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May 31, 2026
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NIA को राहत, SC ने गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट में सुनवाई रद्द की

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नई दिल्ली / शौर्यपथ / बहुचर्चित भीमा कोरेगांव मामलेमें राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी को राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई रद्द की. SC ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को भीमा कोरेगांव मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की अंतरिम जमानत याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए था क्योंकि यह मामला बॉम्बे HC के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की इस मामले में NIA पर टिप्पणियों को भी हटा दिया है.
मामले में NIA की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि नवलखा के लिए "हाउस कस्टडी" के लिए एक "अभूतपूर्व" आदेश दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारित किया गया था. घर में हिरासत में रहते हुए उन्हें सुरक्षा दी गई थी.आत्मसमर्पण के समय, दिल्ली लॉकडाउन में थी फिर उन्होंने दिल्ली HC का रुख किया. हमने कोर्ट से कुछ नहीं छिपाया. मुंबई एनआईए अदालत में अन्य सभी अभियुक्तों पर मुकदमा चलाया जा रहा है. यही कारण है कि उन्हें भी वहां ले जाया गया. सॉलिसिटर जनरल (SG) ने कहा, जब उन्होंने (नवलखा ने) दिल्ली HC में याचिका दी तो हमने पहले ही HC को सूचित कर दिया कि अन्य सभी आरोपी मुंबई में हैं. हम उन्हें एक न्यायिक आदेश के बाद ले गए जो कि मुंबई की विशेष अदालत द्वारा प्रोडक्शन वारंट था. उच्च न्यायालय दिल्ली में अधिकार क्षेत्र में नहीं है और पूरी तरह से अनुचित है.

दूसरी ओर, नवलखा के लिए वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 'राई का पहाड़' बना दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट NIA की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने NIA को याचिका की प्रति गौतम नवलखा के वकील को देने को कहा था. 2 जून को सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट गौतम नवलखा मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी थी. NIA ने दिल्ली हाईकोर्ट के 27 मई के आदेश के खिलाफ अपील दायर की है जिसमें जिसने दिल्ली और मुंबई में NIA स्पेशल कोर्ट के सामने चल रही कार्यवाही का रिकॉर्ड मांगा है जिसके आधार पर गौतम नवलखा को दिल्ली से मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया था. NIA ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली HC के पास अधिकार क्षेत्र नहीं है. 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एक आयोजन 'एल्गर परिषद' आयोजित किया गया था, जिसमें 1 जनवरी, 2018 को कथित रूप से जातिगत हिंसा हुई थी. इस मामले में कई प्रमुख एक्टिविस्ट को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है

 

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