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ओस्लो/नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम द्वारा ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में ‘द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। यह विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला नॉर्वे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवाओं और वैश्विक स्तर पर विशेष योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत-नॉर्वे संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए दिया गया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और वहां की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारत और नॉर्वे के बीच दशकों पुरानी ऐतिहासिक मित्रता, विश्वास और पारस्परिक स्नेह का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को दोनों देशों की जनता के बीच साझा की गई गर्मजोशी और मजबूत संबंधों को समर्पित करते हुए कहा कि यह भविष्य में भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग, साझेदारी और मित्रता को और अधिक सशक्त बनाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, ।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।
समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।
समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।
नई दिल्ली ।
न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।
समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली /
दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल गौतम अडानी पर वर्ष 2024 में आरोप लगा था कि उन्होंने एक बड़े सौर ऊर्जा परियोजना को सफल बनाने के लिए भारी रिश्वत दी। उन पर साजिश, सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड जैसे आरोप लगाए गए थे। यह मामला अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य कंपनी द्वारा भारत सरकार को 12 गीगावॉट सौर ऊर्जा बेचने के समझौते से जुड़ा था, जिसका उद्देश्य लाखों घरों और व्यवसायों तक बिजली पहुंचाना था।
उस समय अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। अडानी को इस मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए अमेरिका लाया गया। भारत में कई लोगों को पहले से उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (Foreign Corrupt Practices Act - FCPA) के प्रवर्तन को निलंबित किए जाने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह कानून विदेशों में व्यापारिक रिश्वतखोरी पर रोक लगाता है।
आरोप वापस लेने का यह फैसला ऐसे समय आया जब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी से जुड़े एक अन्य मुकदमे के निपटारे की जानकारी दी।
गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयला कारोबार से अपनी संपत्ति बनाई थी। समय के साथ अडानी समूह ने नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में निवेश कर अपना कारोबार विविध बनाया। कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा पोर्टफोलियो तैयार किया, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक भी शामिल है। समूह ने वर्ष 2030 तक देश की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा कंपनी बनने का लक्ष्य रखा था। अडानी के भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी संबंध भी बताए जाते रहे हैं।
अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दायर दस्तावेज में कहा,
“न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अभियोजन संबंधी अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ इन आपराधिक मामलों पर आगे संसाधन खर्च न करने का निर्णय लिया है।”
हालांकि, इस अनुरोध को अभी न्यायाधीश निकोलस गारौफिस की मंजूरी मिलना बाकी है।
अभियोजकों के अनुसार, अडानी और उनके सह-आरोपियों के वकीलों ने भी इस अनुरोध पर सहमति जताई है। अडानी के वकील रॉबर्ट जियुफ्रा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर, अडानी समूह के आलोचक भी लगातार सक्रिय रहे हैं। अमेरिकी वित्तीय शोध संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर “खुलेआम शेयर मूल्य में हेरफेर” और “लेखा धोखाधड़ी” के आरोप लगाए थे। अडानी समूह ने इन दावों को “चयनित गलत सूचनाओं और पुराने, निराधार तथा बदनाम आरोपों का दुर्भावनापूर्ण मिश्रण” बताया था।
जब 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी पर आरोप लगाए थे, तब उनका कहना था कि अडानी और अन्य लोगों ने सौर ऊर्जा सौदे में दोहरी रणनीति अपनाई। एक ओर उन्होंने वॉल स्ट्रीट निवेशकों को परियोजना की आकर्षक तस्वीर दिखाकर अरबों डॉलर का निवेश हासिल किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय सरकारी अधिकारियों को लाभकारी अनुबंध पाने के लिए लगभग 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने का आरोप भी लगाया गया।
मामला सामने आने के बाद केन्या के राष्ट्रपति ने अडानी समूह से जुड़े करोड़ों डॉलर के एयरपोर्ट विस्तार और ऊर्जा समझौतों को रद्द कर दिया था। वहीं, श्रीलंका द्वारा कीमतों पर पुनर्विचार की मांग के बाद अडानी ग्रीन एनर्जी ने वहां की पवन ऊर्जा परियोजनाओं से खुद को अलग कर लिया। एक फ्रांसीसी तेल कंपनी ने भी समूह में नए निवेश अस्थायी रूप से रोक दिए थे।
विश्लेषकों का मानना है कि अडानी समूह की तेज़ी से बढ़ती सफलता का एक प्रमुख कारण उसकी कारोबारी प्राथमिकताओं का मोदी सरकार की नीतियों के अनुरूप होना रहा है। हालांकि, आलोचक अडानी पर “क्रोनी कैपिटलिज्म” यानी सत्ता से निकटता के जरिए लाभ लेने और सरकारी अनुबंधों में विशेष रियायत मिलने के आरोप लगाते रहे हैं, जिन्हें अडानी समूह लगातार खारिज करता आया है।
रायपुर / शौर्यपथ /
कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन की विभिन्न योजनाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।
शिविर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही लोगों को शासकीय योजनाओं, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।
सुकमा तहसीलदार श्री गिरीश निम्बालकर, सरपंच श्रीमती मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच श्री प्रवीण बारसे की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिविर में 8 जाति प्रमाण पत्र, 12 निवास प्रमाण पत्र, 8 किसान किताब तथा 2 नामांतरण आदेश प्रदान किए गए। इससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों को बड़ी राहत मिली।
शिविर की एक खास उपलब्धि किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना भी रही। यहां 5 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन किया गया। इससे किसानों को भविष्य में डिजिटल कृषि सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने शिविर में त्वरित समाधान और एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों से गांव में ही जरूरी काम पूरे हो रहे हैं, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
सुशासन तिहार के तहत आयोजित ये शिविर शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं।
400 अत्याधुनिक आपातकालीन वाहन एवं 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी
‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ के साथ प्रदेश में त्वरित सहायता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था होगी सशक्त
‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित सेवा से पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी, आगजनी, सड़क दुर्घटना और आपदा जैसी हर स्थिति में मिलेगी त्वरित सहायता
रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ तथा मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह एवं की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों तथा 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
यह सेवा 24x7 संचालित होगी। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी तथा स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच
‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी। “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।
लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल
राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है।
आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले — “जनहित और सुशासन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल”
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में नागरिक सुरक्षा और त्वरित राहत व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा के माध्यम से अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में जरूरतमंद नागरिकों को आपात परिस्थितियों में तेज, सुरक्षित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अत्याधुनिक सेवा के अंतर्गत आज भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आधुनिक इमरजेंसी एवं हाईवे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह पहल सड़क दुर्घटनाओं, मेडिकल इमरजेंसी, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण तथा अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस पहल को जनहित और सुशासन की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर सुरक्षा और त्वरित सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि —
“नेक्स्ट जेन CG डायल-112 सेवा केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को शीघ्र राहत मिलेगी और प्रदेश में सुरक्षा तंत्र पहले से अधिक प्रभावी होगा।”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ लगातार आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी अब बेहतर आपात सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है और नई डायल-112 सेवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस यह व्यवस्था पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा राहत सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में नागरिकों को कम समय में सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा को सुरक्षित, संवेदनशील और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और जनहितैषी कदम माना जा रहा है।
रायपुर। प्रभु श्रीराम के ननिहाल एवं माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के आगमन को लेकर प्रदेशभर में उत्साह और आत्मीयता का वातावरण दिखाई दे रहा है।
प्रदेशवासियों की ओर से उनके प्रति हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन व्यक्त किया गया है। यह दौरा केवल एक औपचारिक प्रवास नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
प्रदेश में केंद्र सरकार के सतत सहयोग और डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। विशेषकर बस्तर क्षेत्र, जो वर्षों तक नक्सलवाद की चुनौती से प्रभावित रहा, आज विकास और विश्वास की नई दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और सुरक्षा बलों के मनोबल को मजबूत करने वाले निर्णयों के कारण बस्तर में शांति स्थापना और विकास कार्यों को नई गति मिली है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे कार्य अब आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि गृहमंत्री का यह प्रवास प्रदेश के विकास कार्यों को और अधिक गति देगा तथा सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बस्तर के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
छत्तीसगढ़ की जनता को विश्वास है कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से प्रदेश आने वाले समय में विकास, सुरक्षा और जनकल्याण का नया उदाहरण बनेगा।
छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से
माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी अमित शुक्ला के निधन से शोक की लहर
बस्तर सहित पूरे पुलिस महकमे के लिए अत्यंत दुःखद समाचार सामने आया है।
बस्तर के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं देने वाले पुलिस अधिकारी श्री अमित शुक्ला का असमय निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पुलिस विभाग, सहयोगियों और क्षेत्रीय नागरिकों में गहरा शोक व्याप्त है।
श्री अमित शुक्ला अपने शांत स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए जाने जाते थे। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पुलिस विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
उनकी कार्यशैली में अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाएं भी स्पष्ट दिखाई देती थीं, यही कारण रहा कि वे अपने साथियों और आम नागरिकों के बीच सम्मानित अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे।
उनका असमय निधन केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि पुलिस महकमे के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी।
विभाग के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया है।
शोक संदेशों का सिलसिला लगातार जारी है।
सहकर्मियों का कहना है कि अमित शुक्ला ने अपने सेवा काल में कठिन परिस्थितियों के बीच भी कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और सदैव ईमानदारी एवं समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति ?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
