July 31, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का समापन किया उद्योग मंत्री ने

    रायपुर, / वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन आज रायपुर में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय (बिलासपुर) एवं आइसेक्ट इंडिया गु्रप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री देवांगन ने कहा कि किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन होती है। भारत के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है, लेकिन चुनौती है उन्हें आज के दौर के अनुसार हुनरमंद बनाना। श्री देवांगन ने कहा कि आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां परिर्वतन ही एक मात्र स्थिर चीज है और इस दौर में भारत को एक महा शक्ति बनाने का सबसे बड़ा सारथी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.)।

    विकसित भारत के लिए ए.आई. संचालित कौशल विकास वित्तीय समावेशन और सामाजिक उद्यम विषय पर आईसेक्ट द्वारा इसका आयोजन किया गया। केबिनेट मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि जब हम साल 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने की बात करते हैं तो ए.आई. केवल एक तकनीक नहीं बल्कि वह इंजन है जो हमारे कौशल, हमारी अर्थव्यव्स्था और हमारे समाज को नई दिशा और रफतार देगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तब तक अधूरा है जब तक विकास की रोशनी देश के आखरी कोने में बैठे व्यक्ति तक न पहुंचे। वित्तीय समावेशन का मतलब है, हर नागरिक को बैंकिंग और आर्थिक व्यवस्था से जोड़ना। श्री देवांगन ने कहा कि आजकल सामाज के प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति मोबाइल ऐप के माध्यम से सरकार के समस्त योजनाओं की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकता है। यह केवल तकनीकि उत्थान एवं ए.आई. के माध्यम से संभव हो सका है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री ने 5 युवा उद्यमियों को सम्मानित किया।

    कार्यक्रम के दौरान डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पी.के. घोष, आईसेक्ट के चेयरमेन डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पद्म श्री अजय मंडावी, डॉ. तोपलाल वर्मा,डॉ. अनुराग होता, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के महाप्रबंधक श्री राजेश भुतड़ा, भारतीय स्टेट बैंक के श्री ललित कुमार, सीआईआई के छत्तीसगढ़ प्रमुख श्री पदम गोयल, श्री अनुराग गुप्ता, बजरंग गोयल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    बिना पंजीयन एवं वैध दस्तावेजों के बैटरी अपशिष्ट का संग्रहण, भंडारण और व्यापार दंडनीय अपराध

    रायपुर, /छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने राज्य में अवैध रूप से स्क्रैप एवं प्रयुक्त बैटरियों के संग्रहण, भंडारण, परिवहन, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) तथा व्यापार में संलिप्त व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मंडल ने सभी व्यापारियों, कबाड़ संचालकों, स्क्रैप डीलरों, परिवहनकर्ताओं तथा बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े हितधारकों को निर्देशित किया है कि वे अपना संचालन केवल बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 एवं अन्य प्रचलित वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही करें।

    मंडल के संज्ञान में आया है कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में बिना आवश्यक पंजीयन, प्राधिकार एवं वैध दस्तावेजों के प्रयुक्त एवं स्क्रैप बैटरियों का संग्रहण, भंडारण, परिवहन तथा क्रय-विक्रय किया जा रहा है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की गतिविधियां पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं तथा पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन हैं।

    मंडल ने बताया कि बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 के तहत प्रयुक्त एवं अपशिष्ट बैटरियों का संग्रहण, भंडारण, परिवहन तथा व्यापार केवल विधिवत पंजीकृत एवं अधिकृत संस्थाओं द्वारा ही किया जा सकता है। अपशिष्ट बैटरियों के परिवहन के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन तथा आवश्यक दस्तावेजों का संधारण अनिवार्य है। इसके साथ ही खरीद-बिक्री संबंधी अभिलेख एवं अन्य आवश्यक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।

    मंडल ने स्पष्ट किया है कि खुले स्थानों पर अपशिष्ट बैटरियों का भंडारण, अनधिकृत संग्रहण, पर्यावरणीय मानकों के विपरीत संचालन अथवा अवैध व्यापार दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2022 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    इस संबंध में राज्यभर में विशेष निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों, फर्मों एवं संस्थानों के विरुद्ध जांच, निरीक्षण तथा विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर अभियोजन दर्ज कर न्यायालयीन कार्रवाई भी की जा सकती है।

    छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सभी संबंधित हितधारकों से अपने संचालन को तत्काल प्रभाव से नियमों के अनुरूप सुनिश्चित करने तथा आवश्यक पंजीयन एवं अनुमतियां प्राप्त करने का आग्रह किया है। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि कहीं भी स्क्रैप अथवा अपशिष्ट बैटरियों का अवैध संग्रहण, भंडारण, परिवहन अथवा व्यापार किया जा रहा हो तो इसकी सूचना निकटतम क्षेत्रीय कार्यालय अथवा मंडल को दें। मंडल ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण एवं जनस्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों और संबंधित संस्थाओं का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।

      रायपुर, / मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में टीवी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ को टीवी मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।

    मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा है कि राज्य में टीबी के मरीजों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाये जायें। जिसमें जांच के दौरान मिलने वाले टीबी के मरीजों का त्वरित ईलाज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक गांव और शहरों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने टीबी मरीजों के जांच के लिए सभी जरूरी उपकरणों एक्स-रे मशीन एवं रेडियोग्राफरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा है।

    श्री विकासशील ने मरीजों की शीघ्र पहचान कर ईलाज शुरू किया जाना चाहिए एवं मरीजों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत पोषण आहार एवं पौष्टिक सामग्री हेतु निर्धारित राशि तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत जो गांव और ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होती है। इसके बारे में गांव में होने वाली ग्राम सभा में लोगों को बताया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की घर-घर जाकर जांच की जाए। महिलाओं के बीपी, वजन, हिमोग्लोबिन इत्यादि की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को एफआरयू में रेफर किए जाए।

    मुख्य सचिव ने बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाए। सभी आंगनबाड़ी, स्कूलों में हर बच्चें की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। रोग युक्त पाए जाने बच्चों को बड़े अस्पतालों में ईलाज के लिए भेजा जाए। अस्पतालों में ईलाज करा रहे बच्चों की टैªकिंग की जाकर उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग कर समुचित उपचार दिया जाए। सभी शिशुओं को जरूरी टीके लगाए जाये। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

      रायपुर, / राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा से आज यूनिसेफ इंडिया के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नीति भवन नवा रायपुर में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने किया। इस अवसर पर यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड कार्यालय की प्रमुख श्रीमती सीमा कुमार एवं सामाजिक नीति प्रमुख डॉ. बाल परितोष दाश भी उपस्थित रहे।

    बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त, सामुदायिक जागरूकता एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन और बस्तर अंजोर कार्यक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई।

    विकसित छत्तीसगढ़ - जहाँ बच्चे हैं विकास की नींव

    बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में बच्चे केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य के प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और संरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य अधूरा है। राज्य नीति आयोग ने विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क के अंतर्गत 50 से अधिक विभागों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक विकसित किए हैं, जिसमें बाल कल्याण को एक स्वतंत्र एवं समर्पित विषयक्षेत्र के रूप में सम्मिलित किया गया है।

    विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई, नीति और जमीन के बीच सेतु

    राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से स्थापित विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई (VC-SPS Unit) राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल है। यह इकाई विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए बजट विश्लेषण और सामाजिक संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य के विभागों को निरंतर तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। बैठक में इस इकाई के कार्यों की सराहना की गई और इसे और अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।

    देश में पहली बार - बाल कल्याण सूचकांक

    राज्य नीति आयोग देश में पहली बार एक राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण मापन पद्धति एवं बाल वंचना सूचकांक विकसित करेगा। यह सूचकांक राज्य के विभागों को बच्चों तक सेवा वितरण की कमियों की पहचान करने और बाल-केंद्रित नीतियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। साथ ही बच्चों के लिए बजट का एक मानक ढांचा भी तैयार किया जाएगा। यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्तावित पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगा।

    बस्तर अंजोर - आदिवासी एवं बाल विकास का ऐतिहासिक अवसर

    बैठक में बस्तर अंजोर को आदिवासी समुदायों और बच्चों के कल्याण के लिए एक अभूतपूर्व अवसर के रूप में रेखांकित किया गया। राज्य नीति आयोग द्वारा प्रवर्तित यह अभिनव समन्वय पहल बस्तर संभाग के सातों जिलों को आच्छादित करती है। 3+4 मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम तीन कलेक्टर नेतृत्व वाली जिला पहलों -नियद नेल्ला नार, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर को चार राष्ट्रीय एवं राज्य मिशनों से जोड़ता है। इस कार्यक्रम के 90 प्रतिशत से अधिक हस्तक्षेप क्षेत्र बाल स्वास्थ्य, पोषण एवं सामाजिक संरक्षण से संबंधित हैं।

    यूनिसेफ ने इस कार्यक्रम को संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में विकास की रोशनी पहुँचाने का एक दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण अवसर बताया और बस्तर अंजोर के औपचारिक लोकार्पण में मुख्य अतिथि एवं रणनीतिक भागीदार के रूप में सहभागिता की सहर्ष स्वीकृति दी।

    सामुदायिक जागरूकता, विश्वास निर्माण एवं सामाजिक व्यवहार परिवर्तन

    बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल नीति एवं बजट से नहीं, बल्कि समुदाय के विश्वास और व्यवहार परिवर्तन से भी निर्धारित होती है। बस्तर जैसे आदिवासी एवं संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जागरूकता और जन विश्वास का निर्माण विकास की पूर्वशर्त है।

    यूनिसेफ की सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञता को बस्तर अंजोर और विकसित छत्तीसगढ़ के जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके अंतर्गत पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्रों में समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान, स्थानीय नेतृत्व का सुदृढ़ीकरण और परिवारों में सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।

    यूनिसेफ का सहयोग और विस्तार

    यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने कहा कि यूनिसेफ वर्ष 2019 से छत्तीसगढ़ सरकार का विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार रहा है और यह साझेदारी आगे और सुदृढ़ होगी। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़, बस्तर अंजोर, बाल कल्याण सूचकांक, सामुदायिक जागरूकता और बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त के क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से सहयोग विस्तार का आश्वासन दिया।

    बैठक के अंत में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने यूनिसेफ की पूरी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी छत्तीसगढ़ के बच्चों के उज्जवल भविष्य और विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरणादायी कदम है।

      रायपुर, /राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कमल विहार रायपुर स्थित लगभग 230 एकड़ क्षेत्र में फैले गजराज बांध को रायपुर शहर की पेयजल आवश्यकता की पूर्ति के लिए एक विशाल जलाशय के रूप में विकसित करने की पहल की है। राज्यपाल ने आज लोकभवन में नगर निगम रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे और अतिरिक्त कमिश्नर श्री विनोद पाण्डेय के साथ इस संबंध में विशेष चर्चा की।

    राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में सिंचाई कार्याे में उपयोग नहीं हो रहे गजराज बांध की आवश्यक मरम्मत कर इसे रायपुर शहर की लाइफलाइन बनाया जा सकता है। इस बांध को एक पेयजल भंड़ार के रूप में विकसित करने से शहर को शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। राज्यपाल ने महापौर से संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए दिशा निर्देश दिए है।

     

    सरगुजा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होंगे आयोजन

    रायपुर, / 21 जून 2026 को इस बार “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम पर सामूहिक योगाभ्यास का कार्यक्रम आयोजित होगा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन को लेकर जिला मुख्यालयों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक तैयारियां पूरी कर ली गई है। जिला मुख्यालयों में आयोजित सामूहिक योगाभ्यास के कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री द्वय, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण मुख्य अतिथि होंगे। छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले सामूहिक योगाभ्यास में मुख्य अतिथि नामांकित किया गया है।

    राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में 21 जून को राजधानी रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सामूहिक योगाभ्यास का कार्यक्रम आयोजित होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में सरगुजा जिले में सुबह 7 बजे सामूहिक योगाभ्यास होगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे।

    जारी आदेश के तहत केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू बिलासपुर में, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव दुर्ग में, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा कबीरधाम, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव में 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि होंगें। इसी प्रकार कोरिया जिले में मंत्री श्री रामविचार नेताम, महासमुंद जिले में मंत्री श्री दयालदास बघेल, सुकमा जिले में मंत्री श्री केदार कश्यप, कांकेर जिले में मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, जांजगीर-चांपा जिले में मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में मंत्री श्री टंकराम वर्मा, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जशपुर जिले में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, कोरबा जिले में मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब और बालोद जिले में मंत्री श्री गजेन्द्र यादव 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि बनाए गए हैं।

    विभिन्न जिलों में योग दिवस के गरिमामय आयोजन की कमान माननीय सांसदों और विधायकों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा जिले में सांसद श्री विजय बघेल, मोहला-मानपुर-चौकी जिले में सांसद श्री संतोष पांडेय 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। इसी प्रकार सूरजपुर जिले में सांसद श्री चिंतामणी महाराज, गरियाबंद जिले में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, रायगढ़ जिले में सांसद श्री राधेश्याम राठिया, जांजगीर जिले में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, नारायणपुर जिले में सांसद श्री महेश कश्यप और कोण्डागांव जिले में सांसद श्री भोजराज नाग 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। बीजापुर जिले में विधायक सुश्री लता उसेंडी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में विधायक श्री ललित चंद्राकर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, मुंगेली जिले में विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, धमतरी जिले में विधायक श्री अजय चंद्राकर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, बस्तर जिले में विधायक श्री किरण सिंह देव और दंतेवाड़ा जिले में विधायक श्री चैतराम अटामी को 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि बनाए गए हैं। सभी जिलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सामूहिक योग कार्यक्रमों की तैयारियां जिला प्रशासन की देखरेख में अंतिम चरण में हैं।

    हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा जारी की गई निविदाएं

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के विभिन्न शहरों में पाँच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग तथा आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इन परियोजनाओं का विकास राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रिडेवलपमेंट परियोजनाओं के लिए मंडल द्वारा प्रिलिमिनरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (पीपीआर) एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यवस्था की गई है।

    मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके पश्चात 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पाँचों परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अनुमोदित किया गया।

    प्रस्तावित परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनका अनुमानित मूल्य लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बी.टी.आई. रोड शंकर नगर (रायपुर), क्लब पारा (महासमुंद), कैलाश नगर (राजनांदगांव), कटघोरा (कोरबा) तथा चांदनी चौक फेज-2 (जगदलपुर) में विकसित की जाएंगी। इन पाँचों रिडेवलपमेंट योजनाओं का टेंडर हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा जारी कर दिया गया है।

    राजधानी रायपुर में प्रस्तावित परियोजना विशेष महत्व रखती है। यह परियोजना शहर के प्रमुख एवं विकसित क्षेत्र शंकर नगर स्थित बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने, सिंधु भवन के समीप स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक तथा आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा तथा शासकीय परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर एवं अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी। शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही परियोजनाओं के वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ-साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

    यह पहल निजी डेवलपर्स के लिए भी आकर्षक अवसर प्रदान करती है। उन्हें शहरों के प्रमुख क्षेत्रों में स्थित प्राइम लोकेशन वाली भूमि पर परियोजनाएं विकसित करने का अवसर मिलेगा। स्पष्ट नीति, पारदर्शी निविदा प्रक्रिया तथा सरकारी एजेंसी के साथ साझेदारी से परियोजनाओं में विश्वास और स्थिरता सुनिश्चित होगी।

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी एवं जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक तथा उपयोगी अधोसंरचना में परिवर्तित किया जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता एवं सौंदर्य में वृद्धि होगी तथा सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास को नई गति मिलेगी।

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि बी.टी.आई. ग्राउंड, शंकर नगर के सामने प्रस्तावित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल सिद्ध होगी। मंडल गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ इन परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।

    आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने टी.एल. बैठक में इन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए आगामी रिडेवलपमेंट की आठ नई परियोजनाओं का प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

     755 करोड़ की परियोजना को मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार

    डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री

    मोदी सरकार के विशेष फोकस से छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली नई ऊंचाई : रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प - मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर,/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय रेल द्वारा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत ₹755 करोड़ की लागत से चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे विकास को नई गति मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं प्राप्त होंगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण पहचान रखता है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयले की आपूर्ति होती है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) तथा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना के पूर्ण होने से कोयला परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक आधार और अधिक मजबूत होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में तीसरी रेल लाइन का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया दूरदर्शी निर्णय है। इससे अतिरिक्त माल परिवहन को सुगम बनाया जा सकेगा और रेल परिचालन अधिक दक्ष एवं प्रभावी होगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को मजबूती मिलेगी, निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क, सुदृढ़ लॉजिस्टिक व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ को रेल अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रदेश के रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी-चौथी लाइन और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के विकास के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना भी इसी विकास दृष्टि का प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में स्वीकृति मिलना जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरांचल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल एवं शहरी परिवहन अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विकास पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1853 से 2014 तक 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 रूट किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई थी, जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का रेल नेटवर्क बढ़कर 2200 रूट किलोमीटर से अधिक होने जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश की रेल परियोजनाओं के लिए जहां लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को 1,680 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

    टूटे खंभे के सहारे टिका प्रवेश द्वार, हजारों लोगों की जान जोखिम में; गंदगी, अव्यवस्था और लापरवाही पर उठे सवाल

    दुर्ग। शहर के मध्य स्थित इंदिरा मार्केट इन दिनों नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। जिस बाजार में प्रतिदिन हजारों नागरिक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, वहां मुख्य प्रवेश द्वार की छत को एक टूटे हुए खंभे के सहारे टिकाकर रखा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जर्जर संरचना कभी भी धराशायी हो सकती है और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

    विडंबना यह है कि यह पूरा मामला नगर निगम के सभापति श्याम शर्मा के वार्ड का है। सभापति को निगम की कार्यवाही, पार्षदों के कार्यों की समीक्षा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निगरानी रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन उनके ही वार्ड में स्थित शहर के प्रमुख बाजार की ऐसी स्थिति आम जनता को सोचने पर मजबूर कर रही है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह खंभा या उससे सहारा प्राप्त संरचना अचानक गिरती है तो बाजार में मौजूद लोगों की जान पर बन सकती है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन, बाजार विभाग के जिम्मेदार पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रतिदिन क्षेत्र का निरीक्षण करने वाले अधिकारी इस गंभीर खतरे से अनजान बने हुए हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।

    केवल जर्जर ढांचा ही नहीं, बल्कि इंदिरा मार्केट का सार्वजनिक मूत्रालय भी बदहाल स्थिति में है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां हमेशा गंदगी और दुर्गंध बनी रहती है। इससे बाजार आने वाले नागरिकों, व्यापारियों और महिलाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्वच्छता के दावे करने वाली शहरी सरकार के लिए यह स्थिति किसी आईने से कम नहीं है।

    जनता यह भी सवाल उठा रही है कि जब भीषण गर्मी के दौरान मीना बाजार क्षेत्र में वाटर एटीएम से पानी बेचे जाने का मामला सामने आया था, तब भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। जनहित से जुड़े ऐसे मामलों पर लगातार चुप्पी कहीं न कहीं जनता की अपेक्षाओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाती है।

    सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नगर निगम और उसके जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेंगे? क्या किसी निर्दोष नागरिक की जान जाने के बाद ही मरम्मत और सुरक्षा उपायों की याद आएगी? आखिर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?

    शहर की जनता अब यह जानना चाहती है कि जिन जनप्रतिनिधियों को विकास, सुरक्षा और व्यवस्था सुधारने के लिए चुना गया था, वे इन मूलभूत समस्याओं पर कब जवाब देंगे। यदि शहर के मध्य स्थित सबसे व्यस्त बाजार की यह स्थिति है तो अन्य क्षेत्रों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

    जनहित में आवश्यक है कि नगर निगम तत्काल तकनीकी जांच कराए, जर्जर संरचना को सुरक्षित बनाए, सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था सुधारे और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय करे। क्योंकि प्रशासन की पहली जिम्मेदारी विकास नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा होती है।

    10.30 करोड़ की स्वीकृति के बावजूद अस्पताल स्थानांतरण की चर्चा से बढ़ी चिंता, भाजपा पदाधिकारियों, पार्षदों और नागरिकों ने सौंपा ज्ञापन

    दुर्ग। पटरीपार क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा अब जनआंदोलन का स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। सिकोला बस्ती, धमधा नाका स्थित प्रस्तावित शासकीय नवीन आयुर्वेदिक चिकित्सालय भवन को उसके वर्तमान स्थान से कहीं और स्थानांतरित किए जाने की आशंकाओं के बीच क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, भारतीय जनता पार्टी सिकोला भाठा पटरीपार मंडल के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल भवन का निर्माण उसी स्वीकृत स्थल पर कराने की मांग की है।

    ज्ञापन में कहा गया है कि पटरीपार क्षेत्र में लगभग एक लाख से अधिक नागरिक निवासरत हैं, जो वर्षों से पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में सिकोला बस्ती, धमधा नाका स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय गरीबों, मजदूरों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

    जनता के लिए जीवनरेखा बना हुआ है अस्पताल

    ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आयुर्वेदिक चिकित्सालय के नवीन भवन निर्माण के लिए लगभग 10 करोड़ 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। किंतु क्षेत्र में यह चर्चा है कि प्रस्तावित भवन को उसके मूल स्थान से हटाकर किसी अन्य क्षेत्र में निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस संभावना ने क्षेत्रवासियों में गहरी चिंता और असंतोष पैदा कर दिया है।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह राशि स्वीकृत हुई है, उसकी सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब अस्पताल का निर्माण उसी क्षेत्र में किया जाए जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। वर्तमान स्थल पर भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।

    15 वार्डों की जनता होगी प्रभावित

    ज्ञापन के अनुसार यदि अस्पताल को वर्तमान स्थान से हटाकर किसी अन्य क्षेत्र में स्थापित किया जाता है तो पटरीपार क्षेत्र के लगभग 15 वार्डों की जनता सीधे तौर पर प्रभावित होगी। हजारों गरीब परिवारों, दिहाड़ी मजदूरों, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच और अधिक कठिन हो जाएगी।

    जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह केवल एक भवन निर्माण का विषय नहीं है, बल्कि लाखों उम्मीदों, जनभावनाओं और नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों का प्रश्न है। यदि अस्पताल को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया तो यह क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय होगा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

    भाजपा मंडल और पार्षदों ने दिखाई एकजुटता

    ज्ञापन पर भाजपा सिकोला भाठा पटरीपार मंडल अध्यक्ष मनमोहन शर्मा के साथ क्षेत्र के कई पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। सभी ने एक स्वर में मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सालय के नवीन भवन का निर्माण सिकोला बस्ती, धमधा नाका स्थित वर्तमान स्थल पर ही कराया जाए।

    स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्णायक साबित हो सकता है यह फैसला

    पटरीपार क्षेत्र लंबे समय से स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग करता रहा है। ऐसे में यदि स्वीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सालय भवन का निर्माण यथास्थान होता है तो यह क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए राहत और स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा। वहीं यदि परियोजना का स्थान बदला जाता है तो यह निर्णय हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए गंभीर कठिनाइयों का कारण बन सकता है।

    अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जनभावनाओं, जनहित और स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ऐसा निर्णय लेगा जो पटरीपार क्षेत्र की एक लाख से अधिक आबादी के हितों की रक्षा कर सके।

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