September 28, 2026
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    "काशी का कायाकल्प...": दुनिया के सबसे बड़े योग सेंटर स्वर्वेद महामंदिर के उद्घाटन पर पीएम मोदी

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      वाराणसी /शौर्यपथ /उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के उमराहा में नवनिर्मित स्वर्वेद मंदिर का उद्घाटन कर दिया है. इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि संतो के सानिध्य में काशी के लोगों ने मिलकर विकास और नवनिर्माण के कितने ही नए कीर्तिमान गढ़े हैं. सरकार, समाज और संतगण सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं. इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे. इस मंदिर की भव्‍यता देखते ही बनती है. इसमें एक साथ 20 हजार लोग योगाभ्‍यास कर सकते हैं.  
      पीएम मोदी ने कहा, "आज स्वर्वेद मंदिर बनकर तैयार होना, इसी ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है. ये महामंदिर महृषि सदाफल देव जी की शिक्षाओं और उनके उपदेशों का प्रतीक है. इस मंदिर की दिव्यता जितना आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमे उतना ही अचंभित भी करती है.स्वर्वेद मंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है. इसकी दीवारों पर स्वर्वेद को बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किया गया है. वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रन्थों के दिव्य संदेश भी इसमें चित्रों के जरिये उकेरे गए हैं. इसलिए ये मंदिर एक तरह से अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है."
      भारत की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो सदियों तक विश्व के लिए आर्थिक समृद्धि और भौतिक विकास का उदाहरण रहा है. हमने प्रगति के प्रतिमान गढ़े हैं, समृद्धि के सौपान तय किए हैं. भारत ने कभी भौतिक उन्नति को भौगोलिक विस्तार और शोषण का माध्यम नहीं बनने दिया. भौतिक प्रगति के लिए भी हमने आध्यात्मिक और मानवीय प्रतीकों की रचना की. हमने काशी जैसे जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों का आशीर्वाद लिया."
    राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर पीएम मोदी ने कहा, "देश में राम सर्किट के विकास के लिए भी तेजी से काम हो रहा है और अगले कुछ सप्ताह में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी पूरा होने जा रहा है.
    अब बनारस के मतलब है - विकास,
    अब बनारस के मतलब है - आस्था के साथ आधुनिक सुविधाएं,
    अब बनारस के मतलब है - स्वच्छता और बदलाव,
    बनारस आज विकास के अद्वितीय पथ पर अग्रसर है."
     उन्‍होंने कहा, "भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो सदियों तक विश्व के लिए आर्थिक समृद्धि और भौतिक विकास का उदाहरण रहा है. हमने प्रगति के प्रतिमान गढ़े हैं, समृद्धि के सौपान तय किए हैं भारत ने कभी भौतिक उन्नति को भौगोलिक विस्तार और शोषण का माध्यम नहीं बनने दिया. भौतिक प्रगति के लिए भी हमने आध्यात्मिक और मानवीय प्रतीकों की रचना की. हमने काशी जैसे जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों का आशीर्वाद लिया. भारत की आध्यात्मिक संरचनाओं के आसपास ही हमारी शिल्प और कला ने अकल्पनीय ऊंचाइयों को छुआ. यहां से ज्ञान और अनुसंधान  के नए मार्ग खुले. उद्यमों और उद्योगों से जुड़ी असीम संभावनाओं का जन्म हुआ. आस्था के साथ-साथ योग जैसे विज्ञान फले-फुले, और यहीं से पूरे विश्व के लिए मानवीय मूल्यों की अविरल धाराएं भी बही."
      पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी के कालखंड में जिन अत्याचारियों ने भारत को कमजोर करने का प्रयास किया, उन्होंने सबसे पहले हमारे प्रतीकों को ही निशाना बनाया. आजादी के बाद इन सांस्कृतिक प्रतीकों का पुनर्निर्माण आवश्यक था. अगर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देते तो देश के भीतर एकजुटता और आत्मसम्मान का भाव मजबूत होता. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ. आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण तक का विरोध किया गया था और ये सोच दशकों तक देश पर हावी रही. आजादी के 7 दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है. देश अब लालकिले से गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व की घोषणा कर रहा है. जो काम सोमनाथ से शुरू हुआ था, वो अब एक अभियान बन गया है. आज काशी में विश्वनाथ धाम की भव्यता भारत के अविनाशी वैभव की गाथा गा रही है. आज महाकाल महालोक हमारी अमरता का प्रमाण दे रहा है. आज केदारनाथ धाम भी विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है.
      बता दें कि स्वर्वेद महामंदिर दुनिया का अनोखा मंदिर है. इस मंदिर में किसी देवी-देवता की प्रतिमा नहीं है. मंदिर में पूजा की जगह ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए योग साधना की जाएगी. गुरु परंपरा को समर्पित इस महामंदिर को योग साधकों की साधना के लिए तैयार किया गया है, जिसमें 35 करोड़ की लागत आई है. मंदिर आज से आम साधकों व श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा.
    स्वर्वेद महामंदिर की कुछ विशेषताएं
    • विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र.
    • मकराना संगमरमर पर 3137 स्वर्वेद छंद उत्कीर्ण.
    • 20,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं.
    • 125 पंखुड़ी वाला कमल गुंबद.
    • सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के जीवन पर यांत्रिकी प्रस्तुति.
    • इसमें सामाजिक कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन शामिल है.
    • ग्रामीण भारत की भलाई के लिए अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का केंद्र.
    • आध्यात्मिकता के शिखर से प्रेरित- स्वर्वेद
    • भारतीय विरासत की झलक दर्शाती जटिल नक्काशीदार बलुआ पत्थर की संरचनाएँ.
    • मंदिर की दीवारों के चारों ओर गुलाबी बलुआ पत्थर की सजावट.
    • औषधीय जड़ी-बूटियों वाला उत्तम उद्यान.
       उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ इस केंद्र का दौरा किया. यहां 20,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं. सात मंजिला इस भव्य महामंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के छंद उकेरे गए हैं. स्वर्वेद महामंदिर प्राचीन दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक मिलाजुला रूप है.

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