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हेग/नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति में एक नए अध्याय के रूप में उभरी है। हेग स्थित डच प्रधानमंत्री आवास कैटश्यूस में प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम श्री रोब जेटेन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” (Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
यह केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, जल प्रबंधन और हरित ऊर्जा में साझा नेतृत्व की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक “सामरिक साझेदारी रोडमैप” पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तीव्र विकास यात्रा डच कंपनियों और निवेशकों के लिए अपार अवसर लेकर आई है, जबकि प्रधानमंत्री जेटेन ने भारत को यूरोप का विश्वसनीय और भविष्य-केंद्रित साझेदार बताया।
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को वैश्विक व्यापार के लिए “परिवर्तनकारी कदम” बताते हुए जल्द हस्ताक्षर और क्रियान्वयन का समर्थन किया।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई गति देगा।
दोनों नेताओं ने जल प्रबंधन, कृषि और स्वास्थ्य (WAH) को सहयोग का प्रमुख आधार बताते हुए बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर संयुक्त कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ, स्वास्थ्य अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीकों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने AI, सेमीकंडक्टर और उभरती डिजिटल तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का फैसला किया।
युवाओं के बीच तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त हैकाथॉन आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री जेटेन ने हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, ग्रीन शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग को भविष्य की आवश्यकता बताया।
दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साझा प्रयास तेज करने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोलकालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहयोग के लिए डच सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया।
साथ ही लीडेन विश्वविद्यालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच हुए सहयोग को ऐतिहासिक विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
आधिकारिक वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, शिक्षा और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में कुल 14 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते को शिक्षा और अकादमिक सहयोग की नई शुरुआत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डच प्रधानमंत्री रोब जेटेन को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का एक निर्णायक केंद्र बनकर उभर रहा है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
