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नई दिल्ली / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में अपना लगातार नौवां आम बजट पेश किया। यह बजट एक ओर जहां बुनियादी ढांचे, रक्षा, विनिर्माण और ऊर्जा संक्रमण पर सरकार के दीर्घकालिक विजऩ को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी के लिए कुछ मोर्चों पर राहत और कुछ पर झटके भी लेकर आया है।
देश की निगाहें हमेशा की तरह इस सवाल पर टिकी रहीं—क्या सस्ता होगा, क्या महंगा पड़ेगा?
बजट के पन्नों को गहराई से पढऩे पर तस्वीर साफ होती है:
?? इलाज सस्ता, तकनीक किफायती, खेल को बढ़ावा
?? टैक्स में सख्ती, शेयर बाजार को झटका, मिडिल क्लास निराश
इलाज होगा सस्ता: आम आदमी को बड़ी राहत
बजट 2026 की सबसे मानवीय घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली कई दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। कैंसर की कुछ विशेष दवाओं और आर्टेमिया सिस्ट पर टैरिफ 5त्न से घटाकर 0त्न किया गया। इससे लाखों मरीजों और उनके परिवारों पर पडऩे वाला आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
स्मार्टफोन, टैबलेट और खेल सामान होंगे सस्ते
मेक इन इंडिया को मजबूती देते हुए सरकार ने भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट को और किफायती बनाने के संकेत दिए हैं। खेल इक्विपमेंट पर खास फोकस करते हुए बजट 2026–27 में इन्हें सस्ता करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका सीधा लाभ युवाओं, खिलाडिय़ों और मध्यम वर्ग को मिलेगा।
ये चीज़ें हुईं सस्ती (मुख्य बिंदु)
बजट में कई सेक्टर्स को राहत दी गई है:
माइक्रोवेव ओवन के कुछ पाट्र्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म
क्चश्वस्स् (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) और एनर्जी ट्रांजिशन उपकरणों पर ड्यूटी माफ
सोलर ग्लास के कच्चे माल (सोडियम एंटीमोनेट) पर ड्यूटी शून्य
न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के आयात पर 2035 तक कस्टम ड्यूटी नहीं
एविएशन सेक्टर के कच्चे माल पर राहत
विदेशी टूर पैकेज पर ञ्जष्टस् घटाकर 2त्न
विदेश में पढ़ाई पर रुक्रस् के तहत कम ञ्जष्ठस्
मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछली पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं
झींगा-श्रिम्प चारे, फॉस्फोरिक एसिड, बीज, मेवे, मखाना, रेयर अर्थ मिनरल्स पर भारी कटौती
?? कुल मिलाकर ऊर्जा, कृषि, निर्यात और ग्रीन सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन।
ये चीज़ें होंगी महंगी: सख्ती का संदेश
सरकार ने कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट सख्ती दिखाई है:
इनकम टैक्स में गलत जानकारी: 100त्न पेनल्टी
चल संपत्ति छुपाने पर अब जुर्माना
फ्यूचर्स और स्टॉक ऑप्शन ट्रेडिंग पर स्ञ्जञ्ज बढ़कर 0.05त्न
शराब, मिनरल्स और स्क्रैप बिक्री पर ञ्जष्टस् 2त्न
छाते और उनके पाट्र्स पर ऊंची ड्यूटी
रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों पर 5त्न ड्यूटी
चबाने वाला तंबाकू, ज़र्दा और गुटखा पर हृष्टष्टष्ठ 60त्न
?? साफ संदेश: स्पेकुलेशन और नशे पर सख्ती, टैक्स अनुपालन में कोई ढील नहीं।
मिडिल क्लास को झटका: टैक्स में कोई राहत नहीं
इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं स्टैंडर्ड डिडक्शन जस का तस, मिडिल क्लास को उम्मीद थी कि महंगाई के दौर में टैक्स राहत मिलेगी, लेकिन वित्त मंत्री ने इस मोर्चे पर कोई रियायत नहीं दी।
शेयर बाजार को बड़ा झटका
बजट के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट ,निफ्टी 50 करीब 3त्न गिरकर 25,600 के नीचे टैक्स और पूंजी बाजार से जुड़ी सख्ती से निवेशकों की निराशा साफ दिखी।
देश को मिलेगी रफ्तार: 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि देश में 7 नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनमें प्रमुख रूट शामिल हैं:
मुंबई–पुणे
पुणे–हैदराबाद
हैदराबाद–बेंगलुरु
हैदराबाद–चेन्नई
सिलिगुड़ी–वाराणसी
इससे कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार को नई गति मिलेगी।
टेक्सटाइल और कारीगरों के लिए बड़ा विजऩ
मेगा टेक्सटाइल पार्क
नेशनल फाइबर स्कीम
मैन-मेड और एडवांस्ड फाइबर पर जोर
नेशनल हैंडलूम पॉलिसी
कारीगरों को अकादमिक और तकनीकी सहयोग
रक्षा पर रिकॉर्ड निवेश
सरकार ने डिफेंस बजट बढ़ाकर 7.8 लाख करोड़ रुपये किया ,आधुनिकीकरण के लिए 2.1 लाख करोड़ रुपये.राफेल, पनडुब्बी, ्रङ्क जैसी परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी।
विकास का बजट, लेकिन सबके लिए समान नहीं
आम बजट 2026
?? इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और ग्रीन एनर्जी पर मजबूत फोकस
?? इलाज, तकनीक और खेल में राहत
?? टैक्स और बाजार में सख्ती
?? मिडिल क्लास की उम्मीदों पर ब्रेक
यह बजट साफ करता है कि सरकार का लक्ष्य दीर्घकालिक विकास और अनुशासन है, लेकिन इसका तत्काल बोझ कुछ वर्गों को महसूस होगा। आम आदमी के लिए यह बजट राहत और चुनौती—दोनों का मिश्रण है।
**ठेकेदार यूनियन की बधाई से लेकर ‘बुलडोजर सरकार’ के प्रचार तक
जन्मदिन के पोस्टरों में विकास, ज़मीन पर सवालों का अंबार**
दुर्ग | विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार का 31 जनवरी को जन्मदिन इस बार केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आयोजन शहर भर में चर्चा, सवाल और बहस का विषय बन गया है। शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए बधाई पोस्टर—विशेषकर ठेकेदार यूनियन के नाम से—नगर निगम के इतिहास में पहली बार देखने को मिले हैं।
बताया जा रहा है कि जन्मदिन के आयोजन और प्रचार-प्रसार में लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन चर्चा का असली कारण यह है कि ठेकेदारों द्वारा लगाए गए कई पोस्टरों में ऐसे लोगों के चेहरे भी शामिल हैं, जिन्हें स्वयं यह जानकारी नहीं थी कि उनकी तस्वीरें बधाई संदेश में उपयोग की जा चुकी हैं। सोशल मीडिया के दौर में तस्वीरें जुटाना भले आसान हो, लेकिन बिना सहमति तस्वीरों का सार्वजनिक उपयोग कई सवाल खड़े करता है—कि यह प्रचार आखिर किसके इशारे पर और किस उद्देश्य से हो रहा है?
‘बुलडोजर सरकार’ का प्रचार, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग
महापौर अलका बाघमार को विज्ञापनों में “बुलडोजर सरकार” और “विकास की वीरांगना” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई हो रही है, लेकिन शहर के कई प्रमुख इलाके इन दावों की पोल खोलते नज़र आते हैं।
समृद्धि बाजार के सामने, हॉकी ग्राउंड से सटे क्षेत्र में अवैध बाजार निर्माण पर निगम की चुप्पी।
इंदिरा मार्केट में ओम ज्वेलर्स द्वारा बरामदे और सड़क तक किए गए कब्जे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं।
कुआं चौक में गुमटियों की भरमार, जिससे यातायात व्यवस्था लगातार बाधित।
प्राचीन गणेश मंदिर के सामने सड़क पर खुलेआम अवैध कब्जा—और हैरानी की बात यह कि कब्जाधारी ही महापौर के बधाई पोस्टरों में मंच साझा करते दिख रहे हैं।
चर्च गेट मार्ग पर हर शनिवार लगने वाला अवैध बाजार आज भी संचालित।
इसके विपरीत, कपड़ा लाइन जैसे क्षेत्रों में सीमित कार्रवाई को बड़े पैमाने पर प्रचारित कर “अतिक्रमण पर करारा प्रहार” बताया जा रहा है।
गंदगी, अधूरा निर्माण और बुनियादी समस्याएं जस की तस
शहर के कई हिस्सों में समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं—
धमधा नाका में कचरे के ढेर
सुराना कॉलेज के सामने बदबूदार वातावरण
दादा-दादी पार्क के सामने उद्यान का अधूरा निर्माण
मंत्री बंगला–सेवा सदन मार्ग पर अवैध गुमठियों की फौज
सड़कों पर बढ़ती यातायात अव्यवस्था
इतना ही नहीं, पेयजल व्यवस्था भी कई वार्डों में विवाद का कारण बनी हुई है। कहीं गंदे पानी की आपूर्ति तो कहीं अनियमित सप्लाई से नागरिक परेशान हैं।
कागजों में विकास, ज़मीन पर सवाल
नगर निगम के दस्तावेजों में लाखों–करोड़ों रुपये के विकास कार्य दर्ज हैं, लेकिन लोककला मार्ग में लगी लाखों की मूर्तियां आज गंदगी में घिरी हैं, चौपाटी की व्यवस्था बदहाल है और शहर की बुनियादी तस्वीर आम नागरिक खुद देख रहा है।
विज्ञापनों और बधाई संदेशों में प्रयुक्त अतिशयोक्तिपूर्ण शब्दों के बीच शहर की जनता मौन है—लेकिन समझदार भी। यह मौन असहमति का है, जो अपने समय का इंतजार कर रही है।
उम्मीद के साथ बधाई
इन तमाम सवालों और विरोधाभासों के बीच शहर की जनता यही उम्मीद करती है कि जिस तरह जन्मदिन के प्रचार और आयोजन में ऊर्जा व संसाधन लगाए गए हैं, उसी गंभीरता से आने वाले समय में विकास ज़मीन पर भी दिखाई देगा।
इन्हीं उम्मीदों के साथ
महापौर श्रीमती अलका बाघमार को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
शहर चाहता है कि उत्सव के बाद विकास केवल पोस्टरों में नहीं, बल्कि सड़कों, पानी, स्वच्छता और व्यवस्था में भी नज़र आए।
दुर्ग | शौर्यपथ
दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार 31 जनवरी को शहरी सरकार की मुखिया के रूप में अपना पहला जन्मदिन मना रही हैं। जन्मदिन से पहले शहर में समर्थकों द्वारा लगाए गए फ्लेक्स, बैनर और कटआउट्स की भरमार ने एक बार फिर शहर की सुंदरता, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी पृष्ठभूमि में महापौर अलका बाघमार ने 29 जनवरी को एक सराहनीय और विनम्र पहल करते हुए अपने समर्थकों से अनुरोध किया कि वे शहर के खंभों, सार्वजनिक स्थलों और यातायात मार्गों पर लगाए गए फ्लेक्स-बैनर स्वयं हटा लें। महापौर ने स्पष्ट किया कि उन्हें समर्थकों का प्रेम और आशीर्वाद स्वीकार है, लेकिन शहर की सुंदरता, स्वच्छता और नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है।
महापौर का यह बयान निश्चित ही स्वागत योग्य है, लेकिन अब सवाल यह नहीं कि क्या कहा गया, बल्कि यह है कि क्या किया जाएगा।
अतिक्रमण टीम की अग्निपरीक्षा
अब निगाहें नगर निगम के अतिक्रमण विभाग पर टिकी हैं। क्या निगम प्रशासन महापौर की मंशा के अनुरूप नियम विरुद्ध टंगे फ्लेक्स-बैनर हटाने की कार्रवाई करेगा?
क्या महापौर के समर्थक स्वयं आगे आकर अपने बैनर हटाएंगे, या फिर यह अनुरोध भी पूर्व के नेताओं के बयानों की तरह कागज़ी साबित होगा?
शहर की जनता अब केवल बयान सुनकर संतुष्ट होने वाली नहीं रही है। वर्षों से जनता ने देखा है कि कैसे नियमों की दुहाई आम नागरिकों के लिए तो दी जाती है, लेकिन राजनीतिक बैनरों पर वही नियम मौन हो जाते हैं।
नीरज पाल बनाम अलका बाघमार
इस संदर्भ में भिलाई नगर निगम के पूर्व महापौर नीरज पाल का उदाहरण आज भी मिसाल के रूप में सामने है। नीरज पाल ने अपने जन्मदिन से पहले स्वयं आगे बढ़कर शहर के खंभों से अपने सभी बधाई बैनर और पोस्टर उतरवाए थे। उन्होंने न सिर्फ अपील की, बल्कि कार्रवाई कर दिखायी—और समर्थकों से भी यही अपेक्षा रखी।
आज दुर्ग की जनता यही सवाल पूछ रही है— क्या महापौर अलका बाघमार भी नीरज पाल की तरह बयान से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई करेंगी?
या फिर यह पहल भी एक औपचारिक अनुरोध बनकर रह जाएगी?
30 जनवरी की कार्रवाई बताएगी दिशा
महापौर का अनुरोध 29 जनवरी को सामने आया। अब 30 जनवरी का दिन यह तय करेगा कि नगर निगम प्रशासन और अतिक्रमण विभाग इस अनुरोध को कितनी गंभीरता से लेता है।
यदि आज नियम विरुद्ध फ्लेक्स हटाए जाते हैं, तो यह दुर्ग की राजनीति में एक सकारात्मक और भरोसेमंद संदेश होगा।
और यदि ऐसा नहीं होता, तो जनता इसे भी एक और “अच्छा बयान” मानकर आगे बढ़ जाएगी।
सार --
महापौर अलका बाघमार का कदम निस्संदेह प्रशंसनीय है, लेकिन शहर की जनता अब शब्द नहीं, उदाहरण चाहती है।
दुर्ग को आज एक ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है, जो नीरज पाल की तरह सिर्फ कहे नहीं—करके दिखाए।
अब देखना यह है कि
दुर्ग की महापौर इतिहास रचेंगी या बयानबाज़ी की सूची में एक और नाम जुड़ जाएगा।
✍️ शौर्यपथ लेख:
दुर्ग की धरती पर आज एक ऐसी घटना घटी, जिसने यह साबित कर दिया कि अगर सत्ता में बैठा व्यक्ति संवेदनशील हो, तो वह सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि किसी का भविष्य भी संवार देता है।
महर्षि दयानंद स्कूल का 8 वर्षीय छात्र ओजश चक्रधारी… उम्र इतनी कम कि सपनों की दुनिया अभी रंग भरना सीख ही रही थी। लेकिन अचानक फीस न भर पाने की मजबूरी ने उसके सपनों पर ताला जड़ दिया। स्कूल से बाहर कर दिए जाने की टीस जब एक मासूम दिल तक पहुँची, तो वह रोते हुए अपनी माँ विजयी लक्ष्मी से बस इतना कह सका—
“माँ, मैं पढ़ना चाहता हूँ…”
माँ के लिए इससे बड़ा दर्द और क्या हो सकता है? बेटे के भविष्य की चिंता लिए वह सेवा सदन मंत्री गजेंद्र यादव के पास पहुँचीं। यह मुलाकात किसी औपचारिकता की नहीं थी, यह एक माँ की आख़िरी उम्मीद थी।
मंत्री गजेंद्र यादव ने न सिर्फ पूरे मामले को ध्यान से सुना, बल्कि उसी क्षण यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता आज भी राजनीति में ज़िंदा है। उन्होंने तुरंत स्कूल प्रबंधन से फोन पर बात की और दो टूक शब्दों में कहा—
“बच्चे की फीस मैं भरूंगा, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।”
यह सिर्फ फीस भरने का निर्णय नहीं था, यह एक बच्चे के आत्मविश्वास को वापस देने का संकल्प था। वह एक वाक्य—
“मैं हूँ ना, चिंता क्यों करते हो”
ओजश और उसके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं था।
जब यही शब्द प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री के मुख से निकलते हैं, तो वे सिर्फ आश्वासन नहीं रहते, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के भीतर ऐसा आत्मबल भर देते हैं, जो जीवन की दिशा बदल देता है। एक पल में डर, निराशा और असहायता—आशा और विश्वास में बदल जाती है।
इस संवेदनशील पहल ने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार है, और कोई भी बच्चा सिर्फ आर्थिक कारणों से अपने सपनों से दूर नहीं किया जा सकता।
आज ओजश की आँखों में फिर से पढ़ाई की चमक है, उसकी माँ के चेहरे पर सुकून है, और समाज के सामने एक उदाहरण है—
कि जब जनप्रतिनिधि दिल से सोचते हैं, तब शासन सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि सहारा बन जाता है।
यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि उस “मैं हूँ ना” की है, जो किसी के जीवन में उजाला भर देता है। ?
दुर्ग। दिनांक 28 जनवरी 2026 को डायल 112 चीता वन थाना मोहन नगर की टीम ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए एक लापता महिला को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाया।
ड्यूटी पर तैनात आरक्षक राजेश्वर साहू (आईडी 1001) एवं चालक दुष्यंत कुमार (आईडी 197) को शाम 6:35 बजे सूचना मिली कि शांति नगर के पास एक अज्ञात महिला बैठी हुई है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही है।
सूचना मिलते ही डायल 112 टीम मौके पर पहुंची। पूछताछ में महिला ने अपना निवास माया नगर, रिसाली बताया। टीम ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए महिला को 112 वाहन में बैठाकर माया नगर, रिसाली ले जाकर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। पहचान सुनिश्चित होने पर महिला को आजाद मार्केट, माया नगर, रिसाली स्थित उसके घर पहुंचाया गया, जहां परिजन मिले।
परिजनों ने बताया कि महिला 17 दिसंबर 2025 को बिना बताए घर से चली गई थी और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उसकी तलाश की जा रही थी। महिला की पहचान उत्तरी मनहरे, पिता भगवती मनहरे, उम्र 42 वर्ष, निवासी आज़ाद मार्केट, माया नगर, रिसाली के रूप में हुई।
डायल 112 टीम के अथक प्रयासों से महिला को सुरक्षित एवं सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों ने सराहना की।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंप कर रखी विभिन्न मांगें,पांडेय ने पूरा कराने दिया आश्वासन
भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ यूपी बिहार रेल यात्री सेवा संघ के अध्यक्ष हाजी एम. एच. सिद्दीकी एवं सचिव मोहम्मद सलीम (अधिवक्ता) के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें रेल यात्रा में होने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया। जिसमे प्रमुख रूप से उ.प्र. बिहार जाने वाले यात्रियों की समस्याओं के समाधान करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान गोंदिया बरौनी एक्सप्रेस 15231/15232 या सारनाथ एक्सप्रेस 15159/15160 को सप्ताह में कम से कम तीन दिन वाया मऊ, बेल्थरा रोड़, सलेमपुर, भटनी, मैरवा, सिवान, छपरा होकर चलाने और इसे वापसी में भिलाई पावर हाउस स्टेशन पर भी स्टॉपेज देने की मांग रखी गई।
वहीं दुर्ग गोरखपुर नौतनवा एक्सप्रेस 18201/18202 को नियमित रूप से प्रतिदिन चलाने के साथ ही नौतनवा एक्सप्रेस 18201 के समय को परिवर्तित कर शाम 4.00 बजे से पहले दुर्ग से चलाने की मांग की गई। जिससे बनारस से आगे जाने वाले यात्रियों को समय पर अपने गाँव पहुंचने में आसानी हो। इसी तरह पावर हाउस रेलवे स्टेशन पर स्टॉपेज देने की भी मांग की गई। प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने सभी मांगो को गंभीरता पूर्वक सुना और इन्हें पूर्ण कराने पूरी कोशिश करने का आश्वासन दिया। इस दौरान हीरालाल यादव, सत्तार अहमद, शशांक पाण्डेय, विवेक नायक, शाहनवाज़ अहमद एवं शहादत हुसैन भी प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप में शामिल थे।
दुर्ग |
नगर पालिक निगम दुर्ग की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को महापौर श्रीमती अलका बाघमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल सहित सभी एमआईसी सदस्यों की उपस्थिति में नगर विकास से जुड़े अहम एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें जल प्रबंधन, सड़क, पाइपलाइन एवं स्वच्छता से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
एमआईसी सदस्य नरेंद्र बंजारे, देवनारायण चंद्राकर, शेखर चंद्राकर, लीना दिनेश देवांगन, ज्ञानेश्वर ताम्रकर, काशीराम कोसरे, मनीष साहू, शिव नायक, लीलाधर पाल, शशि साहू, नीलेश अग्रवाल, हर्षिका संभव जैन, उपायुक्त मोहेन्द्र साहू, अभियंता अधिकारी विनीता वर्मा, मो. सलीम सिद्दीकी, प्रकाशचंद थावनी, सुरेश केवलानी, पंकज साहू, रेवाराम मनु, दुर्गेश गुप्ता, अभय मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 04, गया नगर में 1500 किलोलीटर क्षमता के उच्च स्तरीय जलागार के निर्माण हेतु 15वें वित्त आयोग अनुदान अंतर्गत मिलियन प्लस सिटीज (जल प्रबंधन) योजना के तहत ₹199.02 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
महाराजा चौक से बोरसी चौक तक प्रस्तावित 1.80 किमी लंबे फोरलेन सड़क निर्माण के लिए आवश्यक पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य को स्वीकृति।
मिनीमाता चौक से महाराजा चौक होते हुए ठगड़ा डेम तक पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य को वर्ष 2025–26 के बजट में सम्मिलित करते हुए ₹439.50 लाख की स्वीकृति।
चंडी मंदिर से नया पारा मार्ग (लंबाई 0.90 किमी) के चौड़ीकरण एवं पुनर्निर्माण अंतर्गत पाइपलाइन शिफ्टिंग हेतु ₹100.45 लाख स्वीकृत।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) घटक के तहत शहर में 8 स्थानों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके अंतर्गत सूखा एवं गीला कचरा प्रबंधन हेतु नए संयंत्रों की स्थापना, पूर्व स्थापित संयंत्रों के उन्नयन तथा आगामी 5 वर्षों के संचालन एवं संधारण के लिए कुल ₹1597.69 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह पहल शहर में कचरे के पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान और स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने बैठक में एमआईसी सदस्यों से अनुरोध किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 8 उपयुक्त स्थानों का शीघ्र चिन्हांकन कर विभाग को जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ हो सके।
इन सभी स्वीकृतियों से नगर में जलापूर्ति, सड़क, स्वच्छता एवं नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा और दुर्ग शहर के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
जयपुर।
राजस्थान की सबसे चर्चित भर्तियों में शामिल सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती–2021 एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की तत्कालीन सदस्य और प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की पत्नी डॉ. मंजू शर्मा का नाम न्यायिक जांच के दायरे में आया, हालांकि उनके विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का सीधा कानूनी आरोप या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
अगस्त 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने SI भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “Systematic Corruption” से प्रभावित बताया। अदालत ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए यह संकेत दिया कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार स्तर पर प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है।
इन्हीं टिप्पणियों के बाद आयोग के तत्कालीन सदस्यों की भूमिका न्यायिक जांच के दायरे में आई, जिनमें डॉ. मंजू शर्मा भी शामिल रहीं।
अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद डॉ. मंजू शर्मा ने
? 1 सितंबर 2025 को RPSC सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे राजस्थान के राज्यपाल ने
? 15 सितंबर 2025 को स्वीकार कर लिया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि—
उनके खिलाफ किसी भी एजेंसी में कोई आपराधिक जांच लंबित नहीं है
उन्हें किसी भी मामले में अभियुक्त नहीं बनाया गया है
उन्होंने आयोग की गरिमा और अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए पद छोड़ा
डॉ. मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट की एकल पीठ की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए उन्हें हटाने की मांग के साथ विशेष अपील (Special Appeal) दायर की है।
उनका तर्क है कि—
“बिना पक्षकार बनाए और बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार की टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या SI भर्ती 2021 पूरी तरह रद्द होगी?
क्या न्यायिक जांच किसी औपचारिक आपराधिक जांच में बदलेगी?
या फिर हाईकोर्ट की अपील में कोई नया मोड़ आएगा?
फिलहाल, मामला न्यायालय के विचाराधीन है, और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
✍️ नोट: यह समाचार न्यायालयी रिकॉर्ड, सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है।
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में गरीब, वंचित, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाखों बच्चों के शिक्षा अधिकारों की लड़ाई एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिनांक 23/01/2026 को जारी आदेश के अनुपालन में आज स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी को 253 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज सौंपा।
यह मामला जनहित याचिका क्रमांक 22/2016 से जुड़ा है। जिरह के दौरान विकास तिवारी द्वारा राजधानी रायपुर के सुंदर नगर स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी (बिना मान्यता संचालित) में एक नन्ही बच्ची को शिक्षिका द्वारा अगरबत्ती से जलाने की गंभीर घटना न्यायालय के संज्ञान में लाई गई थी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रायपुर के एक विंग में साजिश के तहत आग लगाए जाने और उसमें रखे गए गरीब छात्रों के आरटीई दस्तावेज, निजी स्कूलों की मान्यता फाइलें, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के कागजात तथा फीस नियामक से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जलाकर नष्ट करने के प्रमाण और समाचार भी प्रस्तुत किए गए थे।
इन गंभीर आरोपों पर माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आदेश दिया था कि संबंधित सभी दस्तावेज 10 दिनों के भीतर स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपे जाएं, ताकि विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को निर्धारित है।
दस्तावेज सौंपने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से भावुक अपील करते हुए कहा—
“छत्तीसगढ़ के गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के हजारों-लाखों बच्चों के हक़ की लड़ाई और आप सभी के बच्चों को बेहतर स्कूल शिक्षा दिलाने की लड़ाई मैं अकेला लड़ रहा हूँ।
मेरी क्षमता से कहीं अधिक मजबूती और कुर्बानी के साथ इस संघर्ष में खड़ा हूँ।
इस लड़ाई में मेरी जीत का अर्थ लाखों गरीब बच्चों की जीत है,
और मेरी हार लाखों बच्चों की हार होगी।
इसलिए प्रार्थना और दुवा में उन बच्चों की जीत की कामना कीजिए।”
उनका यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति की याचिका नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 11 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई और स्कूल शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
प्रयागराज।
महाराष्ट्र में हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री समेत पाँच लोगों के असामयिक निधन की अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। इस राष्ट्रीय त्रासदी के बाद ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि वे अब विशेष परिस्थिति में ही प्रयागराज छोड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर वे अब कोई और चर्चा नहीं करना चाहते।
मंगलवार की रात प्रशासन की ओर से ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा शंकराचार्य के मुख्य कार्याधिकारी चंद्रप्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र एवं प्रस्ताव भेजा गया। इसमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराने का आमंत्रण दिया गया था। माना जा रहा है कि उमा भारती के बयान के पश्चात सरकार और प्रशासन दोनों ने पहल करते हुए यह आमंत्रण भेजा।
हालाँकि, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरे शोक और संवेदना के भाव में संगम स्नान से विरत रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा—
“संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है।
लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं।
जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति नहीं दे सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती—
“आज हम यहाँ से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।
ये प्रश्न न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।”
शंकराचार्य का यह निर्णय केवल एक व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शोक के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक चेतना और आत्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जा रहा है। उनके शब्दों और मौन में वह पीड़ा झलकती है, जो आज पूरे देश के हृदय में समाई हुई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
