”
सबसे बड़ी हैरानी यह है कि इतनी बड़ी परियोजना की निगरानी जिस अधिकारी को करनी चाहिए वही मौके से नदारद बताए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी और सुस्त देखरेख ने ठेकेदार को इतना बेलगाम कर दिया है कि वह खुलेआम घटिया काम कर रहा है, जैसे शहर उसकी निजी जागीर हो? लोग तंज कस रहे हैं—“जब साहब आंखें मूंदे बैठे हैं, तो ठेकेदार क्यों न काम में आंख मारे!”
यह भी कम चौंकाने वाली बात नहीं कि शहर के कई ऐसे सड़क है जिससे रोज शहर के VIP गुजरते हैं। लेकिन फिर भी घटिया गुणवत्ता वाला पैच रिपेयर ऐसे डाला जा रहा है जैसे सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि जनता की समझदारी और धैर्य पैच किए जा रहे हों। शहरवासियों का गुस्सा इस बात पर और भड़क रहा है कि VIP एक्सेस वाली इस सड़क पर जब इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है, तो बाकी शहर का क्या हाल किया जाएगा? साफ संदेश मिल रहा है “जिम्मेदारों की चुप्पी ही ठेकेदार की ताकत है।”
लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्यपालन अभियंता श्री बत्रा ने गुणवत्ता देखने की जिम्मेदारी ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी है? क्या इस पैच रिपेयर में डामर से ज्यादा कुछ और बह रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि निरीक्षण की फाइलों में सब कुछ सही है, और जमीन पर सिर्फ दुकानदारों और आम जनता के पैसे बह रहे हैं? यह भी चर्चा गर्म है कि कुछ “चार पैसे” की चमक ने विभागीय आंखों पर ताला लगा दिया है, और उसी का फायदा उठाकर ठेकेदार शहर की सड़कों को प्रयोगशाला समझकर खेल खेल रहा है?
करोड़ों का यह काम यदि ऐसे ही चलता रहा तो शहर के गड्ढे तो भरेंगे नहीं, पर PWD की जवाबदेही के गड्ढे जरूर और गहरे होते जाएंगे। जनता ने स्पष्ट कहा है—यह सिर्फ खराब सड़क का मामला नहीं, बल्कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से होने वाले सफेदपोश भ्रष्टाचार की बू है, जिसे अब छुपाना मुश्किल हो रहा है। लोगो का कहना है की जरूरत इस बात की है कि पूरे काम की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो, ठेकेदार को रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
और अब बात PWD के ‘भाग्य-विधाता’ श्री बत्रा साहब की…
इस विषय पे कार्यालय पहुँच, मुँह खोलकर सवाल रखने से पहले हि साहब बिना कुछ सुने ही अपने आप बोलने लगे— “अभी टाइम नहीं है… मीटिंग में जाना है… बाद में बात करेंगे…” लग ही नहीं रहा था कि कोई अधिकारी जनता के सवालों का सामना कर रहा है; बल्कि ऐसा लगा जैसे सवाल सुनने की ज़िम्मेदारी भी किसी और विभाग को ठेके पर दे दी गई हो!
साहब का व्यवहार बिल्कुल ऐसा—जवाबदेही नहीं, बल्कि सवाल पूछना ही अपराध हो गया हो। काम की गुणवत्ता सड़क पर लोटपोट है, पर साहब का एटीट्यूड?
जिम्मेदारी से भागने का रफ्तार VIP स्पीड साहब!
शहीदों को नमन करने सहित पूर्व सैनिकों का किया गया सम्मान
जगदलपुर, शौर्यपथ। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों के पुण्य स्मरण और उनके परिवारों के कल्याण के लिए बस्तर जिले में रविवार 07 दिसंबर को सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पूरे सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया। रविवार 07 दिसंबर को प्रातः 11 बजे जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर और जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक के प्रभारी अधिकारी कर्नल एके कर, सर्जन कमाण्डर जॉनसन एवं दंत चिकित्सक डॉ. अभिषेक सिंह पठानिया को जिला सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा ध्वज प्रतीक (फ्लैग प्रतीक) लगाकर किया गया।
इस मौके पर जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में द्वितीय विश्व युद्ध की नान पेंशनर श्रीमति महेश्वरी वानखड़े एवं श्रीमति वानो बाई को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें विशेष निधि से 10 हजार रुपए का धनादेश भी सौंपा गया। पूरे बस्तर संभाग से पूर्व सैनिक एवं पूर्व सैनिकों के परिजनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष कलेक्टर हरिस एस ने सभी नागरिकों से सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में उदारतापूर्वक योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा यह कोष हमें अपने बहादुर शहीदों के आश्रितों, भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास और कल्याण को सुनिश्चित करने का अवसर देता है। राष्ट्र के इन सच्चे नायकों के प्रति आभार व्यक्त करने का यह हमारा कर्तव्य है।
इस दिन का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र सेनाओं के कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए धन एकत्र करना है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्होंने देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह दिन हमें सेना के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनकी वीरता को याद करने की प्रेरणा देता है।हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और राष्ट्र के इन सच्चे सेवकों के परिवारों के लिए अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
जगदलपुर, शौर्यपथ। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा 2025 के अंतर्गत संपूर्ण बस्तर जिले में चलाए जा रहे यातायात जागरूकता अभियान के तहत मंगलवार को दंतेश्वरी फ़ार्मेसी कॉलेज, बोरपदर (जगदलपुर) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ सिन्हा के मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) जगदलपुर संतोष जैन, यातायात प्रभारी मधुसूदन नाग एवं प्रकाश देवांगन ने कॉलेज के लगभग 100 छात्र-छात्राओं, अध्यापक एवं स्टाफ को सड़क सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। इनमें ट्रैफिक नियमों का पालन, सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण, रोकथाम के उपाय, गुड सेमेरिटन लॉ तथा बस्तर क्षेत्र में पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के उदाहरण शामिल थे।
छात्रों एवं स्टाफ ने गम्भीरता से जानकारी को सुना तथा भविष्य में यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प व्यक्त किया।
कॉलेज प्राचार्य ने भी सभी छात्रों से दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनने की अपील की और स्पष्ट कहा कि बिना हेलमेट किसी भी विद्यार्थी को कॉलेज गेट से प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्राचार्य की इस पहल पर सभी छात्रों ने सहमति जताई।
कार्यक्रम में कॉलेज के अध्यापक, स्टाफ तथा यातायात विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में यह कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
राशन दुकान व आंगनबाड़ी तक पहुंचा कचरे का कहर, प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा गंदगी का कारोबार!
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ । शहर में स्वच्छता का नारा बुलंद करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि अगर सच्चाई देखना चाहते हैं तो एक बार सिविल लाइन वार्ड क्रमांक 07 लालबाग स्थित SLRM सेंटर का हाल जरूर देखें। यहां शहर भर का कचरा लाकर डंप किया जाता है, जिसे महिला समूह के माध्यम से छांटा जाता है, लेकिन सफाई के नाम पर यह केंद्र अब दुर्गंध, मक्खियों और बीमारी का गढ़ बन चुका है।
बदबू से त्रस्त जनता, और वहीं पास में चल रहा राशन दुकान व बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्र, दोनों ही इस कचरे के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। बच्चों को पोषण देने के बजाय यहां संक्रमण और प्रदूषण का ज़हर परोसा जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सेंटर से उठने वाली सड़ी दुर्गंध पूरे इलाके में फैल चुकी है। “सुबह से शाम तक बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को बाहर खेलना तो दूर, आंगनबाड़ी भेजना भी खतरे से खाली नहीं,” लोगों ने नाराज़गी जताई।
शिकायतों के बावजूद नगर निगम और स्वच्छता मिशन अधिकारी बेखबर हैं, जैसे किसी को जनता की सेहत की कोई परवाह ही नहीं। हर साल “स्वच्छता रैंकिंग” में नंबर बढ़ाने की होड़ में लगे अधिकारी, ज़मीनी गंदगी और जनता की परेशानी को पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन का असली चेहरा लालबाग में साफ दिखाई दे रहा है — जहां मिशन सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में नागरिक बदबू, मच्छर और बीमारी के बीच जीने को मजबूर हैं।
वार्डवासियों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे या तो SLRM सेंटर को आबादी से दूर हटाया जाए, या फिर वहां दुर्गंध नियंत्रण, कीटाणुनाशक छिड़काव और सफाई की स्थायी व्यवस्था की जाए। अन्यथा वार्ड के लोग आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, क्योंकि अब यह मामला सिर्फ बदबू का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही का बन चुका है।
जगदलपुर में पत्रकारों के बीच पहला शो—बस्तर की वास्तविकता, दर्द और उम्मीद का संजीव चित्रण
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बहुप्रतीक्षित छत्तीसगढ़ी फिल्म “माटी” शुक्रवार को पूरे प्रदेश में रिलीज होते ही चर्चा का केंद्र बन गई। बस्तर में लंबे समय से प्रतीक्षित यह फिल्म अपने पहले ही दिन जगदलपुर के स्थानीय बिनाका मॉल स्थित मल्टीप्लेक्स में बस्तर जिला पत्रकार संघ के सदस्यों के लिए विशेष शो के रूप में प्रदर्शित की गई। बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकारों ने फिल्म देखकर बस्तर की वास्तविकताओं से रूबरू होने का अनुभव साझा किया।
फिल्म माटी न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि बस्तर की मिट्टी, संस्कृति, लोकजीवन और संघर्ष को पहली बार इतने सजीव, भावनात्मक और संवेदनशील रूप में बड़े पर्दे पर सामने लाती है। घने जंगलों, घाटियों, झरनों और दूरस्थ गांवों की प्राकृतिक सुंदरता को कैमरे ने एक ऐसी दृष्टि दी है, जिसने दर्शकों को अपनी ही मिट्टी से नए सिरे से जोड़ दिया।
फिल्म की कहानी नक्सलवाद की छाया में जी रहे बस्तरवासियों की पीड़ा, भय, प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं और आम लोगों के संघर्ष को बिना किसी आडंबर के पेश करती है। हिंसा और अनिश्चितता के बीच पनपती एक शांत, सच्ची और मासूम प्रेम कहानी इस फिल्म की भावनात्मक धड़कन बनकर उभरती है, जो अंधेरे परिस्थितियों में भी उम्मीद और जिंदगी की किरण दिखाती है।
फिल्म की खासियत यह है कि इसमें बस्तर के स्थानीय कलाकारों ने बड़ी संख्या में अभिनय किया है। उनका बोली-बानी, हावभाव और जीवनशैली कहानी को वास्तविक और भरोसेमंद आयाम देती है। निर्देशक ने कलाकारों को सिर्फ अभिनय नहीं कराया, बल्कि उन्हें अपनी ही कहानी को जीने का अवसर दिया है।
चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फिल्म के निर्माता व कथाकार सम्पत झा ने कहा कि “माटी सिर्फ एक फिल्म नहीं, यह बस्तर की पहचान और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यहां की खुशबू, दर्द और उम्मीद को दुनिया के सामने लाना ही मकसद था।” उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में नक्सलवाद के डर के कारण स्थानीय लोग शामिल होने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन बाद में वे खुद इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर गर्व महसूस करने लगे।
फिल्म में 1000 से अधिक स्थानीय लोगों ने छोटी-बड़ी भूमिकाओं में काम किया है, जिससे इसका प्रत्येक दृश्य बस्तर की सच्चाई के और करीब नजर आता है।
फिल्म के निर्देशक अविनाश प्रसाद, जिन्होंने वर्षों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया है, ने बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को बेहद जीवंत निर्देशन के साथ परदे पर उतारा है।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लोकप्रिय संगीतकार अमित प्रधान ने बैकग्राउंड स्कोर से फिल्म को गहराई दी है, वहीं मनोज पांडेय के लिखे गीत कहानी के संवेदनशील पहलुओं को और प्रभावी बनाते हैं।
फिल्म की संपूर्ण शूटिंग बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों, नदी-घाटियों, पहाड़ों, जंगलों और दुर्गम गांवों में की गई है। इन प्राकृतिक दृश्यों की मौलिक सुंदरता ने फिल्म को दृश्यात्मक रूप से और भी आकर्षक बना दिया है।
मुख्य कलाकारों में महेन्द्र ठाकुर (भीमा), भूमिका साहा (उर्मिला) सहित भूमिका निषाद, राजेश मोहंती, आशुतोष तिवारी, दीपक नाथन, संतोष दानी, निर्मल सिंह राजपूत, जितेन्द्र ठाकुर, नीलिमा, लावण्या मानिकपुरी, पूर्णिमा सरोज, श्रीधर राव, बादशाह खान और कई स्थानीय कलाकारों ने दमदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
