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नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कृषि कानून , कोरोना वायरस और लोकल के लिए वोकल समेत अन्य मुद्दों का जिक्र किया. कृषि कानूनों को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि नए सुधारों से किसानों को नए अधिकार मिलने के साथ नए अवसर मिले हैं. इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में, किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने इससे जुड़ा उदाहरण भी दिया. कोरोना महामारी को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को मज़बूती से जारी रखना है. किसी तरह की लापरवाही बहुत घातक साबित हो सकती है.
प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम की 10 महत्वपूर्ण बातें
किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं. बरसों से किसानों की जो मांग थी, जिन मांगो को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय में हर राजनीतिक दल ने उनसे वायदा किया था, वो मांगे पूरी हुई हैं.
कृषि सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि किसानों को नए अधिकार भी मिले हैं और नए अवसर भी मिले हैं. इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में, किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है.
नए क़ानून में ये तय किया गया है कि फसल खरीदने के तीन दिन में ही किसान को पूरा पेमेन्ट करना पड़ता है और अगर पेमेन्ट नहीं होता है, तो, किसान शिकायत दर्ज कर सकता है. इस क़ानून में ये प्रावधान किया गया है कि क्षेत्र के एस.डी.एम को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा.
हमारे यहां सुई और दियासलाई तक विलायती जहाज से आते हैं. खाने-पीने, सोने, किसी भी बात में लोग स्वतन्त्र नहीं हैं. हम, ‘लोकल के लिए वोकल' अभियान के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो अरबिंदो का स्वदेशी का दर्शन हमें राह दिखाता है. 5 दिसम्बर को अरबिंदो की पुण्यतिथि है. वो कहते भी थे, स्वदेशी का अर्थ है कि हम अपने भारतीय कामगारों, कारीगरों की बनाई हुई चीजों को प्राथमिकता दें.
करीब-करीब एक साल हो रहे हैं, जब दुनिया को कोरोना के पहले केस के बारे में पता चला. तब से लेकर अब तक पूरे विश्व ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं. Lockdown के दौर से बाहर निकलकर अब vaccine पर चर्चा होने लगी है. कोरोना को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही अब भी बहुत घातक है. हमें, कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को मज़बूती से जारी रखना है.
गुरुनानक जयंती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्छ में एक गुरुद्वारा है, लखपत गुरुद्वारा साहिब. गुरु नानक जी अपने उदासी के दौरान लखपत गुरुद्वारा साहिब में रुके थे. 2001 के भूकंप से इस गुरूद्वारे को भी नुकसान पहुंचा था. यह गुरु साहिब की कृपा ही थी कि मैं इसका जीर्णोद्धार सुनिश्चित कर पाया.
गुरु नानक देव जी ही थे, जिन्होंने, लंगर की परंपरा शुरू की थी और आज हमने देखा कि दुनिया-भर में सिख समुदाय ने किस प्रकार कोरोना के इस समय में लोगों को खाना खिलाने की अपनी परंपरा को जारी रखा है.
पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात' की शुरुआत में आज मैं आप सबके साथ एक खुशखबरी साझा करना चाहता हूं. हर भारतीय को यह जानकर गर्व होगा कि देवी अन्नपूर्णा की एक बहुत पुरानी प्रतिमा कनाडा से वापस भारत आ रही है. यह प्रतिमा लगभग 100 साल पहले 1913 के करीब वाराणसी के एक मंदिर से चुराकर, देश से बाहर भेज दी गई थी. मैं, कनाडा की सरकार और इस कार्य को सम्भव बनाने वाले सभी लोगों का इस सहृदयता के लिये आभार प्रकट करता हूं.
माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा की तरह ही हमारी विरासत की अनेक अनमोल धरोहरें, अंतरराष्ट्रीय गिरोंहों का शिकार होती रही हैं. ये गिरोह विदेशी बाजार में इन्हें बहुत ऊंची कीमत पर बेचते हैं. अब इन पर सख्ती तो लगाई ही जा रही है, इनकी वापसी के लिए भारत ने अपने प्रयास भी बढ़ाए हैं.
देश के बड़े हिस्से में सर्दी का मौसम भी जोर पकड़ रहा है. अनेक जगहों पर बर्फ़-बारी हो रही है. इस मौसम में हमें परिवार के बच्चों और बुजुर्गों का, बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखना है, खुद भी सावधानी बरतनी है.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
