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नई दिल्ली/शौर्यपथ /सुप्रीम कोर्ट ने ऑन रिकॉर्ड मामलों का निपटारा करने के मामले पर आज कहा कि उन्होंने इस साल दर्ज मुकदमों से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है. इससे पता चलता है कि अदालत न्यायपालिका की लंबे समय से चली आ रही बड़ी समस्या यानी कि लंबित मामलों को निपटाने में सक्षम है. सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर तक 52,191 मामलों का निपटारा किया, जबकि इस साल 49,191 मामले दर्ज किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने इसे "देश के कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण" बताया.
कोर्ट ने इस साल 52,191 मामलों का किया निपटारा
अदालत ने कहा, "एक अन्य उपलब्धि में, भारत का सर्वोच्च न्यायालय 1 जनवरी 2023 से 15 दिसंबर 2023 तक 52,191 मामलों का निपटारा करने में सक्षम रहा है, जिसमें 45,642 विविध मामले और लगभग 6,549 नियमित मामले शामिल हैं. साल 2023 में अदालत ने कुल 52,191 मामले निपटाए हैं, जबकि कुल रजिस्टर्ड केस 49,191 थे. इस साल निपटाए गए मुकदमों में 18,449 आपराधिक मामले, 10,348 सामान्य नागरिक मामले और 4,410 सेवा मामले शामिल हैं.
अदालती आंकड़ों से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में 39,800 मामले, 2021 में 24,586 मामले और 2020 में 20,670 मामले निपटाए थे. कोर्ट ने कुशल न्याय देने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने और रणनीतिक सुधारों के साथ-साथ न्यायपालिका के सक्रिय दृष्टिकोण को श्रेय दिया. अदालत ने कहा, "यह उपलब्धि न केवल भारतीय कानूनी प्रणाली के लचीलेपन और अनुकूलन क्षमता को दिखाती है, बल्कि तेजी से विकसित हो रही दुनिया में न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है."
"SC के लिए कोई मामला बड़ा या छोटा नहीं"
2017 में इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम लागू होने के बाद से निपटाए गए मामले सबसे ज्यादा हैं. अदालत ने मिसाल के मुताबिक मुकदमेबाजी में बिंदु निर्धारित करने के कानूनी सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने कोई भी मामला बड़ा या छोटा नहीं होता, हर मामला स्टेयर डेसीसिस के सिद्धांत के तहत आता है. कोर्ट ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के पास मामलों के निपटान के लिए एक खाका था. उन्होंने लिस्टिंग के लिए जरूरी समय सीमा को सुव्यवस्थित किया.
मामलों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में आया बदलाव
उनके कार्यकाल में, मामलों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में एक आदर्श बदलाव आया, जहां मामले के सत्यापन के बाद सूचीबद्ध होने से लेकर दाखिल करने तक का समय 10 दिनों के बजाय घटाकर 7 से 5 दिनों के भीतर कर दिया गया. अदालत ने कहा कि जमानत, बंदी प्रत्यक्षीकरण, बेदखली मामले, विध्वंस और अग्रिम जमानत से संबंधित कुछ मामलों को एक ही दिन में प्रोसेस कर तुरंत सूचीबद्ध किया गया. पहली बार, अदालत ने छुट्टियों (22 मई-2 जुलाई) के दौरान मानवीय स्वतंत्रता से जुड़े 2,262 मामलों को सूचीबद्ध किया और ऐसे 780 मामलों का निपटारा किया.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
