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April 08, 2026
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हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके 56 साल के शख्स ने दी कोरोना को मात, डॉक्टर बोले-ये चमत्कार से कम नहीं

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मुंंबई / शौर्यपथ / मुंबई में कोरोना वायरस से हुई कुल मौतों में 85% मौतें 50 से ऊपर की उम्र के लोगों और बुजुर्गों की हुई है. इस कठिन घड़ी में अच्छी ख़बर ग्लोबल अस्पताल से आई जहां हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके, 56 साल के एक कोविड पॉज़िटिव मरीज़ जो, मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया, हार्टस्ट्रोक जैसी कई गंभीर तकलीफ़ों में थे, फिर भी एक हफ़्ते में कोविड को मात दे दी. डॉक्टर इसे चमत्कार मान रहे हैं. मुंबई में अब तक कोविड से 9,199 मौतें हुईं हैं जिनमें 7,793 मौतें 50 साल से ऊपर के मरीज़ों की हुईं हैं, यानी क़रीब 85 फीसदी. वैसे कोविड के कुल मामलों में 50 से ऊपर के संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब 42% है. बीएमसी, 50 से ऊपर के हर कोविड मरीज़ को अस्पताल भेजने की कोशिश में है. लक्षण-तकलीफ़ें हों या नहीं.
बीएमसी के एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर सुरेश ककानी कहते हैं, 'हमने ऐसा प्रयास किया है कि 50 के ऊपर के मरीज़ को भले ही होम आइसोलेशन की सुविधा प्राप्त हो, लेकिन इन्हें निजी या सरकारी या महानगर पालिका के अस्पताल में दाखिल कराना ही सही रहेगा. इसको लेकर एक सर्कुलर जारी किया है.'मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में 56 साल के महादेव हरी पटेल भर्ती हुए जिनका कोविड के कारण मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया से सामना हुआ. दो साल पहले ही वो हार्ट ट्रान्स्प्लैंट भी करवा चुके हैं. हालत गम्भीर थी लेकिन एक हफ़्ते में ही इन्होंने कोरोना को हरा दिया. कोविड नेगेटिव होने के साथ ही इनके रिकवर होने को डॉक्टर चमत्कार मानते हैं और खुद महादेव कहते हैं कि उन्हें नई ज़िंदगी मिली है.
मरीज महादेव हरी पटेल ने कहा, ''मुझे घर जाने की अब ख़ुशी है, ऐसा लग रहा है मुझे तीसरी ज़िंदगी मिली है.'' वहीं उनके बेटे दिनेश पटेल ने कहा, ''डैडी की हालत 2018 में भी ख़राब थी, उनका तब हार्ट ट्रांसप्लांट करवाया था, ठीक थे तब से. लेकिन कोविड के कारण हालत काफ़ी सीरियस हो गयी. ग्लोबल में वेंटिलेटर पर रखा, डॉक्टरों की टीम ने अब इनको अच्छा ट्रीटमेंट देकर एकदम ठीक कर दिया है.'' ग्लोबल हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉक्टर प्रशांत बोराडे ने कहा, 'जब ये ग्लोबल हॉस्पिटल आए, हमने काफ़ी टेस्ट किए, तो हमें पता चला कि इनको स्ट्रोक हो चुका था, किडनी फेल हुआ था, हार्ट कमजोर था, फेफड़े में पानी जम गया था, फेफड़े में कोविड निमोनिया की मात्रा काफ़ी थी. बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन भी था. तो चुनौती ये थी कि मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर के साथ हार्ट ट्रांसप्लांट भी हुआ था इनका. कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी टीम, किडनी की टीम और इंटेन्सिव केयर जैसी सारी टीमों ने मिलकर ट्रीटमेंट दी. पांच दिन के बाद वेंटिलेटर से बाहर आये और इनका सक्सेसफ़ुली ट्रीटमेंट हो गया.'
कोविड के इलाज के लिए मरीज़ों की इम्यूनिटी बढ़ाई जाती है लेकिन ऑर्गन ट्रांसप्लानट वाले मरीज़ों के इलाज के लिए इम्यूनिटी घटानी पड़ती है. 17 सितम्बर को भर्ती हुए महादेव पटेल हफ़्ते भर बाद डिस्चार्ज तो हुए लेकिन सांस की दिक़्क़त के बाद फ़िलहाल स्थिर हालत में ऑक्सिजन बेड पर रिकवर कर रहे हैं. इनकी केस स्टडी डॉक्टर, मेडिकल जर्नल में छापने वाले हैं. ऐसे मरीज़ों की स्टडी में डॉक्टर मानते हैं कि कोविड के प्रकोप में भी वक्त पर इलाज कमजोर से कमजोर मरीज़ की ज़िंदगी बचा सकता है.

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