July 23, 2026
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    कोमा में आए लावारिस बुजुर्ग को मिला नया जीवन, मेडिकल कॉलेज पेंड्री के डॉक्टरों ने बचाई जान

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    मृणेन्द्र चौबे

    राजनांदगांव। शौर्यपथ। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय पेंड्री में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की संवेदनशीलता तथा समर्पण से एक लावारिस बुजुर्ग मरीज को नया जीवन मिला है। कोमा और गैस्पिंग की गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए इस अज्ञात मरीज का लगभग 20 दिनों तक लगातार उपचार किया गया, जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।

    जानकारी के अनुसार 24 फरवरी 2026 को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से एक अज्ञात बुजुर्ग मरीज को अत्यंत नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। भर्ती के समय मरीज गहरे कोमा में था और गैस्पिंग की स्थिति में अंतिम सांसें ले रहा था। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि मरीज लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित था, जिसके कारण वह हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (दिमाग पर असर) की खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका था।

    इसके साथ ही मरीज के शरीर में प्रोटीन की अत्यधिक कमी के कारण पूरे शरीर में सूजन थी और संक्रमण फैलने से वह सेप्टिक शॉक की स्थिति में था। चिकित्सकों के अनुसार इस अवस्था में मरीज के बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन समय पर मिले उपचार और टीमवर्क से उसे नया जीवन मिल सका।

    डीन डॉ. पी. एम. लुका एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. देशकर के मार्गदर्शन तथा मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. तिरकी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। मरीज के अज्ञात और लावारिस होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके सभी आवश्यक परीक्षण, जांच और दवाइयों की व्यवस्था पूरी तरह नि:शुल्क कराई।

    इलाज की जिम्मेदारी डॉ. प्रकाश खुंटे के साथ डॉ. आशीष दुलानी, डॉ. भूपेंद्र जंघेल, डॉ. आकाश चंद्राकर और डॉ. विकास जैन की टीम ने संभाली। चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए लगातार मॉनिटरिंग और आवश्यक उपचार जारी रखा। इस दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने भी उपचार प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया।

    डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की विशेष देखभाल भी मरीज के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सिस्टर इंचार्ज रेखा और नर्सिंग ऑफिसर केसर, राजलक्ष्मी, मोहिनी, पूजा निषाद तथा चंद्रकला ने चौबीसों घंटे मरीज की सेवा की। वार्ड बॉय और आया वर्ग ने भी मरीज की देखभाल में पूरा सहयोग दिया, जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होता गया।

    लगातार लगभग 10 दिनों तक आईसीयू और क्रिटिकल केयर में गहन उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर हुई और वह धीरे-धीरे होश में आने लगा। इसके बाद सामान्य वार्ड में रखकर उपचार जारी रखा गया। करीब 20 दिनों तक चले उपचार के बाद 14 मार्च 2026 को बुजुर्ग मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

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