September 29, 2026
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    NGT का बड़ा फैसला, भोपाल के बड़े तालाब में नहीं चलेंगे क्रूज और मोटर बोट

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        भोपाल /शौर्यपथ /झीलों का शहर कहलाने वाली मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बड़े तालाब की लहरों पर अब क्रूज और मोटर बोट के हिचकोले देखने को नहीं मिलेंगे. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने अपने एक फैसले में प्रदेश के सभी जलाशयों में क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर रोक लगाने को कहा है. ये फैसला नर्मदा समेत प्रदेश में दूसरी नदियों और जलस्रोतों पर भी लागू होगा. एनजीटी ने ये फैसला पर्यावरणविद् सुभाष पांडे की याचिका पर दिया है. पांडे ने अपनी याचिका में भोज वेटलैंड में क्रूज को अनुमति देने के मामले में नियमों की अनदेखी और पर्यावरण को होने वाले खतरे की बात कही थी.
    इंसानों और जलीय जीवों के लिए है खतरा, स्थायी निर्माण को तोड़ने के आदेश
        पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मोटरबोट और क्रूज के संचालन की वजह से 'भोज वेटलैंड' और दूसरे जलस्रोतों को होने वाले नुकसान को याचिका दाखिल की थी. उनका कहना है कि यात्रियों के साथ छोट क्रूज जहाज तैरती कॉलोनियों के रूप में कार्य करते हैं जो सीवेज, गंदगी और दूसरे दूषित पदार्थों के साथ पानी को प्रदूषित करते हैं.
        बता दें कि भोपाल में स्थित बड़ा तालाब अंतरराष्ट्रीय महत्व वाला एक रामसर साइट है. इस साइट में बड़ा तालाब और छोटा तालाब शामिल हैं. बड़ा तालाब लगभग 31 किमी में फैला हुआ है. शहर के लगभग 12 लाख लोग पीने के पानी की जरूरत के लिए इस जल स्रोत के आसरे हैं. स्थानीय जलवायु, वनस्पति, भूजल की कमी और आसपास के क्षेत्र के भूजल प्रदूषण को रोकने में भी बड़े तालाब की अहम भूमिका है. इसमें 15 से अधिक प्रकार की मछलियां और कछुए पाए जाते हैं. दुनिया भर से 2500 से अधिक प्रवासी पक्षी प्रजनन के लिये इस वेटलैंड में नियमित रूप से आते थे, जिससे उनके मार्गों पर जैव विविधता का रखरखाव होता था. एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बड़ा तालाब के 'प्रभाव क्षेत्र' के भीतर कोई भी स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता है और यदि कोई स्थायी निर्माण किया गया है, तो उसे तोड़ दिया जाएगा.
     एनजीटी ने खारिज किया सरकार का तर्क
         बड़े तालाब में जलपरी क्रूज का संचालन सरकार करती है. एनजीटी ने कहा है कि इसकी मंज़ूरी किसी वैधानिक संस्था से नहीं ली गई, ऐसे में ये पूरी तरह अवैध गतिविधि है. वहीं सरकार ने इसे औद्योगिक गतिविधि बताते हुए एनजीटी के क्षेत्राधिकार से बाहर रखने का तर्क दिया, लेकिन एनजीटी ने इस तर्क को खारिज कर दिया. इस फैसले से भोपाल के बड़े तालाब पर क्रूज नहीं चलेगा, वहीं फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का प्लान भी अटक जाएगा. मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड राज्य के 20 बांध, नदियों में क्रूज चलाना चाहता है लेकिन इस आदेश की वजह से ये प्लान ठंडे बस्ते में जा सकता है, क्योंकि एनजीटी ने सरकार को 3 महीने में इस आदेश का पालन सुनिश्चित कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है.
    मास्टर प्लान में भी था मनोरंजक गतिविधियों को रोकने का जिक्र
       भोपाल मास्टर प्लान, 2005 में भी कहा गया था कि बड़े तालाब के पानी में किसी भी मनोरंजक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इसका उपयोग मूल रूप से पीने के उद्देश्यों के लिए किया जाता है. प्लान में कहा गया था कि झील के पानी की गुणवत्ता पर मनोरंजक गतिविधियों से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी एमपीटीबी (मध्य प्रदेश प्रदेश पर्यटन बोर्ड) ने नदियों, झीलों और जल निकायों में मोटरबोट और क्रूज चलाने की इजाज़त दे दी.

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