August 08, 2026
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    तकनीकी संप्रभुता पर जोर: भारत को ‘टेक उपभोक्ता’ से ‘वैश्विक नवप्रवर्तक’ बनना होगा – डॉ. जितेंद्र सिंह

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    नई दिल्ली/लॉस एंजिल्स ।
    भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व अनिवार्य है। यह बात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉस एंजिल्स में वर्चुअल रूप से आयोजित अखिल-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि अब भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का निर्माता, डिजाइनर और वैश्विक चालक बनना होगा।

    2047 का विजन: तकनीक बनेगी विकास की धुरी

    डॉ. सिंह ने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य विज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित है।
    उन्होंने भारत की हालिया उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा:

    • अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार
    • जैव प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति
    • डीप-टेक स्टार्टअप्स का उभार

    ये सभी संकेत हैं कि भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

    उभरती तकनीकें: राष्ट्रीय सुरक्षा से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

    मंत्री ने चार प्रमुख क्षेत्रों को भारत के भविष्य के लिए निर्णायक बताया:

    • सेमीकंडक्टर
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
    • रोबोटिक्स
    • क्वांटम टेक्नोलॉजी

    उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र न केवल आर्थिक मजबूती बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी परिभाषित करेंगे।

    आईआईटी एलुमनाई और प्रवासी भारतीय: वैश्विक कड़ी

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी के पूर्व छात्रों और भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत और वैश्विक नवाचार इकोसिस्टम के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।
    उन्होंने इनके योगदान को रेखांकित किया:

    • निवेश और स्टार्टअप समर्थन
    • मेंटरशिप और शोध सहयोग
    • नीतिगत भागीदारी

    शिक्षा-उद्योग-सरकार का त्रिकोण

    उन्होंने तकनीकी नेतृत्व के लिए शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता बताई।
    नई शिक्षा पहल जैसे ऋषिहुड विश्वविद्यालय में सज्जन अग्रवाल स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी को उन्होंने इसी दिशा में एक उदाहरण बताया।

    संदेश स्पष्ट: साझेदारी से ही बनेगा टेक्नोलॉजी लीडर भारत

    डॉ. सिंह ने आईआईटी एलुमनाई से आह्वान किया कि वे:

    • उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाएं
    • भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग करें
    • युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन दें

    उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत न केवल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रगति में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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