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सपत्नीक शिव महापुराण कथा के अंतिम दिवस पहुंचे भिलाई, व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना
भिलाई, दुर्ग / शौर्यपथ / जयंती स्टेडियम के समीप आयोजित शिव महापुराण कथा के अंतिम दिवस मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या देवी साय के साथ कथा स्थल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, समृद्धि और सुख-शांति की कामना की।
विशाल संख्या में उपस्थित शिवभक्तों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माता कौशिल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की इस्पात नगरी भिलाई में सात दिनों से शिव भक्ति की अविरल धारा बह रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को अध्यात्म से सीधे जुड़ने का अवसर मिला और स्वयं सपत्नीक कथा श्रवण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
छत्तीसगढ़ के चप्पे-चप्पे में महादेव का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान भोलेनाथ छत्तीसगढ़ के चारों दिशाओं में विभिन्न स्वरूपों में विराजमान हैं। रायपुर में हटकेश्वर महादेव, कवर्धा में भोरमदेव, राजिम में कुलेश्वर महादेव, चंपारण में चंपेश्वर महादेव, गरियाबंद में भूतेश्वर महादेव, सिरपुर में गंधेश्वर महादेव और जशपुर में मधेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव की आराधना होती है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के चप्पे-चप्पे पर देवाधिदेव महादेव की कृपा है और उनके आशीर्वाद से प्रदेश में खुशहाली एवं समृद्धि बनी हुई है।
पांच शक्तिपीठों के विकास पर सरकार का जोर
श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान शिव की भूमि होने के साथ-साथ मां शक्ति की आराधना का भी प्रमुख केंद्र है। राज्य सरकार द्वारा कुदरगढ़ी माता, चंद्रहासिनी माता, महामाया माता, बम्लेश्वरी माता और दंतेश्वरी माता से जुड़े पांच प्रमुख शक्तिपीठों के विकास की योजना बनाई गई है। इन्हें चारधाम की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ प्रदेश सरकार श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना भी संचालित कर रही है, जिसके तहत अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर श्री रामलला के दर्शन कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पुनः शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत श्रद्धालुओं को देश के विभिन्न 19 तीर्थस्थलों का दर्शन कराया जा रहा है।
तीसरी बार भिलाई में शिव महापुराण कथा
मुख्यमंत्री ने कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की सराहना करते हुए कहा कि वे देश-दुनिया में शिव महापुराण कथा के माध्यम से सनातन धर्म के प्रति आस्था को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। भिलाई में लगातार तीसरी बार शिव महापुराण कथा का आयोजन होने पर उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत किया तथा आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर, आईजी अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, आयोजन समिति के दया सिंह एवं अन्य पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिवभक्त उपस्थित रहे।
रिसाली / शौर्यपथ / दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देते हुए विधायक ललित चंद्राकर ने रिसाली नगर निगम के वार्ड क्रमांक 29 और 30 में कुल 1.01 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। विधायक ने कहा कि क्षेत्र की जनता की जरूरत और प्राथमिकता के अनुरूप विकास कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
वार्ड 29 में 62.14 लाख के कार्य
लक्ष्मी नगर, रिसाली भाठा वार्ड क्रमांक 29 में 62.14 लाख रुपये की लागत से डोम शेड, सड़क चौड़ीकरण, आरसीसी नाली, सीसी रोड, नाली निर्माण, कवर ड्रेन, सामुदायिक भवन एवं सौंदर्यीकरण सहित विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे।
वार्ड 30 में 39.32 लाख के विकास कार्य
इस्पात नगर, साईं मंदिर परिसर वार्ड क्रमांक 30 में 39.32 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण, नाली निर्माण, कवर ड्रेन एवं सौंदर्यीकरण के कार्य होंगे। दोनों स्थानों पर विधायक श्री चंद्राकर ने पूजा-अर्चना कर विकास कार्यों की आधारशिला रखी।
“रिसाली के विकास में धन की कमी नहीं आने देंगे”
इस अवसर पर विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और किसान सम्मान निधि जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ सड़क, नाली और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रिसाली नगर निगम के विकास के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। जनता की अपेक्षाओं और प्राथमिकता वाले कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पहले पूरा किया जाएगा। वार्ड 29 और 30 में शुरू हुए एक करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। लक्ष्य रिसाली के प्रत्येक वार्ड को आधुनिक सुविधाओं से युक्त आदर्श वार्ड बनाना है।
विधायक ने कहा कि विकास की यह गति आगे भी जारी रहेगी और भाजपा सरकार का मूल मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” है।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं वार्डवासी रहे मौजूद
कार्यक्रम में रिसाली मंडल अध्यक्ष अनुपम साहू, मरोदा पुरैना मंडल अध्यक्ष राजू जंघेल, महामंत्री दशरथ साहू, गुड्डू झा, नेता प्रतिपक्ष शैलेन्द्र साहू, मंडल उपाध्यक्ष प्रेम साहू, प्रदेश कन्या सह संयोजिका संस्कृति वर्मा, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष शकुंतला दास सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। पार्षदों में विलास बोरकर, धर्मेन्द्र भगत, सीमा साहू, ईश्वरी साहू, सरिता देवांगन, रमा साहू, सविता धवज, शीला नारखेड़े, गजेंद्री कोठारी और ममता सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा भूपेंद्र दास, रुपेश यादव, राजा डहरिया, दिलीप चौधरी, अमित वोरा, अश्वन निषाद, विजय सिंह सोनी, अनुप डे, कंचन सिंह, राजेन्द्र सिंह, संध्या मंडलोई, लता गेंद्रे, गीता मिश्रा, ज्योति स्नाई, अल्का श्रीवास्तव, सुम्भा राव, निशा, ओकेश्वरी मारकंडे, आमा शुक्ला, परमेश्वर महिलांग, कमलेश हिरवानी, आरती शर्मा, विकास कुलश्रेष्ठ, सतीश दुबे, डॉ. पार्वती कुर्रे, सविता महिलांग, तन्नू सोनवानी, अंचल यादव, राजेन्द्र यादव, अमन शर्मा, सुनीता कोसरे, धनजय मिश्रा, करुणा श्रीवास, चंद्रकली चतुर्वेदी, आयुष तिवारी, बॉबी दास, मनोज साहू, हिमांशु चंद्राकर, मंजु साहू, अनिल घोष, संतोष चौधरी, कृष्णा सिंह, हर्ष डोंगरे, गणेश पटेल सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी एवं निगम कर्मचारी उपस्थित रहे।
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के वीर बलिदानियों की पावन स्मृति को संजोने और उनकी शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम सोनपुर में शौर्य वाटिका का भूमिपूजन किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 37 शहीद परिवारों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही 'शौर्य वाटिका'में शहीदों के नाम पर उनके परिजनों द्वारा स्मृति वृक्ष लगाए गए। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने भी शहीदों की स्मृति में पीपल का पौधा रोपित कर शौर्य वाटिका में पौधरोपण की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा ने लगभग 78.96 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें तालाब गहरीकरण, खेल मैदान, पहुंच मार्ग निर्माण, शौचालय, चबूतरा निर्माण, वृक्षारोपण एवं शेड निर्माण सहित विभिन्न कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के अंतर्गत 37.95 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण, आहता निर्माण एवं शेड निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया गया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ के जवानों और बस्तर के लोगों ने बड़ी कीमते चुकाई है। उन्होंने शहीद जवानों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा कि आज बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा के कारण स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती थीं, वहां अब विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में शहीद जवानों की बहादुरी और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आज नक्सल क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है, जहां कभी जाना मुश्किल था, अब वहां शांति और बदलाव का माहौल है। उपमुख्यमंत्री ने सोनपुर गांव के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यहां शहीदों की स्मृति में शौर्य वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के शहीद परिवारों और शहीदों के नाम पर यहां पौधरोपण किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग और शौर्य को याद रख सकें। उन्होंने कहा कि सोनपुर गांव में योजना के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उपमुख्यमंत्री ने गांव में निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा सहित वीवीजी राम जी के माध्यम से रोजगार के साथ-साथ कौशल विकास और अधोसंरचना निर्माण को गति दी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजनाबद्ध तरीके से गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सांसद विजय बघेल ने भी शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम में साजा विधायक ईश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष कीर्ति नायक, सुरेन्द कोशिक, सरपंच संत कुमार कुंभकार, सेवानिवृत शिक्षक रामू राम चक्रधर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक गण उपस्थित थे।
मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने चुनौती—क्या दुर्ग RTO में वर्षों से जमे अधिकारी-कर्मचारियों पर लागू होगा शासन का डेस्क रोटेशन और तबादला नियम?
दुर्ग। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए लंबे समय से एक ही स्थान, पद या पटल पर जमे अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यभार में बदलाव और आवश्यकतानुसार तबादले की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अब सवाल दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली को लेकर भी उठने लगे हैं।
दुर्ग RTO में कथित तौर पर कई अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जो तीन वर्ष ही नहीं बल्कि छह, दस और बारह वर्ष से भी अधिक समय से एक ही विभाग में कार्यरत बताए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति दस्तावेजी जांच में सही पाई जाती है तो यह शासन की रोटेशन नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या दुर्ग RTO में लागू होगा ‘3 साल’ का सिद्धांत?
शासन की ओर से लंबे समय तक एक ही पटल अथवा कार्यस्थल पर पदस्थ रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के संबंध में डेस्क रोटेशन एवं स्थानांतरण की नीति का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी एक व्यक्ति के लंबे समय तक एक ही संवेदनशील कार्य से जुड़े रहने की संभावित विसंगतियों को रोकना है।
लेकिन जमीनी स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह व्यवस्था सभी विभागों और कार्यालयों में समान रूप से लागू हो रही है?
दुर्ग RTO को लेकर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि विभाग में लंबे समय से पदस्थ बताए जा रहे कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा अब आवश्यक नजर आती है। आखिर कौन कर्मचारी कितने वर्षों से दुर्ग RTO में पदस्थ है, किस पटल पर कार्यरत है और क्या वह शासन द्वारा निर्धारित रोटेशन व्यवस्था के दायरे में आता है—इन तमाम बिंदुओं की विभागीय जांच ही स्थिति को स्पष्ट कर सकती है।
मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने बड़ी जिम्मेदारी
वर्तमान में दुर्ग RTO की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल के सामने अब बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। यदि विभाग में ऐसे अधिकारी-कर्मचारी वास्तव में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, तो उनकी सेवा अवधि, पदस्थापना, कार्य-पटल और रोटेशन की स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
यह केवल तबादले का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के पालन से जुड़ा विषय है।
सवाल यह भी है कि क्या दुर्ग RTO अपने स्तर पर ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर उच्च विभाग को भेजेगा, जिन्होंने निर्धारित अवधि से अधिक समय एक ही स्थान अथवा पटल पर पूरा कर लिया है?
‘सुशासन’ की कसौटी पर होगी व्यवस्था की परीक्षा
प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की बात कर रही है। ऐसे में शासन के निर्देशों का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका पालन सरकारी कार्यालयों के जमीनी स्तर पर भी नजर आए।
यदि किसी कर्मचारी की लंबे समय तक एक ही कार्यालय अथवा संवेदनशील पटल पर पदस्थापना नियमों के अनुरूप है, तो विभाग को उसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि रोटेशन या स्थानांतरण अपेक्षित है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
दुर्ग RTO में अब सूची और कार्रवाई का इंतजार
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुर्ग RTO अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल क्या वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराएंगे?
क्या विभाग यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करेगा कि दुर्ग RTO में कौन-कौन से अधिकारी-कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थ हैं और किन कर्मचारियों का डेस्क रोटेशन या स्थानांतरण किया जाना प्रस्तावित है?
या फिर शासन का यह निर्देश भी सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगा?
दुर्ग RTO की कार्यप्रणाली पर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब शासन की रोटेशन नीति अधिकारी मृत्युंजय प्रसाद पटेल के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परीक्षा बन गई है। आने वाला समय बताएगा कि विभाग शासन के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारियों के मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल निगाहें दुर्ग RTO कार्यालय और उच्च परिवहन विभाग पर हैं—क्या ‘3 साल’ की नीति वास्तव में जमीन पर उतरेगी, या लंबे समय से जमे अधिकारी-कर्मचारियों की स्थिति जस की तस बनी रहेगी?
संपादकीय सावधानी: लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की अवधि और शासन के आदेश की लागू शर्तों की आधिकारिक सूची/आदेश से पुष्टि किया जाना आवश्यक है। संबंधित अधिकारी या विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
बाढ़ और रासायनिक दुर्घटना की आपात स्थिति से निपटने 20 अगस्त को होगा मॉक अभ्यास
दुर्ग, 18 अगस्त 2026 / जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने और नागरिकों को आपदा की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 20 अगस्त 2026 गुरुवार को बाढ़ के कारण उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना की स्थिति पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई है। यह मॉक ड्रिल सुबह 10 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र, भिलाई में आयोजित होगी।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास के माध्यम से बाढ़ एवं उससे उत्पन्न रासायनिक दुर्घटना जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मॉक ड्रिल के दौरान शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार की घबराहट न करें। यह केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए आयोजित प्रशिक्षण अभ्यास है। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करें।
प्रशासन ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने की अपील की है। नागरिकों का सहयोग इस अभ्यास को सफल बनाने के साथ-साथ वास्तविक आपदा की स्थिति में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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दुर्ग / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में किए गए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। एनआईसी दुर्ग से कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री ए.के. भट्टाचार्य सहित अन्य जिला प्रमुख अधिकारी बैठक में जुड़े थे।
*बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्देश*
दुर्घटना में घायलों का इलाज प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 108 एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता की सख्त मॉनिटरिंग और ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को यथाशीघ्र प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
*दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने निर्देश*
अधिक दुर्घटना वाले 8 जिलों पर विशेष फोकस किया गया, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा और जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों का गहन विश्लेषण कर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
*दुर्घटनाओं में कमी लाने सड़क निर्माण के पूर्व ही डिजाइन सही बनाएं*
ब्लैक स्पॉट्स का सुधार एवं विश्लेषण के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को ब्लैक स्पॉट्स में समय-सीमा के भीतर सुधार करने और सुधार के बाद दुर्घटनाओं में आई कमी का विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने जोर दिया कि बाद में सुधार करने से बेहतर है कि सड़कों की शुरुआती डिजाइन ही सही हो। सड़कों पर आवारा पशुओं के विचरण को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
*युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को यातायात जागरूकता से जोड़े*
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में रोड क्लब गठित करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सुगम यातायात प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बनी रहे। सभी जिलों के कलेक्टरों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने और मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक की शुरुआत में परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी।
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दुर्ग। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दुर्ग नगर पालिक निगम को नया आयुक्त मिल गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी प्रशासनिक फेरबदल के आदेश में IAS अधिकारी लीना कोसम (IAS-2020) को अस्थायी रूप से आयुक्त, नगर पालिक निगम दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है। लीना कोसम वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं।
दुर्ग नगर निगम के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि निगम के इतिहास में पहली बार किसी IAS अधिकारी को आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में नई आयुक्त के सामने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के साथ-साथ शहर के विकास कार्यों, कर्मचारियों से जुड़े मामलों और जनसुविधाओं को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
एक महीने से प्रभारी आयुक्त के भरोसे था निगम
गौरतलब है कि पिछले करीब एक महीने से दुर्ग नगर निगम में आयुक्त का नियमित पद खाली था और उप आयुक्त मोहन साहू प्रभारी आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नियमित आयुक्त की अनुपस्थिति के चलते निगम के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
इसी दौरान निगम कर्मचारियों को भी वेतन सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछले दिनों महापौर स्तर से किए गए प्रयासों के बाद कर्मचारियों को वेतन मिल पाया था। ऐसे माहौल में अब नियमित आयुक्त की नियुक्ति से निगम के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
IAS अधिकारी की नियुक्ति से बढ़ी जवाबदेही की उम्मीद
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का निवास एवं विधानसभा क्षेत्र आता है। वहीं भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का निवास भी निगम क्षेत्र में है। इसके अलावा दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा अहिवारा क्षेत्र के विधायक एवं दर्जा प्राप्त मंत्री डोमनलाल कोरसेवाड़ा का भी दुर्ग निगम क्षेत्र से जुड़ाव है।
ऐसे महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र में पहली बार IAS अधिकारी की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इससे नगर निगम में निर्णय प्रक्रिया, जवाबदेही, विकास कार्यों की निगरानी और जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
कर्मचारियों में भी खुशी, अब कामकाज पटरी पर लौटने की उम्मीद
नए आयुक्त की नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद नगर निगम के कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिला। पिछले एक महीने से नियमित आयुक्त नहीं होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में आ रही दिक्कतों के बीच अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के साथ लंबित कार्यों को गति मिलेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
नगर निगम के सामने शहर की सफाई व्यवस्था, सड़क एवं नाली निर्माण, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, राजस्व वसूली, कर्मचारियों से जुड़े मामले और विभिन्न विकास कार्यों को गति देने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में IAS अधिकारी की नियुक्ति से निगम प्रशासन में नई कार्यशैली और बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
दुर्ग निगम के लिए नए अध्याय की शुरुआत
लीना कोसम की नियुक्ति को महज प्रशासनिक तबादला नहीं, बल्कि दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि नई आयुक्त निगम की कार्यप्रणाली को किस तरह गति देती हैं और शहर की लंबित समस्याओं तथा विकास कार्यों पर कितनी तेजी से निर्णय लिए जाते हैं।
लंबे इंतजार के बाद निगम को नियमित आयुक्त मिला है। पहली बार IAS अधिकारी को यह जिम्मेदारी मिलने से दुर्ग शहरवासियों और निगम कर्मचारियों की उम्मीदें अब नई आयुक्त लीना कोसम से जुड़ गई हैं।
- कृषकों की तरफ से मांग आने पर जलाशयों से सिंचाई पानी छोड़ा जाए
- संभाग आयुक्त ने ली संभाग स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक
दुर्ग / शौर्यपथ / संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर ने कहा कि संभाग अंतर्गत जिलों के सभी ड्राई नलकूप में वॉटर लेवल बढ़ाने हेतु रिचार्ज सोकपीट बनायी जाए। इस हेतु ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा के द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव के आधार पर पीएचई विभाग द्वारा जिलों के ड्राई नलकूप की संख्यात्मक जानकारी के साथ आवश्यक पहल की जाए। इसी प्रकार वर्षा जल को संरक्षित करने सभी आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने अधीक्षक अभियंता लोक निर्माण विभाग को संभाग अंतर्गत सभी जिलों में पूर्व निर्मित एवं निर्माणाधीन शासकीय भवनों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्यतः लगवाने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित करने कहा।
संभाग आयुक्त राठौर ने आज संभाग कार्यालय के सभाकक्ष में संभाग स्तरीय अधिकारियों की बैठक में विभागीय काम-काज की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशानुरूप संभाग के सभी जिलों के विकासखण्ड, तहसील एवं जिला स्तरीय कार्यालयों में कार्यालयीन कार्य, फाईल मूवमेंट, ई-ऑफिस प्रक्रिया के तहत ही हो, यह सुनिश्चित किया जाए। इस पारदर्शी व्यवस्था से कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। संभाग आयुक्त ने कहा कि अधीनस्थ कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति पर विशेष ध्यान दें। प्रति सप्ताह उपस्थिति पत्रक की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने सीएम हेल्पलाईन में विभागों को प्राप्त शिकायतों की जानकारी लेते हुए निर्धारित समयावधि के भीतर विभागीय शिकायतें निराकृत करने के निर्देश दिये। संभागायुक्त ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से नशा-मुक्ति अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु नुक्कड़ नाटक, रैली आदि कार्यक्रम निरंतर जारी रखने उन्होंने संयुक्त संचालक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी को संबंधित विभागों के समन्वय से नशा-मुक्ति अभियान क्रम जारी रखने के निर्देश दिये।
संभाग आयुक्त राठौर ने सी.जी.एम.एस.सी. के माध्यम से चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी ली तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बातें कही। उन्होंने निर्माण कार्य एजेंसी विभाग के अधिकारियों को विभागीय निर्माण कार्यों की औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिये। संभाग आयुक्त श्री राठौर ने संभाग अंतर्गत जलाशयों में जल भराव की जानकारी ली। साथ ही अधीक्षण अभियंता जल संसाधन विभाग से कहा कि किसानों की तरफ से मांग आने पर सिंचाई हेतु जलाशयों से पानी छोड़ा जाए। खरीफ फसल बोनी की समीक्षा के दौरान संयुक्त संचालक कृषि ने बताया कि संभाग के जिलों में खरीफ धान, मक्का, कोदो, कुक्की, रॉगी, ज्वार एवं अन्य फसलों की 100 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इसी प्रकार अरहर, मुंग, उड़द, कुल्थी एवं अन्य दहलन फसलों की 93 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। नियमित बारिश की वजह से संभाग अंतर्गत 16.45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में बियासी कार्य किसानों द्वारा पूर्ण कर लिया गया है। बैठक में उपायुक्त पदुम लाल यादव और संतोष ठाकुर सहित सभी विभाग के संभाग स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 को लेकर अभ्यर्थियों की मांगें अब तेज होती नजर आ रही हैं। विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता और रसायन विज्ञान व्याख्याता के पदों पर भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने और अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्तमान रिक्त पदों, पात्रता शर्तों और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के कारण प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञान शिक्षक के पद बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षक भर्ती 2026 में विज्ञान शिक्षक के पर्याप्त पद जोड़कर संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी करने की की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञान विषय में बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध हैं, ऐसे में पदों की संख्या बढ़ाकर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में भी पद सृजित करने की मांग
अभ्यर्थियों ने जीव विज्ञान व्याख्याता एवं रसायन विज्ञान व्याख्याता के आवश्यक/रिक्त पद सृजित कर भर्ती में शामिल करने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि इन विषयों के भी बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी हैं और रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
6 सितंबर की CTET परीक्षा देने वालों को भी मिले मौका
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मांग 6 सितंबर 2026 को होने वाली CTET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन का अवसर देने की है। अभ्यर्थियों ने कहा है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में CTET Application Number के लिए अलग कॉलम रखा जाए तथा केवल Roll Number उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी पात्र अभ्यर्थी को अवसर से वंचित न किया जाए।
50 प्रतिशत की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत छूट की मांग
अभ्यर्थियों ने स्नातक स्तर पर निर्धारित 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत की छूट सभी पात्र अभ्यर्थियों को देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पात्रता मानदंड में व्यवहारिक और न्यायसंगत संशोधन से बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष करने की मांग
ज्ञापन में शिक्षक भर्ती की उच्चतम आयु सीमा 40 वर्ष के स्थान पर 45 वर्ष किए जाने की मांग की गई है। साथ ही नियमानुसार मिलने वाली आयु सीमा में छूट को भी लागू करने की बात कही गई है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को समान अवसर
अभ्यर्थियों ने स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की भर्ती में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यमों के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि माध्यम के आधार पर योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित नहीं किए जाने चाहिए।
‘टकराव नहीं, संवाद और समाधान’ की अपील
ज्ञापन के अंत में अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और न्यायपूर्ण अवसर की अपेक्षा से रखी गई हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में आवश्यक संशोधन, अतिरिक्त पदों का समावेश, CTET अभ्यर्थियों को अवसर तथा पात्रता एवं आयु सीमा में राहत मिलने से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यापक और न्यायसंगत बन सकेगी। अब सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
