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करोड़ों के कामों में बार-बार एक ही समूह की हिस्सेदारी पर उठे सवाल, दूसरे ठेकेदारों की कड़ी जांच तो आरबीएस के कामों पर निगम की खामोशी क्यों?
दुर्ग। नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर महापौर अलका बाघमार लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं। कहीं सड़क और पेवर ब्लॉक के निर्माण में बेस की जांच हो रही है तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को डांट-फटकार लगाई जा रही है। लेकिन इसी बीच निगम में काम पाने वाले आरबीएस ग्रुप को लेकर ठेकेदारों और निगम से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं।
चर्चा का मुख्य विषय यह है कि महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में आरबीएस ग्रुप को नगर निगम के निर्माण कार्यों में लगातार काम मिलने की स्थिति क्यों बनी? निगम की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यदि अन्य ठेकेदार दस्तावेजी जांच में अपात्र होते हैं और किसी विशेष समूह को लगातार काम मिलता है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाई जानी चाहिए?
तीन-चार करोड़ के काम में आधे काम का दावा—क्या है वास्तविकता?
निगम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि यदि किसी अवधि में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य निकलते हैं तो उनमें बड़ी हिस्सेदारी आरबीएस ग्रुप को मिल रही है। हालांकि इस दावे की वास्तविकता निगम के टेंडर रिकॉर्ड, वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण से ही स्पष्ट हो सकती है।
यदि आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं तो सवाल केवल आरबीएस ग्रुप को काम मिलने का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अन्य वर्षों से निगम में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदारों को समान अवसर मिल रहा है या नहीं।
पोस्टरबाजी और ठेकेदारी का संयोग बना चर्चा का विषय
महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के दौरान शहर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए बधाई पोस्टरों ने भी निगम की ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया। जनप्रतिनिधि को जन्मदिन की शुभकामना देना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यदि उसी अवधि में संबंधित ठेकेदारों को बड़ी संख्या में निगम के काम मिलते हैं तो क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?
इसका जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि निगम के निविदा रिकॉर्ड और ठेकेदारवार कार्य आवंटन के आंकड़ों से मिल सकता है।
वार्ड 17-18 की नाली ने खड़ा किया गुणवत्ता का बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल वार्ड क्रमांक 17-18 में हुए नाली निर्माण को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि निर्माण में सरिया निर्धारित मानक के अनुरूप लगभग 8 इंच की दूरी पर लगाए जाने के बजाय करीब एक फीट की दूरी पर लगाया गया।
यदि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के विपरीत हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच होना आवश्यक है। खासकर तब, जब महापौर स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर सक्रिय दिखाई देती हैं।
अब सवाल यह है कि क्या इस नाली के निर्माण की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत ड्राइंग, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी? क्या आवश्यकता पड़ने पर निर्माण को खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच होगी?
दूसरों के काम में सख्ती, आरबीएस के काम में भी वही पैमाना लागू होगा?
महापौर द्वारा पेवर ब्लॉक के नीचे बेस की जांच करना और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को जवाबदेह बनाना स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है। लेकिन इसी कसौटी को निगम के प्रत्येक ठेकेदार और प्रत्येक निर्माण पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
यही वह बिंदु है जहां आरबीएस ग्रुप से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़ा होता है—क्या निगम प्रशासन आरबीएस के कार्यों की भी उसी कठोरता से जांच करेगा, जिस तरह अन्य ठेकेदारों के कार्यों की जांच की जा रही है?
कसारीडीह नाला और सुराना कॉलेज का पाथवे भी सवालों में
दुर्ग शहर में निर्माण कार्यों की संख्या भले ही बढ़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन कई पुराने काम अब भी अधूरे हैं। कसारीडीह का नाला लंबे समय से पूर्णता की प्रतीक्षा में है। वहीं वर्ष 2024 में सुराना कॉलेज के सामने पाथवे पार्क का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ था, लेकिन उसके पूर्ण होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
दूसरी ओर शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण हैं। ऐसे में केवल नए निर्माणों की संख्या नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पूर्णता भी निगम की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।
अब सवाल महापौर से नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता से है
नगर निगम में ठेकेदारी व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर ठेकेदारवार कितने काम मिले, कितनी राशि के मिले, कितने काम पूरे हुए और कितने कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आईं—इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
यदि आरबीएस ग्रुप को लगातार काम मिलना पूरी तरह निविदा नियमों और तकनीकी पात्रता के आधार पर हुआ है तो दस्तावेज स्वयं सारी चर्चाओं का जवाब दे सकते हैं।
और यदि किसी निर्माण में वास्तव में तकनीकी मानकों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
जनता का सवाल सीधा है—निगम की जांच व्यवस्था क्या सभी ठेकेदारों के लिए समान है?
क्या पोस्टर लगाने वाला ठेकेदार हो या पोस्टर से दूरी रखने वाला—दोनों के निर्माण कार्यों की जांच एक ही पैमाने से होगी?
अब वार्ड 17-18 की नाली से लेकर आरबीएस ग्रुप को मिले कार्यों तक, निष्पक्ष तकनीकी जांच ही तय करेगी कि चर्चाओं में कितना तथ्य है और कितना भ्रम।
पसरा लगाने वालों पर कार्रवाई, लेकिन अनमोल ज्वेलर्स के कथित अतिक्रमण पर मौन क्यों? — बाजार व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन से जवाब की मांग
दुर्ग। शहर के सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल इंदिरा मार्केट के एक प्रमुख चौक पर सड़क और आम लोगों के आवागमन के लिए बने बरामदे तक कथित कब्जे ने नगर निगम की बाजार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और स्थिति के अनुसार अनमोल ज्वेलर्स द्वारा दुकान के सामने बरामदे के हिस्से में व्यापारिक गतिविधियां संचालित किए जाने के साथ सड़क की ओर बैरियर और वाहन लगाए जाने की बात सामने आई है। यदि आवंटित क्षेत्र से अधिक हिस्से का उपयोग किया जा रहा है, तो इसकी जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है।
सबसे बड़ा सवाल बाजार विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर है। बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के कार्यकाल में छोटे व्यापारियों और पसरा लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर निगम की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन बड़े और स्थापित व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा किए जा रहे कथित अतिक्रमण पर समान कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती? क्या बाजार विभाग ने इस स्थान का निरीक्षण किया है? क्या संबंधित व्यापारी को नोटिस दिया गया? और यदि दिया गया है तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई?
ट्रिपल इंजन की सरकार के सुशासन का इम्तिहान
नगरीय निकाय चुनाव के दौरान प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार के माध्यम से सुशासन और बेहतर नगरीय व्यवस्था का दावा किया गया था। ऐसे में इंदिरा मार्केट जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में सड़क और बरामदे के उपयोग को लेकर पैदा हुई स्थिति इन दावों की जमीनी कसौटी बन जाती है।
जनता का सवाल सीधा है—यदि बरामदा पैदल चलने वालों के लिए है और सड़क सार्वजनिक आवागमन के लिए, तो किसी भी प्रतिष्ठान को इन स्थानों के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति किस आधार पर मिल रही है? यदि अनुमति नहीं है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
अभ्युदय मिश्रा की भूमिका पर भी जवाब जरूरी
बाजार अधिकारी के रूप में अभ्युदय मिश्रा पर बाजार क्षेत्र की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि क्या उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया है और क्या इस कथित अतिक्रमण के संबंध में कोई कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
यदि निगम के रिकॉर्ड में आवंटित क्षेत्र अपेक्षाकृत कम है और मौके पर उससे अधिक क्षेत्र का उपयोग पाया जाता है, तो माप-जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार कार्रवाई ही इस विवाद का तथ्यात्मक समाधान हो सकता है।
महापौर अलका बाघमार से भी जनहित में सवाल
दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने भी यह मामला व्यवस्था और समान कार्रवाई से जुड़ा प्रश्न है। यदि सड़क और बरामदे पर अतिक्रमण की शिकायत या प्रमाण निगम के संज्ञान में हैं, तो क्या महापौर प्रशासन को बाजार क्षेत्र का विशेष निरीक्षण कराकर सभी अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई के निर्देश देंगी?
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या इस मामले में महापौर कार्यालय को कोई शिकायत प्राप्त हुई है और यदि हुई है तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
लेन-देन के आरोप नहीं, जांच से सामने आएगा सच
अतिक्रमण बने रहने को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के सवाल और चर्चाएं हो सकती हैं, लेकिन किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि पर लेन-देन अथवा संरक्षण का आरोप बिना प्रमाण तथ्य के रूप में लगाना उचित नहीं होगा। यदि ऐसी कोई शिकायत या प्रमाण है तो उसकी स्वतंत्र जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
फिलहाल तस्वीर यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि नियम छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए समान हैं या नहीं। इंदिरा मार्केट में यदि सार्वजनिक रास्ते और बरामदे का व्यावसायिक उपयोग नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो निगम प्रशासन को कार्रवाई का आधार, आवंटन की सीमा और मौके की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
अब निगाहें बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और महापौर अलका बाघमार पर हैं—क्या इंदिरा मार्केट की इस व्यवस्था पर निगम प्रशासन मौके पर जाकर जांच करेगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा?
‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ की ट्रॉफी का अनावरण, 132 प्रोफेशनल गोल्फर ले रहे हिस्सा
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से देश के प्रमुख स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। नवा रायपुर में आयोजित ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनेगा और प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर स्थित फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब रिजॉर्ट में प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण किया। इस अवसर पर 1983 विश्वकप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एवं पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्वयं गोल्फ खेलकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
प्रतियोगिता में देश-विदेश के 132 प्रोफेशनल गोल्फर, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं, हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े स्तर के आयोजन से प्रदेश की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी, खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। उन्होंने गोल्फ के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
खेल अधोसंरचना का हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ की भावना के अनुरूप प्रदेश में विभिन्न खेलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और नेशनल ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के साथ युवाओं को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। क्रिकेट, हॉकी, तीरंदाजी और एथलेटिक्स के साथ अब गोल्फ के बड़े आयोजन प्रदेश की खेल यात्रा को नया आयाम दे रहे हैं।
खिलाड़ियों को बस्तर-सरगुजा आने का न्योता
मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए गोल्फ खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए उन्हें प्रतियोगिता के साथ बस्तर और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता एवं जनजातीय संस्कृति देखने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी छत्तीसगढ़ से टूर्नामेंट की यादों के साथ यहां के आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य की स्मृतियां भी लेकर लौटें।
हर साल हो गोल्फ टूर्नामेंट : कपिल देव
पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव ने आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन खेल संस्कृति और नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि छत्तीसगढ़ में यह प्रतियोगिता हर वर्ष आयोजित हो और इसकी तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश के खिलाड़ी अपने कैलेंडर के अनुसार यहां आने की योजना बना सकें।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का वातावरण गोल्फ के लिए अनुकूल है और आने वाले समय में दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता की तरह छत्तीसगढ़ भी देश के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना सकता है।
पीजीटीआई के सीईओ अमनदीप चहल ने भी छत्तीसगढ़ की व्यवस्थाओं और आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यहां आने वाले खिलाड़ी दोबारा खेलने की इच्छा व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पर्यटन और अन्य खेलों के साथ उभरते गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में भी पहचान बना रहा है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने टीम के साथ राज्य की ओर से की भागीदारी
रायपुर / शौर्यपथ / गुजरात के गांधीनगर में आयोजित 10वें वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF 2026) में छत्तीसगढ़ ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के नेतृत्व में राज्य से गई टीम ने फोरम में शामिल होकर सर्कुलर इकोनॉमी, संसाधन दक्षता और कचरे को संसाधन में बदलने के आधुनिक समाधानों पर वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। राज्य शहरी विकास अभिकरण के सीईओ सुमीत अग्रवाल भी प्रतिनिधि मंडल में शामिल हैं।
राज्य की टीम के प्रमुख श्री बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के अधिकतम उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य का प्रयास है कि नवाचार और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कचरे का बेहतर प्रबंधन करते हुए उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जाए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छ, मजबूत और टिकाऊ शहरों के निर्माण को गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में राज्य की पहल और मजबूत होगी।
फोरम में दुनिया के विभिन्न देशों के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नवाचारी तकनीक विकसित करने वाले संस्थान और क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, संसाधनों के बेहतर उपयोग, टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग तथा वेस्ट-टू-रिसोर्स जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
राज्य की टीम ने प्रदर्शनी केंद्रों का किया अवलोकन
छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने फोरम के दौरान प्रदर्शनी केंद्रों का भी अवलोकन किया। यहां रिसाइक्लिंग, संसाधनों की रिकवरी, कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने, टिकाऊ सामग्री तथा सर्कुलर बिजनेस मॉडल से जुड़ी नवीन तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित किया गया था। टीम ने इन तकनीकों और मॉडलों के जरिए कचरे को बोझ के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाओं को समझा।
छत्तीसगढ़ के शहरी विकास के लिए उपयोगी समाधानों की तलाश
विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में सहभागिता के दौरान राज्य की टीम को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को समझने तथा छत्तीसगढ़ के शहरी विकास और अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र के लिए उपयोगी नवाचारों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला। इनमें विशेष रूप से संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और वेस्ट-टू-वैल्यू से जुड़े समाधानों पर फोकस रहा।
एनएसटीआई से मिलेगी कौशल को नई पहचान, 45 वर्ष की आयु सीमा से अनुभव को लाभ-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अवसरों का विस्तार
रायुपर / छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है। खेतों में लहलहाती फसलें प्रदेश की समृद्धि की कहानी कहती हैं, लेकिन बदलते समय के साथ छत्तीसगढ़ ने विकास की अपनी यात्रा में नए आयाम जोड़े हैं। अब कृषि के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता भी प्रदेश की नई पहचान बन रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत प्रदेश के युवा और अनुभवी मानव संसाधन हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के हालिया निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं। एक ओर नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) की स्थापना होने से युवाओं को आधुनिक कौशल का मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किया जाना अनुभव और क्षमता को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय है।
सपनों को डिग्री के साथ हुनर भी चाहिए
आज का युवा केवल शिक्षा नहीं, रोजगारपरक कौशल चाहता है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के बीच ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व बढ़ गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेंदुवा में एनएसटीआई की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब एक हजार तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। हजारों युवाओं के सपनों से जुड़ा अवसर है। इससे कोई तकनीकी कौशल हासिल करेगा, कोई उद्योग से जुड़ेगा, तो कोई अपना उद्यम शुरू कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह
एनएसटीआई की स्थापना होने से युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। आज कौशल केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है। गांव और कस्बे के युवा को भी उद्यमशील बनने का अवसर मिलेगा। एक प्रशिक्षित युवा नौकरी तलाशने वाला बनने के साथ नौकरी देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। यही कौशल से उद्यमिता और रोजगार से आत्मनिर्भरता की यात्रा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के युवाओं से अक्सर कहते हैं कि ऐसा कार्य करें जो युवाओं को रोजगार देने वाला बने, ताकि उनकी नई पहचान बन सके।
उम्र बढ़ी तो अवसरों का दायरा भी बढ़ा
अधिकतम आयु सीमा को 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का निर्णय उन लोगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, जिनके पास अनुभव, कार्यकुशलता और जिम्मेदारियों का व्यावहारिक ज्ञान है। उम्र बढ़ने के साथ अनुभव बढ़ता है और अनुभव किसी भी व्यवस्था की महत्वपूर्ण पूंजी है। वर्षों तक काम कर चुके लोगों ने व्यवस्था को करीब से समझा है और चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे अनुभव का बेहतर उपयोग नई जिम्मेदारियों में किया जाना संस्थाओं को अधिक सक्षम बना सकता है।
युवा ऊर्जा और अनुभवी हाथ साथ चलें
विकास की मजबूत तस्वीर तब बनती है, जब युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच साथ आती है। युवा नई तकनीक और नए विचार लाते हैं, जबकि अनुभवी वर्ग व्यावहारिक समझ और परिस्थितियों से निपटने का अनुभव देता है। एनएसटीआई युवाओं के हुनर को मंच देगा, तो आयु सीमा में वृद्धि अनुभवी वर्ग की क्षमता को अवसर। दोनों निर्णय मिलकर प्रदेश की मानव पूंजी को मजबूत करने की दिशा दिखाते हैं।
छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि उसके लोगों की क्षमता से तय होगा। जब हुनर को मंच, अनुभव को अवसर और सपनों को सही दिशा मिलेगी, तब विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों की जिंदगी में दिखाई देगा। यही नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर है, जहां कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की राह तैयार हो रही है। इसी तरह के निर्णयों से छत्तीसगढ़ सरकार सेवा करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
साभार - (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक होंगे विभिन्न जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम
रायपुर. / कांकेर जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर आज जिले के प्रभारी मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री आशाराम नेताम और जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी बैठक में वर्चुअली शामिल हुईं। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार भी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल हुए।
उन्होंने प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव के समक्ष जिले में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों एवं जनभागीदारी कार्यक्रमों की संक्षिप्त जानकारी दी।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बैठक में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने सभी स्कूलों में विशेष गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय खुलने के पश्चात प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में विद्यार्थियों को स्वच्छता के महत्व की जानकारी दी जाए तथा उन्हें स्वच्छता की शपथ दिलाई जाए। विद्यार्थियों को स्वयं स्वच्छ रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक और प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति व्यापक जन जागरूकता विकसित हो सके।
श्री साव ने सेवा संकल्प अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने तथा अभियान को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने पर जोर दिया। हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, कांकेर नगर पालिका के अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, श्री महेश जैन, श्री बृजेश चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री निखिल राखेचा, जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मण्डावी और अपर कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुर्रे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा अभियान से संबंधित सभी नोडल अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री ने सभी जिला पंचायतों के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा दिए आवश्यक तैयारियों के निर्देश
बस्तर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को मिलेगा विशेष स्वरूप, शहीद परिवारों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी जलेंगे दीप
रायपुर, / ‘सेवा संकल्प अभियान’ को प्रदेशव्यापी जनभागीदारी का अभियान बनाने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज अटल नगर नवा रायपुर स्थित महानदी भवन से सभी जिलों के जिला पंचायत के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में उन्होंने 17 सितंबर को आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम सहित पूरे अभियान की तैयारियों और इसके व्यापक संचालन को लेकर अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग और हर व्यक्ति को इससे जोड़ते हुए सेवा, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन का संकल्प बनाया जाए। आशीर्वाद के दीयों से पूरा छत्तीसगढ़ रौशन होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि अभियान का उद्देश्य प्रत्येक हितग्राही और प्रत्येक नागरिक को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को प्रदेशभर में लोग अपने-अपने स्थानों पर दीप जलाकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की राष्ट्रसेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेंगे और वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान की पहुंच गांव के अंतिम व्यक्ति तक हो और इसमें शासन की योजनाओं के हितग्राहियों के साथ आम नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
स्कूल से लेकर धान खरीदी केंद्र तक, हर स्थान पर जलेगा दीप
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप देने के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। स्कूलों और छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों, शासकीय भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, महतारी सदनों, पीडीएस दुकानों, धान खरीदी केंद्रों, अमृत सरोवरों, अटल चौकों और धार्मिक स्थलों सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर दीप जलाए जाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के घरों में भी ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया जाएगा। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बिहान की दीदियां भी इसमें सहभागी बनेंगी। पर्यटन स्थलों और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी दीप प्रज्ज्वलन कर विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को जनभागीदारी से मजबूत किया जाएगा।
बस्तर में ‘बस्तर सेवा संकल्प अभियान’ का विशेष आयोजन
बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर संभाग में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को विशेष स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बस्तर में यह अभियान सेवा, शांति, विकास और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को अभिव्यक्त करने वाला बने। इसके तहत वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा केंद्रों, सुरक्षा कैंपों, पुनर्वास केंद्रों तथा उन स्थानों पर विशेष रूप से दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे, जहां बड़े नक्सल अभियानों में सफलता मिली है अथवा नक्सल हिंसा की बड़ी घटनाएं हुई हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों और नागरिकों के परिवारों को भी इस अभियान से विशेष रूप से जोड़ा जाए। शहीदों के घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर उनके बलिदान को नमन किया जाएगा। इन दीपों के माध्यम से शांति, विकास और नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।
नक्सल मुक्त गांवों को अभियान से जोड़ने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बस्तर संभाग के सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अभियान की विशेष तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ अब नक्सल मुक्त हुए गांवों को भी ‘सेवा संकल्प अभियान’ से सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। इन गांवों में विकास, शांति और नई उम्मीद की रोशनी को प्रतीकात्मक रूप से दीपों के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अभियान की प्रत्येक गतिविधि में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित हो और यह कार्यक्रम बस्तर में बदलती तस्वीर तथा विकास की नई दिशा का संदेश बने।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ किसी एक स्थान या वर्ग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सामूहिक भावना का प्रतीक बने। गांव, शहर, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेत-खलिहान, शासकीय संस्थान और आम नागरिक हर कोई इस संकल्प का सहभागी बने। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति विकास की इस यात्रा से अपने आपको जोड़ता है, तभी विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक जनआंदोलन का रूप लेता है।
इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्री रजत बंसल, आयुक्त वीबी जी राम जी श्री तारन प्रकाश सिन्हा, संचालक श्री अश्वनी देवांगन सहित सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ, जनपद सीईओ भी शामिल हुए।
न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति का 42वां आयोजन देगा पर्यावरण और पक्षी संरक्षण का संदेश
भिलाई / शौर्यपथ / न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति, सेक्टर-2 भिलाई द्वारा गणेशोत्सव का 42वां वर्ष इस बार भव्यता, श्रद्धा और सामाजिक सरोकार के साथ मनाया जा रहा है। समिति की ओर से भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापना के साथ पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारापीठ स्थित मनोकामना मंदिर की तर्ज पर आकर्षक पंडाल और झांकी तैयार की जा रही है।
आयोजन की जानकारी देने आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद जे. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष झांकी को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संरक्षण की थीम पर तैयार किया जा रहा है। झांकी के माध्यम से लोगों को पेड़-पौधों, हरियाली और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ पक्षियों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यदि समाज को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जाए तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी उद्देश्य से समिति ने प्रकृति रक्षा, वृक्षारोपण और पक्षी संरक्षण को इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय बनाया है।
श्री राव ने कहा कि समिति का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लेकर लौटें। उन्होंने भिलाईवासियों और श्रद्धालुओं से सेक्टर-2 स्थित गणेश पंडाल में पहुंचकर दर्शन करने तथा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प में सहभागी बनने की अपील की।
निर्दलीय प्रत्याशियों का आरोप—एनओसी जमा होने के बावजूद नामांकन रद्द किया गया, निष्पक्ष जांच की मांग
सदस्यों का सवाल—पिछले कार्यकाल का लेखा-जोखा पूरा हुए बिना नए चुनाव की घोषणा क्यों?
बचेली/किरंदुल, दंतेवाड़ा। बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन (बीटीओए) के वार्षिक चुनाव 2026-27 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित प्रत्याशियों का आरोप है कि नामांकन के साथ जमा किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को कथित रूप से नजरअंदाज अथवा छिपाकर उनके नामांकन निरस्त किए गए।
मामला केवल नामांकन निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीटीओए कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे बंद होने तथा निगरानी फुटेज या संबंधित दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अनुविभागीय अधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा तहसीलदार और फम्र्स एंड सोसायटीज विभाग से भी जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सिर्फ दो नामांकन पर सवाल
सदस्यों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि नामांकन नियमों के तहत निरस्त किए गए हैं तो इसकी पूरी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन ही क्यों निरस्त किए गए?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके द्वारा एनओसी सहित आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे, तो उनकी जांच किस आधार पर की गई और नामांकन निरस्त करने का स्पष्ट कारण क्या था, इसे सामने लाया जाना चाहिए।
लेखा-जोखा पूरा हुए बिना चुनाव की घोषणा?
वहीं, संस्था के कुछ सदस्यों ने 2025-26 के कार्यकाल से जुड़े लेखा-जोखा और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कार्यकाल का हिसाब-किताब और संस्था से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए बिना 2026-27 के चुनाव की घोषणा कैसे कर दी गई?
सदस्यों का तर्क है कि नए चुनाव से पहले पिछले कार्यकाल की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि संस्था के सदस्यों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
सीसीटीवी जांच की मांग
सीसीटीवी को लेकर सामने आए आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैमरे बंद किए गए या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। इसके लिए सीसीटीवी रिकॉर्ड, डीवीआर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
पहले जांच या पहले मतदान?
अब पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि पहले शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी या विवादों के बीच ही मतदान कराया जाएगा?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोपों और कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना चुनाव करा दिया गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे। वहीं, जल्दबाजी में चुनाव कराने से पिछले कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
दो निर्दलीय प्रत्याशियों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच तथा निर्णय पर टिकी हैं। यदि जांच होती है तो नामांकन निरस्तीकरण, एनओसी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय दल ने देखा लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और प्राचीन स्थापत्य
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से सिरपुर को वैश्विक अकादमिक और पर्यटन संवाद से जोडऩे की कोशिश
रायपुर / शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने महत्वपूर्ण पहल की है। जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए सिरपुर में विशेष विरासत भ्रमण आयोजित किया गया। एनआईटी रायपुर के आतिथ्य में 12 से 14 सितंबर तक छत्तीसगढ़ आए जापानी प्रतिनिधिमंडल ने 14 सितंबर को सिरपुर पहुंचकर प्रदेश की प्राचीन विरासत को करीब से जाना और इसके ऐतिहासिक वैभव से परिचित हुए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष भ्रमण व्यवस्था के साथ स्थानीय विशेषज्ञ गाइड की सेवाएं उपलब्ध कराईं। गाइड ने जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सिरपुर के इतिहास, स्थापत्य, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता की जानकारी दी। जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन एवं आतिथ्य की व्यवस्था भी की गई।
लक्ष्मण मंदिर ने खींचा विशेष ध्यान
प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर की स्थापत्य संरचना, बारीक अलंकरण और ईंटों पर की गई कलात्मक कारीगरी ने प्रतिनिधिमंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया। सदस्यों ने मंदिर के गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित विभिन्न स्थापत्य विशेषताओं का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक संदर्भों की जानकारी ली।
बौद्ध विरासत से भी हुए परिचित
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर बने कक्षों और कलात्मक स्थापत्य वाले इस परिसर ने जापानी विद्यार्थियों की विशेष रुचि जगाई। यहां बुद्ध और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेषों के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने सिरपुर की बौद्ध विरासत को समझा।
स्वास्तिक विहार में प्रतिनिधिमंडल ने इसकी विशिष्ट वास्तु योजना और बौद्धकालीन अवशेषों का अवलोकन किया। वहीं तीवरदेव महाविहार में बौद्ध और हिंदू कला परंपराओं के अद्भुत समन्वय ने सदस्यों को प्रभावित किया। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी और अन्य अलंकरणात्मक शिल्प भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं।
इतिहास, धर्म और स्थापत्य का संगम है सिरपुर
महानदी के तट पर स्थित सिरपुर प्राचीनकाल में 'श्रीपुरÓ के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। पुरातात्विक उत्खननों से यहां बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विशाल संसार सामने आया है।
सिरपुर में अब तक मिले पुरातात्विक अवशेष यह प्रमाणित करते हैं कि यह क्षेत्र कभी धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा। प्रतिनिधिमंडल ने यहां प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की संरचना और मंदिर स्थापत्य का बारीकी से अवलोकन किया।
पर्यटन के साथ अकादमिक संवाद को बढ़ावा
एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के विरासत भ्रमण केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
जापानी प्रतिनिधिमंडल के लिए सिरपुर का भ्रमण विशेष महत्व रखता है, क्योंकि जापान की सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला की गहरी छाप रही है। ऐसे में सिरपुर की बौद्ध विरासत को प्रत्यक्ष देखना उनके लिए अध्ययन और अनुभव का महत्वपूर्ण अवसर बना।
वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर को पहचान दिलाने की पहल
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का यह प्रयास सिरपुर को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सिरपुर में इतिहास, धर्म, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की ऐसी समृद्ध कहानी मौजूद है, जो दुनिया भर के शोधार्थियों, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित कर सकती है।
एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल का यह भ्रमण छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और जापान की अकादमिक दुनिया के बीच एक नए सांस्कृतिक सेतु के रूप में सामने आया। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने और प्रदेश की विरासत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
