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June 19, 2026
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दुर्ग

दुर्ग (5114)

दुर्ग / शौर्यपथ / दो साल के बाद फिर एक बार शहर में डेंगू जैसी बीमारी के महामारी का रूप धारण करने का आसार स्पष्ट नजर आ रहा है। इस बार फोरलेन सड़क पर फ्लाई ओव्हर निर्माण के लिए की गई खुदाई के चलते बने गड्ढों से डेंगू का खतरा उत्पन्न होने की संभावना उभरने लगी है। इन गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने से डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लार्वा को पनपने का मौका मिलेगा। ऐसे में दो साल पहले खुर्सीपार में केनाल रोड निर्माण के साथ बनी परिस्थितियां इस बार भी बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
भिलाई नगर निगम क्षेत्र में अभी दर्जन भर के करीब डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही जिला और निगम प्रशासन के लिए बारिश शुरू होने से पहले शहर में डेंगू की दस्तक पड़ जाने से चुनौती बढ़ गई है। इस बीच डेंगू के लिहाज से फ्लाई ओव्हर निर्माण के लिए फोरलेन सड़क पर की गई खुदाई वाली जगह भी खासी चुनौती बन सकती है। दरअसल डेंगू फैलाने वाले मच्छर जमा पानी में पनपते हैं। ऐसे में फ्लाई ओव्हर के लिए सड़क की हुई खुदाई वाली जगह पर जमा होने वाले बारिश का पानी डेंगू के मच्छरों को लार्वा छोडऩे के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर सकते हैं। इन गड्ढों में पनपने वाले लार्वा जब मच्छर बनकर शहर में फैल जाएंगे तो इसमें संदेह नहीं कि डेंगू एक बार फिर कहर बरपा सकता है।
गौरतलब रहे कि दो साल पहले भिलाई-दुर्ग सहित इसके आसपास के इलाके में महामारी के रूप में कहर बरपाया था। भिलाई निगम क्षेत्र में ही 54 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उस वक्त खुर्सीपार इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। तब आम लोगों के बीच केनाल रोड निर्माण के लिए हुए खुदाई वाले जगहों पर बारिश का पानी जमा होने को डेंगू फैलने की चर्चा ने खासा जोर पकड़ा था। इस बार भी वैसी ही आशंका फ्लाई ओव्हर निर्माण के लिए की गई खुदाई वाली जगह को लेकर जताई जाने लगी है।
यहां पर यह बताना लाजिमी होगा कि फोरलेन सड़क पर कुम्हारी से लेकर सुपेला के बीच चार फ्लाई ओव्हर का निर्माण हो रहा है। पहला फ्लाई ओव्हर कुम्हारी में बन रहा है और इसका जमीनी स्तर का काम पूरा हो जाने से खुदाई वाले गड्ढों का भरा जा चुका है। इस लिहाज से कुम्हारी में तो कोई खास खतरा नहीं दिखता, लेकिन डबरापारा तिराहे सहित पावर हाउस और फिर चंद्रा-मौर्या से लेकर सुपेला चौक तक तीन स्थानों मे पिलर खड़ा करने के लिए की गई खुदाई के चलते बने गड्ढों में बारिश का पानी जमा होना तय है। इस जमे पानी में डेंगू के लार्वा को पनपने का मौका मिलेगा जिससे दो साल पहले जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
खुर्सीपार है संवेदनशील इलाका
डेंगू के लिहाज से भिलाई निगम के खुर्सीपार का इलाका संवेदनशील माना जाता है। दो साल पहले इसी इलाके में डेंगू से ज्यादा मौते हुए थी। हालांकि इस बार केम्प-2 के संतोषी पारा वार्ड में डेंगू की दस्तक पड़ चुकी है और 10 मरीज मिले हैं। इसके साथ ही संतोषी पारा में साफ सफाई के साथ लोगों को मच्छर से बचने और सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भूरे ने गत दिनों संतोषी पारा वार्ड का दौरा कर निगम द्वारा डेंगू के रोकथाम हेतु किए जा रहे इंतजाम का अवलोकन कर जरुरी निर्देश दिया। निगम द्वारा सभी संवेदनशील वार्डों में टैमीफास का वितरण कर जमा पानी में इस्तेमाल करने की सलाह लोगों को दी जा रही है। इसके साथ ही कूलर, पानी टंकी की हर दो दिन में सफाई, खुले में पड़े टायर व गमलों व मिट्टी के बर्तन में पानी जमा नहीं होने देने की अपील निगम द्वारा की जा रही है।

 दुर्ग / शौर्यपथ /    कोरोना महामारी के दौर में इन दिनों बाहर से आए लोगों को होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। इस दौरान इन्हें सख्त हिदायत दी जा रही है कि वे घर से बाहर न निकले। वहीं परिवार वालों को भी इन पर निगरानी करने कहा जा रहा है। इसके बाद ऐसी शिकायतें मिली हैं जिसमें होम क्वारंटाइन के दौरान व्यक्ति घर से बाहर निकल रहा है। आज के हालात में यह बेहद खतरनाक है। इसे देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने आदेश जारी ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई किए जाने बात कही है।
कलेक्टर भूरे ने आदेश जारी कर होम क्वारंटाइन का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान तो है ही। साथ की कलेक्टर ने आदेश जारी कर ऐसे व्यक्ति को 6 माह की सजा व एक हजार रुपए का जुर्माना लगाने कहा है। यहीं नहीं यदि होम क्वारंटाइन के दौरान व्यक्ति को बाहर निकलने में मदद करते हैं तो परिवार वालों पर भी कार्रवाई जाएगी। व 11 जून की रात 10 बजे से 12 जून की सुबह 8 तक समपार फाटक से वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। इस दौरान आवश्यक मरम्मत का कार्य पूरा किया जाएगा।

दुर्ग / शौर्यपथ / शहर की बढ़ती आबादी एवं जिला अस्पताल में मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग प्रमुखता से की जा रही थी। जिस पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा 75 लाख रु की राशि पोटिया क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण हेतु स्वीकृति मिली। विधायक अरुण वोरा द्वारा एक वर्ष पूर्व भूमिपूजन करने के पश्चात लगातार मॉनिटरिंग से अब लॉकडाउन के पश्चात विधायक वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल ने लेंटर लेवल तक का कार्य पूर्ण के बाद छत ढलाई का कार्य प्रारंभ किया गया। तीन माह के अंदर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
विधायक वोरा ने कहा कि नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू हो जाने से आसपास के 14 वार्डों की लगभग 60 हजार जनता को जिला अस्पताल की लंबी दूरी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा व घर के निकट अच्छी स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो सकेगी जो अपने आप में मोहल्ला क्लिनिक मॉडल का स्वरुप होगा। 10 बिस्तर वाले पोटिया स्वास्थ्य केंद्र के अतिरिक्त शहर में तीन अन्य स्थानों शनिचरी बाजार, बघेरा एवं पटरीपार क्षेत्र में भी स्वास्थ्य केंद्र निर्माण कराने मुख्यमंत्री से मांग की गई है। महापौर धीरज बाकलीवाल से सीजीएमएससी के अधिकारियों ने नगर निगम द्वारा स्वास्थ्य केंद्र के सामने नाली निर्माण करने की मांग रखी। इस दौरान जिला चिकित्सालय के डॉ. राजेन्द्र खण्डेलवाल, निगम उप अभियंता जितेंद्र समैया, परियोजना अधिकारी संजीव दुबे, लोनिवि अभियंता आर के राव मौजूद थे।

दुर्ग / शौर्यपथ / पर्यावरण को संजोने आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण से जोडऩा बेहद आवश्यक है। इसके लिए एक नवाचारी प्रयोग वन विभाग द्वारा किया जाएगा। लगभग 120 बच्चों का समूह जंगल में टैंट में एक दिन का हाल्ट करेगा। यहां फारेस्ट विभाग के ट्रेनर बच्चों को जंगल के जानवरों के बारे में, पक्षियों के बारे में बताएंगे। वे यह बताएंगे कि किस प्रकार पारिस्थितिकी का संरक्षण करना मानवता के लिए उपयोगी होगा। जंगल में अलग-अलग तरह के पक्षियों की आवाजें, उनके आवास, उनके समूह में रहने का तरीका, खानपान की विधि आदि बताई जाएगी।
कैंप का समय माइग्रेटरी बर्ड का समय होगा, इसलिए उनके डिटेल्स भी बताए जाएंगे। इसमें फारेस्ट विभाग के प्रमुख अधिकारियों के साथ राजू वर्मा जैसे पक्षी विशेषज्ञ भी बच्चों को पक्षियों के बारे में तथ्य साझा करेंगे। आज कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे की अध्यक्षता में इस संबंध में बैठक हुई। यहां डीएफओ श्री केआर बढ़ाई ने विस्तार से प्रोजेक्ट की जानकारी दी और बताया कि ये प्रोजेक्ट किस तरह बच्चों की अभिरुचि जगाने में सहायक हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि स्कूली विद्यार्थियों में वन, वन्य प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने हेतु वन मितान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत कक्षा 6वीं से 12वीं के छात्र-छात्राओं को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव प्रदान कर उन्हें इसके संरक्षण के लिए जागरुक किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य- वन मितान कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को वन वन्य प्राणी एवं पर्यावरण की वन मितान बनाकर उन्हें इसके संरक्षण हेतु प्रेरित करना है। इच्छुक विद्यार्थियों को नेचुरल वॉलेंटियर फोर्स के रूप में विकसित करना है साथ ही विभाग एवं विभागीय अधिकारियों के कार्य उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से इन विद्यार्थियों को अवगत कराना है।
विद्यालय एवं विद्यार्थियों का चयन- विद्यालय एवं विद्यार्थियों का चयन एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थी जो पर्यावरण के प्रति अभिरूचि रखते हो। विद्यार्थी का चयन वन्य प्राणी पक्षी इत्यादि की समान्य जानकारी के आधार पर होगा। चयनित विद्यार्थी का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। शिविर हेतु कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को चनित किया जा सकता हैं किन्तु प्राथमिकता के आधार पर 8वीं एवं 12वीं के विद्यार्थी को सर्वप्रथामिकता दी जाएगी। प्रत्येक परिक्षेत्र में 120 विद्यार्थी का चयन किया जाकर दो चरणों में 60-60 विद्यार्थी हेतु वन मितान कार्यक्रम किया जाएगा।
शिविर स्थल का चयन- प्रशिक्षण सह जागरूकता शिविर का आयोजन वन्य परिक्षेत्र में स्थित प्राकृतिक सौन्दर्य के स्थल पर किया जाएगा। शिविर का चयन इस प्रकार से किया जाएगा कि विद्यालय से 25 से 30 किलोमीटर के परिक्षेत्र में स्थित हो।
गतिविधियॉ- वनमितान शिविर एक दिन का होगा। जिसमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियॉ को शामिल किया गया है। शिविर दिवस पर विद्यार्थियों को पक्षी दर्शन, वन्य प्राणी दर्शन, सफारी, नौकायान, वन भ्रमण कराया जाएगा। प्राकृतिक पथ भ्रमण, प्रकृति की पाठशाला, स्थल पर विद्यमान वाणिकी गतिविधियों की जानकारी देने के साथ ही वन एवं वन्य प्राणी एवं पर्यावरण के महत्व से रूबरू कराया जाएगा। जिज्ञासा समाधान व चर्चा, परिचर्चा, वनाचार, प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया जाएगा। शिविर के आयोजन को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, भोजन, सुरक्षा स्वास्थ्य, सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में 75 दिन बाद सरकार द्वारा अनुमति मिलने के बाद खुले मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे व चर्च में अब भक्तों को भगवान के दर्शन हो सकेगें। लेकिन उन्हे सोशल डिस्टेसिंग व मास्क लगाना अनिवार्य रहेगा। निगम क्षेत्रांतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों में विधायक अरुण वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा सैनिटाईजेशन का कार्य गणेश मंदिर इंदिरा मार्केट, सांई मंदिर कसारीडीह, चण्डी मंदिर, शीतला मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च, रहमान शाह बाबा का दरगाह एवं दादाबाड़ी जैन मंदिर मालवीय नगर में सुबह से ही प्रारंभ किया गया। वोरा ने कहा कि धार्मिक स्थलों में लॉकडाउन के बाद पुन: रौनक लौट आई है। दर्शनार्थियों के लिए अच्छी व्यवस्था देख जनता में हर्ष व्याप्त है। कोरोना महामारी के बचाव के लिए सैनिटाईजर एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य है लोग सुरक्षित रहेगें तो मंदिर परिसर भी सुरक्षित रहेगा। धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की अपनी अस्था है इन स्थानों पर पहुंचने से मनोबल बढ़ता है। हम सभी धार्मिक भावनाओं से जुड़े है। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर शहरवासियों के लिए सुख समृद्धि की कामना की। महापौर बाकलीवाल ने कहा कि काफी दिनों बाद मंदिरो के पट खोले गए है आमजनों में उत्साह है। नगर निगम के द्वारा लगातार धार्मिक स्थलों की मॉनिटरिंग एवं सेनेटाईजेशन का कार्य किया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर फिजीकल और सोशल डिस्टेसिंग के साथ पूजा- अर्चना प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत किया गया।

अन्य राज्य से आने वाले 14 दिन का होम क्वारंटाइन का पालन करें : वोरा


दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना महामारी को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा है। अब तक इससे अछूते रहे दुर्ग शहर के घनी आबादी में भी कोरोना के पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढऩे के कारण जनता में हड़कम्प की स्थिति निर्मित हो गई है। अब प्रशासनिक अमले को ज्यादा सतर्कता से काम करना होगा। विधायक अरुण वोरा ने कलेक्टर से चर्चा कर कहा कि बीते कुछ दिनों से क्वारेंटाइन सेंटर में फिजिकल डिस्टेंसिंग व होम क्वारंटाइन का पालन नही होने की शिकायत मिल रही हैं। सेंटर में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों समेत अन्य लोगों के फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने में लापरवाही होने पर निगम क्षेत्र में भी कोरोना बम फूट सकता है। प्रशासन द्वारा नियुक्त क्वारंटीन सेंटर के नोडल अधिकारी को इसका पालन कड़ाई से कराना होगा तथा नियमित मॉनिटरिंग करने अफसरों की ड्यूटी लगाने और इसे क्रास चेक करने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। जिला मुख्यालय दुर्ग के सभी 60 वार्डों में सेनिटाइजेशन का सघन अभियान सतत् जारी रहे। दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के कारण अब दुर्ग में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्वारंटाइन सेंटरों एवं शासकीय व अशासकीय कार्यालय तथा सार्वजनिक स्थानों में साफ.-सफाई, दवा का छिड़काव, बार.बार हाथ धोने की सुविधा से संक्रमण से बचाव के लिए अन्य जरूरी उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने आवश्यकता हैं। शहर के बाजारों, दुकानों व अन्य व्यवसायिक उपक्रमों में भी फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए सतर्कता जरुरी है। इसमें ढील देने या लापरवाही होने पर दुर्ग में कोरोना महामारी तेजी से फैल सकती है। वार्डो के जनप्रतिनिधि एवं जनता के द्वारा दूसरे राज्यों से आने वालो की जानकारी पर नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग व पुलिस विभाग तत्काल उन्हे चिन्हित कर हेल्थ परीक्षण व घर से बाहर ना निकले 14 दिनों तक होम क्वारंटाइन का पालन करवाएं।

क्वारन्टीन जोन में, क्वारन्टीन सेंटर में तथा होम क्वारन्टीन में रह रहे लोगों की पुख्ता मॉनिटरिंग होती रहे


   दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण के नियंत्रण की समीक्षा को लेकर आज एक महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट में आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने कहा कि जिले में कुछ दिनों से लगातार कोरोना के नए मामले आ रहे है। ऐसी स्थिति में पहले की तरह ही पूरी सावधानी व सतर्कता की जरुरत है। हर स्तर पर संक्रमण को रोकने के साथ-साथ लोगों को इस संक्रमण से बचाने निरंतर जनजागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने जिले के सभी राजस्व अनुभागों के अनुविभागीय राजस्व अधिकारी व नगरीय निकायों के आयुक्त को इस पूरे काम में बडी सार्थक भूमिका के साथ दायित्वों का पालन करने कहा है।
       कलेक्टर ने कहा कि हमेशा की तरह कोरोना संक्रमण को थामने रिस्पांस टाइम का बडा महत्व है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के साथ ही किसी भी क्वारन्टीन सेंटरध्होम क्वारेंटाईन में किसी व्यक्ति का रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर बिना समय गंवाए उसके उपचार की व्यवस्था तुरंत आरम्भ कराने तथा संपर्क में आये लोगों की ट्रेसिंग जरूरी है। कंटेन्मेंट जोन की पूरी तरह से ट्रेकिंग करने के लिए शहरी क्षेत्रों के लिए नगरीय निकाय के आयुक्तों को तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अनुविभागीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। नगरीय निकाय क्षेत्रो में 2 या 2 से अधिक मामले आने पर नगरीय निकाय के आयुक्त सम्बंधित एसडीएम से संपर्क कर अलग-अलग टीम के साथ प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण एवं आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। कहीं पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में प्रोटोकॉल अनुसार सीएमएचओ सम्बंधित एसडीएम और कमिश्नर को इसकी तत्काल सूचना देंगे जिससे सुरक्षित तरीकों के साथ आगे की कार्यवाही हो सके।
कलेक्टर ने बैठक में कहा कि कंटेन्मेंट जोन में सुरक्षा बल लगातार मोनीटरिंग करेंगे
    उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि सभी कंटेन्मेंट जोनध्क्वारन्टीन सेंटर में रहने वाले लोगों की मॉनिटरिंग करें। यह सुनिश्चित करें कि होम क्वारन्टीन में रहने वाला नागरिक घर में अलग से रहे और अपनी सभी गतिविधियों का संचालन पृथक रूप से ही करे। क्वारन्टीन सेंटर में रहने वाले लोगों के खून की सेम्पल लेने की दिन से उनके क्वारेंटीन सेंटर में रहने के दिन की गणना की जाए। साथ ही निर्धारित अवधि पूरी हो जाने के बाद उसकी ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही सेंटर से उसकी छुट्टी की जाए।
      कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को अपने वार्डो और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी घरों के लोगों की आवश्यक निगरानी रखते हुए सर्दी खांसी के लक्षण होने पर अथवा सांस लेने में तकलीफ होने पर जानकारी देने कहा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के साथ भी समन्वय से कार्य करने कहा।
           उन्होंने कोरोना के संक्रमण को रोकने व बचाव के लिए लगे दलों के अधिकारियों को बेहद जवाबदेही से कार्य करते हुए इसे नियंत्रित करने की दिशा में कार्य करने कहा है। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिले में अभी कुछ दिनों में और नए मामले आने की आशंका है। इसके मद्देनजर बाहर से आने वाले लोगों की पूरी सूची श्रम विभाग से लेकर स्वास्थ्य जांच कर इन्हें क्वारन्टीन सेंटर पर रखने कहा। कोई पॉजिटिव मरीज मिलने पर उसके सम्पर्क में आये सभी लोगों की हिस्ट्री तैयार कर उन सभी की जांच कराएं। जिले में पूरी तरह से संक्रमण के रोकथाम की दिशा में कार्य करने उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया।

कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने किया पाटन ब्लॉक का निरीक्षण


दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज पाटन ब्लॉक में विभिन्न निर्माण कार्यो तथा प्रस्तावित निर्माण कार्यो के स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रगतिरत कार्यों के साइट का अवलोकन कर निर्माण कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। साथ ही इन्हें युद्धस्तर पर कार्य कर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने उन जगहों का निरीक्षण भी किया जहां पर महत्वपूर्ण कार्य होने हैं। डॉ. भूरे कुरमीगुंडा, सेलूद, मर्रा जैसे गांवों में पहुंचे। मर्रा में उन्होंने प्रस्तावित कृषि महाविद्यालय की भूमि तथा इंडोर स्टेडियम की भूमि देखी। यहां मौजूद इंजीनियरों ने उन्हें प्रोजेक्ट के डिटेल्स के बारे में बताया। कलेक्टर ने दोनों ही प्रोजेक्ट के संबंध में विस्तार से तकनीकी पक्षों के बारे में चर्चा की। कलेक्टर सेलूद भी पहुंचे।
यहां पर उन्होंने ऐतिहासिक प्राइमरी स्कूल के सामने ग्रामीणों से विकास कार्यों के संबंध में चर्चा की। ग्रामीणों ने यहां की समस्या रखी। ग्रामीणों ने बताया कि सडक की वजह से दिक्कत है। यह दूर हो गई तो बहुत सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। स्कूल बिल्कुल बगल से लगा है। धूल काफी उडती है। साथ ही ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ड्रेनेज की समस्या यहां पर है सडक निर्माण के साथ ही नाली निर्माण की दिशा में मुकम्मल कार्य होगा तो लोगों के लिए काफी राहत होगी। कलेक्टर कुरमीगुंडरा भी पहुंचे यहां पर तथा अन्य स्थलों में प्रस्तावित पौधरोपण कार्यों की उन्होंने जानकारी ली। यहां पर 15 एकउ में नींबू के पौधों का रोपण का प्रोजेक्ट है। कलेक्टर ने कहा कि पौधरोपण सबसे महत्वपूर्ण अभियान है। पूरे जिले में फलदार वृक्षों के रोपण पर काम किया जा रहा है।
पाटन ब्लॉक में भी नींबू और मुनगा के रोपण पर कार्य किया जा रहा है ग्रामीणों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि मुनगा के रोपण से न केवल हरियाली का दायरा बढेगा अपितु इसके माध्यम से आंगनबाउियों में मुनगा वितरण कर सकेंगे। कुपोषण से लाडने में मुनगा अहम भूमिका निभाता है हिमोग्लोबिन के बढाने में एनीमिया से बचाने में मूंगा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा फलोद्यान का दायरा बढाने का उद्देश्य यह है कि कृषि के अलावा लोगों को अतिरिक्त आय अर्जित हो सके। कलेक्टर ने इस मौके पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा की और उनसे प्रस्तावित विकास कार्यों के सुझाव लिए। कलेक्टर ने कहा कि सभी निर्माण कार्य तय समय पर पूरे होंगे। आजीविकामूलक गतिविधियों को ब?ावा दिया जाएगा। साथ ही पौधरोपण के कार्यक्रम को भी युद्धस्तर पर किया जाएगा। पौधों को रोपने से लेकर सहेजने तक सारी योजना बना ली गई है।
कलेक्टर ने बताया कि पाटन शहर को प्रमुख शहरों से जोडऩे वाली महत्वपूर्ण सडकों पर बडेे पैमाने पर पौधरोपण की तैयारी कर ली गई है। दौरे में प्रशिक्षु कलेक्टर जितेंद्र यादव, एसडीएम विनय पोयाम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

   दुर्ग / शौर्यपथ / भिलाई निगम क्षेत्र में बाहर राज्य से आने वाले लोगों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। नोवल कोरोना वायरस के बचाव हेतु निगम क्षेत्र में अब तक कई व्यक्तियों को होम आइसोलेट किया जा चुका है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। आइसोलेटेड लोगों की निगरानी के लिए सभी जोन कार्यालय के अंतर्गत विशेष टीम गठित की गई है जो दिन में चार बार होम आइसोलेट के लोगों पर निगरानी रख रहे हैं। नोवल कोरोना वायरस कोविड-19 के अंतर्गत लॉक डाउन के दौरान अन्य राज्यों से आए हुए व्यक्तियों की सूची अथवा सूचना के आधार पर होम क्वॉरेंटाइन एवं निगरानी सुनिश्चित करने के लिए जोन आयुक्तों के निर्देशन में टीम गठित की गई है तथा बाहर से आने के बाद अपनी जानकारी छुपाने वालों के खिलाफ (एफआईआर) के निर्देश भी जारी किया गया है।
भिलाई निगम क्षेत्र में कोरोना वायरस के रोकथाम हेतु हर संभव प्रयास किए जा रहे है, निगम प्रशासन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम बनाकर बाहर से आए हुए व्यक्तियों के घरों के बाहर होम आइसोलेशन के स्टीकर लगा रहे है। भिलाई क्षेत्र में बाहर से आए हुए व्यक्ति व परिवारों को निर्धारित अवधि तक घर पर रहने की हिदायत देने के साथ ही निगरानी की जा रही है ताकि ये लोग किसी तरह से दूसरे लोगों के संपर्क में न आए और होम क्वॉरेंटाइन का पूर्णत: पालन करें। इसके अलावा जिन लोगों को होम आईसोलेट किया गया है उनके आस पास के 6-7 घरों के परिवारों के मोबाइल नं. भी लिए जा रहे है जिनसे निगम की टीम फोन करके भी पूछताछ कर रही है कि वे लोग बाहर तो नहीं निकल रहे है इसकी जानकारी ली जा रही है। दूसरे राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की प्रतिदिन निगरानी करने भिलाई निगम, आंगनबा?ी कार्यकर्ता व शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई जो अलग-अलग जोन क्षेत्रों में शहर के आम नागरिकों से सूचना प्राप्त कर बाहर राज्य से आए हुए हैं उनकी जानकारी एकत्रित कर उन्हें होम आइसोलेट कर रहे है।
बाहर से आने के बाद जो लोग अपनी जानकारी छुपाएंगे या होम आईसोलशेन की प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए यह आवश्यक है कि जो लोग बाहर से आ रहे है उन्हें जागरूकता दिखाते हुए निगम प्रशासन को जानकारी देनी होगी ! बाहर से आए हुए व्यक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए व्यवसायिक व सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है तथा हेल्पलाइन नंबर से संबंधित स्टीकर लगाए गए है, बाहर से आने वाले लोगों की जानकारी देने वाले का नाम गोपनीय रखा जा रहा है।
बाहर से आए हुए लोगों की मिले जानकारी तो इन नंबरों पर करें संपर्क कोरोनावायरस कोविड-19 महामारी के संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु ऐसे व्यक्ति जो भिलाई शहर के वार्ड, क्षेत्र, मोहल्ला या आसपास में अन्य शहर, गांव, राज्य से आए हुए हैं उनकी जानकारी इस कार्य के लिए नियुक्त भिलाई निगम के नोडल अधिकारी जोन क्रमांक एक नेहरू नगर के जोन आयुक्त अमिताभ शर्मा 7000092136, प्र. सहा. राजस्व अधि. विनोद चंद्राकर 9826685701, जोन क्रमांक 2 वैशाली नगर के जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि 7050344444, प्र. सहा. राजस्व अधि. संजय वर्मा 9669332966, जोन क्रमांक 3 मदर टैरेसा नगर के जोन आयुक्त महेंद्र पाठक 9424227177, प्र. सहा. राजस्व अधि. परमेश्वर चंद्राकर 9826947891, जोन क्रमांक 4 खुर्सीपार की जोन आयुक्त प्रीति सिंह 7697590459, प्र. सहा. राजस्व अधि. बालकृष्ण नायडू 9425245007, सेक्टर क्षेत्र जोन क्रमांक 5 के प्रभारी कार्यपालन अभियंता सुनील जैन 9425555648, प्र. सहा. राजस्व अधि. मलखान सिंह सोरी 9977421330 के मोबाइल नंबर पर संपर्क करके दे सकते हैं।

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