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June 17, 2026
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Naresh Dewangan

Naresh Dewangan


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जगदलपुर, शौर्यपथ।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जगदलपुर में मां दंतेश्वरी हवाई अड्डे पर आत्मीय स्वागत किया गया। वे धुरवा समाज और माहरा समाज के भवन का लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय के साथ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद बस्तर महेश कश्यप भी पहुंचे हैं।

​हवाई अड्डे पर वन मंत्री केदार कश्यप, ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय, पूर्व सांसद दिनेश कश्यप,पूर्व विधायक संतोष बाफना, महेश गागड़ा, डॉ सुभाऊ कश्यप, लच्छू कश्यप, बैदूराम कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदर राज पी., कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन ने स्वागत किया।

By - नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। नवरात्र एवं बस्तर दशहरा पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की दंतेवाड़ा पैदल यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने बस्तर पुलिस व यातायात विभाग ने सराहनीय पहल की है। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग के पर्यवेक्षण में शनिवार को परिवहन संघ सभागार, झाडेश्वर समिति नगरनार व बस स्टैंड जगदलपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर ट्रक मालिक, 300 ट्रक चालक व लगभग 100 ऑटो चालकों को सड़क सुरक्षा नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। यातायात डीएसपी संतोष जैन, प्रभारी मधुसूदन नाग व टीम ने चालकों से अपील की कि वे नियंत्रित गति में वाहन चलाएं, ओवरस्पीड व ओवरटेक से बचें, नशे की हालत में वाहन न चलाएं तथा थकान होने पर विश्राम करें। साथ ही रात्रि में श्रद्धालु मार्ग पर परिवहन रोकने और वाहन की सभी लाइट चालू हालत में रखने जैसे महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

पुलिस अधीक्षक ने श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया कि वे यात्रा के दौरान सड़क के बाएं किनारे चलें, सड़क पर बैठकर विश्राम करने से बचें तथा सुरक्षित कैंपों का उपयोग करें। जरूरत पड़ने पर पुलिस पेट्रोलिंग वाहन या आपातकालीन नंबर से तुरंत सहायता लें।

श्रद्धालुओं व वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर यातायात विभाग का यह सतत प्रयास जनहित में सराहनीय माना जा रहा है। “सुरक्षित सफर ही सुरक्षित जीवन” का संदेश पूरे जिले में जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ।विश्कर्मा जयंती के पावन अवसर पर बुधवार को यातायात विभाग जगदलपुर ने अपने वाहनों की विशेष पूजा-अर्चना दंतेश्वरी मंदिर में कराई। पूजा-अर्चना के दौरान दंतेश्वरी माता से सुरक्षित यातायात व्यवस्था, दुर्घटनामुक्त सेवाओं और जनहित में निरंतर कार्य करने की प्रार्थना की गई। विभाग के कर्मचारियों ने इसे परंपरा और श्रद्धा से जुड़ा अवसर मानते हुए अपने वाहनों की साफ-सफाई कर उन्हें पूजा में सम्मिलित किया।

इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने संदेश दिया कि वाहन केवल सरकारी संसाधन नहीं, बल्कि जनता की सेवा का साधन हैं। उनकी सुरक्षा, देखभाल और सदुपयोग ही विभाग की प्राथमिकता है।

बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी के रथारूढ़ होने नए रथ निर्माण की हुई शुरुआत

जगदलपुर, शौर्यपथ।  छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की दूसरी प्रमुख रस्म 'डेरी गड़ाई' आज पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हो गई। यह रस्म बस्तर दशहरा की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके साथ ही बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की परिक्रमा के लिए रथ निर्माण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने की अनुमति प्राप्त हुई। इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर हरिस एस, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, बस्तर दशहरा पर्व के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन और बड़ी संख्या में स्थानीय समुदाय उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

            बस्तर दशहरा पर्व के डेरी गड़ाई रस्म के तहत बिरिंगपाल गांव से विशेष रूप से लाई गई साल की पवित्र टहनियों को सिरहासार में खंभों के साथ विधि-विधानपूर्वक गाड़ा गया। यह प्रक्रिया पारंपरिक वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों के बीच मंत्रोच्चार और परम्परागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। इस रस्म का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह बस्तर दशहरा के रथ निर्माण की शुरुआत का प्रतीक है। रस्म के दौरान सिरहासार में रथ निर्माण की अनुमति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। 

          डेरी गड़ाई रस्म के अवसर पर महिलाओं ने हल्दी खेलने की परंपरा को निभाया, जिसमें वे एक-दूसरे पर हल्दी छिड़ककर उत्सव की खुशी को साझा करती हैं। यह दृश्य स्थानीय संस्कृति की जीवंतता और सामुदायिक एकता को दर्शाता है। हल्दी खेलने की यह परंपरा उत्साह बढ़ाती है। इसके साथ ही सामाजिक समरसता को भी मजबूत करती है। डेरी गड़ाई रस्म के समापन के साथ ही रथ निर्माण का कार्य विधिवत शुरू हो गया है। इस कार्य को झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के संवरा जाति के कुशल कारीगर संपन्न करेंगे। ये कारीगर अपनी परंपरागत तकनीकों और औजारों का उपयोग करते हुए रथ को तैयार करेंगे, जो आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की रथारूढ़ होने के साथ परिक्रमा के लिए उपयोग किया जाएगा। रथ का निर्माण पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से किया जाता है, जिसमें आधुनिक उपकरणों का उपयोग नहीं होता। यह प्रक्रिया न केवल कारीगरी का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखती है। रथ का उपयोग बस्तर दशहरा के दौरान मां दंतेश्वरी की शोभायात्रा में किया जाएगा। यह रथ उत्सव का एक केंद्रीय प्रतीक है, जो मां दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। रथ की परिक्रमा बस्तर दशहरा के सबसे आकर्षक और धार्मिक दृश्यों में से एक होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। साथ ही देश-विदेश के सैलानी भी ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के साक्षी बनते हैं।

जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जगदलपुर में मां दंतेश्वरी हवाई अड्डे पर आत्मीय स्वागत किया गया। वे बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और राहत कार्यों की समीक्षा करने के लिए पहुंचे हैं।

​हवाई अड्डे पर सांसद महेश कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, आयुक्त नगर निगम प्रवीण वर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय के साथ वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और सचिव श्रीमती रीना बाबा साहब कंगाले भी पहुंचे हैं।

​हवाई अड्डे पर स्वागत के बाद मुख्यमंत्री श्री साय सड़क मार्ग से दंतेवाड़ा के लिए रवाना हो गए। वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे। इसके साथ ही, वे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा भी करेंगे ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

एक पेड़ माँ के नाम 2.0 पौधारोपण के लक्ष्य को साय सरकार ने किया पूरा- केदार कश्यप 

जगदलपुर, शौर्यपथ । आज प्रदेश के वनमंत्री केदार कश्यप बस्तर के बेसोली स्थित शासकीय महाविद्यालय में आयोजित वन महोत्सव और फल उद्यान लोकार्पण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। वनमंत्री श्री कश्यप ने इस अवसर पर "मौलश्री" का पौधा लगाकर वन विभाग बस्तर वन मंडल के वन महोत्सव का औपचारिक शुभारम्भ किया एवं वन मंत्री ने आम जनता से अपील की कि वे अपने घर, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वर्ष 1950 से देशभर में वन महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है, जिसका उद्देश्य वनों का संरक्षण, पौधारोपण को बढ़ावा देना और वृक्षों के प्रति जन जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा हमारी विष्णुदेव साय सरकार ने भी वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ में 2 करोड़ 76 लाख पौधरोपण का लक्ष्य तय किया था जिसे वन विभाग ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों, स्व सहायता समूहों और महतारी वंदन योजना के हितग्राही महिलाओं के सहयोग से पूरा कर लिया है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद भी विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश की हरियाली और सुंदरता को बनाये रखने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के कार्य में लगी है। 

उन्होंने कहा एक पेड़ माँ के नाम 2.0 अभियान के तहत पिछले दो महीनों में राज्य भर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। इसमें केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास विभाग, जीविका समूह, उद्यान विभाग, अन्य सरकारी संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक क्लब भी शामिल हुए। ऐसे सभी लोगों का ह्रदय से आभार। 

फल उद्यान का लोकार्पण, पांच एकड़ में फैला है उद्यान

आज वनमंत्री केदार कश्यप ने बेसोली फल वाटिका का उदघाटन किया। महाविद्यालय कैंपस के पाँच एकड़ क्षेत्र में लगभग 775 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण किया गया है। जिसमें आम 180, जामुन 175,अमरुद 175, कटहल 75, सीताफल 75, फ्लावरिंग 95 इसके साथ रामफल, लक्ष्मण फल, हनुमान फल, रूद्राक्ष, लक्ष्मी तरु, बेल इस तरह कुल अलग अलग किस्म के 775 पौधे रोपे गए हैं. 

 

तेंदूपत्ता महिला हितग्राहियों को चरण पादुका का वितरण एवं चेक वितरण

 वन महोत्सव में वनमंत्री केदार कश्यप ने तेन्दुपत्ता संग्रहण करने वाले महिला हितग्राहियों को चरण पादुका का वितरण किया। वनमंत्री केदार कश्यप ने इस दौरान लोगों को बताया कि पिछले कांग्रेस शासन में न तेन्दु पत्ते का खरीदी हुआ बल्कि चरण पादुका जैसे महत्वपूर्ण योजना जो सीधा हमारे आदिवासी भाई बहनों के हित से जुड़ा था ऐसी हितग्राही मुलक योजना को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा आज विष्णुदेव साय सरकार में यह योजना फिर से शुरू हो गयी है। वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बस्तर संभाग में अब तक पुरे प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक चरण पादुका का वितरण किया जा चूका है। वनमंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम के दौरान ग्राम चेराकुर के श्रीधर बघेल को राज मोहिनी देवी तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत 2 लाख का चेक प्रदान किया। 

 

इस दौरान कार्यक्रम में कार्यक्रम में बस्तर के पर्व सांसद दिनेश कश्यप, बस्तर भाजपा जिलाध्यक्ष वेद प्रकाश पाण्डेय, निर्देश दीवान, शकुंतला कश्यप, पूर्व जिला अध्यक्ष रुपसिंह मण्डावी, मंडल अध्यक्ष प्रवीण सांखला, खितेश मौर्य, गौरव कश्यप, जमुना ठाकुर एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से आज जगदलपुर में “कनेक्ट बस्तर” का भव्य शुभारंभ हुआ। यह अनूठी पहल पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन समारोह का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में किरण सिंह देव (विधायक), वेद प्रकाश पाण्डेय (बीजेपी जिला अध्यक्ष), रूप सिंह मंडावी (पूर्व जिला अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

समारोह में समिति द्वारा चयनित वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके साथ ही विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आधारित विशेष पैकेज और एक ब्राउज़र प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया, जिससे पर्यटक बस्तर की खूबसूरती को डिजिटल माध्यम से आसानी से खोज सकेंगे।

कार्यक्रम के दौरान कही गई अहम बातें वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा,

“बस्तर क्षेत्र केरल से बड़ा है और इसकी प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है। वर्ष 2026 तक इस क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य है। पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करके स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।”

विधायक किरण सिंह देव ने कहा,“‘कनेक्ट बस्तर’ बस्तर के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे गाँवों के लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान मिलेगी।”

इस कार्यक्रम के प्रमुख आयोजकों में सीसीएफ सुश्री स्टायलो मंडावी, नवीन कुमार (निदेशक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान) और उत्तम गुप्ता (डीएफओ बस्तर वनमंडल) रहे। कार्यक्रम का समापन भूषण साहू, डिप्टी एमडी, बस्तर वन मंडल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

कनेक्ट बस्तर’ के प्रमुख उद्देश्य

पर्यटन बढ़ावा: बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना।

सांस्कृतिक संवर्धन: बस्तर की लोकसंस्कृति, लोकनृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और त्योहारों को बढ़ावा देना।

स्थानीय रोजगार: होमस्टे, गाइडिंग, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर सृजित करना।

प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण: पर्यटकों में पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

सांस्कृतिक और प्राकृतिक अनुभव: झरनों, गुफाओं, मंदिरों और बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव कराना।

‘कनेक्ट बस्तर’ पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और पारिस्थितिक संरक्षण को भी नई ऊँचाई प्रदान करेगी।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा महतारी सदन- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

जगदलपुर, शौर्यपथ।  प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार महतारी सदन का निर्माण कार्य किया जाना है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास से 166 महतारी सदन की स्वीकृति आदेश जारी किया गया है, इसके लिए 49 करोड़ 80 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि न्यू इंडिया के ग्रोथ साइकल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ रहा है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में बनने जा रहा महतारी सदन भी इसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि लगातार ग्राम भ्रमण के दौरान महिलाओं द्वारा बैठने की स्थान न होने की शिकायत की और बैठने हेतु स्थान दिलाने की मांग की जाती रही इसलिए महतारी सदन बनाने का विचार आया। ततपश्चात महिलाओं को रोजगार दिलाने और उनको काम काज के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार गांवों में महतारी सदन बनाने जा रही है। अब तक 368 महतारी सदन की स्वीकृति इसी उद्देश्य को पूर्ति के लिये जारी किया गया है। कार्यों में एकरूपता के दृष्टिकोण से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्य का एक मानक डिजाईन एवं प्राक्कलन तैयार किया गया है। प्रति महतारी सदन की लागत राशि रुपये 30 लाख होगी। 

 

5 वर्षो में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाने की योजना

प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाया जाएगा। महतारी सदन बनाने की शुरुआत हो गयी है। पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में महतारी सदन बनना प्रारंभ किया जा रहा है व 5 साल में सभी ग्राम पंचायत में महतारी सदन बनेंगे। प्रदेश में बनने वाले महतारी सदन का निर्माण लगभग 25 सौ वर्गफुट में कराया जाएगा। सदन में कमरा, शौचालय, बरामदा, हाल, किचन और स्टोररूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमे बॉउंड्रीवाल भी बनाये जाएंगे। महतारी सदन में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा।

 

बस्तर जिले में नए आठ महतारी सदन स्वीकृत

बस्तर जिले में आठ नए महतारी सदन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें बस्तर विकासखंड का करंदोला, केशरपाल, चमिया, परचनपाल जगदलपुर विकासखंड का आड़ावाल, दरभा विकासखंड का दरभा और ग़ुमड़पाल, बकावंड विकासखंड का करपावन्ड शामिल है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी बस्तर जिले में 10 महतारी सदन निर्माण की स्वीकृति राज्य शासन द्वारा प्रदान की जा चुकी है, जिसमें दरभा विकासखंड के चिंगमपाल, तोकापाल विकासखंड के परपा और लोहंडीगुड़ा विकासखंड के उसरीबेड़ा में महतारी सदन के निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष महतारी सदन निर्माण का कार्य प्रगति पर हैं।

जगदलपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़, जिसे "धान का कटोरा" के रूप में जाना जाता है, एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की संस्कृति और परंपराएं गहरे रूप से खेती-किसानी और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं। यहां के त्यौहार और पर्व न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं, बल्कि किसानों और उनके पशुधन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को भी व्यक्त करते हैं। इनमें से एक प्रमुख और लोकप्रिय पर्व है पोला, जो छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से किसानों और उनके बैलों के प्रति समर्पित है, जो खेती-किसानी में उनकी सबसे महत्वपूर्ण सहायता करते हैं। 

     पोला छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से कृषि और पशुधन, विशेषकर बैलों की पूजा से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ के अलावा, यह पर्व महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। यह त्यौहार किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी मेहनत और पशुधन के योगदान को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। पोला पर्व का मूल उद्देश्य खेती-किसानी में बैलों के योगदान को मान्यता देना और उनकी पूजा करना है। यह छत्तीसगढ़ की सनातन परंपराओं और कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। बैल, जो खेती-किसानी में किसानों के सबसे बड़े सहायक हैं, इस दिन विशेष सम्मान के पात्र बनते हैं। यह पर्व मानसून के समापन और खरीफ फसल की बोआई के बाद मनाया जाता है, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है।

 पोला पर्व की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। 

पोला पर्व के दिन, सुबह से ही उत्साह का माहौल होता है।किसान अपने बैलों को नदी या तालाब में ले जाकर स्नान कराते हैं। इसके बाद बैलों को रंगों, कपड़ों, घुंघरू, घंटियों, और कौड़ियों से सजाया जाता है। उनके सींगों पर पॉलिश और रंग लगाए जाते हैं, और गले में आभूषण पहनाए जाते हैं। बैलों को विशेष भोजन, जैसे गुड़ और चावल का मिश्रण, खिलाया जाता है। जिनके पास बैल नहीं होते, वे मिट्टी या लकड़ी से बने बैलों की पूजा करते हैं। पूजा में चंदन का टीका, धूप, अगरबत्ती, और माला का उपयोग किया जाता है। घरों में महिलाएं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाती हैं, जैसे चीला, गुड़हा, अनरसा, सोहरी, चौसला, ठेठरी, खुरमी, बरा, मुरकु, भजिया, तसमई आदि। ये व्यंजन चावल, गुड़, तिल, और अन्य स्थानीय सामग्रियों से तैयार किए जाते हैं, जो छत्तीसगढ़ की पारम्परिक खाद्य संस्कृति को दर्शाते हैं।

      बच्चों के लिए यह पर्व विशेष रूप से रोमांचक होता है। वे मिट्टी या लकड़ी से बने खिलौनों, जैसे बैल और रसोई के बर्तनों के साथ खेलते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन बैल दौड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जो पर्व के उत्साह को और बढ़ाती हैं।

पोला पर्व का महत्व केवल धार्मिक या कृषि तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक, सांस्कृतिक, और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। बैल खेती-किसानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी पूजा करके किसान अपनी समृद्धि और प्रगति के लिए आभार व्यक्त करते हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखता है। बच्चों को मिट्टी के खिलौनों जैसे खेलों के माध्यम से अपनी संस्कृति और प्रकृति के महत्व का ज्ञान होता है। बैलों और प्रकृति की पूजा के माध्यम से यह पर्व पर्यावरण और पशुधन के संरक्षण का संदेश देता है। यह हमें हमारी जड़ों और प्रकृति के साथ जुड़ाव की याद दिलाता है।

     आधुनिक युग में, जहां मशीनों ने खेती-किसानी में बैलों की भूमिका को कुछ हद तक कम कर दिया है, फिर भी पोला पर्व अपनी प्रासंगिकता बनाए रखता है। यह पर्व न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संजोता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने पर्यावरण और पशुधन का सम्मान करना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में भी यह पर्व छोटे स्तर पर मनाया जाता है, जहां लोग मिट्टी के बैलों की पूजा करते हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

सोनारपाल में की जाएगी उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना-मंत्री केदार कश्यप

जगदलपुर, शौर्यपथ। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि क्षेत्र में उद्यानिकी फसल की ओर किसानों के रुझान को देखते हुए शीघ्र ही सोनारपाल में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

गुरुवार को मंत्री केदार कश्यप ने बोड़नपाल और सोनारपाल में आयोजित कार्यक्रमों में 80 लाख 57 हजार रुपए लागत के 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन अवसर पर कहा कि हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को गति दी हैण् 18 लाख आवासों के निर्माण की स्वीकृति इस बात का साक्ष्य है। हमारी सरकार ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का कार्य किया साथ ही विकास कार्यों को एक नई दिशा दी है। उन्होंने इस दौरान क्षेत्रीय ग्रामीणों की मांग पर सोनारपाल में मंदिर के निकट हैंडपंप खनन, बड़ेपारा तारागांव में 2 मीटर पुलिया, सोनारपाल ठाकुरपारा में 2 मीटर पुलिया, माता मंदिर तारागांव में भवन, स्कूल में शेड निर्माण, बाकेल में धान खरीदी केंद्र, डेढ़ करोड़ रूपए की लागत से एनीकट निर्माण, जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण, खालेपारा बाकेल में हैंडपंप स्थापाना एवं सिलाई सेंटर स्थापना की घोषणा भी की।

मंत्री केदार कश्यप ने सोनारपाल में आयोजित कार्यक्रम में 34 लाख 32 हजार रुपए और बोड़नपाल-2 में आयोजित कार्यक्रम में 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने सोनारपाल में 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया, जिनमें चपका ग्राम पंचायत के मारीपारा स्थित माध्यमिक विद्यालय के पास 5 लाख रुपए की लागत से 2 मीटर पुलिया निर्माण, इसी ग्राम पंचायत में मारीपारा से बंगा घर तक 9 लाख 60 हजार रुपए की लागत से 300 मीटर सीसी सड़क का निर्माण, सोनारपाल ग्राम पंचायत में मेन रोड हनुमान मंदिर से संतोषी किराना दुकान तक चार लाख रुपए की लागत से 200 मीटर नाली निर्माण और क्षमता विकास योजना के तहत 5 लाख रुपए की लागत से सीएससी भवन निर्माण कार्य, तारागांव ग्राम पंचायत में बस्तर विकास प्राधिकरण के तहत 6 लाख 50 हजार रुपये की लागत से जोगी घर से मोसू घर तक 200 मीटर सी.सी. रोड निर्माण कार्य और छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा ग्राम तारागांव माता मंदिर में 4 लाख 22 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड निर्माण का भूमिपूजन किया।

         मंत्री श्री कश्यप ने इसके साथ ही बोड़नपाल 02 में आयोजित कार्यक्रम में कुल 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमें छात्रावास बेसोली के क्रीड़ा परिसर में बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत 16 लाख 14 हजार रुपये की लागत से हाई मास्ट लाइट की स्थापना और बेसोली स्कूलपारा श्यामलाल घर के पास डीएमएफ के तहत 3 लाख 30 हजार रुपए की लागत से डेढ़ मीटर पुलिया निर्माण, ग्राम पंचायत बाकेल में छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा माता मंदिर के पास साप्ताहिक बाजार में 23 लाख 51 हजार रुपए की लागत से बाजार शेड निर्माण और अमडीगुड़ा पारा के पिकड़वाही नाला में डीएमएफ के अंतर्गत 3 लाख 30 हजार रुपए की लागत से डेढ़ मीटर पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में अधोसंरचना के विकास और जनसुविधाओं में वृद्धि होगी। इन सभी विकास कार्यों से बस्तर क्षेत्र में ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। श्री कश्यप ने इस अवसर पर ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसे ही जनहितैषी कार्य जारी रहेंगे। इस अवसर पर बस्तर जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल, जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान एवं श्रीमती शकुंतला कश्यप सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, अनुविभागीय दंडाधिकारी ऋषिकेश तिवारी सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण उपस्थित रहे।


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