July 18, 2026
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    स्वरूपानंद महाविद्यालय में औद्योगिक भ्रमण के साथ सात दिवसीय अटल बेसिकएफडीपी का हुआ समापन

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    भिलाई/शौर्यपथ / स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई में एआईसीटीई ट्रेनिंग एण्ड लर्निंग (अटल) अकादमी के सहयोग से उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम विषय पर आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का समापन सत्र डॉ. सुमित गुप्ता प्राध्यापक आईआईएम रायपुर के व्याख्यान और
    औद्योगिक भ्रमण से हुआ। महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा एवं श्री शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मोनिशा शर्मा ने कार्यक्रम आयोजन के लिए बधाई दी एवं कहा सरकारी संस्थाए एवं व्यावसायिक संगठन के साथ मिलकर हम विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकते है जिससे वे रोजगार ना ढूंढ कर रोजगार देने वाले बने और देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान दे।
         डॉ. सुमित गुप्ता प्राध्यापक आईआईएम रायपुर ने उद्यमिता चर्चा डेटा विश्लेषण दृष्टिकोण विषय पर अपने व्याख्यान में बताया उद्यमिता में डेटा विश्लेषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है विभिन्न स्त्रोतों से डेटा संग्रहण करना ग्राहकों की जानकारी के आँकड़े को एकत्रित कर के उसका विश्लेषण करना, उसके आधार पर निर्णय ले हम अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते है उन्होंने अमेजान, ओला, जीवनसाथी डॉटकाम, जोमैटो आदि उदाहरण के माध्यम से बताया कि ऑनलाइन प्लेटफार्म में निर्माता और उपभोक्ता के बीच की दूरी को कम करने के लिए नये विचार से स्टार्ट-अप शुरू किया जा सकता है। ऐसे स्टार्ट-अप में उद्यमी को व्यवसाय शुरू करने के पश्चात् बाजार में बने रहने के लिए नितनए अनुसन्धान और  ्रोद्योगिकी का प्रयोग करना होता है।
      प्रतिभागियों को औद्योगिक भ्रमण हेतु एमएसएमई टेक्नालॉजी सेंटर रसमड़ा दुर्ग ले जाया गया यह एफडीपी का ही हिस्सा था। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने अपने विचारों से स्टार्ट-अप प्रारंभ करने के लिये नई दिशा दी। पूर्व सत्रों के वक्ता एवम व्यक्तव्य के मुख्य बिंदु अग्रनुसार है-दूसरे दिन के प्रथम सत्र के वक्ता विष्णु वैभव द्विवेदी, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी आईआईटी भिलाई ने प्रौद्योगिकी उद्यमियों के लिये बाजार की रणनीतियॉं विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा उद्यमिता छोटी बजट से प्रारंभ होती है सीमित संसाधनों से आरंभ कर धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर बढ़ाना चाहिये यह तरीका वर्तमान की चुनौतियों का सामना करने के साथ भविष्य में भारत को वैश्विक पटल पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका
    निभाएगा। उन्होंने बताया जब तकनीकी मेडिकल साईंस, शिक्षा या इंजीनियरिंग से मिलती है तो क्रंातिकारी परिवर्तन होता है। हमें बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुये अपना स्टार्ट-अप करना होगा। उन्होंने बताया आईआईटी भिलाई ने कम समय में ही 50 से अधिक पेटेंट और 300 से अधिक राष्ट्रीय स्तर पर नौकरी सृजित किया है।
    द्वितीय सत्र की वक्ता डॉं. हंसा शुक्ला प्राचार्य स्वामी  स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय ने उद्यमशीलता: प्रेरणा और चुनौतियॉं विषय पर अपने व्याख्यान में बताया अगर आप बिजनेस प्रारंभ कर रहे है तो आप कभी न सोचे की मैं मार्केट में बना रहूगा बल्कि हमेशा यह सोच होनी चाहिए कि मैं मार्केट से बाहर हो सकता हू यह सोच आपको नवीन आईडिया के लिये प्रेरित करेगा। आज का स्टार्ट-अप कल का बिजनेसमैन बनेगा। बाबा रामदेव जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व में हमारे आयुर्वेद को पहुचाया पदमश्री फूलवासन ने महिला स्व सहायता समूह से कार्य की शुरुआत की आज उनका लाखो का टर्नओवर
    है । छत्तीसगढ़ में पर्यटन, कला व संस्कृति प्रत्येक क्षेत्र में स्टार्ट-अप की असीम सम्भावनाये है।
    कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति सदस्य डॉ. रजनी मुदलियार, डॉ. सुनीता वर्मा, डॉ. मीना मिश्रा, श्रीमती खुशबू पाठक, श्रीमती रुपाली खर्चे, श्रीमती एन. बबीता, डॉ. शर्मिला सामल, श्रीमती कामिनी वर्मा, हितेश सोनवानी,  जमुना प्रसाद, योगिता लोखण्डे, श्रीमती श्रीलथा नायर, श्रीमती मोनिका मेश्राम, संजना सोलोमन, समीक्षा मिश्रा, विजय मिश्रा, निकिता देवांगन, रश्मि बनाज, मोहिनी शर्मा ने विशेष योगदान दिया।
      फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में अंजनेय विश्वविद्यालय, भिलाई इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग, श्री शंकराचार्य इंस्टीटयूट ऑफ प्रोफेशनल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, रायपुर, भिलाई प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्ग, सेठ आरसीएस आर्टस एवं कामर्स महाविद्यालय दुर्ग, देव संस्कृति कॉलेज ऑफ एजुकेशन एण्ड टेक्नोलॉजी खपरी दुर्ग, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्ससिटी, भिलाई, सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई, कल्याण पीजी महाविद्यालय, दुर्ग, कृष्णा इंस्टीटयूट ऑफ साइंस एण्ड कामर्स महाविद्यालय, खम्हरिया,  आईआईटी भिलाई श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी भिलाई, भिलाई महिला महाविद्यालय, भिलाई के प्राध्यापक एवं शोधार्थी शामिल हुये।

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