August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

      नई दिल्ली, । भारत निर्वाचन आयोग के अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) 2026 के तहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-1) के विधानसभा चुनावों ने वैश्विक मंच पर भारतीय लोकतंत्र की ताकत, पारदर्शिता और व्यापकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 16 देशों के 32 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों और ‘इंटरनेशनल आईडीईए’ के विशेषज्ञों ने चुनाव प्रक्रिया को नजदीक से देखा और इसे “लोकतंत्र का सच्चा उत्सव” करार दिया।

    अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से रिकॉर्ड मतदान, सूक्ष्म योजना और निर्बाध चुनाव संचालन की सराहना की। मॉरीशस की उच्चायुक्त शीलाबाई बाप्पू ने कहा कि भारत दुनिया को चुनाव कराने की प्रक्रिया और अनुभव सिखा रहा है, जहां “वोट को मतदाता के द्वार तक पहुंचाया जाता है।”

    प्रबंधन और तकनीक का संगम
    22-23 अप्रैल के दौरान प्रतिनिधियों ने डिस्पैच और डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों का दौरा कर चुनावी लॉजिस्टिक्स की सटीकता को देखा। फिलीपींस की मेलिसा ऐन टेलन ने ईवीएम (कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट) के व्यवस्थित वितरण और पारदर्शिता को “अद्भुत अनुभव” बताया।

    100% वेबकास्टिंग, कंट्रोल रूम्स की निगरानी और मॉक पोल जैसी प्रक्रियाओं ने चुनावी पारदर्शिता को और मजबूत किया। प्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण माना।

    समावेशी और सुलभ मतदान व्यवस्था
    मतदान केंद्रों पर रैंप, व्हीलचेयर, हेल्प डेस्क, क्रेच सुविधा और स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने समावेशी लोकतंत्र की झलक पेश की। बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए घर से मतदान की सुविधा को भी प्रतिनिधियों ने सराहा। नेपाल के प्रतिनिधि यज्ञ प्रसाद भट्टराई ने मतदान केंद्रों के प्रबंधन को “उत्कृष्ट और सराहनीय” बताया।

    चेन्नई में कलर-कोडेड मतदान केंद्रों और न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था ने भूटान के प्रतिनिधि शेरिंग समद्रुप को प्रभावित किया, वहीं पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य जांच सेवाएं और मोबाइल डिपॉजिट सुविधा को केन्या की रूथ कुलुंडु ने गोपनीयता और सुविधा का बेहतर उदाहरण बताया।

    वैश्विक मानक स्थापित करता भारत
    इससे पहले 8-9 अप्रैल को 22 देशों के 38 प्रतिनिधि असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा कर चुके हैं। अब तक कुल 38 देशों के 70 प्रतिनिधि भारत की चुनावी प्रक्रिया का अनुभव ले चुके हैं।

    भारत निर्वाचन आयोग का यह कार्यक्रम न केवल वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारत के चुनावी मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक के रूप में स्थापित कर रहा है। विशाल पैमाने, रिकॉर्ड भागीदारी और तकनीकी नवाचारों के साथ भारत एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि लोकतंत्र केवल एक प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवंत और समावेशी उत्सव है।

      आगरा । भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से ठीक पहले आगरा में आयोजित उद्योग संवाद ने इस समझौते को केवल टैरिफ कटौती तक सीमित न मानकर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में स्थापित कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की संयुक्त अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और FTA से मिलने वाले अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।

    इस संवाद का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—यह FTA व्यापार, निवेश, प्रतिभा के आवागमन, शिक्षा, पर्यटन और जन-संपर्क जैसे कई आयामों को जोड़ने वाला बहु-स्तरीय फ्रेमवर्क है। सरकार का दृष्टिकोण इसे “जन-केंद्रित आर्थिक साझेदारी” के रूप में विकसित करने का है, जिससे MSME, महिला उद्यमी, किसान और कुशल पेशेवर सभी को लाभ मिल सके।

    आगरा का चमड़ा उद्योग इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर सकता है। वर्तमान में भारत के कुल लेदर फुटवियर उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा आगरा से आता है। FTA लागू होने के बाद जूते और चमड़े के उत्पादों पर 5% तक का टैरिफ शून्य हो जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत ने इस क्षेत्र के 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावनाएं जताई हैं। न्यूजीलैंड के कच्चे चमड़े के संसाधन और भारत की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इस सहयोग को और मजबूती देंगे।

    फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भी FTA को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। त्वरित नियामक स्वीकृति, GMP और GCP रिपोर्टों की पारस्परिक मान्यता से भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा। विशेष रूप से आयुष को लेकर समझौते में एक समर्पित अध्याय शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस समझौते को केवल व्यापार तक सीमित न रखें, बल्कि शिक्षा, स्किल मोबिलिटी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने MSME सेक्टर तक इसके लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। वहीं टॉड मैक्ले ने भारत को न्यूजीलैंड की रणनीतिक प्राथमिकता बताते हुए इसे अब तक का “उच्च गुणवत्ता वाला FTA” करार दिया और संयुक्त उद्यमों व निवेश के नए अवसरों पर बल दिया।

    महज नौ महीनों में तैयार हुआ यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। आगरा में हुआ यह उद्योग संवाद इस बात का संकेत है कि FTA केवल एक कागजी समझौता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उद्योगों, रोजगार और निर्यात को नई दिशा देने वाला परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकता है।

    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की 133वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी को विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने देश की हालिया उपलब्धियों और जन-आंदोलनों को रेखांकित करते हुए नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।


    ? परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक उपलब्धि

    प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल करने को भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा का बड़ा मील का पत्थर बताया।

    • पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित
    • ऊर्जा उत्पादन के साथ नया ईंधन तैयार करने की क्षमता
    • औद्योगिक, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा लाभ

    ?️ पवन ऊर्जा में भारत की छलांग

    पीएम मोदी ने बताया कि भारत की विंड एनर्जी क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और देश दुनिया में चौथे स्थान पर है।

    • गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे राज्य अग्रणी
    • रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर
    • स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने का आह्वान

    ?️ बुद्ध पूर्णिमा और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव

    प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि

    • शांति और करुणा आज के वैश्विक तनाव में और अधिक प्रासंगिक
    • चिली और कर्नाटक में बौद्ध परंपरा से जुड़े प्रेरक प्रयासों का उल्लेख

    ? ‘बीटिंग रिट्रीट’ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर

    • पहली बार WAVES OTT पर उपलब्ध
    • भारतीय संगीत परंपरा और सशस्त्र बलों की झलक
    • नागरिकों से इसे सुनने और जुड़ने की अपील

    ? पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानियां

    प्रधानमंत्री ने देशभर से उदाहरण साझा किए:

    • कच्छ में Flamingo City
    • यूपी में ‘गज मित्र’ पहल
    • छत्तीसगढ़ में ब्लैकबक की वापसी
    • गोडावण संरक्षण के प्रयास

    ? नॉर्थ-ईस्ट का ‘बांस क्रांति’

    • 2017 में कानून बदलाव के बाद बांस उद्योग में उछाल
    • महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को लाभ
    • नागरिकों से नॉर्थ-ईस्ट उत्पाद खरीदने की अपील

    ? डिजिटल इंडिया: 20 करोड़ ऐतिहासिक दस्तावेज ऑनलाइन

    • National Archives द्वारा डिजिटाइजेशन
    • 7वीं-8वीं सदी की पांडुलिपियां, 1857 के दस्तावेज
    • पोर्टल: abhilekh-patal.in

    ? बेटियों की वैश्विक उपलब्धि

    European Girls Mathematical Olympiad में:

    • भारत 6वें स्थान पर
    • गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज पदक
    • बेटियों और उनके अभिभावकों की सराहना

    ? जनगणना 2027: पूरी तरह डिजिटल

    • मोबाइल ऐप और self-enumeration की सुविधा
    • अब तक 1.2 करोड़ घरों का सूचीकरण
    • नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील

    ? ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रहा भारतीय चीज

    • अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय ब्रांड सम्मानित
    • कलारी, छुरपी, सुरती चीज जैसे पारंपरिक उत्पाद
    • डेयरी सेक्टर में वैल्यू एडिशन और वैश्विक पहचान

    ?? समापन संदेश

    प्रधानमंत्री ने रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को नमन किया और युवाओं से छुट्टियों में कुछ नया सीखने का आग्रह किया।

    “विकसित भारत का सपना जनभागीदारी से ही साकार होगा।”

    इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, प्रकृति संरक्षण और राष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने का आह्वान किया।

    नई दिल्ली/विशाखापत्तनम ।
    भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन 27-28 अप्रैल, 2026 को आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगे।

    इस दौरान वे 27 अप्रैल को विशाखापत्तनम पहुंचकर प्रतिष्ठित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे।

    आंध्र विश्वविद्यालय, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है, अपने 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।

    यह दौरा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत उपलब्धियों को सम्मानित करने और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    नई दिल्ली/लॉस एंजिल्स ।
    भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व अनिवार्य है। यह बात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉस एंजिल्स में वर्चुअल रूप से आयोजित अखिल-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि अब भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का निर्माता, डिजाइनर और वैश्विक चालक बनना होगा।

    2047 का विजन: तकनीक बनेगी विकास की धुरी

    डॉ. सिंह ने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य विज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित है।
    उन्होंने भारत की हालिया उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा:

    • अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार
    • जैव प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति
    • डीप-टेक स्टार्टअप्स का उभार

    ये सभी संकेत हैं कि भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

    उभरती तकनीकें: राष्ट्रीय सुरक्षा से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

    मंत्री ने चार प्रमुख क्षेत्रों को भारत के भविष्य के लिए निर्णायक बताया:

    • सेमीकंडक्टर
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
    • रोबोटिक्स
    • क्वांटम टेक्नोलॉजी

    उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र न केवल आर्थिक मजबूती बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी परिभाषित करेंगे।

    आईआईटी एलुमनाई और प्रवासी भारतीय: वैश्विक कड़ी

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी के पूर्व छात्रों और भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत और वैश्विक नवाचार इकोसिस्टम के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।
    उन्होंने इनके योगदान को रेखांकित किया:

    • निवेश और स्टार्टअप समर्थन
    • मेंटरशिप और शोध सहयोग
    • नीतिगत भागीदारी

    शिक्षा-उद्योग-सरकार का त्रिकोण

    उन्होंने तकनीकी नेतृत्व के लिए शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता बताई।
    नई शिक्षा पहल जैसे ऋषिहुड विश्वविद्यालय में सज्जन अग्रवाल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी को उन्होंने इसी दिशा में एक उदाहरण बताया।

    संदेश स्पष्ट: साझेदारी से ही बनेगा टेक्नोलॉजी लीडर भारत

    डॉ. सिंह ने आईआईटी एलुमनाई से आह्वान किया कि वे:

    • उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाएं
    • भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग करें
    • युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन दें

    उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत न केवल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रगति में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

    गंगटोक ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27-28 अप्रैल को सिक्किम के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य स्थापना के 50वें वर्ष (स्वर्ण जयंती) के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ करेंगे।

    स्वर्ण जयंती समारोह में भागीदारी

    28 अप्रैल को सुबह प्रधानमंत्री पालजोर स्टेडियम, गंगटोक में आयोजित समापन समारोह में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले वे गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा कर राज्य की समृद्ध पारिस्थितिक और पुष्प विरासत का अवलोकन करेंगे।

    हर क्षेत्र में विकास की बड़ी पहल

    प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाएं कई अहम क्षेत्रों को कवर करती हैं:

    • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी
    • स्वास्थ्य और शिक्षा
    • बिजली और शहरी विकास
    • पर्यावरण संरक्षण
    • पर्यटन और कृषि

    इनका उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूती

    • यांगंग में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल (शिलान्यास)
    • एनआईटी देवराली में सोवा रिग्पा अस्पताल (उद्घाटन)
    • सिक्किम विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर
    • हेलेन लेपचा मेडिकल कॉलेज, डेंटम व्यावसायिक कॉलेज
    • 160 स्कूलों में आईटी-सक्षम शिक्षा परियोजना

    कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

    • तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील आर्च ब्रिज
    • बिरधांग-नामची सड़क का उन्नयन
    • गंगटोक में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

    शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण

    • मिनी सचिवालय और सिविल सेवा संस्थान
    • शहरी गरीब आवास और पुलिस आवास परियोजनाएं
    • सिंगतम में सीवरेज सिस्टम और नदी प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं

    पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना को बढ़ावा

    • रिज प्रीसिंक्ट का पुनर्विकास
    • कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सुविधाएं
    • इको-टूरिज्म और तीर्थ स्थलों का विकास
    • कृष्णा प्रणामी मंगलधाम में यात्री निवास

    कृषि और युवाओं के लिए पहल

    • IFFCO प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन
    • रंगपो में इंडोर क्रिकेट सुविधाएं

    पूर्वोत्तर विकास का संकेत

    प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर सिक्किम के सतत और तेज विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।

    स्वर्ण जयंती वर्ष में यह पहल सिक्किम को बुनियादी ढांचे, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    श्रीनगर, ।
    भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन अवसर पर जारी इस दस्तावेज़ ने खिलाड़ी-केंद्रित, समन्वित और सहयोगात्मक खेल व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकजुट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

    खिलाड़ी केंद्र में, सरकार सहयोग में

    ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का मूल फोकस एक ऐसे खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर है, जहां

    • खिलाड़ी विकास प्राथमिकता हो
    • केंद्र और राज्य मिलकर संसाधनों का समन्वय करें
    • खेल निकायों में पारदर्शिता और पेशेवर ढांचा विकसित हो

    डॉ. मांडविया ने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और युवा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खेल संस्कृति से आर्थिक विकास तक

    संकल्प में खेलों को बहुआयामी विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

    • खेल अवसंरचना का विस्तार
    • प्रतिभा पहचान और पोषण
    • क्षेत्रीय खेल क्लस्टर का विकास
    • खेल पर्यटन और रोजगार सृजन
    • भारत को वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करना

    यह दृष्टिकोण खेलों को स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे जोड़ता है।

    विविधता ही ताकत: राज्यों को मिली भूमिका

    संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ताकत मानते हुए राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार खेल मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
    इससे स्थानीय प्रतिभाओं को उभरने का अवसर मिलेगा और ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी।

    प्रशासनिक सुधार और ‘माय भारत’ से युवा सहभागिता

    चिंतन शिविर के अंतिम दिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई:

    • खेल प्रशासन में सुधार: पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर ढांचा
    • खेल सामग्री निर्माण: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा
    • युवा सहभागिता: ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाना

    फिट इंडिया का संदेश

    समापन दिवस की शुरुआत “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉ. मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भाग लेकर फिटनेस और जनभागीदारी का संदेश दिया।

    निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास, वैश्विक लक्ष्य

    ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खेल भविष्य खंडित प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रणनीति से तय होगा।

    यह पहल केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

    चंडीगढ़, ।
    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर चंडीगढ़ में एक स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ—अब सामाजिक न्याय केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध, मापनीय और जमीनी परिणामों के रूप में दिखाई देगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” थीम पर केंद्रित इस शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक और कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर सहमति दी।

    नीतियों से आगे, व्यावहारिक समाधान पर फोकस

    केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिविर “इरादों से क्रियान्वयन” की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
    उन्होंने कहा कि चर्चा केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि

    • छात्रवृत्ति वितरण
    • नशामुक्ति
    • वरिष्ठ नागरिक कल्याण
    • दिव्यांगजनों के प्रमाणन
    • ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास

    जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान तलाशे गए।

    पांच थीमेटिक समूहों में बना ठोस एक्शन प्लान

    शिविर के दौरान पांच समूहों ने अलग-अलग आयामों पर गहन मंथन किया:

    • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: SC समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और पीएम-अजय के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
    • समावेश, पहचान और एकीकरण: डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए SEED योजना और सटीक पहचान प्रणाली
    • आर्थिक सशक्तिकरण: SC, OBC और वंचित वर्गों के लिए ऋण और उद्यमिता तक आसान पहुंच
    • सुगमता (Accessibility): 2027-28 तक बाधा-मुक्त मानकों और सार्वजनिक ढांचे में सार्वभौमिक डिजाइन लागू करने की योजना
    • दिव्यांगजनों का प्रमाणन: तकनीक आधारित, तेज और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली

    2027 जनगणना और ट्रांसजेंडर कल्याण पर विशेष ध्यान

    शिविर में कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर सहमति बनी:

    • जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों का समुचित समावेश
    • SEED योजना को और मजबूत करना
    • SC/OBC वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना
    • SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास, गरिमा गृह और संरक्षण तंत्र को विस्तार

    “जागरूकता से सुलभता” और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर

    राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह स्वीकार किया कि योजनाओं की सफलता का मूल आधार है:

    • जागरूकता बढ़ाना
    • प्रक्रियाओं को सरल बनाना
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग
    • स्पष्ट समयसीमा तय करना

    इस दिशा में छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास और अन्य लाभों को बिना देरी और बाधाओं के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

    टेक्नोलॉजी और समन्वय बनेगा गेमचेंजर

    केंद्रीय मंत्री ने टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन, बेहतर मॉनिटरिंग और केंद्र-राज्य समन्वय को सामाजिक न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन की कुंजी बताया।

    निष्कर्ष: इरादों से परिणाम की ओर

    तीन दिवसीय यह चिंतन शिविर एक स्पष्ट दिशा देकर समाप्त हुआ—

    सामाजिक न्याय को अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक, मापनीय बदलाव लाने पर फोकस किया जाएगा।

    इस साझा संकल्प के साथ देश ने 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगत विकसित भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।

    नई दिल्ली / 

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें कला का एक ऐसा पर्याय बताया है जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। श्री मोदी ने कहा कि श्री रघु राय का कार्य गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता से परिपूर्ण था, जिसने भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को संजोया और उन्हें लोगों के करीब लाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया में उनका योगदान अद्वितीय है और उनका निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

    प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

    “श्री रघु राय जी को कला के एक ऐसे पर्याय के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। उनकी फोटोग्राफी में गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता थी। इसने लोगों को भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं के और अधिक करीब लाया। उनका निधन फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और फोटोग्राफी जगत के साथ हैं। ओम शांति।”

    दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के बाजार विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'अवैध' को 'वैध' बनाने का खेल धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला इंदिरा मार्केट के सी-ब्लॉक से जुड़ा है, जहां आवंटन की शर्तों का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर अनियमितता की पूरी जानकारी होने के बावजूद बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की निष्क्रियता अब संदेह के घेरे में है। शहर में चर्चा है कि क्या एक ग्रेड-3 स्तर का कर्मचारी, जिले के कड़क आईएएस अधिकारी और निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल को भी गुमराह करने में सफल हो रहा है?

    नियमों की धज्जियां: 'नो रेंट' की शर्त, फिर भी किराए पर दुकान

    इंदिरा मार्केट सी-ब्लॉक के भूतल पर सीढ़ी के बगल स्थित एक दुकान को लेकर निगम के आवंटन पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि संचालक इसे किसी अन्य को किराए पर नहीं दे सकेगा। इसके बावजूद, उक्त दुकान को न केवल किराए पर दिया गया है, बल्कि वहां खुलेआम व्यापार संचालित हो रहा है।

    डेढ़ महीने की खामोशी: मार्च के प्रथम सप्ताह में ही बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा को इस अवैध संचालन की बिंदुवार जानकारी दी गई थी। तब उन्होंने 'जल्द कार्रवाई' का आश्वासन दिया था, लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी फाइलें दबी हुई हैं। यह देरी बाजार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर 'मिलीभगत' और 'अपना राजस्व बढ़ाने' जैसे गंभीर आरोप लगा रही है।

    बाजार प्रभारी शेखर चंद्राकर का 'मौन' सुशासन पर सवाल

    लोकतंत्र में जब अधिकारी लापरवाह हों, तो जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की उम्मीद की जाती है। परंतु, बाजार विभाग के प्रभारी शेखर चंद्राकर की इस पूरे मामले पर रहस्यमयी चुप्पी ने आग में घी डालने का काम किया है। शहर में चर्चा का बाजार गर्म है कि क्या बाजार प्रभारी भी 'सुशासन' के बजाय 'निजी राजस्व' की राह पर चल पड़े हैं? आखिर क्यों एक निर्वाचित प्रतिनिधि, सरकारी नियमों के इस खुले उल्लंघन पर मौन है?

    क्या गुमराह हो रहे हैं निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल?

    दुर्ग निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल अपनी प्रशासनिक दृढ़ता और पारदर्शिता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन, बाजार विभाग की यह स्थिति उनकी कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में ला रही है।

    क्या अभ्युदय मिश्रा जैसे कर्मचारी आयुक्त तक सही जानकारी पहुंचने ही नहीं दे रहे?

    क्या एक ग्रेड-3 कर्मचारी के पास इतनी ताकत है कि वह शासन की छवि को धूमिल कर सके?

    क्या महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाले निगम प्रशासन में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं?

    निष्कर्ष: कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति?

    लिखित शिकायत का इंतजार करने का तर्क देने वाले अधिकारी यह भूल रहे हैं कि जब अपराध और उल्लंघन सार्वजनिक हो, तो कार्रवाई के लिए कागज नहीं, बल्कि नीयत की जरूरत होती है। यदि जल्द ही इस अवैध दुकान और इसके पीछे के 'संरक्षकों' पर कार्यवाही नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि दुर्ग निगम में 'जनहित' नहीं, बल्कि 'अधिकारी हित' सर्वोपरि है।

    फिलहाल, जनता की नजरें अब आयुक्त सुमित अग्रवाल पर टिकी हैं—क्या वे इस भ्रष्टाचार के मकड़जाल को काटकर दोषियों पर गाज गिराएंगे?

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